हेल्थ एजुकेशन- बच्चेदानी में गांठ का घरेलू उपचार

Amit Srivastav

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हेल्थ एजुकेशन- बच्चेदानी में गांठ का घरेलू उपचार

समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो बढ़ सकता है बच्चेदानी में गांठ सहित Uterus यूट्स यानी गर्भाश्य, बच्चेदानी कैंसर का खतरा। गर्भाश्य-बच्चेदानी से जुड़ी ज्यादातर महिलाओं कि समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, इस लेख में एकत्रित जानकारी- समस्या और निदान को सार्वजनिक कर रहा हूं। मनुष्य अपने जीवन में कई तरह की बीमारियों से जूझता हुआ जीवन व्यतीत कर रहा है। इसमें कुछ बीमारियों के बारे में डाक्टर, परिवार, परिचित या मित्रों से चर्चा कर निदान कर लेता है, तो कुछ ऐसी भी बीमारी होती है जिस पर चर्चा करने में शर्म आती है।

जैसे अंदरूनी, sexual dysfunction or mental illness यौन रोग या मानसिक रोग। गुप्त यौन रोग से संबंधित ज्यादातर महिलाओं में हो रही बच्चेदानी में इन्फेक्शन सूजन, गांठ, दर्द और गर्भ न धारण कर पाने की समस्या विषय पर बडे-बडे यौन रोग विशेषज्ञों से गहन मंथन के बाद अपने अनुभव से निकाले गये निष्कर्ष को हेल्थ एजुकेशन लेखनी में शामिल कर रहा हूं।

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यौन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य

Sex health and mental health यौन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सम्बंधित समस्या ऐसी समस्या हो गई है, जिस पर न कोई खुलकर बोल पाता है, न कोई खुलकर किसी से पूछ पाता है। आज के समय में गूगल ऐसा प्लेटफार्म है, जहां हर किसी को अपनी समस्याओं का समाधान पाना आसान हो गया है। अन्य देशों की अपेक्षा भारत में पहले से ही सेक्स और मानसिक बीमारियों को लेकर लोगों में जागरूकता कम है।

येनकेन प्रकारेण कैसे भी जीवन व्यतीत हो ठीक ही है। हर व्यक्ति को अगर सेक्स और मेंटल हेल्थ कि सही जानकारी रहती तो ज्यादातर बीमारियों से खुद को बचाया जा सकता। चीता और चिंता में ज्यादा का फासला नही होता चिंता बहुत जल्द चीता के तरफ़ ले जाती है इसलिए चिंता न करें समय रहते निदान करें।

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मेरे एक लेखनी का शिर्षक है… सेक्स गंभीर बीमारियों का इलाज़। अगर सही तरीके से सेक्स सम्बन्ध स्थापित किया जा रहा है तो, गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज़ है, वर्ना गंभीर से गंभीर बीमारियों को आमंत्रित भी कर देता है। बच्चेदानी गर्भाशय में उत्पन्न समस्या का एक हिस्सा गलत तरीके से किया गया सेक्स सम्बन्ध भी हो सकता है। अगर सेक्स के दौरान पार्टनर के प्राइवेट पार्ट कि अच्छी तरह सफाई न हो तो निश्चित रूप से एक दूसरे को इनफेक्शन होगा ही जो धीरे-धीरे गंभीर बीमारी का रुप ले लेगा।

नियमित प्राइवेट पार्ट कि सफाई पर कितना ध्यान लोगों का है। स्त्रियों और पुरुषों में उत्पन्न समस्या से अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति इन विषयों पर अपनी जानकारी किसी माध्यम से सार्वजनिक करता है, तो बुद्धजीवियों द्वारा मंथन किया जाता है, तो वहीं कुछ लोगों को पढ़ने से पहले ही कहते सुना गया है, मुझे तो पता ही है।

मतलब आधा ज्ञान फिर भी अभिमान। ये तो वही बात हुई जिस कारण आज तक कबूतर अपना खुद का घोषणा नहीं बना पाता… पुराने समय की बात है जब इतने मकान नही हुआ करते थे, मादा कबूतर को अंडा जंगल-झाड़ में देना पड़ता था, कोई जानवर उसके अंडा या बच्चा खा जाया करता था। कबूतर चिड़ियों के पास गया और अपनी समस्या बताई। चिडियों ने कहा चलो तुम्हें घोषणा बनाने के लिए सिखा देते हैं। कुछ चिड़ियें कबूतरी के लिए घोषणा बनाने आई, अभी थोड़ा बनाना शुरू ही कि थी, तभी कबूतर ने कहा ऐसा बनाना तो मुझे आता ही है।

