ग्वालियर में आयोजित कृषि सम्मेलन Kisan Sammelan Gwalior में पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने निधि सिंह को राम दरबार भेंट कर सम्मानित किया। निधि सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती, सहकारिता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में आयोजित एक भव्य सहकारिता कृषि सम्मेलन में देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों और सामाजिक कार्यों के लिए पहचान बना चुकीं मिस एशिया वर्ल्ड एवं मिस यूनिवर्स इंडिया निधि सिंह आकर्षण का केंद्र रहीं। सम्मेलन के दौरान पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स और सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने उन्हें भगवान श्रीराम के दरबार की प्रतिमा भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया।
यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान नहीं था, बल्कि समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, मानवाधिकार जागरूकता और किसानों के हित में उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सार्वजनिक सराहना भी था। जैसे ही मंच पर निधि सिंह को राम दरबार भेंट कर सम्मानित किया गया, पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी और उपस्थित लोगों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया।

Kisan Sammelan Gwalior राम दरबार से सम्मानित हुईं निधि सिंह, ग्वालियर कृषि सम्मेलन में किसानों को दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
ग्वालियर के मैन सिटी क्षेत्र के समीप स्थित ग्रेट काउंसिल रिसॉर्ट में आयोजित यह सम्मेलन वेंकटेश्वरा को-ऑपरेटिव पावर एंड एग्रो प्रोसेसिंग लिमिटेड के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, सहकारिता मॉडल और कृषि आधारित उद्यमिता के प्रति जागरूक करना था।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में किसान, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, युवा उद्यमी, कृषि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पूर्व सैनिक उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर कृषि विकास, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई और किसानों को नई तकनीकों तथा योजनाओं की जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए निधि सिंह ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की आत्मा किसान हैं। यदि किसान मजबूत होगा तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और यदि किसान समृद्ध होगा तो भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और कृषि क्षेत्र भी आधुनिक तकनीकों से जुड़ रहा है।
ऐसे समय में किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन, कृषि प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों को भी अपनाना चाहिए। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

अपने संबोधन में निधि सिंह ने प्राकृतिक खेती पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है और उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी मिट्टी, जल और पर्यावरण को बचाने के लिए प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। उनके अनुसार आने वाले समय में जैविक उत्पादों की मांग देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी से बढ़ेगी, जिसका लाभ भारतीय किसानों को मिल सकता है।
सम्मेलन में मौजूद पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने अपने संबोधन में कहा कि किसान और सैनिक दोनों राष्ट्र निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करता है, जबकि किसान देश के करोड़ों लोगों के भोजन और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि किसानों का सम्मान करना वास्तव में राष्ट्र का सम्मान करना है। इसी भावना के साथ उन्होंने निधि सिंह को राम दरबार भेंट कर सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि राम दरबार भारतीय संस्कृति, न्याय, सेवा, आदर्श नेतृत्व और लोककल्याण का प्रतीक है, इसलिए यह सम्मान समाज के लिए प्रेरणादायक कार्य करने वाले व्यक्तित्व को समर्पित किया गया।
कार्यक्रम में निधि सिंह ने महिला सशक्तिकरण के विषय पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण भारत की महिलाएं कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। खेतों में काम करने से लेकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और स्वयं सहायता समूहों के संचालन तक महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने आधुनिक खेती की विभिन्न तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन तकनीक, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण और कृषि प्रसंस्करण जैसी व्यवस्थाएं किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। किसानों को यह भी बताया गया कि सहकारिता मॉडल के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करने पर उत्पादन लागत कम की जा सकती है और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। कई विशेषज्ञों ने कृषि आधारित लघु उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बताया।
निधि सिंह ने अपने संबोधन में किसानों की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए कहा कि खेती से जुड़ी चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं होगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर किसानों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों और समस्याओं को उचित मंचों तक पहुंचाने के लिए वे अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को केवल सहायता प्राप्त करने वाला वर्ग नहीं बल्कि देश की आर्थिक शक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि निधि सिंह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित नाम बन चुकी हैं। उन्हें अब तक 3700 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। अमेरिका, जापान, रूस, उज्बेकिस्तान, वियतनाम सहित कई देशों में उन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकार क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मान प्राप्त हुआ है। वर्तमान में वे भारतीय मानव अधिकार परिषद की महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय हैं और महिलाओं, किसानों तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार कार्य कर रही हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शिवाजी राव डॉल ने की। उन्होंने किसानों को आधुनिक सोच अपनाने, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने और सहकारिता के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसान संगठित होकर आधुनिक तकनीक का उपयोग करें तो खेती को घाटे का नहीं बल्कि लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। सम्मेलन के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, किसानों, पूर्व सैनिकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
निधि सिंह से जुड़ी और जानकारी के लिए सम्बंधित पोस्ट देखें और खोजें पढ़ें अपनो को शेयर करें स्वयं लाभ उठाएं। लेखक अमित श्रीवास्तव।


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