आज जो लोग अति उत्साहितता में किसी जाति और किसी प्रदेश या किसी शहर को टारगेट करके भाजपा का सीट कम होने का कारण गिनवाते हुए नजर आ रहे हैं, वे हास्यास्पद बातें कर रहे हैं।
बीजेपी से BJP का कोर वोटर आज खिसक गए, जिसका कारण बढ़ती हुई महंगाई, बेरोजगारी और असफल योजनाएं हैं। जिन्होंने पिछली बार मोदी को जातिवाद से आगे जाकर वोट दिया था, इनमें से अधिकांश इस बार भाजपा से छिटक गए हैं। इनके छिटकने का कारण उनके रोजी रोजगार और स्थानीय मुद्दे रहे हैं। हर समाज के अपने अलग-अलग मुद्दे होते हैं। उन पर वे वोट करते हैं। इनके साथ एंटी इनकंबेंसी भी था। दो बार की सत्ता के बाद कई वादे अधूरे रह जाने के कारण जनता बीजेपी से नाराज भी रही है।

400 पार का नारा देने के बाद आरक्षण पर सवाल उठने लगा। एससी, एसटी, ओबीसी रिजर्वेशन का अधिकार लेने वाले मतदाताओं को संविधान बदलने का खतरा भी नजर आया। क्योंकि उन्हें लगा कि रिजर्वेशन हटा दिया जाएगा। ऐसे में रिजर्व कैटिगरी में आने वाले लोग डर गए, इसमें से अधिकांश वोटर बीजेपी के खिलाफ वोट दिया। मेन स्ट्रीम की मीडिया ने मोदी की नैया डुबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कई तरह के भ्रम उसने भाजपा के खिलाफ प्रसारित कर दिया। हालांकि मीडिया ने सब जानबूझकर प्रस्तुत नहीं किया। लेकिन डिबेट्स में आर्थिक सर्वे में कांग्रेस के वादे पर डिबेट्स में जाने अनजाने में मीडिया चूक गई। जातिगत सर्वे और आर्थिक सर्वे पर एक नकारात्मक माहौल बनाया गया।

बीजेपी को जितनी जल्दी यह बात समझ में आ जाए वह अच्छी बात है। बनारस में भी वोट अंतर घटा है, वहां पर स्थानीय लोग भाजपा से नाराज है। कारण है कि घाटों के आसपास लोगों के रोजगार छिन गया है। गुजराती कंपनियां इन जगहों पर टूरिस्ट प्लेस कब्जा करके यहां के लोकल लोगों का पारंपरिक रोजगार छीन रही हैं। जिससे स्थानीय जनता परेशान है।

बनारस में स्थानीय लोग अपना व्यवसाय आसानी से कर लेते हैं। लाखों तीर्थयात्री यहां पर आते हैं, सभी का रोजगार यहां चलता है लेकिन टूरिस्ट स्पॉट बनाने के नाम पर नए नियम आने से यहां के स्थानीय लोगों के रोजगार पर खतरा मंडराने लगा।
जब बदलाव किसी जगह आता है तो इस तरह की मुसीबतें आना स्वाभाविक है। यह सब भी कारण रहा है। हालांकि अभी भी बाजी बीजेपी के हाथ में है। BJP सही समीक्षा करके हार के करणों को दूर करने की पूरी कोशिश कर सकती है।
सबसे बुनियादी जरूरत आजीविका की है। इस पर काम करना उन्हें शुरू कर देना चाहिए। उत्तर प्रदेश और केंद्र में पेपर लीक एक बड़ी समस्या है। भाई भतीजाबाद से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। शिक्षा और स्वास्थ्य पर समुचित ध्यान देने की आवश्यकता है।




