राजस्थान के आईबी ऑफिसर चेतन प्रकाश गलाना की रहस्यमयी मौत, पत्नी अनीता मीणा और प्रवीण राठौड़ की साजिश, प्रेम, विश्वासघात और हत्या की परतें — पढ़ें इस दुखद सच्ची कहानी का पूरा सच। चित्रगुप्त वंशज-अमित श्रीवास्तव की कर्म-धर्म लेखनी में।
कहानियाँ कई बार हमें प्रेरणा देती हैं, तो कभी-कभी हमें सावधान करती हैं। कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं, जो सतह पर साधारण दिखती हैं, लेकिन उनके भीतर छिपी सच्चाई दिल दहला देने वाली होती है। आज हम ऐसी ही एक कहानी लेकर आए हैं, जो राजस्थान के कोटा और झालावाड़ की गलियों से शुरू होकर एक खुशहाल परिवार को तहस-नहस कर देती है।
यह कहानी है इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के सीनियर टेक्निकल ऑफिसर चेतन प्रकाश गलाना की, जिनके जीवन में सब कुछ था—सपनों का घर, प्यारा परिवार, सम्मानजनक नौकरी—लेकिन एक साजिश ने सब कुछ छीन लिया। आइए, इस रहस्यमयी और दुखद घटना की परतें खोलते हैं और जानते हैं कि आखिर क्या हुआ था उस वैलेंटाइंस डे की रात को।

Table of Contents
1. चेतन प्रकाश गलाना एक सुखी परिवार की शुरुआत
राजस्थान के कोटा जिले की रामगंज मंडी इलाके में इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में रहते थे 32 वर्षीय चेतन प्रकाश गलाना। चेतन एक प्रतिभाशाली और मेहनती इंसान थे, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में सीनियर टेक्निकल ऑफिसर के पद पर दिल्ली में तैनात थे। उनकी पत्नी, 28 वर्षीय अनीता मीणा, झालावाड़ की गायत्री कॉलोनी की रहने वाली थीं और एक सरकारी स्कूल, असनावर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, में सेकंड ग्रेड की शिक्षिका थीं। इस दंपति के दो बच्चे थे—एक साढ़े पांच साल का बेटा और दूसरा चार महीने का नवजात।
साल 2011 में चेतन और अनीता की शादी हुई थी। यह एक अरेंज मैरिज थी, लेकिन दोनों परिवारों की सहमति और खुशी से हुई। शादी के बाद, अनीता अपनी नौकरी के कारण झालावाड़ में रहती थीं, जबकि चेतन दिल्ली में। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में सफल थे। जून 2017 में, इस दंपति ने झालावाड़ के हाउसिंग बोर्ड में 35 लाख रुपये में एक घर खरीदा, जिसमें अनीता अपने बच्चों के साथ रहने लगीं। इससे पहले, वह अपने मायके में रहती थीं, क्योंकि वहाँ से स्कूल नजदीक था। बाहरी नजरों में, यह परिवार हर मायने में परिपूर्ण था। अच्छी नौकरियाँ, प्यारा घर, दो बच्चे—सपनों की जिंदगी। लेकिन, जैसा कि अक्सर होता है, सतह के नीचे कुछ और ही चल रहा था।
2. वैलेंटाइंस डे की वह रात
14 फरवरी 2018, वैलेंटाइंस डे का दिन। चेतन दो दिन की छुट्टी लेकर राजस्थान लौटे। हमेशा की तरह, वह पहले अपने माता-पिता से मिलने कोटा के रामगंज मंडी गए। कुछ घंटे परिवार के साथ बिताने के बाद, शाम करीब 6:00 बजे उन्होंने झालावाड़ के लिए ट्रेन पकड़ी। चेतन ने अपनी पत्नी अनीता को फोन करके बताया कि वह एक घंटे में घर पहुँच जाएँगे। अनीता और बच्चे उनके आने का इंतजार करने लगे।
