साकार रूप से स्त्री प्रकृति की जननी होती है। स्त्री को पीरियड्स होने का तात्पर्य अण्डा उर्वरित हो और वह बढ़ सके। शिशु के जन्म के लिए उसके गर्भ स्थल में विकसित हो। प्रकृति की जननी स्त्री का डिम्ब प्रकृति के पूरक पुरुष के शुक्राणु से मिलन न होने पर वह स्राव बनकर योनी मार्ग से मासिक धर्म के रूप में बाहर निकल जाता है। लिंग पुराण में इसका वर्णन बिस्तार से मिलता है। ईषत्कृष्ण विदग्धं च वायुर्योनिमुखं नयेत। अर्थात स्त्री के शरीर से वह आर्तव एक मास पर्यन्त इकट्ठा होता है जिसका रंग भूरा काला पड़ जाता है।
वह धमनियों द्वारा स्त्री की योनी मार्ग से बाहर निकलता है। इसे ही पीरियड्स, एमसी, मासिक धर्म व रजस्वला कहते हैं। मासिक धर्म समाप्त होने पर स्त्री को शुद्ध भाव से स्नान करने के साथ सम्पूर्ण श्रंगार करके जगत-जननी पार्वती व देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उसके बाद प्रकृति के पूरक अपने पति का दर्शन करना चाहिए। अगर पति मौजूद न हो तो देवी पूजन के बाद सूर्य दर्शन करना चाहिए। इससे पति की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
मासिक धर्म के दौरान स्त्री के शरीर में उर्जा का संचार इतना अधिक होता है कि इस उर्जा को भगवान भी सहन नहीं कर पाते। मासिक धर्म के दौरान स्त्री अगर तुलसी के पौधे में जल डाल दे तो देवी तुलसी का पौधा तक सूख जाता है। मासिक धर्म के दौरान पूजा पाठ या मंदिर जाना वर्जित इसी लिए है कि रजस्वला स्त्री के शरीर का ताप मनुष्य तो मनुष्य ईश्वर भी सहन नहीं कर सकता। हमारे धर्म ग्रंथों के मुताबिक रजस्वला स्त्री को अपवित्र माना गया है, इसलिए कि प्रकृति विस्तार के लिए निर्मित एग को प्रकृति की जननी प्रकृति के पूरक से कंसीव नही कराईं जिस वजह से वो एग फट कर मासिक धर्म के रूप में बाहर निकल गया।
इस स्थिति में कोई भी पवित्रता से जूडा कार्य नही करने की बात कही गई है। रजस्वला स्त्री को ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आमतौर पर मासिक धर्म निवृत के पांचवे दिन मंदिर में शुद्ध मन से प्रवेश की अनुमति दी गई है। रजोनिवृत्ति स्नान के बाद ही कोई धर्म कार्य करना चाहिए। स्त्री के लिए पति परमेश्वर का स्वरूप होता है जब ईश्वर की पूजा वर्जित है तो पति का स्पर्श भी वर्जित माना गया है। पहले के समय में ऐसी रीति-रिवाज देखने को मिलता था लेकिन आज के समय में ज्यादातर पुरानी परम्पराओं का त्याग किया जानें लगा है और आधुनिकता में धर्म शास्त्रों के उल्टा कार्य लोगों की सौख बनती जा रही है।
वर्तमान परिवेश को ध्यान में रखते हुए तमाम धर्म ग्रंथों सहित विशेषज्ञ डाक्टरों से प्राप्त जानकारी, वर्तमान पीढ़ी की सौख पीरियड्स वाली स्त्री के साथ शारीरिक संबंध बनाने से होने वाले फायदे और नुकसान के बारे में जानकारी दे रहे हैं। यह उन सभी के लिए उपयोगी साबित होगा जो लोग पीरियड्स वाली स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाने की सोच रहे हैं या बनाते हैं। वैसे तो रेड लाइट एरिया से मिली जानकारी के अनुसार बता दें जो महिला मासिक चक्र से गुजर रही होती है उन महिलाओं का डिमांड सामान्य महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा रहता है।
ऐसा आखिर क्यूँ ? इस पर भी हमने जानकारी जुटाई है थोड़ी जानकारी इस रेड लाइट एरिया में रजस्वला स्त्री की डिमांड पर अंत में दूंगा पहले आते हैं मुख्य मुद्दे पर।
Safe sex methods in hindi
पीरियड्स में सेक्स करने से क्या होता है ?
