अच्छे दिनों के वादों के साथ केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार देश की जनता को इंतजार कराते कराते दस साल दो चुनाव बिता तीसरी बार केंद्र में सरकार बना चुकी है। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के अगुआई में बीजेपी 2014 पहली सरकार मे 68 वीं तो इस तीसरी सरकार मे स्वतंत्रता के 78वीं वर्षगाठ मना चुकी है। ऐसे में भारत की तस्वीर बदलने का मौका नरेंद्र मोदी के पास 10 साल कमजोर विपक्ष के साथ मिला हुआ था लेकिन उस दस साल में एक ही नारा गूंजता हुआ तीसरी सरकार मे गूंज रहा है कि हिन्दू और हिन्दुस्तान खतरे में है, तो क्या हिन्दू और हिन्दुस्तान खतरे में बताना ही अच्छा दिन रहा? इस बार मोदी के रवैये से छुब्द जनता मजबूत विपक्ष दी है वैसे तो चुनावी दौर में लग रहा था, बीजेपी की सरकार ही जा रही है और गठबंधन सरकार मे आ रही है। हम निस्पक्ष लेखकों के सर्वेक्षण से 400 +का नारा बीजेपी का पहले ही एक भौकाल लग रहा था जो वास्तव में सच भी सावित हुआ। सवाल उठता रहा है कि आखिर क्या नरेंद्र मोदी कभी भी अपने वादों पर खरा उतरेंगे? जो 2014 चुवावी मंचों से कहते आ रहे हैं वो करते नहीं। तो क्या इस तीसरी चुनाव में किये गए अपने कथनी को करनी में बदल पाएंगे। दो चुनावों का चुनावी एजेंडा तो जनता देख ही चुकी है गुजरात के तर्ज पर विकास करेंगे, काला धन लाकर देश की जनता को पंद्रह पंद्रह लाख देगें, बेरोजगारों को रोजगार के लिए गुजरात जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी हर जगह कर-कारखाने लगेंगे, ये करेंगे वो करेंगे मतलब कुछ भी नहीं किया। अब तक दो सरकार 10 साल के रवैये को देखकर तो जबाव यही निकल रहा है मोदी कुछ अच्छा करने वाले नहीं हैं। जिससे अच्छे दिन आ सके। अग्निवीर योजना लागू किए पेट भरने भर का भी वेतन नही तो अग्निवीर के जवाब चोरी डकैती करते अभी पकड़े जाने लगे हैं, दो चोरी डकैती की घटनाओं में अग्निवीरों का नाम पुलिस सार्वजनिक कर चुकी है और मीडिया में खबरें भी आ चुकी है। आगे जब अग्निवीर के सामने 4 साल बाद कोई आय का श्रोत नही रहेगा तब अग्निवीर के जवान क्या करेंगे, यह गंभीर मुद्दा है? जिसे विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद में उठा भी चुके हैं। समय रहते सोचने और समाधान कि जरूरत है, क्योकि उन्हे हथियार चलाने की पूरी ट्रेनिंग देकर घर वापसी किया जायेगा तो सेना के जवान चाय पकौड़ी तो छानेगा नही, जैसा कि देश के शिक्षित युवाओं के लिए कहा गया था। अपने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा लाई गई संविदा व्यवस्था के कर्मियों की दशा वैसे बना दी कि कहने लायक नहीं है, मोदी सरकार मे संविदा पर नियुक्त हजारों कर्मी आर्थिक तंगी से परेशान हो अपनी जीवन लीला ही खत्म कर लिए और आये दिन कर ही रहे हैं। वैसे उत्तर प्रदेश कि योगी सरकार भी कुछ कम नहीं मोदी से दो कदम आगे ही दिखाई देती है। योगी जब तक मुख्यमंत्री नही थे, तब जब जब शिक्षा मित्रों के खिलाफ कोई फ़ैसले आते थे, योगी आदित्यनाथ शिक्षा मित्रों का सरकार के खिलाफ मंच संभाला करते थे। जब खुद मुख्यमंत्री हो गए तो न देने की फैसले पर कोर्ट के आदेश का सम्मान करेंगे, देने के नाम पर कोई असर नहीं पड़ता। यानी मोदी योगी जन हित की लड़ाई से दूर बस कुर्सी कि चाह लिए कुर्सी कायम रहे उतना ही सोच लिए काम कम भौकाल ज्यादा करते हुए सत्ता पर काबिज रहना चाहते हैं। हिन्दू और हिन्दुस्तान भले ही शोशल मीडिया द्वारा रोज फैलवाये गये मैसेज से खतरे में है लेकिन 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा में बीजेपी कि कुर्सी भी खतरे में है। क्योंकि लोकसभा 2024 चुनाव से स्पष्ट होने लगा है कि देश प्रदेश की जनता बीजेपी की राजनीति को समझ चुकी है और जनता बीजेपी को सत्ता से बाहर करने की अल्टिमेटम दे रही है। गांवों में लगभग बीसों परिवार का कोई न कोई सदस्य संविदा कर्मी के रूप में है और संविदा कर्मियों को भर पेट अच्छा भोजन तक नही मिल पा रहा है महगाई के हिसाब से मिल रहे मानदेय में तो इन परिवारों का मत क्या हठी सरकार को मिलती रहेगी यह आंकड़ा विते चुनावी नतीजों से ही देखा जा सकता है। बेरोजगारी महंगाई आय के स्रोत में कमी से तंग बड़ा समुदाय भाजपा से कटने लगा है।

