देवरिया में ओवरब्रिज के नीचे स्थित मजार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष व्यास यादव ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे न केवल जनभावनाओं पर चोट बताया, बल्कि इसे सत्ता के दबाव में की गई एकतरफा और असंवेदनशील कार्रवाई करार दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं होते, बल्कि उनसे लोगों की आस्था, भावनाएं, स्मृतियां और सांस्कृतिक पहचान जुड़ी होती है। जब किसी धार्मिक या उपासना स्थल पर इस प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई होती है, तो समाज का भावुक होना पूरी तरह स्वाभाविक है।
यादव ने कहा कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है, यह तय करना न्यायालय का काम है, न कि प्रशासन का। जब यह मामला दीवानी न्यायालय और कमिश्नरी स्तर पर विचाराधीन था, तो फिर इतनी जल्दबाज़ी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों की गई? क्या यह न्यायिक प्रक्रिया का अपमान नहीं है? उन्होंने इसे सीधे तौर पर सत्ता के दबाव में की गई मनमानी कार्रवाई बताया और कहा कि यह कदम कानून के राज की भावना के विपरीत है।
मजार पर चला बुलडोजर

उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सार्वजनिक भूमि पर बने धार्मिक स्थलों के खिलाफ कार्रवाई करनी ही है, तो क्या पूरे प्रदेश में सिर्फ देवरिया की यही एक मजार ऐसी है? क्या सरकार यह साहस दिखाएगी कि वह इसी तरह सभी धर्मों के उन स्थलों की निष्पक्ष जांच कराए, जो सार्वजनिक भूमि पर स्थित हैं? या फिर कार्रवाई का पैमाना और निशाना केवल चुनिंदा समुदाय और चुनिंदा स्थान ही रहेंगे? यदि कानून सबके लिए समान है, तो वह सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए, न कि किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाने के लिए।
सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र लोकलाज, संवैधानिक मर्यादा और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में चलना चाहिए, न कि वर्ग, जाति या समुदाय विशेष के प्रति दमन और उत्पीड़न की मानसिकता से। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम की चारों ओर निंदा हो रही है और आम नागरिकों में यह संदेश जा रहा है कि प्रशासन निष्पक्ष नहीं, बल्कि दबाव में काम कर रहा है।
उन्होंने देवरिया की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की याद दिलाते हुए कहा कि देवरिया देवों की नगरी है, जो हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सौहार्द की मिसाल रही है। यहां शिव बारात हो या हनुमान जयंती, अल्पसंख्यक समाज द्वारा पूरे उत्साह से स्वागत और सहयोग किया जाता है, और वहीं सैयद बाबा की मजार पर हिंदू समाज की गहरी आस्था रही है। यही साझा संस्कृति देवरिया की असली पहचान है, जिसने इस जिले को हमेशा शांति और सद्भाव का प्रतीक बनाए रखा है।
व्यास यादव ने कहा कि जब शहीद बाबा मजार और कब्रिस्तान से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तब प्रशासन को संयम और संवैधानिक मर्यादा का परिचय देना चाहिए था। लेकिन इसके विपरीत, जिस तरह अचानक बुलडोजर चलाया गया, उससे साफ संदेश गया है कि यह कार्रवाई न्याय नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस ध्वस्तीकरण की घोर निंदा करती है और इसे देवरिया के सामाजिक ताने-बाने पर हमला मानती है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि आज का दिन देवरिया के इतिहास में एक “काले दिन” के रूप में याद रखा जाएगा, क्योंकि इस दिन न केवल एक धार्मिक स्थल तोड़ा गया, बल्कि आपसी विश्वास और सौहार्द की दीवारों को भी चोट पहुंचाई गई है।
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अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से शांति, संयम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि देवरिया नफ़रत की नहीं, बल्कि भाईचारे, सद्भाव और संविधान की धरती है। किसी भी उकसावे में आए बिना हमें अपनी साझा संस्कृति और सामाजिक एकता को बचाए रखना है।
उन्होंने अपने वक्तव्य का समापन इन पंक्तियों के साथ किया—
“मंदिर की घंटी, मस्जिद की अज़ान,
इक साथ गूँजे—यही देवरिया की पहचान।”

amitsrivastav.in पर देवरिया से दिलीप कुमार की रिपोर्ट।
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