लेकिन समय बीतता गया, और चेतन घर नहीं पहुँचे। रात के 8:00 बज गए, और अनीता को चिंता होने लगी। चेतन ने एक मैसेज भेजा था कि वह ऑटो रिक्शा से पाटन होते हुए आ रहे हैं, लेकिन अब उनका फोन बंद हो चुका था। अनीता ने बार-बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। घबराकर उन्होंने चेतन के पिता और अन्य रिश्तेदारों को फोन किया, लेकिन किसी को चेतन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
अनीता ने अपने भाई, मनमोहन मीणा, से संपर्क किया, जो गायत्री कॉलोनी में रहते थे। मनमोहन ने तुरंत चेतन की खोज शुरू की। वह झालावाड़ रेलवे स्टेशन और आसपास के रास्तों पर गए, जहाँ चेतन ने मैसेज में बताया था कि वह ऑटो से आ रहे हैं। खोजते-खोजते मनमोहन झालरापाटन-भवानी मंडी मार्ग पर रलायता रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुँचे। वहाँ कुछ लोगों की भीड़ जमा थी। पास जाकर देखा तो चेतन बेसुध हालत में जमीन पर पड़े थे।
3. रहस्यमयी मौत और शुरुआती जांच
मनमोहन ने तुरंत कुछ लोगों की मदद से चेतन को झालावाड़ के एसआरजी हॉस्पिटल पहुँचाया। लेकिन डॉक्टरों ने चेतन को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अनीता, चेतन के माता-पिता, और रिश्तेदार हॉस्पिटल पहुँचे। पुलिस को सूचना दी गई, और झालावाड़ सदर थाने की पुलिस ने मौके का मुआयना किया।
चेतन के शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं था। उनके कपड़े साफ-सुथरे थे, और ऐसा कोई संकेत नहीं था कि उनकी किसी से मारपीट हुई हो या कोई संघर्ष हुआ हो। फिर आखिर चेतन की मौत कैसे हुई? अगले दिन, 15 फरवरी 2018 को, बीआरएस हॉस्पिटल में चेतन का पोस्टमॉर्टम हुआ। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की निगरानी में डॉक्टरों के पैनल ने जांच की, लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। डॉक्टरों ने केवल इतना बताया कि चेतन के नाखूनों में हल्का नीलापन था, जो किसी जहर या केमिकल की मौजूदगी का संकेत हो सकता था।
पोस्टमॉर्टम के बाद, कुछ सैंपल्स जयपुर की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजे गए। चेतन के पिता, महादेव गलाना, ने सदर थाने में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला दर्ज करवाया, जिसे सीआरपीसी की धारा 174 के तहत दर्ज किया गया। शुरुआती तौर पर, पुलिस और परिवार को लगा कि शायद हृदय गति रुकने या किसी बीमारी के कारण चेतन की मृत्यु हुई होगी। लेकिन चेतन एक आईबी ऑफिसर थे, और उनकी मौत कोई साधारण घटना नहीं थी। क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी? क्या कोई खुफिया एजेंसी या दुश्मन इसमें शामिल था?
4. साजिश की परतें खुलती हैं
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया, जिसका नेतृत्व एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कर रहे थे। जांच में कई सवाल उठे—
- – चेतन उस रात रलायता रेलवे क्रॉसिंग के पास कैसे पहुँचे, जबकि वह ऑटो से घर जा रहे थे?
- – उनके फोन की आखिरी गतिविधि रात 8:30 बजे तक एक्टिव थी, जबकि वह पहले ही बेहोश या मृत पाए गए थे।
- – क्या कोई ऐसा व्यक्ति था, जिसे चेतन की मौत से फायदा हो सकता था?
