राजकीय आईटीआई काॅलेज के 18 प्रधानाचार्यों की अमान्य डिग्री की बार बार जांच

Amit Srivastav

चन्दौली। उत्तर प्रदेश के राजकीय आईटीआई काॅलेज औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में हाल ही में दूरस्थ शिक्षा से बीटेक की फर्जी डिग्रियों के आधार पर प्रधानाचार्य पद पर आसीन होकर भ्रष्टाचार करने के गंभीर मामले प्रकाश में आए हैं। जबकि यदि बीटेक प्रोग्राम AICTE -DEB दोनों की मान्यता प्राप्त हो  और वह प्रोग्राम ODL/ ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा मोड में विस्तार से मान्यता प्राप्त हो तो राजकीय सेवा में बैधता मिल सकती है।

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परंतु इंजीनियरिंग/तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए अनुभव प्रैक्टिकल प्रयोगशाला आदि  आवश्यक है और दूरस्थ ऑनलाइन मोड में यह सुविधा कदापि पूरी नहीं की जा सकती हैं, जबकि पूर्व में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय दोनों ने ही दोषी 18 प्रधानाचार्यों की दूरस्थ डिग्री को अमान्य घोषित कर दिया है। इसके बावजूद अभी तक यह अपने पद पर कैसे बने रहे। यह समझने योग्य है।

शक की सुई घूम रही है जांचकर्ता और उच्च स्तरीय अधिकारियों पर

यह स्थिति अत्यंत चिंतनीय है। विशेषकर तब जब इन्वेस्ट प्रधानाचार्यों की शैक्षिक योग्यता की जांच पूर्व में तत्कालीन निदेशक यशु रुस्तगी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराए जाने के निर्देश दिए गए थे। तथापि प्रभावशाली तत्वों द्वारा धनबल का प्रयोग कर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

शक की सुई घूम रही है जांचकर्ता और उच्च स्तरीय अधिकारियों पर
राजकीय आईटीआई काॅलेज
राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद इस प्रकार की गतिविधियां शासन-प्रशासन की छवि को धूमिल कर रही हैं। अब यहां देखना दिलचस्प यह होगा कि इस बार भी मोटी रकम लेकर जांच को दबा दिया जाता है या कार्यवाही की जाती है। विशेष रूप से जनपद चंदौली में तैनात प्रधानाचार्य अजय कुमार यादव पर गंभीर आरोप लगे है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी डिग्री के आधार पर पद प्राप्त किया तथा प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान प्रशिक्षार्थियों से सुविधा शुल्क लेकर अंकों का मनमाना वितरण किया।
जिन छात्रों ने भुगतान किया उन्हें 98 से 99 प्रतिशत अंक प्रदान किए गए। जबकि बिना भुगतान वाले छात्रों को 50–60 प्रतिशत तक सीमित अंक दिए गए। इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त मार्च 2024 में लगभग डेढ़ लाख रुपये की वास्तविक लागत वाली मशीन को दस लाख रुपये में खरीदे जाने का आरोप है। इस संबंध में अनुदेशकों पर अनुचित दबाव बनाकर इंडेंट कराने का प्रयास किया गया तथा असहयोग करने वाले कार्मिकों की एसीपी एवं चरित्र प्रविष्टि रोक दी गई।
उक्त प्रकरण वर्तमान में निदेशक प्रशिक्षण के संज्ञान में है। साथ ही प्रदेश के समस्त प्रधानाचार्यों की डिग्री सत्यापन प्रक्रिया निदेशक प्रशिक्षण एवं वित्त नियंत्रक स्तर पर लंबित है। प्रधानाचार्य अजय कुमार यादव से संबंधित भ्रष्टाचार प्रकरण प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री तक संज्ञान में लाया जा चुका है। शासन से अपेक्षा है कि इस विषय की जांच पारदर्शी एवं त्वरित ढंग से संपन्न कर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएं। जिससे प्रशिक्षार्थियों के भविष्य की रक्षा हो सके तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की साख अक्षुण्ण बनी रहे।
amitsrivastav.in पर चंदौली से रिपोर्ट। 
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