धर्म पुराणों की माने तो- पीरियड्स, एमसी, मासिक धर्म, आयुर्वेद की भाषा में रजस्वला स्त्री के साथ सेक्स सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। यहां तक की सात दिन तक मासिक धर्म का चलना नार्मल माना गया है। सिर्फ तब जब पीरियड फ्लो नार्मल हो। मासिक आने के पहले दूसरे दिन हैवी बाकी पांच दिनों में यह धीरे-धीरे नार्मल होने लगता है। सात दिनों तक चलने वाला मासिक नार्मल कहा जाता है। पीरियड्स में सेक्स करने से स्त्री को उस दौरान गर्भ नही ठहरता।
गर्भधारण की इच्छा नहीं तो- पीरियड्स के पांच दिन पहले से, पीरियड्स सहित शुरू होने के दिन से दस दिनों तक किया जाने वाला सेक्स स्त्री के लिए सेफ सेक्स डेहोता है। इस दौरान स्त्री जब जैसे चाहें वैसे सेक्स कर सकती है। पीरियड्स आने के पांच दिन पहले से किया जाने वाला तृप्ति पूर्ण सेक्स से दर्द के साथ आ रही पीरियड्स से मुक्ति मिलती है।
रविवार और मंगलवार विशेष परिस्थितियों में “बृहस्पति” यह खर दिन होता है। इन्हीं दिनों में मासिक धर्म वाली स्त्री को बाल धोना चाहिए। यदि पीरियड्स तीन दिन चलता है तो स्त्री चौथे या पांचवें दिन रविवार, मंगलवार या विशेष परिस्थिति में बृहस्पति को बाल धोकर निवृत हों, यदि 6 या 7 दिन का पीरियड्स है तो आठवें दिन बाल धोकर निवृत हों। पीरियड्स के दौरान बाल नही धोना चाहिए। जो महिलाएं पीरियड्स के पहले दूसरे तीसरे दिन बाल धोती हैं तमाम तरह की शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से ग्रसित हो जाती हैं। ज्योतिष के अनुसार पीरियड्स खत्म होने के बाद पांचवें या आठवें दिन बाल धोनी चाहिए।
रजस्वला परिचर्या को क्या नहीं करना चाहिए ?
पूजा-पाठ, घरेलू कार्य जैसे भोजन पकाना, सिलाई-कटाई बुनाई आदि कार्य नही करना चाहिए। धर्मशास्त्रों में तो किसी का शरीर तक छूने की मनाही है। इस दौरान स्त्रीयों को मन में अच्छे विचार रखना चाहिए और तनाव चिंता से दूर रहना चाहिए। धर्मशास्त्रों का मानें तो इस दौरान सेक्स नहीं करना चाहिए और अपनी इच्छा शक्ति प्रबल है तो इस दौरान आन्नद प्राप्ति के लिए सेफ सेक्स किया जा सकता है। दो युगल जोड़ियों की इच्छा पर निर्भर है कि धर्मशास्त्रों की मान सेक्स से परहेज करते हैं या सेफ आनन्द लेने देने के लिए सुरक्षित सेक्स।
ओव्यूलेशन डे मे अपनी इच्छानुसार होगा गर्भधारण ऐसे करें- सेक्स:
अगर प्रेगनेंट होने की इच्छा है तो ओव्यूलेशन डे मे कमर के नीचे तकिया रख किजिये सेक्स साथ ही तुरंत अलग होने का मत किजिये प्रयास, कुछ समय फ्लाव के बाद भी उसी स्थिति में बनी रहिए 99.5 प्रतिशत गर्भधारण की संभावना रहेगी। सुयोग्य पुत्र या पुत्री प्राप्ति की इच्छा है तो ज्योतिष शास्त्र का ध्यान रखते हुए शुभ मुहूर्त में सम्बन्ध स्थापित किजिए। स्त्री में xx गुणसूत्र पाया जाता है जो पुरुष के x से मिलकर पुत्री और y से मिलकर पुत्र उत्पन्न होता है। सामान्य परीक्षण पुरुष स्त्री अपनी नाक की सांसों से कर सकते हैं।