पुलिस ने चेतन के परिवार, सहकर्मियों, और करीबी लोगों से पूछताछ शुरू की। उनकी कॉल डिटेल्स, लोकेशन हिस्ट्री, और बैकग्राउंड की जांच की गई। इस दौरान, पुलिस को अनीता के फोन में कुछ संदिग्ध मिला। अनीता का फोन पूरी तरह से “क्लीन” था—कोई कॉल हिस्ट्री, मैसेज, या डेटा नहीं। ऐसा लग रहा था जैसे फोन को फॉर्मेट कर दिया गया हो। टेक्निकल एक्सपर्ट्स की मदद से डेटा रिकवर किया गया, और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
अनीता की अपने मुंहबोले भाई, प्रवीण राठौड़, से नियमित और लंबी बातचीत होती थी। प्रवीण झालावाड़ पुलिस की गोपनीय शाखा में कार्यरत था और बाद में एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में कांस्टेबल बन चुका था। हैरानी की बात यह थी कि 14 फरवरी को भी अनीता और प्रवीण के बीच कई कॉल्स हुए थे। पुलिस को अनीता और चेतन के बीच व्हाट्सएप चैट्स में झगड़े के संकेत मिले, और इसका कारण था प्रवीण का अनीता के घर पर बार-बार आना।
5. अनीता और प्रवीण का रिश्ता
जांच गहराने पर पता चला कि अनीता और प्रवीण का रिश्ता सिर्फ मुंहबोले भाई-बहन का नहीं था। दोनों बचपन से एक-दूसरे को जानते थे, क्योंकि वे सातवीं कक्षा में पड़ोसी हुआ करते थे। समय के साथ दोनों अलग हो गए, लेकिन 2014 में उनकी फिर से मुलाकात हुई, जब प्रवीण की पत्नी, जो एक शिक्षिका थीं, अनीता के स्कूल में नियुक्त हुईं। प्रवीण अपनी पत्नी को स्कूल छोड़ने और लेने आता था, और इस दौरान अनीता से उसकी दोस्ती फिर से गहरी हो गई।
2015 में रक्षाबंधन के मौके पर अनीता ने प्रवीण को अपने घर बुलाया और उसे राखी बांधी। चेतन भी उस समय मौजूद थे, और अनीता ने प्रवीण को अपना मुंहबोला भाई बताकर मिलवाया। लेकिन यह रिश्ता सिर्फ दिखावे का था। असल में, अनीता और प्रवीण एक-दूसरे से प्यार करते थे। 2017 में जब अनीता और चेतन ने हाउसिंग बोर्ड में घर खरीदा, तो प्रवीण ने ही ब्रोकर के तौर पर 1 लाख रुपये की कमीशन लेकर यह डील करवाई थी।
पुलिस को पता चला कि अनीता और चेतन के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव था। चेतन को प्रवीण का बार-बार घर आना पसंद नहीं था। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी प्रवीण को टोका था, लेकिन वह नहीं माना। सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई, जब पुलिस को पता चला कि अनीता का दूसरा बेटा, जो अक्टूबर 2017 में पैदा हुआ था, चेतन का नहीं, बल्कि प्रवीण का था। यह बच्चा अनीता और प्रवीण के रिश्ते का परिणाम था, और यही वह वजह थी, जिसने चेतन और अनीता के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया।
6. साजिश का खुलासा
पुलिस ने जब प्रवीण से पूछताछ करने की कोशिश की, तो पता चला कि वह 14 जून 2018 को शहर छोड़कर भाग गया था। उसने अपने परिवार को बताया कि वह अजमेर में किसी सरकारी काम से जा रहा है, लेकिन पुलिस को कोई ऐसी ड्यूटी का रिकॉर्ड नहीं मिला। प्रवीण की कॉल डिटेल्स से एक और शख्स का नाम सामने आया—शाहरुख खान, जो झालावाड़ के तोपखाना मोहल्ले का रहने वाला था और वाहनों की खरीद-बिक्री में आरटीओ एजेंट के रूप में काम करता था।
