अन्तर्वासना – बिमारियों का उत्थान या पतन

Amit Srivastav

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अन्तर्वासना

अन्तर्वासना क्या है

आज आप पाठकों को सेक्स एजुकेशन इन हिंदी अन्तर्वासना के अन्तर्गत बता रहे हैं – सेक्स का सही तरीका जिसे आजमा कर जीवन में वास्तविक प्रेम पूर्वक सेक्स का आनंद भी ले सकते हैं और ज्यादातर बीमारियों से अपने पार्टनर को बचा भी सकते हैं।

अन्तर्वासना क्या है। सेक्स कैसे करें

जो लोग स्वस्थ और निरोग खुद और अपने पार्टनर को रखना चाहते हैं उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि इसका मूल केंद्र मन है। यह कहावत आपने सूना होगा मन चंगा तो कठौती में गंगा। मन के पवित्र और प्रसन्न होने पर कठौती जैसे क्षुद्र पात्र में गंगा जैसी दूर्लभ तत्व भर जाता है। यह कल्पना नही बल्कि पूर्णतया सत्य है। अपनी स्थिति के अनुसार जो भी भोजन आपको प्राप्त हो उसे पवित्रता और प्रसन्नता से ग्रहण करें। यहां आप कहने का तात्पर्य समझ रहे होगें। एक एक ग्रास के चर्वण के साथ अमृत भाव का अनुभव करते जाईए वो भोजन शरीर में अमृत ही प्रदान करेगा।

मन को ऐसी स्थिति में रखिए कि मन प्रसन्न रहे और निराशा एवं क्षोभ के अंधकूप में न गिरने पावे। निर्भय और निर्द्वन्द रहिए ताकि रोग शोक आपको देखते ही उल्टे पांव लौट जाएं। कहावत सच है भूत वहीं जाता है जहां उसे बुलाया जाता है। इसी तरह रोग वहां जाता जहां उसका आदर होता है। जो रोग की आवभगत नही करता, यहां तक कि रोग आने का विचार भी मन में नही आने देता उसके अंदर तिरस्कृत अतिथि की तरह रोग वहां जाने की इच्छा नहीं करता। दुर्गुणों और कुविचारो के लिए अपने मन की कपाट मत खोलिए।

क्योंकि रोग और शोक इसी का नाम है। सुविचार ही स्वास्थ्य है, प्रसन्नता ही शक्ति है। और स्त्री तो पराशक्ति है- उसके आगे हर पुरुष को नतमस्तक रहना चाहिए। उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करते हुए उसके साथ सम्बन्ध बनाने चाहिए। अपनी इच्छाओं से अधिक जब स्त्री की इच्छा पर ध्यान देते हुए सम्बन्ध स्थापित किया जाता है, तो चरम सुख की प्राप्ति दोनों को ही होती है।

पुरुषों को अपनी उत्तेजना पर मन का अंकुश जरुरी होता है। स्त्रियों में इतनी आसानी से उत्तेजना तो आती भी नहीं जितना आसानी से पुरुषों में आ जाती है। 95 प्रतिशत महिलाओं में उत्तेजना आने के पहले ही पुरुष अपनी गलत रवैए से पस्त हो जाते हैं और वही महिलाओं को रोग ग्रस्त भी करते हैं।

अन्तर्वासना - बिमारियों का उत्थान या पतन

पुरुष प्राइवेट पार्ट के अग्र भाग में थोड़ी सी कोमलता होती है वो भी मुस्लिम समुदाय को छोड़कर। लेकिन हर समुदाय कि महिलाओं का प्राइवेट पार्ट – फूल की तरह कोमल होता है। फूल को रगड़कर, नोचकर, उसके शरीर पर निशान बनाकर या बाहर भीतर घिसकर किया गया वासना पूर्ति प्रेम युक्त सेक्स नही रेप है। स्त्री के शरीर का सम्पूर्ण भाग कोमल होता है। प्राइवेट पार्ट की नसें बहुत बारीक संवेदनशील होती है। वो अगर सही तरह से तैयार हो गयी तो चरम सुख देती है और कई सारी बिमारियों को करीब भी नही आने देती।