देखा जाए तो 10 साल के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी के साथ अच्छा मौका था। अगर हिन्दू और हिन्दुस्तान खतरे में है तो कुर्सी पाकर हिन्दू राष्ट्र भी घोषित कर सकते थे। खैर 10 साल बीत चुके हैं और मजबूत विपक्ष है हिन्दू राष्ट्र की घोषणा विधेयक तो संसद में लेकर आवें ताकि देश की जनता को दिखाई दे सके राहुल अखिलेश ममता केजरीवाल आदि विपक्ष के नेताओं में कौन हिन्दू राष्ट्र पर संसद में विरोध करता है। बिते 10 साल बहुमत की सरकार रही और विपक्ष की कमजोर स्थिति रही, जो भी फैसले लिए या लेते विरोधी नही खड़ा हुआ, नरेंद्र मोदी को उनकी ही चुवावी मुद्दे व कहे अनुसार देश हित में कई बड़े फैसले लेने है। 15 अगस्त 26 जनवरी मन की बात के ओजपूर्ण भाषण में मोदी संकेत देते रहे हैं। अपने भाषण में देश को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए युवाओं के स्किल कौशल की शिक्षा दी जाने की बात कही, जाहीर है देश के अधिकांश युवा नौकरी के लिए विदेशों का रूख करते हैं लेकिन देश को इनकी कुशलता का फायदा नहीं मिलता है, ऐसे युवाओं को भारत में रखकर जाब क्रिएटर की भूमिका निभाने का आवहान किया गया।
भारत शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की कर रहा है लेकिन अभी भी प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार की बहुत आवश्यक्ता है। शिक्षा के स्तर में सुधार सरकारी स्तर पर होना आवश्यक है। 2014 में नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में लड़कियों के लिए स्कूल में अलग से शौचालय बनवाने की बात कही। देखा जाए तो भारत के अधिकांश राज्यों खासतौर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान में प्राथमिक स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं न ही टायलेट, स्कूल भवन जैसी सुविधा नहीं है।
वहीं शिक्षा प्रदान करने की पुरानी तकनीक पर ही निर्भर है। कम्प्यूटर द्वारा शिक्षा दी जाने की व्यवस्था आज के दौर में जरूरी है। निजी स्कूलों में मंहगी गुणवत्तायुक्त शिक्षा अर्थिक रूप से कमजोर लोग अपने बच्चों को नहीं दे पाते हैं। इसलिए उन्हें सरकारी स्कूल के दोयम दर्जे की शिक्षा के भरोसे अपने बच्चों को छोड़ना पड़ता है। वहीं महंगे स्कूल मे शिक्षा पा रहे आर्थिक रूप से संपन्न लोगों से प्रतियोगिता में पिछड़े बने रहने की साजिश देश में हो रही है। अगर सभी को एक समान स्तर की गुणवत्ता वाली शिक्षा नहीं दी जाएगी, तब तक भारत का समुचित विकास नहीं हो पाएगा। नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सभी को समान स्तर की गुणवत्ता वाली शिक्षा का प्रबंध करना है, शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में समान स्तर की शिक्षा की पहल जरूरी है। उच्च शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देने का प्रयास जरूरी है।
शिक्षा व हथियार है जिससे विकास के प्रत्येक चरण को एक छलांग से पार किया जा सकता है। देश में नयी शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन जरूरी है, राष्ट्रभाषा में विज्ञान और तकनीकी में उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा व्यवस्था प्रारंभ कर देश के युवाओं को कुशल बना सकते हैं। वहीं राष्ट्रभाषा हिंदी पर हो रही राजनीति के कारण आजादी के 78 साल बाद भी हिंदी को उचित स्थान नहीं दिलाया जा सका, न्यायपालिका में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल जरूरी है। भारत में 70 प्रतिशत से अधिक आबादी हिंदी या क्षेत्रीय भाषा जानती है और अपने भाषा में कोई बच्चा दर्शन, विज्ञान, तकनीक आदि विषयों को बहुत तीव्रता से सीख सकता है, लेकिन अंग्रेजी तो जबरजस्ती लादी जा रही हैं। वहीं भारत की 70 प्रतिशत जनता को जान बूझकर देश की बागडोर से दूर रखने की नीति अब तक अपनाई जा रही है, अंग्रजी पसंद मैकाले