19 जून 2018 को पुलिस ने शाहरुख को हिरासत में लिया। सख्त पूछताछ में उसने पूरी साजिश का खुलासा किया। शाहरुख ने बताया कि प्रवीण ने दिसंबर 2017 में उससे संपर्क किया और कहा कि उसकी “बहन” अनीता का पति उसे परेशान करता है। प्रवीण ने चेतन को रास्ते से हटाने के लिए शाहरुख को 3 लाख रुपये की सुपारी दी। प्रवीण ने यह नहीं बताया कि चेतन एक आईबी ऑफिसर है, बल्कि कहा कि वह दिल्ली में कंप्यूटर पर काम करता है।
शाहरुख ने अपने कुछ साथियों—फरहान, प्रिंस, और शाकिर—को इस साजिश में शामिल किया। उन्होंने कई बार चेतन को मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार नाकाम रहे। उदाहरण के लिए, 25 दिसंबर 2017 को उन्होंने चेतन को ट्रेन से धक्का देने की योजना बनाई, लेकिन भीड़ और सर्दी के मौसम के कारण वह बच गए। 5 जनवरी 2018 को शाकिर ने अपने ट्रक से चेतन की स्कूटी को टक्कर मारने की कोशिश की, लेकिन चेतन मामूली चोटों के साथ बच गए।
7. घातक केमिकल और अंतिम साजिश
प्रवीण ने जब देखा कि हिंसक तरीके काम नहीं कर रहे, तो उसने एक और रास्ता चुना। उसने अपने दोस्त संतोष निर्मल, जो एक मेल नर्स था और ऑपरेशन थिएटर में काम करता था, से संपर्क किया। प्रवीण ने संतोष से एक ऐसे केमिकल की मांग की, जो इंसान को तुरंत मार दे और मेडिकल रिपोर्ट्स में इसका पता न चले। 31 दिसंबर 2017 को संतोष ने हॉस्पिटल के स्टोर रूम से 500 मिलीग्राम की दो शीशियाँ चुराकर प्रवीण को दीं। इस केमिकल का नाम यहाँ उजागर नहीं किया जा सकता, लेकिन यह एक ऐसा पदार्थ था, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर मेडिकल प्रक्रियाओं में होता है, इसलिए इसे फॉरेंसिक जांच में नजरअंदाज कर दिया गया।
14 फरवरी 2018 को प्रवीण ने अपनी अंतिम साजिश रची। अनीता ने चेतन को वैलेंटाइंस डे के बहाने घर बुलाया। जब चेतन झालावाड़ रेलवे स्टेशन पर उतरे, तो शाहरुख ने उनका पीछा शुरू किया। प्रवीण, फरहान, और प्रिंस एक फोर्ड फिगो कार में स्टेशन के पास इंतजार कर रहे थे। जैसे ही चेतन सुनसान रास्ते पर पहुँचे, प्रवीण और उसके साथियों ने उन्हें जबरदस्ती कार में बिठा लिया। कार को हल्दीघाटी रोड पर ले जाया गया, जहाँ प्रवीण और चेतन के बीच अनीता के बच्चे को लेकर बहस हुई।
प्रवीण के इशारे पर, उसके साथियों ने चेतन के हाथ-पैर पकड़े। प्रवीण ने उस केमिकल से भरे दो इंजेक्शन तैयार किए और चेतन की जांघों में इंजेक्ट कर दिए। इसके बाद, उन्होंने चेतन की नाक दबाकर उसकी साँसें रोक दीं। बिना किसी मारपीट या चोट के चेतन की मौत हो गई। प्रवीण ने चेतन का फोन लिया और अनीता को मैसेज किया कि वह ऑटो से पाटन होते हुए आ रहा है, ताकि किसी को शक न हो। फिर, चेतन के शव को रलायता रेलवे क्रॉसिंग के पास फेंक दिया गया।

8. गिरफ्तारियाँ और कोर्ट का फैसला
शाहरुख के खुलासे के बाद, पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। 21 जून को शाकिर, 22 जून को संतोष, और 24 जून को प्रिंस को गिरफ्तार किया गया। प्रिंस, जो नाबालिग था, को जुवेनाइल होम भेजा गया। 25 जून को अनीता को भी गिरफ्तार किया गया। 18 अगस्त 2018 को प्रवीण को नाकाबंदी के दौरान पकड़ा गया, और उसके पास से केमिकल की शीशियाँ और इंजेक्शन बरामद हुए।
