पंचायत बीएलओ कार्य को अनदेखा कर प्रकाशित हुई मतदाता सूची, निर्वाचन विभाग ने बनाया मृतकों को मतदाता नये मतदाता सूची से गायब

Amit Srivastav

देवरिया। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच देवरिया जनपद से एक गंभीर और लोकतांत्रिक व्यवस्था को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। निर्वाचन विभाग ने बनाया मृतकों को मतदाता नये मतदाता सूची से गायब। पंचायत स्तर पर बीएलओ (Booth Level Officer) द्वारा महीनों तक किए गए घर-घर सत्यापन, नाम जोड़ने-कटाने और त्रुटि सुधार के कार्य को दरकिनार करते हुए निर्वाचन विभाग द्वारा जो पंचायत मतदाता सूची प्रकाशित की गई है, उसने न केवल बीएलओ को उदासीन किया है बल्कि आम मतदाताओं में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि यह लापरवाही किसकी है—निर्वाचन विभाग की या फिर बीएलओ के परिश्रम की संस्थागत अवहेलना? बीएलओ कर्मियों के चेहरे पर उदासी मतदाताओं में भारी रोष।


पंचायत बीएलओ के जमीनी कार्य को अनदेखा कर चुनाव आयोग मृतकों को बनाया मतदाता नये मतदाता सूची से गायब।

निर्वाचन विभाग ने बनाया मृतकों को मतदाता

बीएलओ बोले—“जमीन पर किया गया पूरा काम कागज़ों में गायब”


पंचायत स्तर पर तैनात कई बीएलओ का कहना है कि उन्होंने निर्धारित समयसीमा में मतदाता पुनरीक्षण का कार्य पूरी निष्ठा से किया। मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए, नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े गए और नाम, आयु व पते से जुड़ी सैकड़ों आपत्तियों का निस्तारण किया गया। तीन प्रति मे गणना प्रपत्र तैयार किया गया, दो प्रति निर्वाचन कार्यालय में जमा किया गया और एक प्रति हमारे पास साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध है आप मीडिया चाहें तो देख लें।

जिन मृतकों को गणना प्रपत्र मे मृतक भरा बिलोपन सूची में नाम शामिल कर दिया गया वह मृतक नये मतदाता सूची में जिवित हो चुके हैं और जो नाम बढाने के लिए परिवर्धन सूची में नाम डालकर दिया है वो मतदाता नई सूची में शामिल ही नहीं किए गए अब ग्रामीणों को हम बीएलओ क्या जबाब दें यह निर्वाचन विभाग बता नही रहा है। इसके बावजूद जब अंतिम पंचायत मतदाता सूची प्रकाशित हुई तो उसमें वही पुरानी त्रुटियाँ जस की तस दिखाई दीं। बीएलओ के अनुसार, “अगर हमारा फील्ड वर्क ही मान्य नहीं था तो महीनों की मेहनत, रिपोर्ट और सत्यापन का क्या अर्थ रह जाता है?”


मतदाताओं में गुस्सा—नाम गायब, मृतकों के नाम बरकरार
सिर्फ बीएलओ ही नहीं, बल्कि आम ग्रामीण मतदाता भी इस सूची से नाराज़ हैं। कई गांवों में योग्य मतदाताओं के नाम सूची से गायब मिले, जबकि वर्षों पहले मृत व्यक्तियों के नाम अब भी मतदाता सूची में दर्ज हैं। कहीं पति-पत्नी के नाम अलग-अलग वार्डों में चले गए हैं तो कहीं नई शादी के बाद महिलाओं के नाम ही नहीं जोड़े गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधा-सीधा उनके मताधिकार का हनन है।


लोकतंत्र की जड़ पर चोट— विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर सीधा प्रहार है। पंचायत चुनाव लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होते हैं और यदि वहीं मतदाता सूची ही अविश्वसनीय हो जाए तो निष्पक्ष चुनाव की कल्पना बेमानी हो जाती है। यह स्थिति आगे चलकर चुनावी विवाद, आपत्तियों और कानूनी पचड़ों को जन्म दे सकती है।


निर्वाचन विभाग की चुप्पी, सवालों के घेरे में व्यवस्था
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले पर निर्वाचन विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है। न तो यह बताया गया कि बीएलओ की रिपोर्ट को क्यों नजरअंदाज किया गया, न ही यह स्पष्ट किया गया कि अंतिम सूची तैयार करते समय किस आधार पर संशोधन या असंशोधन किया गया। विभाग की यह चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है।


क्या होगा आगे? जहां एक तरफ शिक्षकों के उपर गैर शैक्षणिक कार्य की जिम्मेदारी दे एस आई आर कार्य कराये जा रहे हैं, वहीं अब पंचायत बीएलओ के महिनों की मेहनत पर निर्वाचन विभाग आंख मूंद पानी फेर दिया है। पुनः वही त्रुटि पूर्ण मतदाता सूची दे एक और बोझ डाल दिया है। ग्रामीण बीएलओ को दोषी मान रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि बीएलओ के सही कार्य को अनदेखा कर निर्वाचन विभाग मनमानी तरीके से सूची को तैयार करा नया बवाल खड़ा कर दिया है।

ग्रामीण मतदाता अब इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक ले जाने की तैयारी में हैं। मांग की जा रही है कि पंचायत मतदाता सूची का तत्काल पुनरीक्षण कराया जाए, बीएलओ द्वारा किए गए कार्य को आधार बनाकर त्रुटियाँ सुधारी जाएँ और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो यह मामला आंदोलन और न्यायालय तक भी जा सकता है।


देवरिया की यह प्रशासनिक लापरवाही केवल एक जनपद की समस्या नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रणाली के लिए चेतावनी है। यदि जमीनी स्तर पर काम करने वाले बीएलओ की मेहनत को ही महत्व नहीं दिया जाएगा, तो मतदाता सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया पर जनता का भरोसा टूटना तय है। अब देखना यह है कि निर्वाचन विभाग इस रोष को गंभीरता से लेकर लोकतांत्रिक विश्वास की मरम्मत करता है या फिर यह लापरवाही एक बड़े विवाद का रूप लेती है।

पंचायत बीएलओ कार्य को अनदेखा कर प्रकाशित हुई मतदाता सूची, निर्वाचन विभाग ने बनाया मृतकों को मतदाता नये मतदाता सूची से गायब

amitsrivastav.in गूगल टाप टेन वेबसाइट्स पर देवरिया से दिलीप कुमार की रिपोर्ट।

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HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav
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