चिड़ियां चली गईं कबूतर घोषणा बनाने के जगह और बिगाड़ दिया। फिर गया और कहा मेरे पास समय का अभाव है, जाकर घोषणा बना दो फिर चिडियों का एक झूंड घोषणा बनाने गया। इधर-उधर घूमकर कबूतर आया और कहा अब तो मै ही बना दूंगा। फिर चिड़ियों का झुंड चला गया। कबूतर घोषणा बनाने का लाख प्रयास किया लेकिन बना नही पाया। आज भी कबूतरों को घोषणा बनाने नही आता। किसी न किसी के बनाए गए घरों में ही कबूतरों का बसेरा रहता है। आधा ज्ञान फिर भी अभिमान वाली कहावत चरितार्थ करने वाले लोग भरे पड़े हैं।

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किसी मुद्दे पर लिखना या बताना हम लेखकों का दायित्व है। जिन विषयों पर हम लेखकों द्वारा लेखनी प्रस्तुत किया जाता है, पहले उन विषयों पर गहन अध्ययन मंथन किया जाता है। इस लेख में अपने अनुभव के साथ स्त्री रोग विशेषज्ञों के सलाह से निकले मंथन को सार्वजनिक कर रहा हूं। आज के समय में व्यस्तता पूर्ण जीवन, काम का बोझ और किसी चीज़ को जल्दी पाने की लालसा दिमागी और शारीरिक बीमारियों को जन्म दे रही हैं। स्त्री प्रकृत्ति की जननी है और स्त्रियों के शरीर में बच्चेदानी, शरीर का एक अहम भाग है।

स्वस्थ बच्चेदानी से ही स्त्री को मां बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। बच्चेदानी में समस्या कब कहां से शुरू होती है, घरेलू या डाक्टरी उपचार क्या है ? गूगल पर रोज करोड़ों लोगों की सर्च को ध्यान में रखते आज सेक्स एजुकेशन लेखनी में बता रहे हैं। लोगों द्वारा गूगल सर्च का ग्राफ नीचे फुटेज में देख सकते हैं।

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प्राइवेट पार्ट में खुजली – जलन – होने का कारण और घरेलू उपचार

पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों के प्राइवेट पार्ट में ज्यादा समस्या होती है। इन्हीं समस्याओं में से एक है खुजली व जलन। प्राइवेट पार्ट के बाहरी या भीतरी भाग में खुजलाने या खरोचने की इच्छा होती है। उसे खुजली कहते हैं, खुजलाने के बाद जलन हो सकती है। यह एक आम समस्या है, इस विषय पर कोई स्त्री खुलकर बात नहीं करती। इस समस्या का कारण है… प्राइवेट पार्ट कि सुरक्षा व सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाना। प्राइवेट पार्ट में कास्टिंग युक्त साबुन केमिकल का उपयोग करना। वीस्ट इंफेक्शन से पीड़ित या किसी चीज़ से एलर्जी होना।

प्राइवेट पार्ट पर स्प्रे का प्रयोग करना। अहम कारण सेक्स के समय एक दूसरे के प्राइवेट पार्ट पर कचड़े का होना, इससे स्त्रियों में ही नहीं पुरुषों में भी इन्फेक्शन होने की संभावना रहती है। जिस प्रकार शरीर के अन्य भागों की साफ-सफाई किया जाता है। उसी प्रकार नियमित रूप से प्राइवेट पार्ट को साफ पानी से धुलाई करने पर प्राइवेट पार्ट में कचड़ा नही रहता और इन्फेक्शन भी नही होता। महिलाओं को बाथरूम यूज करते समय भी प्राइवेट पार्ट को साफ पानी से धुलाई करनी चाहिए।

नियमित धुलाई साफ-सफाई के बाद भी अंदर बाहर खुजली जलन की समस्या से जूझ रही हैं तो निश्चित रूप से किसी कारण इन्फेक्शन बढ़ गया है। समय से ध्यान नहीं दिया गया तो समस्या आगे बढ़ने का चान्स रहेगा। इस पर विशेषज्ञ डाक्टर से तुरंत सलाह ले उपचार कराएं। लापरवाही के कारण सफेद पानी का आना शुरू होकर धीरे-धीरे समस्या बच्चेदानी तक जा सकती है। आंकड़ों के मुताबिक मुस्लिम महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में हिन्दू महिलाओं कि अपेक्षा इन्फेक्शन कम होता है।

