देवरिया। ग्राम सभा बढ़या हरदो निवासी 35 वर्षीय धर्मेन्द्र प्रसाद की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। धर्मेन्द्र प्रसाद विगत तीन दिनों से लापता थे। परिवारजन उनकी खोजबीन में लगातार जुटे रहे, लेकिन रविवार की सुबह जब लार रोड ढाले पर बन रहे पुल के लिए खोदे गए गहरे गढ़े से उनका शव बरामद हुआ तो पूरे गाँव और क्षेत्र में मातम छा गया।
धर्मेन्द्र की मौत का कारण जो सामने आया, उसने लोगों को झकझोर दिया। तीन दिन पहले शाम को वह बाजार करने निकले थे। रास्ते में निर्माणाधीन पुल के पास बना गढ़ा खुला पड़ा था, जिसमें पानी भरा हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि अंधेरे में गढ़ा दिखाई न देने के कारण धर्मेन्द्र उसमें गिर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई।
सुबह जब कुछ ग्रामीण पुल निर्माण स्थल के पास पहुँचे, तो पानी से भरे गढ़े में शव दिखाई दिया। पहचान होने पर सूचना पूरे गाँव में फैल गई। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों के करुण क्रंदन ने हर किसी की आँखें नम कर दीं।
ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग की लापरवाही ने धर्मेन्द्र की जान ले ली। जिस गढ़े में पानी भरा था, वहाँ किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी। न तो चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही बैरिकेडिंग की गई थी। खुले गढ़े के कारण यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने घटना के बाद जमकर नाराजगी जताई और ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। शव को गढ़े से बाहर निकाला गया और पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। अधिकारियों ने परिजनों को ढाँढस बंधाया और कहा कि ठेकेदार से बातचीत कर पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। समाजवादी पार्टी की नेता एवं सलेमपुर विधानसभा से जुड़ी रंजना भारती भी मौके पर पहुँचीं। उन्होंने परिवार को ढाँढस बंधाते हुए कहा कि इस दर्दनाक हादसे में प्रशासन को तुरंत जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और परिवार को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।
धर्मेन्द्र प्रसाद के असमय निधन से गाँव में गहरा शोक व्याप्त है। लोग उनके सरल और मिलनसार स्वभाव को याद कर आँसू बहा रहे हैं। वहीं, इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना आम बात हो गई है? क्या ठेकेदार केवल काम पूरा करने में ही रुचि रखते हैं और लोगों की जान की कीमत को दरकिनार कर देते हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और ठेकेदार सावधानी बरतते, तो धर्मेन्द्र जैसे मासूम व्यक्ति की जान बचाई जा सकती थी। खुले गढ़े में कोई भी व्यक्ति या बच्चा गिर सकता है। इसलिए इस तरह के निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था करना अनिवार्य होना चाहिए।
इस हादसे ने क्षेत्र की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी की स्थानीय नेता रंजना भारती ने कहा कि धर्मेन्द्र की मौत सीधे तौर पर ठेकेदार और प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं, स्थानीय लोग यह भी कह रहे हैं कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएँ रुकेंगी नहीं।
मामला अब प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी टिक गया है। निर्माण कार्यों में सुरक्षा इंतज़ाम करना ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन उस पर निगरानी रखना संबंधित विभाग का काम है। इस हादसे ने उस निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्रशासन ने कहा है कि जाँच की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई होगी।
पोस्टमार्टम के बाद धर्मेन्द्र प्रसाद का शव परिवार को सौंपा गया। पूरे गाँव में माहौल गमगीन है। लोग अंतिम यात्रा में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। हर कोई यही कह रहा था कि भगवान उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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धर्मेन्द्र प्रसाद की मौत केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। निर्माण कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी कितनी बड़ी त्रासदी बन सकती है, यह घटना इसका ताजा उदाहरण है। अब जरूरत है कि प्रशासन, ठेकेदार और सरकार इस मामले से सबक लें और आगे ऐसी लापरवाहियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएँ। तभी धर्मेन्द्र प्रसाद की आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी।

देवरिया से amitsrivastav.in पर पत्रकार दिलीप कुमार की रिपोर्ट
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