भूमी आंवला (Phyllanthus niruri) के अद्भुत औषधीय फायदे— लीवर, किडनी और शुगर की प्राकृतिक दवा

Amit Srivastav

भूमी आंवला या भूम्यामलकी Phyllanthus niruri एक चमत्कारी जड़ी-बूटी है जो किडनी स्टोन, लीवर, पाचन, ब्लड शुगर और त्वचा रोगों में लाभकारी है। जानिए इसकी चाय बनाने की विधि, सेवन नियम और सावधानियाँ। Amazing medicinal benefits of Bhumi Amla (Phyllanthus niruri) – natural medicine for liver, kidney and diabetes

Phyllanthus niruri फिलैंथस निरुरी भूमी आंवला के फायदे।

भूमी आंवला के फायदे
Phyllanthus niruri benefits in Hindi

प्रकृति ने मानव जीवन को संतुलित और स्वस्थ रखने के लिए असंख्य औषधीय पौधों का भंडार दिया है। उन्हीं में से एक है भूमी आंवला फिलैंथस निरुरी (Phyllanthus niruri), जिसे संस्कृत में भूम्यामलकी और हिंदी में भूमी आंवला कहा जाता है। यह पौधा देखने में साधारण लगता है, परंतु इसके गुण असाधारण हैं। यह एक छोटा हरा पौधा होता है जो जमीन के पास फैलकर उगता है, और इसकी टहनियों के नीचे छोटे हरे दाने जैसे फल लगते हैं।

ये फल ही इसके औषधीय गुणों का मुख्य स्रोत हैं। भूमी आंवला पूरे भारत में, विशेषकर बरसात के मौसम में खेतों, नालों और बगीचों के किनारे स्वाभाविक रूप से उग आता है। इसे आसानी से पहचाना जा सकता है, क्योंकि इसके पत्ते बिल्कुल आंवले के पत्तों जैसे होते हैं।

भूमी आंवला (Phyllanthus niruri) के अद्भुत औषधीय फायदे— लीवर, किडनी और शुगर की प्राकृतिक दवा

भूमी आंवला: प्रकृति की वह छोटी सी जड़ी-बूटी जो बड़ी बीमारियों को मिटा देती है।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी में भूम्यामलकी का स्थान
आयुर्वेद में भूम्यामलकी को “यकृत विकार नाशिनी” यानी लीवर की रक्षक औषधि कहा गया है। यह औषधि ‘चरक संहिता’ और ‘भावप्रकाश निघण्टु’ जैसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है। इसमें कषाय (कसैला), तिक्त (कड़वा) और मधुर रस पाया जाता है तथा इसका स्वभाव शीतल होता है। यह पित्त, कफ और रक्त से जुड़ी विकृतियों को संतुलित करती है। इसके औषधीय तत्व शरीर के अंदर जाकर विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं और लीवर, गुर्दे तथा पाचन तंत्र को शुद्ध करते हैं।


किडनी स्टोन और मूत्र विकारों में अद्भुत औषधि
किडनी स्टोन घरेलू उपचार — भूमी आंवला का सबसे प्रसिद्ध उपयोग किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) को गलाने और बाहर निकालने में किया जाता है। यह मूत्र मार्ग की रुकावट, जलन और संक्रमण को दूर करता है। आधुनिक चिकित्सा अनुसंधानों में भी यह सिद्ध हुआ है कि भूम्यामलकी के अर्क में ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जो कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल को तोड़ने की क्षमता रखते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पेशाब में जलन, मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) या बार-बार पेशाब आने की समस्या हो, तो भूमी आंवला की चाय या काढ़ा पीना अत्यंत लाभकारी होता है।


लीवर को शुद्ध और सक्रिय बनाता है
भूमी आंवला को लीवर की दवा लीवर टॉनिक कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह हेपेटाइटिस A, B और C जैसे वायरस से लीवर को सुरक्षा प्रदान करता है। यदि किसी को जॉन्डिस (पीलिया) है, तो भूमी आंवला का रस सबसे उपयोगी माना गया है। यह रक्त से विषैले तत्वों को निकालकर लीवर कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है। आयुर्वेद में इसे पीलिया नाशक कहा गया है। फैटी लिवर के रोगियों में इसका नियमित सेवन लीवर एंजाइम्स को सामान्य करता है और पाचन क्रिया को संतुलित रखता है।


पाचन तंत्र का सुधारक और भूख बढ़ाने वाला
आज की व्यस्त जीवनशैली में पाचन संबंधी समस्याएँ आम हो गई हैं — गैस, अपच, कब्ज या भारीपन जैसी परेशानियाँ लगभग हर किसी को होती हैं। भूमी आंवला इन समस्याओं में प्राकृतिक औषधि के रूप में काम करता है। इसका सेवन करने से अग्नि मंडल यानी पाचन अग्नि प्रबल होती है, भोजन का अवशोषण सही ढंग से होता है और पेट हल्का महसूस होता है। अगर इसे भोजन के बाद आधा कप गुनगुने पानी के साथ लिया जाए तो गैस, एसिडिटी और अपच में तुरंत राहत मिलती है।