मुस्लिम महिलाएं बाथरूम यूज के साथ पानी का उपयोग करती हैं और बहुत कम हिन्दू महिलाएं बाथरूम के समय पानी का उपयोग करती हैं। जो महिलाएं बाथरूम में पानी का उपयोग करती हैं, वे ज्यादातर सुरक्षित रहती हैं। उनके सम्पर्क में साफ-सफाई के साथ आने वाला पार्टनर भी सुरक्षित रहता है।

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बच्चेदानी – गर्भाशय में गांठ कैसे होती है Uterus –

बच्चेदानी में गांठ एक आम समस्या हो गई है। यह समस्या आजकल महिलाओं में ज्यादा पाईं जा रही है। गर्भाशय में गांठ स्त्री अंग के अहम भाग का एक हिस्सा है। शरीर के अंदर किसी भी अंग मे उत्पन्न होती है, जो बच्चेदानी के पास स्थित होती है। यह गांठ बहुत सारे कारणों से हो सकती है। जिसमें हाँर्मोनल बदलाव, संक्रमण, बढ़ती उम्र, प्रेग्नेंसी, शरीर का हल्का पन, मोटापा, गलत तरीके से सम्बन्ध से बच्चेदानी में समस्या हो सकती है।

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बच्चेदानी – गर्भाशय में गांठ का घरेलू उपचार

प्रकृति ने हमें सम्पूर्ण बीमारियों के निदान के लिए तरह-तरह की जड़ी-बूटियां इस धरातल पर दी है। बस पहचान और जानकारी कि जरुरत है। हमारे पूर्वज ऋषि मुनियों को सम्पूर्ण जड़ी-बूटियों की जानकारी थी। आज आधुनिक युग में लोग अंग्रेजी दवाइयों पर आश्रित होते जा रहे हैं। जो एक तरफ़ तत्काल फायदा तो दूसरी तरफ़ नुकसान भी कर रहा है। हमारा आयुर्वेद पूरी तरह से प्रकृति द्वारा प्रदान जड़ी-बूटियों पर आधारित है, आयुर्वेदिक दवाइयों का दुष्प्रभाव भी ना के बराबर है।

दोनों के मिश्रण से उत्पन्न होम्योपैथी चिकित्सा है थोड़ा देर ही सही इस चिकित्सा से किसी भी बीमारी का स्थाई निदान किया जा सकता है। घरेलू उपाय में पैर के बल बैठने से परहेज करें। सुबह-शाम गाय के दूध में 50 से 100 ग्राम मात्रा में कच्ची हल्दी पकाकर बीना छाने नियमित रूप से पियें एक माह में फायदा दिखने लगेगा, कच्ची हल्दी ज्यादा फायदेमंद रहती है। अगर दूध उपलब्ध न हो सके तो 100 से 200 ग्राम कच्ची हल्दी दो से चार गिलास पानी में उबालें आधा हो जाए तो उस पानी को छानकर दो टाइम सुबह शाम आधा-आधा पियें महिने दिन बाद कुछ राहत दिखाई देना शुरू होगा।

लगातार अपनी समस्या अनुसार तीन महीने से अधिक उपयोग करें। सोंठ पंसारी या किराने की दूकान पर मिल जाती है.. सोंठ और नीम के पत्तों को उबालकर आधा किजिये और चाय के जगह पियें गर्भाश्य के सूजन को कम करता है।

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बच्चेदानी में गांठ का आयुर्वेदिक इलाज

निर्गुण्डी का पौधा औषधि गुणों से भरपूर

निर्गुण्डी नीले, सफेद, काले रंग के फूलों वाली होती है। यह ज्यादातर जंगल झाड़ी नदी नाले किसी भी जगहों पर झाड़ी नुमा देखने को मिल जाती है। यह बात, कफ नाशक औषधि है। इसका उपयोग चोट-मोच, जोड़ों का दर्द, पेट सम्बन्धित समस्या, मासिक धर्म को नियमित करने में, महिलाओं के प्रजनन क्षमता के लिए, घाव भरने के लिए, यौन स्वास्थ्य बढ़ाने में, यौन भावनाओं को कम करने में, स्तनपान के लिए, नसों से जुड़ी समस्या में, हाथी पाव, त्वचा संबंधी समस्याओं में, अर्थाराइटि, मुंह में छाले, सूखी खांसी, सिर दर्द, दांत दर्द, बुखार, साइटिका सहित तमाम बीमारियों में किया जाता है।

