प्रयागराज, 5 जून 2025: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्साह उद्दीपन संस्था द्वारा “पर्यावरण प्रबंधन में समाज विज्ञान और संस्कृति की भूमिका” विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में पर्यावरण संरक्षण के लिए सामाजिक जागरूकता, कला, संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर गहन चर्चा हुई।
मुख्य वक्ता पद्मश्री निरंजन गोस्वामी, संस्थापक व निदेशक, नेशनल माइम इंस्टीट्यूट, कोलकाता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण है लगाए गए पेड़ों का संरक्षण। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस
विशिष्ट वक्ता डॉ. विधु खरे दास, सहायक आचार्य, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा ने स्कूली शिक्षा में पर्यावरण जागरूकता को शामिल करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि नाटक और अन्य गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देकर भावी पीढ़ी को जागरूक किया जा सकता है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ श्री विजय पाण्डेय, प्रयागराज ने छोटे-छोटे वैज्ञानिक उपायों से पर्यावरण संरक्षण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि घरों की छतों पर सफेद रंग का पेंट करने से सूर्य की गर्मी का प्रभाव कम होता है, जिससे गर्मियों में घर का तापमान 3-4 डिग्री तक कम हो सकता है।
विशिष्ट अतिथि वक्ता लेखक और शिक्षक अभिषेक कांत पांडेय ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नागरिकों और सरकार की साझा जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त शहरों के लिए त्वरित और व्यावहारिक कदम उठाने जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि आज 80 प्रतिशत पर्यावरण की खबरें मुख्यधारा की मीडिया से गायब हो गई हैं। इन खबरों की महत्व को समझना होगा। दरअसल पर्यावरण के प्रति जागरूकता निभाने में यह खबर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
युवा रंगकर्मी श्री देव फौजदार ने कहा कि बाहरी पर्यावरण को तभी बचाया जा सकता है जब व्यक्ति अपने भीतर बदलाव करें इसके लिए जागरूकता पूर्वक नाटक करने चाहिए साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से गाँव और कस्बे मे पर्यावरण के बेहतर प्रबंधन की बात को पहुंचना चाहिए।
लेखक व रंगकर्मी श्री ऐश्वर्य निधि गौड़ ने कहा कि पर्यावरण को समाज की दृष्टि से देखा जाए तो समाज की इसको सुधारने में सबसे बड़ी भूमिका होती है। पर्यावरण जागरूकता के लिए नाटक, कला के माध्यम से जागरूकता का बहुत महत्व है। इसके लिए सरकार और नागरिकों की जिम्मेदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कचरा पर्यावरण के लिए एक बड़ी समस्या है। इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण के लिए सही नीति का क्रियान्वयन करना जरूरी है।
उत्साह उद्दीपन संस्था 2014 से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती रही है। संस्था ने भविष्य में स्कूलों में नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता को और व्यापक बनाने का संकल्प लिया है।

कार्यक्रम का संचालन आशीष कांत पांडेय ने किया। उत्साह उद्दीपन संस्था के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने सभी वक्ताओं और श्रोताओं का कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया। नित्या सिंह, इशिता पाण्डेय, नीरज, शाह फैसल, अनिमेष खरे दास, अभिषेक सिंह एवं अन्य प्रतिभागीगण उपस्थित रहे।

प्रयागराज से amitsrivastav.in गूगल वेबसाइट पर अभिषेक कांत पांडेय की रिपोर्ट
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