2 सितंबर 2018 को पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की। यह केस करीब सात साल तक कोर्ट में चला। मई 2025 में, एससी-एसटी कोर्ट ने प्रवीण और शाहरुख को उम्रकैद, जबकि अनीता और संतोष को 14 साल की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। फरहान सबूतों के अभाव में बच गया, और प्रिंस नाबालिग होने के कारण तीन साल में रिहा हो गया। चेतन के पिता इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील करने का फैसला किया।
9. Conclusion (निष्कर्ष) और सबक
चेतन प्रकाश गलाना का केस एक ऐसी कहानी है, जो प्यार, विश्वासघात, और साजिश के जाल में उलझकर एक सुखी परिवार को तबाह कर देती है। यह मामला हमें सिखाता है कि रिश्तों में विश्वास और पारदर्शिता कितनी जरूरी है। अनीता और प्रवीण ने अपने रिश्ते को भाई-बहन का मुखौटा पहनाया, लेकिन उनकी साजिश ने एक बेकसूर इंसान की जान ले ली।
यह कहानी हमें यह भी बताती है कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, सच आखिरकार सामने आ ही जाता है। पुलिस की मेहनत, तकनीकी जांच, और शाहरुख के खुलासे ने इस जटिल मामले को सुलझाया। लेकिन चेतन के परिवार का दुख कोई कम नहीं कर सकता।
हमारा मकसद इस कहानी को लिखकर किसी को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि आपको सावधान करना है। रिश्तों में संदेह की जगह संवाद को महत्व दें। अगर चेतन और अनीता के बीच खुलकर बात हुई होती, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी।
आपके विचार?
इस कहानी को पढ़कर आपके मन में क्या विचार आए? क्या आप मानते हैं कि अनीता और प्रवीण का रिश्ता इस हद तक खतरनाक नहीं था, या यह एक सुनियोजित साजिश थी? अपनी राय हमारे साथ साझा करें।
- अतिरिक्त तथ्य और विश्लेषण अमित श्रीवास्तव
- 1. आईबी ऑफिसर की सुरक्षा: चेतन एक आईबी ऑफिसर थे, फिर भी उनकी मौत की साजिश इतने करीब से रची गई। यह सवाल उठाता है कि क्या उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों की सुरक्षा पर और ध्यान देने की जरूरत है।
- 2. केमिकल का रहस्य: इस केस में इस्तेमाल हुआ केमिकल इतना सामान्य था कि मेडिकल जांच में इसका पता नहीं चला। यह मेडिकल और फॉरेंसिक जांच में सुधार की जरूरत को दर्शाता है।
- 3. पारिवारिक तनाव: अनीता और चेतन के बीच तनाव का मुख्य कारण प्रवीण था। अगर परिवार ने समय रहते इस मुद्दे को संभाला होता, तो शायद यह साजिश रची ही नहीं जाती।
- 4. सामाजिक जागरूकता: यह केस हमें सिखाता है कि रिश्तों में पारदर्शिता और परिवार के साथ खुली बातचीत कितनी जरूरी है।

नोट: यह लेख पूरी तरह से मूल घटनाक्रम से सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से लिया गया है। इस लेख को चेतन प्रकाश गलाना केस में साक्ष्य के तौर पर न लिया जाए। amitsrivastav.in वेबसाइट पर सामाजिक मार्गदर्शन के लिए लेखक अमित श्रीवास्तव द्वारा जनकल्याण सामाजिक जागरूकता फैलाने के लिए लिखा गया है। इसे कॉपीराइट मुक्त रखने के लिए, कृपया इसे बिना अनुमति कहीं और प्रकाशित न करें। अधिक जानकारी के लिए, हमारी वेबसाइट पर अन्य कहानियाँ अपनी-अपनी मनपसंद लेखनी पढ़ें।
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- Disclaimer:
- यह चेतन प्रकाश गलाना केस: एक सुखी परिवार की दुखद कहानी में पूरी लेख सामग्री केवल सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से है, न कि किसी भी प्रकार की यौन क्रिया को प्रोत्साहित करने हेतु।
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