ओव्यूलेशन डे में भी नहीं चाहती हैं प्रेगनेंट होना तो खड़े होकर, बैठकर या पुरुष के ऊपर होकर सेक्स करने जैसी पोजीशन से आऊट फ्लो हो जाता है इस पोजीशन में स्पर्म और एग का मिलन मुस्किल हो जाता है जिससे गर्भधारण की सम्भावना नही रहती।
मासिक चक्र के दौरान व आगे पीछे सम्बन्ध बनाने से क्या होता है फायदा व नुकसान
1- मासिक धर्म के दौरान योनि पूरी तरह से मासिक स्राव से भीगी रहती है उत्तेजना उत्पन्न किए बगैर सीधे सम्बन्ध बनाने में महिला या पुरुष को कोई लिंग या योनि में रगड़ के बाद दर्द नहीं होती।
2- मासिक धर्म शुरू होने के पांच दिन पहले से लगातार सम्बन्ध बनाने से मासिक आने से पहले पेट में होने वाली दर्द नही होती है और इस दौरान शारीरिक सम्बन्ध से गर्भाधान भी नहीं होता है। मासिक के 4-5 दिन पहले से निवृत के अगले 4-5 दिन तक उपजाऊ यानी फर्टाइल अवधि नहीं है। किसी भी तरह कितना भी सम्बन्ध बनाया जाए इस दौरान गर्भ नही ठहरता है।
3- मासिक धर्म सहित निवृती के बाद अगले 4-5 दिनों तक कहने का तात्पर्य मासिक शुरू होने की तारीख से 10 वें दिन तक कितना भी किसी भी तरह से सम्बन्ध बनाना सुरक्षित है। यह समय फर्टाइल नही है, इन दिनों में गर्भधारण की कोई सम्भावना नही रहती है।
मासिक चक्र कितने दिन का होता है
4- सामान्य मासिक चक 28 दिन का माना गया है। किसी-किसी का कुछ कम 26 दिन अधिक 35 दिन तक का भी होता है। अगर इससे ज्यादा इधर-उधर है तो उन महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सामान्य चक्र 28 दिनों पर बता दें। मासिक शुरू होने के 14 वें दिन ओव्यूलेशन पीरियड्स का समय होता है। औरतों में एग मेंस्टुअल साइकिल के बीच में बनता है। चक्र 28 दिनों का है तो बीच 14 वें दिन एग ‘अंडा’ रिलीज होगा। इस समयावधि को फर्टिलाइजर्स डे या फर्टिल विंडो कहा जाता है।
मासिक खत्म अगर तीसरे दिन भी होती है तो दसवें दिन से लेकर अठारहवें दिन बीच के सम्बन्ध से स्त्री गर्भधारण करती है। दसवें दिन से अठारह दिन आपके मासिक चक्र पर निर्भर करता है। स्त्री का जिस दिन ओव्यूलेशन डे होता है उस दिन पेट में हल्का दर्द महसूस होता है और सेक्स की इच्छा अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा रहती है। एक स्वस्थ पुरुष से बना सम्बन्ध का शुक्राणु लगभग 5 दिनों तक कंसीव करने के लिए सक्षम रहता है। वहीं रिलीज एग 12 से 14 घंटे तक कंसीव करने के लिए जीवित रहता है।
पीरियड्स के 4-5 दिन पहले से पीरियड्स शुरू होने के नौवें दसवें दिन तक का समय गर्भावस्था से बचने के लिए सेक्स करना सुरक्षित समय है। यह समय उपजाऊ यानी फर्टाइल समय नही है।
5- महिला में रजोधर्म का प्रारंभ होना क्या कहलाता है?
