क्यों कायस्थ दीपावली से यमदुतिया तक नही करते कलम का प्रयोग ?

Amit Srivastav

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आखिर क्यों कायस्थ समाज दीपावली से यमदुतिया तक नहीं करते कलम का प्रयोग इस लेख में उल्लिखित किया गया है अंत तक पढ़ें जानें श्री चित्रगुप्त वंशज-अमित श्रीवास्तव कायस्थ की कर्म-धर्म लेखनी में प्रस्तुत है। 

जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छुट जाने से नाराज भगवान् चित्रगुप्त ने रख दी थी कलम, उस समय परेवा काल शुरू हो चुका था। 
क्यों कायस्थ दीपावली से यमदुतिया तक नही करते कलम का प्रयोग ?
परेवा के दिन कायस्थ समाज कलम का प्रयोग नहीं करते हैं यानी किसी भी तरह का लेखन कार्य हिसाब-किताब नही करते हैं आखिर ऐसा क्या है ?
 
कि पूरी दुनिया में कायस्थ समाज के लोग दीपावली के दिन पूजन के बाद कलम रख देते है और फिर यमदुतिया के दिन कलम- दवात के पूजन के बाद ही उसे उठाते है। 
 
इसको लेकर सर्व समाज में कई सवाल अक्सर लोग कायस्थों से करते है ?
 
ऐसे में अपने ही इतिहास से अनभिज्ञ कायस्थ युवा पीढ़ी इसका कोई समुचित उत्तर नहीं दे पाती है। जब इसकी खोज की गई तो इससे सम्बंधित एक बहुत रोचक घटना का संदर्भ हमें किवदंतियों में मिला। 
 
कहते हैं जब भगवान् राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राजसिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान् राम के राज्यतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दी। 
 
ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवी-देवता आ गए तब भगवान् राम ने अपने अनुज भरत से पूछा भगवान चित्रगुप्त नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस पर जब खोज बीन हुई तो पता चला की गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त को निमत्रण पहुंचाया ही नहीं था जिसके चलते भगवान् चित्रगुप्त नहीं आये। इधर भगवान् चित्रगुप्त सब जान चुके थे और इसे प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे। फलस्वरूप उन्होंने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर किनारे रख दिया। 
 
सभी देवी देवता जैसे ही राजतिलक से लौटे तो पाया की स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गये थे, प्राणियों का का लेखा जोखा ना लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था की किसको कहाँ भेजे। 
क्यों कायस्थ दीपावली से यमदुतिया तक नही करते कलम का प्रयोग ?
तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने अयोध्या में भगवान् विष्णु द्वारा स्थापित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर, श्री अयोध्या महात्मय में भी इसे श्री धर्म हरि मंदिर कहा गया है धार्मिक मान्यता है कि अयोध्या आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को अनिवार्यत: श्री धर्म-हरि जी के दर्शन करना चाहिये, अन्यथा उसे इस तीर्थ यात्रा का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता। में गुरु वशिष्ठ के साथ जाकर भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की और गुरु वशिष्ठ की गलती के लिए क्षमायाचना की, जिसके बाद भगवान राम का आग्रह मानकर भगवान चित्रगुप्त ने लगभग ४ पहर (२४ घंटे बाद ) पुन: कलम दवात की पूजा करने के पश्चात उसको उठाया और प्राणियों का लेखा जोखा लिखने का कार्य आरम्भ किया I कहते हैं तभी से कायस्थ दीपावली की पूजा के पश्चात कलम को रख देते हैं और यमदुतिया के दिन भगवान चित्रगुप्त जी की प्रतिमा के समक्ष विधिवत कलम दवात पूजन करके ही कलम को अगले दिन से धारण करते हैं। 
 
यह भी मानना है तभी से कायस्थ ब्राह्मणों के लिए भी पूजनीय हुए और इस घटना के पश्चात मिले वरदान के फलस्वरूप सबसे दान लेने वाले ब्राह्मणों से दान लेने का हक़ सिर्फ कायस्थों को ही मिला है। 
 
धनतेरस, चौउदस, दीपावली, भाई दूज – कलम दवात पूजा एवं छठ पूजा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं बहुत-बहुत बधाई।
 

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