सोच से ओत-प्रोत चंद मलाईदार लोगों की सुविधा की नीति के कारण भारत को अपनी राष्ट्रभाषा में खड़े होने नही दिया जा रहा है। किसी देश की पहचान उसकी भाषा होती है, हम क्या अपनी भाषा में अपने देश के विकास का सपना पूरा नहीं कर सकते हैं। मातृभाषा व राष्ट्रभाषा के माध्यम से देश के 100 प्रतिशत आबादी के विकास का सपना पूरा कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी का नारा भी है सबका साथ सबका विकास। सभी के विकास की बात उनकी रोजी रोटी का जुगाड़ देश में अपनी भाषा, अपनी संस्कृति की पहचान बनाकर विश्व के सामने एक उदाहरण पेश कर सकते हैं। आज विश्व की दूसरी अर्थव्यवस्था के रूप में हमने अपनी पहचान बनाई है। नरेंद्र मोदी ने गरीबी हटाने की बात अपने भाषण में की, एक साथ मिलकर गरीबी से लड़ने की बात कही लेकिन सवाल यह है कि आखिर देश में 78 साल से हर राजनैतिक दल की सरकार ने गरीबी हटाने की बात की लेकिन आज भी अधिकांश जनता को दो समय का भोजन भी नहीं मिल पाता है जबकि गोदामों में अनाज सड़ जाते हैं, सरकारी व्यवस्था लापरवाही और भ्रष्टाचार के भेट चढ़ जाती है, और असर पड़ता है तो उस गरीब आदमी के उपर जो अपना पेट भरने के लिए कड़ी मेंहनत करता है। जाहीर है भारत खद्यान उत्पादन मे आत्मनिर्भर बन चुका है लेकिन सरकारी अव्यवस्था के चलते गरीबों के थाली में भोजन पहुंचने से पहले भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। सार्वजनिका वितरण प्रणाली को दुरूस्त करने, मनरेगा जैसी योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते देश का पैसा भ्रष्ट लोगों की तिंजौरी भर रहा है। गरीबी एक बीमारी है जिसकी दवा सरकार के पास है लेकिन इस दवा को सही हाथों तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है।
नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में महिलाओं के प्रति हिंसा और बलात्कार की घटना पर चिंता व्यक्त की थी, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ बलात्कार कि घटना अच्छा खासा बढ़ गया है और दोषी सत्ता पक्ष का करीबी तो बचाव सत्ता पक्ष का विरोधी तो मीडिया के सुर्खियों में छा जाता है। जाहीर है कि यह समाज में कथित लोगों द्वारा महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता का मामला है । किसी राज्य की कानून व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन ऐसे मामले में पीड़िता के प्रति पुलिस द्वारा बरती गई लापरवाही और सवालिया घेरों में पुलिसिया कार्यवाई सबसे ज्यादा मुश्किल खड़ी करती है। वहीं रही सही कसर इसका राजनैतिककरण यानी नेताओं के विवादास्पद बयान अपराधियों के हौसले बुलंद करता है। महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा के प्रति ढिलाई बरतने वाले राज्यों के ऊपर लगाम कसना जरूरी है। महिलाओं की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। पुलिस मित्र की योजना कार्यगर हो सकती है। हर राज्यों में पुलिस को खास ट्रेनिंग देकर इस तरह के मामलों में पीड़िता को तुरंत न्याय दिलाना जरूरी है। निर्भाया काण्ड से भी सरकारों ने कोई सबक नहीं लिया। नरेंद्र मोदी को इस पर ठोस पहल करनी जरूरी है।
आने वाले समय में कानून, सुरक्षा, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी सरकार को जनता की कासौटी पर खरा उतरना होगा नहीं तो जनता अपना फैसला विधानसभा चुनाव में उसी तरह देगी जिस तरह से आम आदमी पार्टी के साथ जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। देश की जनता विकास व रोजी रोजगार चाहती है, नरेंद्र मोदी की ओर सभी की निगाहें थी। अच्छे दिन कब आयेगें मोदी जी जनता के इस सवाल का जवाब जल्दी दिजिये। संविदा कर्मियों को चुनावी रेवड़ी बाट थोडी आस बन रही है, वर्ना हरियाणा और झारखंड की विधानसभा चुनाव 2024 बीजेपी की कुर्सी खतरे में है। अच्छे दिन कि तलाश 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बीजेपी का सत्ता में वापसी भी मुश्किल होती जा रही है।






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