बेमेल रिश्ते और आत्मनिर्भरता: एक सच्ची कहानी

Amit Srivastav

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जब एक लड़की जवान होती है, तो उसके जीवन में शारीरिक और मानसिक इच्छाओं के साथ-साथ कई भावनात्मक पहलू भी जन्म लेते हैं। बेमेल रिश्ते और आत्मनिर्भरता पर आधारित कहानी यह मेरी एक परिचित स्त्री बदला नाम कल्पना शुक्ला की है, यह युवतियों के लिए मार्गदर्शी कहानी हम लेखक भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के देव वंश-अमित श्रीवास्तव इन्हीं कि जुबानी लिख आप पाठकों को प्रस्तुत कर रहे हैं। कल्पना शुक्ला की इस आपबीती कहानी से युवतियों के साथ साथ अभिभावकों को भी सिख लेनी चाहिए और बेमेल रिस्तों से बचने बचाने का प्रयास करना चाहिए। जब वैवाहिक जीवन स्त्रीयों का सुखमय रहता है तो दो परिवारों में खुशियां देखी जा सकती है और स्त्री-पुरुष दोनों जीवन साथी में कोई मनमुटाव नही होता। आइए शुरू करते हैं कल्पना की आपबीती कहानी बेमेल रिश्ते से आत्मनिर्भरता की ओर आधारित। जब मैं 23 साल की थी। उस उम्र में मेरे घर में शादी की चर्चाएँ शुरू हो गई थीं। एक ओर मेरा दिल रोमांचित था, तो दूसरी ओर मैं अपने सपनों और आकांक्षाओं के बीच उलझन में थी।

शादी की पहली चर्चा

बेमेल रिश्ते और आत्मनिर्भरता: एक सच्ची कहानी

पापा उस दिन ऑफिस से लौटे तो उनके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी। मां से बातचीत के बीच उन्होंने मेरी ओर इशारा करते हुए कहा – कल्पना के लिए एक अच्छा रिश्ता आया है। मां ने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखी और कही- लड़का बहुत अच्छा है। मैं शर्माते हुए तस्वीर देखने का इंतजार करने लगी।
जब मां ने मुझे लड़के की तस्वीर दिखाई, तस्वीर से लड़का ओभर एज लग रहा था तो मेरा चेहरा गिर गया, साथ ही जन्म पत्रिका से ज्ञात हुआ कि लड़का का उम्र 42 साल का था। अब मै बहुत दुखी थी क्योंकि मै एक पढ़ी-लिखी युवा युवती थी और जानती थी कि बेमेल रिश्ते जीवन में सुखदायी नही होतें। मेरी कल्पनाओं में मेरा जीवन साथी मेरी उम्र का या थोड़ा बड़ा, साथ ही आधुनिक सोच वाला व्यक्ति था। मां और पापा ने समझाया, यह रिश्ता बहुत अच्छा है। बिना दहेज के शादी हो रही है। लड़के का परिवार संपन्न है। मैंने अपनी भावनाओं को दबाकर अपने माता-पिता की बात मान ली। शायद उस समय मुझे लगा कि वे मेरे माता-पिता मेरे लिए सही फैसला कर रहे हैं।


शादी और पहली चुनौतियाँ

शादी के शुरुआती कुछ महीने ठीक-ठाक गुजरे। मेरा पति सभ्य और सौम्य था, लेकिन जल्द ही हमारे बीच की सोच और जीवन शैली का अंतर स्पष्ट होने लगा। मैं दोस्तों से फोन पर बात करना चाहती थी, लेकिन मेरे पति और सास को यह पसंद नहीं था। मुझे घूमने का शौक था, लेकिन मुझे घर के कामों में उलझा दिया गया। मेरे ऊपर चारों ओर से प्रतिबंध लगाया जाने लगा।
नई रेसिपी बनाने का मेरा शौक भी सास के बजट की चिंता के आगे दम तोड़ गया। मैं धीरे-धीरे खुद को एक बंद पिंजरे में महसूस करने लगी। देश दुनिया से कोई मतलब नहीं रखने दिया जा रहा था, ऐसे विचार मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था।


विदेश यात्रा और अस्वीकृति

एक दिन मेरे पति ने बताया कि उन्हें छह महीने के लिए जर्मनी जाना है। मैंने उनसे साथ जर्मनी चलने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। मेरा दिल टूट गया। मैंने खुद से पासपोर्ट बनवाने की ठानी और मायके जाकर पासपोर्ट बनवाने का काम पूरा किया। जब मेरे पति को यह पता चला, तो वे मुझसे नाराज हो गए। उन्होंने मुझे वापस ससुराल आने से मना कर दिया। मेरी विदाई मायके में ही हो कर रह गई, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं था।