यह दर्द और सूजन को भी कम करता है। यहां बच्चेदानी की सूजन, गांठ, दर्द में उपयोग कैसे करना है, इसको जान लें। नियमित रूप से 10 से 15 निर्गुण्डी के पत्ते तोड़कर दो दाना काली मिर्च चुटकी भर अजवाइन एक गिलास पानी में उबालें आधा हो जाए तब छानकर रख लें सुबह शाम हल्का गुनगुना पियें। निर्गुण्डी का तेल सम्भव हो तो आयुर्वेद की दुकान से लेकर कमर व ओदर पर लेप करें फायदा होगा। निर्गुण्डी से बहुत सारे फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हो सकता है। नीचे फायदा और नुकसान दोनों संक्षिप्त रूप में बता रहे हैं।

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गठिया में एक टेबल स्पून निर्गुण्डी के पत्तों का पाउडर खा सकते हैं। गैस और दर्द दूर करने के लिए पत्तियों का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। फोड़े-फुंसी पर पत्तियों से लेप बनाकर लगा सकते हैं। पेशाब में जलन गुर्दे से पथरी के लिए सप्ताह में दो बार नारियल पानी में दो चम्मच निर्गुण्डी का अर्क मिलाकर पी सकते हैं। सर्दी खांसी सिरदर्द बुखार में पत्तियों को पानी में उबालकर भाप ले सकते हैं। निर्गुण्डी की पत्तियों का रस युवाओं की यौन इच्छा को कम कर सकता है। यह हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के प्रभाव को कम कर सकता है।

गर्भावस्था में इसका सेवन न करें। कम मात्रा में सेवन से स्तन में दूध बढ़ता है तो अधिक मात्रा में सेवन से दूध कम हो सकता है। निर्गुण्डी से अपनी बच्चेदानी गर्भाशय का इलाज़ बताएं अनुसार ध्यान देकर करें। निर्गुण्डी अपने समृद्ध विटामिन सी सामग्री और प्राकृतिक एंटीबायोटिक विशेषता के कारण शरीर के उच्च तापमान को कम करने व संक्रमण से लड़ने प्रतिरक्षा को बढ़ावा देती है।

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बच्चेदानी – गर्भाशय में इन्फेक्शन के लक्षण

ल्यूकोरिया बढ़ते क्रम में स्वाधिष्ठान और मूलाधान चक्र को प्रभावित करता है। बाथरूम करते समय परेशानी का होना। पेट के नीचले हिस्से उदर में दर्द होना। यौन संबंध बनाने में दर्द होना। पीरियड्स के समय असहनीय दर्द होना। हफ्ते भर तक पीरियड्स का रहना, असमय ज्यादा पीरियड्स का आना, पीरियड्स बदबूदार होना, वैजाइनल डिस्चार्ज, मेनोपाँज से पहले औरतों में मासिक धर्म के बीच योनि से रक्तस्राव, पेट के नीचे दर्द या ढोंणि में ऐठन, ऐसा लक्षण बच्चेदानी कैंसर का भी हो सकता है।

इन्फेक्शन के शुरुआती दौर में सफेद पानी का असमय निकलना। ल्यूकोरिया महिला को ही नहीं पुरुषों को भी होता है। यह शारीरिक सम्बन्ध में छुआछूत से भी फैलता है। असमय चिपचिपा सफेद या रंगीन पानी सा प्राइवेट पार्ट से निकलता है। बार-बार मूत्र त्याग, प्राइवेट पार्ट में दर्द, निकलने वाली कलर्स और दुर्गन्ध भी ल्यूकोरिया होने का लक्षण है। धीरे-धीरे इन्फेक्शन बढ़ता है और गर्भाश्य तक जाकर गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। जब महिला बच्चें को जन्म देती है तब बच्चेदानी खाली होकर सिकुड़ती है।

ऐसी स्थिति में कामकाजी महिलाओं को छोड़कर घर में आराम से काम करने वाली महिला झटके से भारी वजनदार समान उठाती है। तब भी बच्चेदानी इधर-उधर खिसक अपना स्थान छोड़ देती है और धीरे-धीरे नीचें की तरफ आने लगती है। ऐसी स्थिति में जब महिला पैर के बल बैठती है। तब उसे एहसास होता है, ओदर से प्राइवेट पार्ट के रास्ते कुछ नीचे योनी के तरफ़ आने की जब चौथे स्टेज पर गर्भाश्य पहुंच जाता है, तब बाहर निकलने तक का आभास होता है।

