कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद कार्यक्रम: उन्नत ग्राम योजना के तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी

Amit Srivastav

कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद कार्यक्रम: उन्नत ग्राम योजना के तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी

उत्तर प्रदेश/देवरिया। भटवा तिवारी गांव में कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग देवरिया द्वारा आयोजित “कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद कार्यक्रम” में किसानों को आधुनिक व वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई। यह पहल उन्नत ग्राम योजना के तहत किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद

कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद कार्यक्रम: उन्नत ग्राम योजना के तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी

कृषि विज्ञान केंद्र (भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी) मल्हना और कृषि विभाग देवरिया के संयुक्त तत्वाधान में जनपद के तहसील एवं विकास खंड भाटपाररानी के भटवा तिवारी गांव में “कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। यह आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र की महत्वाकांक्षी उन्नत ग्राम योजना के तहत संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से परिचित कराना है। इस पहल के जरिए न केवल उत्पादन में वृद्धि की संभावना है, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मांधाता सिंह ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि उन्नत तकनीकों का सही उपयोग करके किसान न सिर्फ अधिक मात्रा में उत्पादन कर सकते हैं, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह योजना किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।कार्यक्रम में केंद्र के उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने किसानों को अगेती और विदेशी सब्जियों के जैविक उत्पादन के लाभों के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती की तुलना में जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए हितकारी है, बल्कि यह बाजार में बेहतर मूल्य भी दिला सकती है। डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी जोड़ा कि विदेशी सब्जियों की मांग आजकल बढ़ रही है और अगर किसान इनका उत्पादन शुरू करें तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही, सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. कमलेश मीना ने फसल विविधीकरण और उत्पादन की नवीनतम तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न फसलों को अपनाने से जोखिम कम होगा और उत्पादन में स्थिरता आएगी।

उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि इन तकनीकों के प्रयोग से भविष्य में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति देखने को मिल सकती है, जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी होगी।इस संवाद कार्यक्रम में डॉ. अंकुर शर्मा ने पशुपालन और खेती के बीच के गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पशुपालन के बिना खेती का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि यह जैविक खाद और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Click on the link ब्लाग पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि पशुपालन से न केवल खेती का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्राप्त होगा, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर होगा। इसके अलावा, सहायक कृषि विकास अधिकारी जसवंत सिंह ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को जायद मक्का के बीज की उपलब्धता और इसके लाभों के बारे में बताया, साथ ही सरकारी सब्सिडी और सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी समझाया।

इस चर्चा से किसानों को यह समझने में मदद मिली कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी खेती को और अधिक लाभप्रद कैसे बना सकते हैं।कार्यक्रम के अंत में श्री मुरलीधर कुशवाहा ने भटवा तिवारी गांव को उन्नत ग्राम योजना के लिए चुने जाने पर गर्व व्यक्त किया और इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास के लिए एक सुनहरा अवसर बताया और सभी आगंतुकों को धन्यवाद देते हुए इस संवाद के सफल आयोजन की सराहना की।

इस अवसर पर भटवा तिवारी गांव के नन्दजी कुशवाहा, रामलाल कुशवाहा, निजामुद्दीन, प्रमोद कुमार, धनंजय सिंह जैसे प्रमुख किसानों सहित 50 से अधिक किसान उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम न केवल किसानों और वैज्ञानिकों के बीच एक सेतु का काम कर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक प्रभावी कदम साबित हो रहा है। इस तरह के आयोजन भविष्य में कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की संभावना को और मजबूत करते हैं।

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