पीरियड के कितने दिन बाद महिला प्रेग्नेंट हो जाती है
इस प्रश्न को जानने के इच्छुक लोगों को बता दें। सामन्य रूप से महिला के पीरियड्स खत्म होने के 13 से 17 वें दिन का समय ओवुलेशन पीरियड्स कहलाता है। इस समय महिमा को गर्भ धारण करने की संभावना सबसे अधिक होती है, इन संभावित दिनों को ही ओवुलेशन पीरियड्स कहा जाता है। ओवुलेशन पीरियड्स की गणना जिस दिन पीरियड्स शुरू होता है उस दिन से मेंस्टुअल साइकिल गिनी जाती है। जिन महिलाओं का पीरियड्स 26 दिनों पर आता है उनका ओव्यूलेशन डे 13 वें दिन मतलब टोटल दिनों का आधा होता है।
जिनका 28 उनका ओव्यूलेशन डे 14 वे दिन और जिनका 30 दिनों पर पीरियड्स आता है उनका 15 वे दिन और जिनका 34 वे दिन पीरियड्स आता है उनका 17 वे दिन ओव्यूलेशन डे होता है। जिस दिन एग रिलीज होता है वही दिन ओव्यूलेशन डे होता है। एग बनने के तीन दिन पहले एक दिन बाद तक का समय फर्टाइल पीरियड्स या ओव्यूलेशन पीरियड्स होता है। इस समय में बनाए गए सम्बन्ध से स्त्री गर्भधारण करती है। ओव्यूलेशन डे मे कंसीव करने से गर्भधारण की संभावना 99.5% हो जाती है अगर स्त्री को पूर्ण रूप से यौन तृप्ति मिली हो तब।
इस दौरान अगर स्त्री का फ्लाव पुरुष के साथ नहीं हो मतलब सही से कंसीव न करें तो इस अवधि में भी गर्भधारण की संभावना नहीं रहती। 85% स्त्रियों को पता नहीं होता गर्भधारण के लिए कंसीव करने का सही समय। पीरियड्स से पीरियड्स के बीच का 4 दिन जिसमें 99. 5% गर्भधारण होना तय माना जाता है। वो चार दिन एग रिलीज होने के तीन दिन पहले से एक दिन बाद तक का होता है।
6- रोज़-रोज़ शारीरिक संबंध बनाने से क्या होता है?
नियमित सेक्स से टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन दोनों का लेवल बढ़ता है। सामान्य तौर पर पुरुषों में अधिक टेस्टोस्टेरोन और कम एस्ट्रोजन होते हैं। जबकि, महिलाओं में इससे उल्टा होता है। नियमित सेक्स से पुरुषों और महिलाओं में इन दोनों हॉर्मोन्स का प्रोडक्शन बढ़ता है। गम्भीर से गंभीर बीमारियों में रोज-रोज शारिरिक संबंध बनाना सेक्स करना फायदेमन्द होता है।
7- रजस्वला स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाने पर संक्रमण का खतरा
बढ़ जाता है अगर स्त्री पुरुष यौन तृप्ति के उद्देश्य से मासिक धर्म के दौरान सम्बन्ध बनाते हैं तो फ्लाव के तुरंत बाद अलग अलग नही होना होता है। अगर फ्लाव के तुरंत बाद अलग अलग हुए तो वातावरण का आक्सीजन एक दूसरे के अंगों में समाहित हो जाती है जो कमजोरी का कारण बनती है। मासिक धर्म के दौरान सम्बन्ध में अगर स्त्री पुरुष फ्लाव के बाद तृप्ति का अनुभव करते एक दूसरे में समाहित रहते हैं तो फ्लाव के बाद थोड़ा खिंचाव होता है, इससे स्त्री द्वारा हो रहा मासिक स्राव से संक्रमण पुरुष के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
8- पीरियड के दौरान प्रेगनेंसी की संभावना
स्त्रियों के शरीर से निकलने वाला हार्मोंस गर्भाशय के स्तर को उधेड़कर योनि मार्ग से बाहर निकाल देता। मासिक धर्म में खराब रक्त श्र्लेष्म और गर्भाशय के स्तर की कुछ कोशिका होती हैं। पहली मासिक धर्म को मेनार्च कहा जाता है। मासिक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है इसमे यूटेरस के अंदर से रक्त और ऊत्तक, वजाइना के द्वारा बाहर आता है यह कृया स्त्रीयों में लगभग 28 दिनों पर होती है। पीरियड्स की शुरुआत का तात्पर्य है स्त्री का शरीर गर्भधारण के लिए तैयार है। प्रकृति की जननी महिला पीरियड्स आने के बाद गर्भधारण कर बच्चें को जन्म देने योग्य होती हैं।
