चन्दौली। (Nodal Principal) व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रदेश के राजकीय आईटीआई, जनपद चंदौली में व्याप्त अव्यवस्थाओं और मनमानी को लेकर निजी आईटीआई कॉलेजों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य एवं छात्र-छात्राओं का आक्रोश गहराता जा रहा है। इनका आरोप है कि राजकीय आईटीआई के नोडल प्रधानाचार्य अजय कुमार यादव और कार्यदेशक आनंद कुमार श्रीवास्तव ने जुलाई 2025 में आयोजित अखिल भारतीय व्यावसायिक प्रयोगात्मक परीक्षा तथा पिछले वर्षों की परीक्षाओं में भी घोर अनियमितताएँ की हैं।
निजी कॉलेजों का कहना है कि परीक्षाओं में जानबूझकर भेदभाव किया गया। कई छात्र-छात्राओं को 250 अंकों की परीक्षा में मात्र 150 से 160 अंक ही दिए गए, जबकि दूसरी ओर कुछ छात्रों को बिना उचित गुणवत्ता के 240 से 250 अंक तक प्रदान कर दिए गए। आरोप है कि यह सब कथित सुविधा शुल्क की वसूली के कारण हुआ। जिन कॉलेजों या छात्रों से सुविधा शुल्क नहीं लिया गया, उन्हें कम अंक देकर हतोत्साहित किया गया।

हरिओम सेवा निजी आईटीआई कॉलेज के प्रधानाचार्य सत्येन्द्र कुमार मिश्र ने बताया कि परीक्षा के दौरान नोडल प्रधानाचार्य के चैंबर से सटे कमरे में एक संविदा कर्मचारी द्वारा प्रति छात्र 400 रुपये की वसूली की जाती थी। यह रकम सफेद लिफाफों में भरकर संबंधित कॉलेज का नाम लिखकर नोडल प्रधानाचार्य की टेबल के दराज में रख दी जाती थी, जिसे बाद में स्वयं प्रधानाचार्य या उनके सहयोगी उठा लेते थे। यही कारण था कि परीक्षा के दौरान नोडल प्रधानाचार्य अधिकांश समय अपने कार्यालय से अनुपस्थित रहते और कार्यदेशक आनंद कुमार श्रीवास्तव एवं बाबुओं के माध्यम से काम निपटाते थे।
प्रधानाचार्य श्री मिश्र ने मांग की है कि जमा जॉब की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रैक्टिकल परीक्षा का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा एक माह के भीतर कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
भ्रष्टाचार और अनुदेशकों के उत्पीड़न के आरोप
निजी कॉलेजों ने यह भी आरोप लगाया है कि अजय कुमार यादव के भ्रष्टाचार की सीमा केवल परीक्षाओं तक ही सीमित नहीं है। राजकीय आईटीआई में कार्यरत अनुदेशकों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। आरोप है कि निम्न गुणवत्ता की मशीनों और सामग्री की खरीददारी करवाई जाती है और अनुदेशकों पर दबाव बनाकर उन्हें इंडेंट कराने को मजबूर किया जाता है।
इसी क्रम में वेल्डिंग व्यवसाय के अनुदेशक मनोज कुमार ठाकुर का मामला सामने आया है। उनके अनुसार ढाई लाख की वेल्डिंग मशीन को आठ लाख रुपये में खरीदा गया। जब उन्होंने मशीन की गुणवत्ता जाँच की तो वह फर्जी पाई गई। मशीन लेने से मना करने पर उनकी एसीपी रोक दी गई और उन्हें व्यवसाय अनुदेशक के पद से हटाकर अप्रेंटिस का कार्य दे दिया गया, जो नियमों के विपरीत है। इस दबाव और उत्पीड़न के चलते वे मानसिक रोगी तक बन गए।
फर्जी डिग्री का भी आरोप
निजी आईटीआई संचालकों का यह भी आरोप है कि अजय कुमार यादव की शैक्षिक डिग्री फर्जी है। इसकी जांच पूर्व निदेशक यशु रुस्तगी के कार्यकाल में कराई गई थी, लेकिन कथित पैसों और रसूख के बल पर मामला दबा दिया गया।
ज्ञापन सौंपे जाने की तैयारी इन सभी आरोपों और घटनाओं के विरोध में निजी आईटीआई कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने निर्णय लिया है कि 11 सितम्बर को जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें प्रैक्टिकल परीक्षा की जांच, पुनर्मूल्यांकन और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी। साथ ही सीसीटीवी फुटेज तलब करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं, वहीं चंदौली के राजकीय आईटीआई में नोडल प्रधानाचार्य और उनके सहयोगियों पर लगे ये गंभीर आरोप शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी और विभागीय उच्च अधिकारी इन मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या यह प्रकरण भी रसूख और पैसों की भेंट चढ़ जाता है।
चंदौली से amitsrivastav.in पर सत्येन्द्र कुमार मिश्र की रिपोर्ट


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