देवरिया, 17 अप्रैल 2025: प्याज की खेती राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, देवरिया के तत्वाधान में तरकुलवा विकासखंड के मैनपुर ग्राम में एक वृहद संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराना और उनकी आय में वृद्धि करना था। इस संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने किसानों को खरीफ प्याज की खेती को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने इस फसल के आर्थिक लाभों, खेती की तकनीकों, और बाजार की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। संगोष्ठी में उपस्थित किसानों ने इस नई जानकारी को उत्साहपूर्वक ग्रहण किया और इसे अपनी खेती में लागू करने की इच्छा जताई।
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खरीफ प्याज की खेती: क्यों है यह लाभकारी?

डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि खरीफ प्याज की खेती उत्तर प्रदेश, विशेषकर देवरिया जैसे क्षेत्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है। खरीफ मौसम (जून से अक्टूबर) में प्याज की फसल तैयार होने पर बाजार में इसकी मांग अधिक होती है, क्योंकि इस समय रबी प्याज की आपूर्ति कम हो जाती है। परिणामस्वरूप, प्याज की कीमतें सामान्यतः 30-50% तक अधिक होती हैं, जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर अधिक मुनाफा प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि खरीफ प्याज की कुछ उन्नत किस्में, जैसे अग्रि फाउंड डार्क रेड, अर्का कल्याण, और भीमा शक्ति, इस क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के लिए उपयुक्त हैं। ये किस्में रोग प्रतिरोधी होने के साथ-साथ उच्च पैदावार देती हैं।
डॉ. श्रीवास्तव ने खरीफ प्याज की खेती की तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। रोपण से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना, जैविक खाद का उपयोग करना, और उचित बीज दर (8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) का पालन करना आवश्यक है। इसके अलावा, ड्रिप सिंचाई और एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के उपयोग से पानी और कीटनाशकों की बचत होती है, साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
सहफसली खेती: आय दोगुनी करने की रणनीति
संगोष्ठी में डॉ. श्रीवास्तव ने सहफसली खेती को किसानों के लिए एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण बताया। उन्होंने विशेष रूप से गन्ने की फसल के साथ प्याज, लहसुन, या अन्य सब्जियों जैसे टमाटर और मिर्च की खेती करने की सलाह दी। गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है, और इसके साथ सहफसली खेती करने से भूमि का अधिकतम उपयोग होता है। उदाहरण के लिए, गन्ने की पंक्तियों के बीच प्याज या लहसुन की खेती न केवल अतिरिक्त आय प्रदान करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखती है।
उन्होंने बताया कि सहफसली खेती से कीटों और रोगों का प्रकोप भी कम होता है, क्योंकि विभिन्न फसलों की जड़ें और पत्तियां मिट्टी में विविधता लाती हैं। इसके अलावा, यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जिनके पास सीमित भूमि होती है। डॉ. श्रीवास्तव ने कुछ सफल किसानों के उदाहरण भी साझा किए, जिन्होंने गन्ने के साथ प्याज की सहफसली खेती करके अपनी आय को दोगुना कर लिया।
बागवानी मिशन: किसानों के लिए नई राह
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, देवरिया के प्रमुख डॉ. बी.के. सिंह ने संगोष्ठी में बागवानी मिशन के तहत चल रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मिशन केंद्र और राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लक्ष्य किसानों को बागवानी फसलों, जैसे फल, फूल, सब्जियां, और औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। डॉ. सिंह ने बताया कि मिशन के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण, और सब्सिडी पर उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों, पॉलीहाउस, और शेड नेट हाउस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। ये तकनीकें न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करती हैं, बल्कि उत्पादन लागत को भी कम करती हैं। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि बागवानी मिशन के तहत जिले में कई किसानों ने फूलों की खेती, जैसे गुलाब और गेंदा, शुरू की है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
डॉ. सिंह ने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतिष्ठान जल्द ही जनपद में एक बागवानी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। यह केंद्र किसानों को नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, और बाजार से जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं और नई तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को और लाभकारी बनाएं।
सब्जी किट वितरण और किसानों की भागीदारी
संगोष्ठी में उद्यान विभाग के अधिकारी छांगुर प्रसाद, प्रगतिशील किसान जय सिंह कुशवाहा, घनश्याम सिंह, और 50 से अधिक किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान की ओर से सभी प्रतिभागी किसानों को सब्जी किट वितरित किए गए। इन किटों में खरीफ प्याज, लहसुन, और अन्य सब्जियों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जैविक खाद, और कीटनाशक शामिल थे। किसानों ने इन किटों को प्राप्त करके उत्साह व्यक्त किया और इसे अपनी खेती में उपयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रगतिशील किसान जय सिंह कुशवाहा ने कहा, “खरीफ प्याज और सहफसली खेती की जानकारी मेरे लिए बिल्कुल नई थी। मैं इसे अपनी एक हेक्टेयर जमीन पर आजमाऊंगा और उम्मीद है कि इससे मेरी आय में अच्छा इजाफा होगा।” इसी तरह, घनश्याम सिंह ने बागवानी मिशन की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल छोटे किसानों के लिए आर्थिक सशक्तीकरण का मार्ग खोल रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
संगोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों और किसानों ने इस बात पर सहमति जताई कि खरीफ प्याज और बागवानी फसलों की खेती से देवरिया के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि, कुछ चुनौतियों, जैसे बीज की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, पर भी चर्चा हुई। डॉ. श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से बीज और अन्य संसाधन प्राप्त करने चाहिए, ताकि लागत कम हो और गुणवत्ता बनी रहे।
डॉ. सिंह ने यह भी जोड़ा कि प्रतिष्ठान और उद्यान विभाग मिलकर किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्थानीय मंडियों के साथ सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
यह संगोष्ठी न केवल किसानों के लिए ज्ञानवर्धक रही, बल्कि उनके लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनी। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान और कृषि विज्ञान केंद्र के इस प्रयास से देवरिया के किसानों को नई दिशा मिली है। खरीफ प्याज, सहफसली खेती, और बागवानी मिशन की योजनाएं न केवल उनकी आय बढ़ाने में मदद करेंगी, बल्कि क्षेत्र को कृषि और बागवानी के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में स्थापित करेंगी। भविष्य में ऐसे आयोजनों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से और अधिक किसानों को लाभान्वित करने की योजना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके।
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