नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 (NCF 2023) ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि पुरानी रट्टू प्रणाली को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। हिंदी भाषा को अब ‘कोर्स A और B’ के स्थान पर R1 (प्रथम भाषा) और R2 (द्वितीय भाषा) के रूप में व्यवस्थित किया गया है। लेख : अभिषेक कांत पांडेय—
यह बदलाव भाषा को मात्र एक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक कौशल के रूप में देखने का नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। अब शिक्षक की भूमिका सूचना देने वाले से बदलकर छात्रों में सोचने, समझने और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने वाले मार्गदर्शक की हो गई है।
नई शिक्षा प्रणाली की अपेक्षाएँ
पुरानी पद्धति में छात्रों को चुनिंदा प्रश्नों के उत्तर रटाकर परीक्षा पास करा देने की प्रथा अब स्वीकार्य नहीं है। NCF 2023 कक्षा 6 से ही छात्रों में रचनात्मक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता, तार्किक शक्ति और आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर देता है। कक्षा 9वीं में यह दृष्टिकोण और अधिक गहरा और व्यापक हो जाता है।
भाषा शिक्षण का मुख्य लक्ष्य अब चारों भाषाई कौशलों — सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना (LSRW) — का संतुलित विकास करना है। केवल लेक्चर देना या बोर्ड पर नोट्स लिखवाना अब पर्याप्त नहीं है।
व्यावहारिक उदाहरण:
किसी पाठ या विषय पर चर्चा करने के बाद शिक्षक सभी छात्रों से अपना उत्तर लिखने को कहें। फिर कक्षा में ही कुछ उत्तरों की सामूहिक समीक्षा करें और बेहतर लेखन की दिशा दिखाएं। यह प्रक्रिया थोड़ी श्रमसाध्य अवश्य है, लेकिन लेखन कौशल विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
शिक्षण में प्रमुख परिवर्तन
कौशल-आधारित शिक्षा: पाठ्यपुस्तक अब केवल याद करने की वस्तु नहीं, बल्कि तर्क, विश्लेषण, संवाद और रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई है।
तार्किक एवं आलोचनात्मक सोच: परीक्षाओं में अब योग्यता-आधारित (Competency-based) प्रश्न अधिक होंगे, जो छात्र की समझ और समस्या-समाधान क्षमता को परखेंगे।
वास्तविक जीवन से जुड़ाव: व्याकरण को रटने की बजाय दैनिक संवाद, पत्र-लेखन, रिपोर्ट लेखन, ब्लॉग लेखन और कहानी लेखन में उसके व्यावहारिक उपयोग पर बल दिया जाएगा।

- कक्षा 9वीं: चुनौती और अवसर
- कक्षा 9वीं में हिंदी का पाठ्यक्रम मात्र 12 पाठों तक सीमित कर दिया गया है। यह संक्षिप्तता जानबूझकर की गई है ताकि शिक्षक पाठों को गहराई से पढ़ा सकें।
- यदि शिक्षक इन 12 पाठों को एक-दो पीरियड में समाप्त करके केवल प्रश्न-उत्तर लिखवा दें, तो NCF 2023 के उद्देश्यों को गंभीर क्षति पहुंचेगी।
- शिक्षक इन पाठों को जीवंत बना सकते हैं —
- कहानियों और कविताओं का नाट्यीकरण
- पात्रों पर बहस
- पुस्तक समीक्षा
- सेमिनार
- रचनात्मक लेखन
- समसामयिक मुद्दों से जोड़कर चर्चा
- उदाहरणस्वरूप, ‘कबीर’ या ‘रैदास’ की कविताओं को पढ़ाते समय केवल अर्थ समझाने तक सीमित न रहें। छात्रों से पूछें — “आज के समाज में इनकी वाणी कितनी प्रासंगिक है?” या “आप अपनी जिंदगी में इनमें से कौन-सा संदेश अपनाना चाहेंगे?” ऐसे प्रश्न छात्रों की आलोचनात्मक सोच को जागृत करते हैं।
- शिक्षक की भूमिका और भविष्य की तैयारी
- कक्षा 9वीं वह महत्वपूर्ण पड़ाव है जहाँ छात्र तीन भाषाओं का गंभीर अध्ययन शुरू करते हैं। जो छात्र स्नातक या परास्नातक स्तर पर भाषा या साहित्य पढ़ना चाहते हैं, उनकी नींव यहीं पड़ती है।
- भाषा केवल एक विषय नहीं है — यह सभी ज्ञान का माध्यम है। यदि भाषा शिक्षण सशक्त, रचनात्मक और कौशल-उन्मुख तरीके से किया गया, तो आने वाली पीढ़ी न केवल भाषाओं में निपुण होगी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक समृद्धि, विविधता और ज्ञान-परंपरा को भी आगे बढ़ाएगी।

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निष्कर्ष
NCF 2023 भाषा शिक्षण को रट्टा प्रणाली से हटाकर विचार, समझ, विश्लेषण और सृजन की प्रक्रिया में बदल रहा है। इस परिवर्तन की सफलता मुख्य रूप से शिक्षक की दृष्टि, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है।
एक प्रेरित और तैयार शिक्षक ही छात्रों को न केवल परीक्षा पास कराने वाला, बल्कि जीवन के लिए सक्षम और चिंतनशील नागरिक बनाने में सफल हो सकता है। लेखक: अभिषेक कांत पांडेय प्रयागराज उत्तर प्रदेश।

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