9- पीरियड्स शुरू होने के
13 से 17 दिन के बीच एग ओवरी से निकलता है। जिनका पीरियड्स 26 दिन पर उनका 13 वें दिन और जिनका पीरियड्स 34 दिन पर उनका 17 वे दिन। ओव्यूलेशन डे में एग रिलीज होने पर स्त्री के पेट में हल्का दर्द महसूस होता है इससे भी औरत को अपने ओव्यूलेशन डे का पता चल जाता है। एक पीरियड्स से दूसरे पीरियड्स के बीच की तारीख हर स्त्री का ओव्यूलेशन डे होती है। ओवरी से निकलने के 12 से 14 घंटा तक एग जीवित रहता है।
इस दौरान शुक्राणु इसे फर्टिलाइज कर देता है तो स्त्री प्रेगनेंट हो जाती है। स्त्री के शरीर में स्पर्म 3 दिन तक जिवित रहता है रिलीज हुए एग से कंसीव होने पर स्त्री प्रेग्नेंट हो जाती है। हमारी यह जानकारी प्रेगनेंट करने का तरीका प्रेग्नेंट होने ना होने की इच्छा में हर स्त्री के लिए उपयोगी साबित होगा।
ओव्यूलेशन चार्ट – ओव्यूलेशन क्या होता है
10- एक रिचर्स के मुताबिक 85% भारतीय महिलाओं को अपने ओव्यूलेशन पीरियड्स की जानकारी नहीं होती। अमेरिका की फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी नामक संस्था के 2014 सर्वे के मुताबिक अमेरिका में 40 प्रतिशत महिलाओं को ना ओव्यूलेशन की जानकारी है न ही अपनी मेंस्टुअल साइकिल की जानकारी है। भारतीय महिलाएं 5 मे से 1 ही अपने ओब्यूलेशन पीरियड्स, मेंस्टुअल साइकिल को जान पाती है। जो इसे जानती है वो अनचाहे गर्भ से बिना किसी टेन्शन मुक्त रहती हैं और गर्भ धारण के लिए कंसीव करने का सही समय क्या है जान लेती हैं।
जो महिलाएं और पुरुष इस कांसेप्ट को जानते हैं वे तृप्ति पूर्ण सेक्स से पीछे नहीं हटते। अपनी इच्छानुसार मनपसंद पुत्र-पुत्री उत्पन्न करना भी सेक्स एजुकेशन सेक्सुअल ज्ञान कि देन होती है। किस स्थित में सम्बन्ध बनाये तो पुत्र या पुत्री होगा इस अद्भुत जानकारी के लिए सम्पर्क करें। सेक्स एवं हेल्थ एजुकेशन विशेष विशेषज्ञ लेखक हवाटएप्स +917379622843
आखिर क्यूँ रेड लाइट एरिया में पीरियड्स वाली औरतों का ज्यादा डिमांड रहता है।
रेड लाइट एरिया की औरतें अपने शरीर के अन्य भागों से छेड़छाड़ नहीं करने देतीं मतलब सीधे-सीधे यौन संबंध बनाती हैं और पुरुष फ्लाव के बाद तुरंत किनारे कर देती हैं। अपने अंगों में उत्तेजना नही आने देती, क्यूंकि? उनका उद्देश्य तन का सुख नही धन की लालसा रहती है और दिन-रात का उनका सिर्फ वही कामक्रीड़ा का कार्य व्यवसाय रहता है। सम्बन्ध बनाते बनाते उनकी योनि पूरी तरह से ढीला-ढाला रहती है इसलिए कोई रगड़ से परेशानी नहीं होती ज्यादातर कंडोम का उपयोग करती या एक प्रकार का लोशन का भी प्रयोग करती हैं जिससे पुरुष शिघ्र स्खलित हो सके और उनका व्यवसाय चलता रहे।
मासिक धर्म के दौरान योनी हिट रहती है और स्राव के वजह से कुछ अलग ही आंनद प्राप्त होती है। इस दौरान संबंध बनाने में कुछ अलग हलचल होती है जिससे पुरुष आनंदित होतें हैं इस वजह से रेड लाइट एरिया में पीरियड्स वाली स्त्रीयों का डिमांड कुछ ज्यादा रहता हैं। मोंक्ष का एक मार्ग सेक्स पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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