किन्तु दुर्भाग्य है स्त्री पार्टनर को बिना तैयार किए ही पुरुष अपनी अन्तर्वासना बुझाने के लिए ब्याकुल हो आग धधकने से पहले ही पानी डाल किनारे हो जाता है। स्त्री के उस आग को धधकाना इतना आसान नहीं, जितना 95 प्रतिशत पुरुष अपनी नासमझी से एकतरफा अपनी सेक्स के भ्रम में हवस की आग को बुझा लेता है। आग को प्रज्वलित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा स्त्री के अंगों पर अपने होठ और मुलायम हाथों का प्रयोग करना होता है। स्तन को कभी भी अपनी हाथों से निचोड़े न, स्तन पर सिर्फ अपने होठों और मूख का उपयोग करें।

निचोड़ने से स्तन ढीला-ढाला हो जाता है, तत्काल तो जोश में होश खोई स्त्री को ज्यादा दर्द नही महसूस होता किन्तु जब शरीर शिथिल होता है तो घुटन भरी दर्द स्तन में महसूस होने लगती है। निचोड़ने से स्तन में गांठ होने की भी सम्भावना भी बढ़ जाती है। साथ ही ढीली होकर बदसूरत हो जाती है। लटकता स्तन स्त्री की सुन्दरता को खराब कर देती है। स्त्री इसका विरोध न करें तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी स्तन की सुन्दरता को ही खत्म कर दें। हाथों से मसलने के जगह होठों और मुख का उपयोग स्तन पर करने से स्त्री की अंगों में उत्तेजना आसानी से आने लगती है।

जब उत्तेजित होने लगे नीचे प्राइवेट पार्ट रस से भींग जाये तब प्यार से चूमने सहलाने की प्रक्रिया शुरू करें। अपने मन को नियंत्रित रखें। जब आग पुरी तरह प्रज्वलित हो जाती है। तब खुद ही स्त्री की ब्याकुलता दिखने लगती है। आपके प्राइवेट पार्ट को अपने अंदर लेने के लिए जब बहुत ज्यादा ब्याकुल हो जाए तब अपने मन को थोड़ा नियंत्रित कर धीरे-धीरे चरम सुख का अनुभव होने दें, उत्तेजित बिल्कुल भी न हों। फिर सेक्स ज्यादा देर तक सुखदायी तृप्ति कर करने में दोनों ही पार्टनर सक्षम होंगे। एक साथ, एक दूसरे के एहसास से फ्लाव होगा वो आनंददायी होगा। दोनों के लिए फायदेमंद भी होगा।

अन्तर्वासना - बिमारियों का उत्थान या पतन

ध्यान रखें झटके से जोश में होश खोकर कभी भी सेक्स न करें। संवेदनशील पार्ट में खरोच आ सकता है, फिर धीरे धीरे कुछ परेशानियां होने लगती है और कोई न कोई बिमारी का जन्म हो जाता है। झटके से किया जाने वाला सेक्स वास्तव में सेक्स नही बल प्रदर्शन कहा जाता है। बल प्रदर्शन सेक्स की श्रेणी में नहीं आता बल्कि रेप कहा जा सकता है। धैर्य के साथ अच्छे तरीके से सम्पूर्ण अंगों को प्रफुल्लित कर किया जाने वाला सेक्स अंदर ठहराव का मौका भी देता है। ज्यादा समय तक तृप्ति कर होता है और दोनों के लिए अच्छा परिणाम भी देता है।

