देवरिया। रामपुर कारखाना के 9 गांवों में कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने 1600 से अधिक किसानों को जैविक खेती, मृदा परीक्षण, पशुपालन व आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन छिड़काव की जानकारी दी। उद्देश्य: आय वृद्धि व टिकाऊ खेती की दिशा में जागरूकता।

देवरिया। किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी (मल्हना, देवरिया) एवं कृषि विभाग देवरिया के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 9 जून 2025 को “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन विकासखंड रामपुर कारखाना के 9 गांवों — मेंहरौना, प्रानपुर, गोरकाठी, कुशहरी, पांडेयपुर, लंगड़ा, किशुनपाली, बिशुनपुर कला एवं महुआपाटन में किया गया।
रामपुर कारखाना के नौ गांवों में पहुंचा कृषि संकल्प अभियान, वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीम ने 1600 से अधिक किसानों को दी आधुनिक खेती की जानकारी
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती: मृदा पोषण और जैविक विधियां
इस अभियान के दौरान विशेषज्ञों और अधिकारियों की तीन टीमों ने गांवों का दौरा कर किसानों को खेती से जुड़े वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नई तकनीकें, मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। प्रमुख वैज्ञानिकों ने किसानों से आग्रह किया कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी और फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी होगी।
डॉ. मांधाता सिंह और डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि मिट्टी परीक्षण, फसल चक्र, हरी खाद, जीवामृत तथा अन्य जैविक उर्वरकों के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि उत्पादन लागत भी कम हो जाती है। जैविक घोलों की घरेलू विधियों पर भी किसानों को प्रशिक्षित किया गया।
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महिलाएं बनीं स्वरोजगार की प्रेरणा
अभियान के एक विशेष सत्र में गांव की महिलाओं को स्थानीय संसाधनों से स्वावलंबन की दिशा में बढ़ने की प्रेरणा दी गई। मशरूम उत्पादन, अचार-पापड़ निर्माण, जैविक खाद निर्माण, मधुमक्खी पालन, और मुर्गी पालन जैसे घरेलू उद्योगों की जानकारी देकर उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा गया। इससे न केवल परिवार की आय बढ़ेगी, बल्कि महिलाओं में आत्मनिर्भरता का भाव भी विकसित होगा।
पशुपालन: खेती के लिए एक मजबूत आधार
पशुपालन विशेषज्ञों ने बताया कि यह केवल दूध या मांस उत्पादन का साधन नहीं है, बल्कि खेती के लिए जैविक इनपुट का विश्वसनीय स्रोत भी है। गाय-भैंसों के गोबर, मूत्र और अन्य अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपयोग कर जैविक खाद, कीटनाशक और ऊर्जा स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
आधुनिक तकनीक: ड्रोन से छिड़काव का लाइव प्रदर्शन
कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि ड्रोन तकनीक द्वारा खेतों में कीटनाशक एवं उर्वरक के छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया गया। यह तकनीक किसानों को खेती में कम समय, कम खर्च और अधिक सटीकता के साथ कार्य करने का मार्ग दिखाती है। ड्रोन के माध्यम से किसानों को यह दिखाया गया कि छिड़काव के दौरान श्रमिकों की आवश्यकता कम होती है और रसायन की बर्बादी भी रुकती है।
विशेषज्ञों की भागीदारी और किसानों का संवाद
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मांधाता सिंह, डॉ. रजनीश श्रीवास्तव, डॉ. कमलेश मीणा, जय कुमार, डॉ. अंकुर शर्मा, कृषि ज्ञान केंद्र से डॉ. संतोष चतुर्वेदी, कृषि विभाग से उपनिदेशक कृषि सुभाष मौर्य, भूमि संरक्षण अधिकारी संतोष मौर्य, जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय सिंह, पौध संरक्षण अधिकारी कुमारी इरम, गन्ना विभाग के प्रतिनिधि, पशु चिकित्सा अधिकारी, इफको प्रतिनिधि सहित तमाम विशेषज्ञ मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को अपने-अपने क्षेत्र की योजनाओं, तकनीकों और लाभकारी उपायों की विस्तृत जानकारी दी।
1600 से अधिक किसानों ने लिया भाग
इस अभियान में लगभग 1600 किसानों ने भाग लिया। उन्होंने वैज्ञानिकों से खेती, उद्यान, पशुपालन और जैविक विधियों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने खेतों में इन तकनीकों को लागू करने का संकल्प लिया। किसानों ने इस प्रकार के आयोजनों को बहुत उपयोगी और व्यावहारिक बताया और अनुरोध किया कि ऐसे कार्यक्रम बार-बार आयोजित किए जाएं।
आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध भारत
“विकसित कृषि संकल्प अभियान” का उद्देश्य केवल जागरूकता नहीं, बल्कि किसानों की खेती की सोच में परिवर्तन लाना है। वैज्ञानिक विधियों, उन्नत तकनीकों, और स्वावलंबन की भावना से ही किसानों की आमदनी बढ़ सकती है और गांवों में खुशहाली आ सकती है। यह अभियान कृषि को व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।

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