What is journalism – पत्रकारिता क्या है?: लोकतंत्र का प्रहरी और जनमत का प्रतिनिधि

Amit Srivastav

पत्रकारिता Hindi Journalism : वर्तमान में हिंदी पत्रकारिता की सही दिशा और उद्देश्य एक समग्र विश्लेषण मीडिया की भूमिका

पत्रकारिता क्या है? What is journalism का असली उद्देश्य सच के साथ खड़ा रहना है, न कि सरकार का एजेंडा चलाना। जानिए स्वतंत्र मीडिया की भूमिका, लोकतंत्र में इसकी अहमियत और निष्पक्ष पत्रकारिता क्यों जरूरी है।

पत्रकारिता का अर्थ और भूमिका (What is journalism)

पत्रकारिता केवल समाचारों को संप्रेषित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने, सत्ता से सवाल पूछने और जनता की आवाज बनने का महत्वपूर्ण माध्यम है। संचार व्यवस्था में मीडिया की भूमिका बेहद अहम होती है, क्योंकि यह न केवल सूचना का प्रसार करती है, बल्कि सरकार और प्रशासन पर निगरानी भी रखती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता को चौथे स्तंभ के रूप में देखा जाता है, जो सत्ता, न्यायपालिका और विधायिका के साथ मिलकर संतुलन बनाए रखने का कार्य करती है।

पत्रकारिता Hindi Journalism : वर्तमान में हिंदी पत्रकारिता की सही दिशा और उद्देश्य एक समग्र विश्लेषण मीडिया की भूमिका

पत्रकारिता क्या है? सच के साथ खड़ा रहना: पत्रकारिता का धर्म

पत्रकारिता का मूल धर्म है—सच के साथ खड़ा रहना। मीडिया का कार्य सरकार का एजेंडा बनना नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से ही सरकारी प्रचार विभाग मौजूद होता है। पत्रकारों का मुख्य कर्तव्य है कि वे सत्तापक्ष से कठिन सवाल पूछें, उनकी नीतियों और कार्यशैली की समीक्षा करें, और यदि कहीं जनविरोधी निर्णय लिए जा रहे हैं तो जनता को सतर्क करें। एक निष्पक्ष और स्वतंत्र मीडिया ही लोकतंत्र को मजबूत करता है और सत्ता को जवाबदेह बनाता है।


लेकिन जब मीडिया सत्ता की कठपुतली बन जाती है, तो वह अपने मूल उद्देश्य से भटक जाती है। जो मीडिया केवल विपक्ष पर सवाल उठाती है और सरकार की आलोचना करने से बचती है, वह वास्तव में पत्रकारिता नहीं, बल्कि एक प्रचार माध्यम बन जाती है। एक सच्ची और निष्पक्ष मीडिया को सत्ता की चापलूसी करने के बजाय, जनता के सरोकारों को प्राथमिकता देनी चाहिए। Click on the link गूगल ब्लाग पर अपनी पसंदीदा पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का भविष्य

लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब कोई सरकार या पूंजीपति वर्ग मीडिया पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो स्वतंत्र पत्रकारिता खतरे में पड़ जाती है। इतिहास गवाह है कि जब-जब मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया, तब-तब लोकतंत्र कमजोर हुआ है।
आज के समय में कुछ मीडिया घराने बड़े पूंजीपतियों के नियंत्रण में हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य अपने व्यावसायिक हितों की रक्षा करना है। ऐसे में, यह स्वाभाविक है कि वे अपने मालिकों के खिलाफ कोई नकारात्मक खबर नहीं दिखाएंगे। यही कारण है कि हमें हमेशा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कौन-सा मीडिया घराना किनके हितों की रक्षा कर रहा है और उसका असली मकसद क्या है।

शिक्षा प्रणाली में मीडिया जागरूकता की आवश्यकता

भारत में 12वीं कक्षा के हिंदी विषय में ‘मीडिया और संचार अभिव्यक्ति’ पर एक पुस्तक पढ़ाई जाती है, जो विद्यार्थियों को पत्रकारिता और संचार के मूल सिद्धांतों से अवगत कराती है। यह आवश्यक है कि हमारी शिक्षा प्रणाली में मीडिया साक्षरता को और अधिक महत्व दिया जाए, ताकि नागरिक यह समझ सकें कि कौन-सा समाचार निष्पक्ष है और कौन-सा एक विशेष एजेंडा चला रहा है।

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आज के डिजिटल युग में, जब फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा का बोलबाला है, तब मीडिया साक्षरता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एक जागरूक नागरिक वही होता है जो समाचारों को तटस्थता से पढ़े, उसकी पड़ताल करे और मीडिया के किसी भी एजेंडे का शिकार न बने।

जनता के प्रति मीडिया का उत्तरदायित्व (पत्रकारिता का महत्व)

मीडिया का असली सरोकार केवल सत्ता के साथ नहीं, बल्कि जनता के साथ होता है। जब कोई मीडिया सत्ता से अधिक जनता के प्रति उत्तरदायी होता है, तभी वह लोकतंत्र को सशक्त बना सकता है। जो पत्रकार सरकार की आलोचना करने से डरता है, वह अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाता है। मीडिया को न केवल सरकार के कार्यों पर पैनी नजर रखनी चाहिए, बल्कि जनता की समस्याओं को भी प्रमुखता से उजागर करना चाहिए।
यदि पत्रकारिता केवल सरकार की उपलब्धियों का गुणगान करने लगे और उसकी नीतियों की समीक्षा न करे, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। मीडिया को अपने पाठकों और दर्शकों के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।

पत्रकारिता की विशेषताएँ- लोकतंत्र की पहरी लेखनी का उद्देश्य

पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबरें देना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक प्रभावी माध्यम बनना भी है। जब मीडिया निष्पक्ष होती है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। इसलिए, हमें हमेशा सजग रहना चाहिए कि कौन-सा मीडिया सच को सामने ला रहा है और कौन-सा मीडिया केवल सत्ता का प्रचार कर रहा है।
एक जागरूक समाज ही स्वतंत्र पत्रकारिता को बचा सकता है। अगर हम निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करेंगे, तो लोकतंत्र भी सुरक्षित रहेगा और जनता की आवाज भी दबने से बची रहेगी।

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स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतंत्र की असली ताकत होती है। एक जागरूक समाज वही है जो सच को पहचान सके, सत्ता से सवाल पूछे और निष्पक्ष मीडिया का समर्थन करे। आइए, सच के पक्ष में खड़े हों और लोकतंत्र को मजबूत बनाएं।

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– अभिषेक कांत पांडेय प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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