पुरुष को पुरुषत्व मिलता है और महिला को तमाम बिमारियों से बचाव। अगर वास्तविक सेक्स का चरम आनंद लेना है, तो कम से कम 45 मिनट बहुत ही प्यार से अपनी स्त्री पार्टनर के साथ ओरल सेक्स गुदा मैथुन वैसे अपने को नियंत्रित रखकर किजिये की फ्लाव न हो, स्त्री पार्टनर को तैयार करने में कम से कम 45 मिनट का समय लगता है, घंटो भी लग सकता है। फिर देखिए वो सेक्स की आग वैसे प्रज्वलित होगी जैसा आपने अपनी हवस शान्त करने में कभी देखा भी नहीं है।

वास्तव में जब तक स्त्री पूरी तरह जागृत नही होती, अपनी इच्छा से पुरुष पार्टनर के अंगों को अपने अंदर लेने के लिए बहुत ब्याकुल नही होती। वो तो बस अपनी पुरुष साथी कि इच्छा का सम्मान करते पुरुष अंग को अपने भीतर ले लेती है। जो उन्हें वो सुख भी नही दे पाता जिसकी चाह होती है। केवल पेनिट्रेशन को सेक्स समझने वाले पुरुष बलात्कारी हैं। अपने ही साथी के साथ बल पूर्वक हरण मतलब सेक्स करना बलात्कार ही है।

बिमारियों का उत्थान या पतन

अन्तर्वासना - बिमारियों का उत्थान या पतन

आज सर्वे के मुताबिक 70 फीसदी महिला आँर्गेज्म़ से अनजान हैं, इसका कारण सेक्स की अज्ञानता है। इस कथन को अपने अहंकार पर चोट न समझें, बल्कि अपने आपको बेहतर बनाने का प्रयास करें। महिला पराशक्ति है उसके आगे पुरुष कुछ भी नहीं, किन्तु महिला के अंदर अहंकार का त्याग है। महिला जल भरी गगरी है जो कभी छलकती नही। सात समुंदर के तरह गहरी है जिसका थाह नही।

पुरुष तो अधजल गगरी है जो छलकते जाता है और उस समुंदर के आगे एक छोटे तालाब का जल जिसका थाह महिला क्षणभर में लगा लेती है। मजबूर होकर अपना फ्लाव कर लेती है जबकि उसकी इच्छा पूर्ति नही हो पाती। अपने को हारकर पुरुष को जिताने की महानता भले ही स्त्री पार्टनर करे तृप्त नही होतीं।

सेक्स का सही तरीका

अपनी स्त्री पार्टनर का समाज के सामने भले ही पैर न छूएं किन्तु जब सेक्स की इच्छा हो तब जरुर छूएं, ऐसा करने से स्त्री पार्टनर आपकी इच्छा को भांपकर अपने को तैयार होने में आपकी मदद करेगी। उसके प्रति श्रद्धा भाव रखें। इस बात का ध्यान रखें उसके पार्ट को दर्द न दें चरम सुख का आनंद दें। उसकी अग्नि प्रज्वलित होने से पहले भले ही कितना भी दम पुरुष दिखा लेता है, पर स्त्री सेक्स से अछूती ही रह जाती है। स्त्री के शरीर का वो पार्ट बहुत धीरे-धीरे तैयार होता है और बहुत देर से वो द्वार खुलता है। यह पुरुषों को समझने के लिए मन में स्थिरता रखनी पडती है कि अनुमति मिले।

बिना मैडिटेशन यह सम्भव नही। अगर गहराई चाहिए चरम सुख तो ध्यान जरुरी है। ठहराव, स्थिरता, होश, धीरज, प्रेम, श्रद्धा ये सारे शब्द केवल ध्यान करने से ही जीवन में आता है। स्त्री को अपनी हवस शान्ति के आड़ में दर्द न दें, बिमारियों से ग्रसित न करें। सेक्स एजुकेशन को समझें फिर चरम सुखदायी जीवन जीने का आनंद आयेगा। बिमारी पैदा खुद ही किया जाता है और समझ है तो बिमारियों का निदान खुद अपने हाथ में है।

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1 thought on “अन्तर्वासना – बिमारियों का उत्थान या पतन”

  1. बहुत ही प्यारा लेखनी है आपका आपकी श्रेया सिंह गाजियाबाद

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