कुंडलिनी जागरण से नुकसान

कामाख्ये वरदे देवी नील पर्वत वासिनी। त्वं देवी जगत माता योनिमुद्रे नमोस्तुते।। sexual intercourse भोग संभोग

कुंडलिनी जागरण: योनि तंत्र, शक्ति का शंखनाद, समाधि का 4 Wonderful काव्य

Amit Srivastav

कुंडलिनी जागरण, वह सर्पिल शक्ति जो मूलाधार चक्र में सुप्त रहती है, तंत्र और कामशास्त्र के काव्य में एक चंद्रमा ...