रुद्रपुर (देवरिया)। तहसील रुद्रपुर के ग्राम जंगल इमिलिहा में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। गांव के निवासी धर्मेन्द्र कुमार ने उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि लेखपाल और सहायक चकबंदी अधिकारी ने घोर लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए पैसे लेकर दूसरे व्यक्ति का चक उनके दरवाजे पर आवंटित कर दिया। इससे न केवल उनकी पारिवारिक संपत्ति पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि गांव में विवाद और अशांति की भी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
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धर्मेन्द्र कुमार का कहना है कि उनके पिता रामप्रताप से लेखपाल और चकबंदी अधिकारियों ने चक की स्थिति बरकरार रखने या मनचाहे स्थान पर रखने के लिए रिश्वत की मांग की थी। जब उन्होंने इस अवैध मांग को ठुकरा दिया, तो अधिकारियों ने दुर्भावना से प्रेरित होकर उनके दरवाजे के सामने दूसरे व्यक्ति का चक दर्ज कर दिया। यह निर्णय पूरी तरह से असंवैधानिक, अन्यायपूर्ण और गांव की शांति व्यवस्था के लिए खतरा बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह चक उनके घर के मुख्य द्वार और निजी रास्ते को बाधित करता है, जिससे उनके परिवार को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, जिस व्यक्ति को वहां चक दिया गया है, वह अब जबरन कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है, जिससे दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया है।
धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि उन्होंने इस प्रकरण की शिकायत पहले भी की थी, लेकिन उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया गया। जब विवाद बढ़ने लगा और गांव के अन्य लोग भी इस भेदभावपूर्ण रवैये से नाराज होने लगे, तब उन्होंने मजबूरी में उपजिलाधिकारी हरिशंकर लाल को लिखित शिकायत दी।

चकबंदी घोटाले का सनसनीखेज मामला उजागर
उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चकबंदी अधिकारी को मौके पर जाकर जांच करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि जांच में किसी भी सरकारी कर्मी की संलिप्तता पाई गई, तो उसके विरुद्ध प्रशासनिक स्तर पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
इस प्रकरण से न केवल चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति अविश्वास भी गहराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई न की गई, तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और गांवों में अशांति की स्थिति बनती रहेगी।
स्थानीय लोगों की मांग है कि चकबंदी की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।
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