शरीर की आंतरिक गर्मी और त्वचा रोगों में लाभ
भूमी आंवला का स्वभाव शीतल (ठंडा) होता है। यह शरीर की आंतरिक गर्मी को नियंत्रित करता है, जिससे फोड़े-फुंसी, खुजली, दाने, एलर्जी और त्वचा के लाल चकत्ते जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। गर्मियों में इसका रस या चाय पीने से शरीर के अंदर की उष्णता शांत होती है और त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है। जिन लोगों को पित्त दोष की अधिकता है, उनके लिए भूम्यामलकी एक वरदान है।


रक्त शुद्धिकरण और डिटॉक्सिफिकेशन में भूमिका
भूमी आंवला को रक्त शुद्धिकर औषधि माना गया है। यह शरीर में जमा हुए टॉक्सिन्स को निकालता है और रक्त को शुद्ध करता है। इसका सेवन करने से त्वचा चमकदार होती है, बालों का झड़ना कम होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। नियमित रूप से इसका पाउडर या रस लेने से शरीर का डिटॉक्स नैचुरल तरीके से होता है, बिना किसी साइड इफेक्ट के।


ब्लड शुगर और डायबिटीज में उपयोगी
भूम्यामलकी में एंटी-डायबिटिक तत्व होते हैं जो इंसुलिन के स्तर को संतुलित रखते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए यह औषधि अत्यंत लाभकारी है क्योंकि यह न केवल शुगर लेवल को नियंत्रित करती है बल्कि अग्न्याशय की कोशिकाओं को भी सक्रिय बनाती है। आयुर्वेद में इसे “मधुमेह हर औषधि” कहा गया है। सुबह खाली पेट भूमी आंवला की चाय या उसका रस लेने से रक्त शर्करा सामान्य बनी रहती है।


एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण
भूम्यामलकी में फाइलैंथिन (Phyllanthin) और हिपोफिलैंथिन (Hypophyllanthin) जैसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो शक्तिशाली एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल यौगिक हैं। ये तत्व शरीर को वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों से बचाते हैं। शोधों में यह भी पाया गया है कि यह पौधा हेपेटाइटिस बी वायरस की सक्रियता को कम करने में प्रभावी है। इसलिए इसे प्राकृतिक एंटी-वायरल औषधि भी कहा जाता है।

Phyllanthus niruri tea भूमी आंवला की चाय बनाने की विधि

1. ताज़े पौधे से 5–6 टहनियाँ (पत्ते और फल सहित) लेकर अच्छी तरह धो लें। एक कप पानी में उबालें और 5–7 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ। फिर छानकर गुनगुना पीएँ। स्वाद के लिए थोड़ा नींबू या शहद मिला सकते हैं।
2. सूखे पत्तों या पाउडर से एक कप पानी में 1 चम्मच सूखा भूमी आंवला पाउडर डालकर 5 मिनट तक उबालें। इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे प्रभावी माना गया है।


पत्तियों, फलों और पाउडर का पारंपरिक उपयोग
पत्तियाँ: रोज़ सुबह 4–5 ताज़ी पत्तियाँ चबाने से लीवर मजबूत होता है और पाचन तंत्र सक्रिय रहता है।
फल: हरे फलों का रस या पेस्ट मूत्र संक्रमण और पेशाब की जलन में राहत देता है।
सूखा पाउडर: 1 चम्मच पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेने से शरीर डिटॉक्स होता है और त्वचा साफ रहती है।

  • सावधानियाँ और सेवन नियम
  • भूमी आंवला यद्यपि प्राकृतिक औषधि है, फिर भी इसे सही मात्रा और समय पर लेना आवश्यक है।
  • लगातार 15–20 दिन सेवन के बाद 5–7 दिन का अंतराल अवश्य लें।
  • अत्यधिक सेवन से शरीर में ठंडक बढ़ सकती है, जिससे सर्दी-जुकाम या कमजोरी महसूस हो सकती है।
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से ही इसका सेवन करें।
  • यदि पहले से कोई गंभीर दवा चल रही है, तो चिकित्सक से परामर्श लेकर ही इसे शामिल करें।
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भूमी आंवला छोटी सी जड़ी-बूटी, बड़े चमत्कार

भूमी आंवला एक ऐसा अद्भुत पौधा है जो शरीर को भीतर से शुद्ध करता है, अंगों को मजबूत बनाता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह उन दुर्लभ जड़ी-बूटियों में से है जो किडनी, लीवर, डायबिटीज, त्वचा और पाचन – सभी के लिए एक साथ उपयोगी हैं। इसका नियमित सेवन यदि उचित मात्रा में किया जाए तो यह शरीर में संतुलन, शांति और स्वास्थ्य का वरदान देती है। प्रकृति के इस छोटे से पौधे में छिपा है वह बड़ा रहस्य, जिसे जानकर कोई भी व्यक्तिस्थ जीवन को स्वस्थ और ऊर्जावान बना सकता है। amitsrivastav.in पर मिलती है हर तरह की सुस्पष्ट जानकारी बेल आइकॉन को दबा एक्सेप्ट करें एप्स इंस्टाल करें।

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HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav
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