अगर पहले दूसरे स्टेज पर ध्यान नहीं दिया गया तो गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। गलत तरीके से झटके के साथ किया गया सेक्स भी इस समस्या को जन्म देती है। वहीं सही तरीके से किया जाने वाला सेक्स बच्चेदानी में उत्पन्न समस्या का इलाज़ भी करती है। पार्टनर अगर सेक्स एजुकेशन का जानकार है तो, गंभीर बीमारियों के इलाज़ के लिए बेहतर डाक्टर साबित हो सकता है।

बच्चेदानी में गांठ का एलोपैथिक उपचार

एलोपैथिक में दवा बहुत हैं कोई स्थाई निदान नही होता दवा चलते-चलते चौथे स्टेज पर आ जाने पर आप्रेशन की सलाह डाक्टर दे सकता है। एलोपैथ में आप्रेशन ही बच्चेदानी में गांठ को खत्म करने का अंतिम उपचार है।

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बच्चेदानी – गर्भाशय में सूजन की होम्योपैथी दवा

अंग्रेजी दवाईयों का कभी न सेवन किया न राय दे सकता हूँ। अंग्रेजी दवाईयां तत्काल तो लाभ दिखा देती हैं फिर अन्य बीमारियों को जन्म भी देती हैं। अंग्रेजी दवा चलाते-चलाते स्थिति बिगड़ने लगती है, तब ऐसे बीमारियों में आप्रेशन किया जाता है। आयुर्वेद पद्धति का उपयोग करें या होम्योपैथ में एक बहुत ही कारगर दवा लिक्विड में आती है- ठूजा बच्चेदानी गर्भाश्य में इन्फेक्शन गांठ को खत्म कर सकती है, अपनी समस्या अनुसार ठूजा 200 से 1000 एमजी सुबह शाम दो-तीन बूंद उपयोग करें। होम्योपैथ में और भी दवाईयां उपलब्ध है, डाक्टर से परामर्श ले उपयोग किया जा सकता है।

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बच्चेदानी में गांठ दूर करने के लिए योगा

बाबा रामदेव के अनुसार योगा में कपालभाति-इस प्राणायाम को 10-15 मिनट से शुरू कर आधा घंटा तक करें। अगर शुरुआती दौर है तो 1 माह में गांठ खत्म हो जायेगी। अनुलोम-विलोम – कपालभाति से आधा समय अनुलोम-विलोम करने से शरीर में एनर्जी का फ्लो बढ़ता है। इस व्यायाम से गर्भाशय का गांठ पिघलने में मदद मिलती है।

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बच्चेदानी – गर्भाशय में सूजन हो तो क्या परहेज करना चाहिए

जिन महिलाओं को गर्भाशय बच्चेदानी में सूजन इन्फेक्शन हो, उन्हे चटपटे मसालेदार तले हुए चीजों का परहेज करना चाहिए। पैरों के बल जमीन पर नही बैठना चाहिए। पैरों को कुछ देर ऊपर उठाकर बैठना चाहिए। यौन संबंध बनाने में सावधानी बरतें। अज्ञानता का शिकार पहले ही हुआ जा चुका है। अब ज्ञान अर्जित कर इस स्थिति में सम्बन्ध बनाये। आधा ज्ञान फिर भी अभिमान से बचें।

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बच्चेदानी – गर्भाशय किस साइड रहता है Left ya Right

बच्चेदानी जिसे गर्भाशय भी कहा जाता है दायें या बायें नही बल्कि ढोंणि के बीच महिला के नीचले पेट में योनी, मूत्राशय और मलाशय के बीच में स्थित होता है। इन्हे जोड़ने वाली नली को गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं। ग्रीवा का मुंह हल्का सा खुला होता है, जो गर्भावस्था के शुरुआती समय में गाढ़े चिपचिपे म्यूकस से बंद हो जाता है। अंडाशय ढोंणि में स्थित दो महिला प्रजनन अंग फैलोपियन ट्यूब होता है। गर्भाशय एक खोखला नाशपाती के आकार का स्त्री शरीर का अहम अंग होता है।

इसमें तीन मुख्य भाग होता है। फंड्स – गर्भाशय का शीर्ष। महिलाओं के गर्भाशय की गहराई का औसत अनुमानित 7.6 सेंटीमीटर – 3 इंच होती है। गूगल पर लाखों करोड़ों लोगों की किवर्ड को ध्यान में रखते हुए जानकारी प्रदान किया।

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