नया जीवन, नई शुरुआत

मायके में मेरे माता-पिता ने मुझे ससुराल जाने के लिए समझाया। माता-पिता ने कहा कि शादी के बाद ससुराल ही बेटी का सबकुछ होता है वो लोग नाराज हैं तो क्या हुआ तुम जाओ और अपने ससुराल में रहकर अपनी भूमिका निभाओ। माता-पिता के कहने पर मै ससुराल चली गई लेकिन मेरे पति और सास ने मुझे घर में प्रवेश नहीं करने दिया। यह मेरी जिंदगी का सबसे कठिन समय था। न मै घर की रही न घाट की। दोनों तरफ मेरे लिए घर का दरवाजा बंद दिखा क्योंकि अपनी माता-पिता के कहने पर मै ससुराल चली गई थी और ससुराल घर में मुझे प्रवेश से रोक दिया गया था। मैंने हार नहीं मानी। ससुराल से वापस मै रेलवे स्टेशन गयी ज्यादा पैसा भी नहीं था इसलिए जनरल टिकट ली और दिल्ली के लिए निकल पड़ी, दिल्ली जाकर एक पीजी में रहना शुरू किया। एक छोटी नौकरी ढूंढी और आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ाए। मेरे पास उस समय न मायके का सहारा था, न ससुराल का।

सीख और संदेश

23 साल की उम्र में मेरी शादी हुई और 24 साल की उम्र में मैं बेघर हो गई। इस अनुभव ने मुझे जिंदगी की सच्चाई से रूबरू कराया। मैंने सीखा कि शादी कोई हल्के में लिया जाने वाला फैसला नहीं है। यह एक लड़की के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ होता है।

  • मैं आज हर लड़की से कहना चाहती हूँ-
  • अपनी पढ़ाई और करियर पर पहले ध्यान दें। अपने पास योग्यता रहेगी तो कभी भी विस्मय परिस्थितियों में अपने पैरों पर खड़ा हो अपनी जीवन को संवारा जा सकता है।
  • शादी के लिए उम्र और मानसिक परिपक्वता को ध्यान में रखते हुए। शास्त्रों द्वारा जो कि उम्र सीमा निर्धारित की गई है वो बहुत ही उत्तम है। उस समय सीमा के अंदर हम युवतियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती हूं। गलत सही का फैसला करने में आत्मनिर्भर रहती हूं। मेरी शादी की उम्र उचित थी लेकिन जीवन साथी का उम्र मेरी उम्र से 19 साल अधिक था जो बेमेल होने वाला पति स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
  • बेमेल रिश्तों से बचें, उम्र में ज्यादा अंतर न ही अच्छे फिजिकल रिलेशन स्थापित करा सकता है न ही सामंजस बन पाती है। मैने अमित श्रीवास्तव जी कि लेखनी कुंडली मिलान के अंतर्गत योनि मिलान को पढ़ा और समझा फिर तुरंत सम्पर्क कर अपने रिश्ते के बारे में बात की तो अमित जी ने बताया यह योनी गुण चक्र 0 आप दोनों का नही बन रहा है यौन संबंध कष्टकारी रहना स्वभाविक है।
  • अपने सपनों और इच्छाओं के साथ कभी समझौता न करें। जीवन आपको एक दूसरे के साथ जीना है माता-पिता अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो आगे साथ नही दे सकते। जहाँ तक संभव हो कुंडली मिलान में योनि गुण ज्ञान चक्र का ध्यान जरूर रखें।
  • माता-पिता का फैसला अगर गलत दिखाई दे तो समझाने की कोशिश करें।

Click on the link कुंडली मिलान से जीवन में गृहस्थ जीवन का सुख समझने जानने के लिए जरूर पढ़िए योनिकुट ज्ञान चक्र। समझदारी के साथ एक बार रिस्ता जुड़ जाता है तो जीवन भर सुख की प्राप्ति होती है। अधिक जानकारी के लिए लेखक भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के देव वंश-अमित श्रीवास्तव से 07379622843 हवाटएप्स कालिंग नम्बर पर सम्पर्क जरुर करें।

मैं कल्पना शुक्ला हूँ। मेरी यह कहानी मेरे दर्द, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की गवाही है। उम्मीद है, मेरी सीख आपके जीवन को सही दिशा देने में मदद करेगी। स्टोरी प्रस्तुति amitsrivastav.in Google side अमित श्रीवास्तव प्रिन्ट मीडिया संपादक भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के देव वंश। अगर आप को यह प्रस्तुति अच्छी लगी हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार व्यक्त किजिए। अपनी हर मनपसंद लेखनी पढ़िए इस गूगल वेबसाइट पर।

बेमेल रिश्ते और आत्मनिर्भरता: एक सच्ची कहानी

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