देवरिया के जिला पंचायत सभागार में मोहन सिंह की 12वीं पुण्यतिथि पर एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल उस समय उपस्थित हुआ जब समाजवादी आंदोलन के महान चिंतक, विचारक, जननायक और शोषित-वंचितों के सच्चे मसीहा कहे जाने वाले स्वर्गीय मोहन सिंह की 12वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न समाजवादी कार्यकर्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग एकजुट होकर इस महान नेता को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे। श्रद्धांजलि सभा में विशेष रूप से विधान सभा सलेमपुर 341 की लोकप्रिय समाजवादी पार्टी नेत्री रंजना भारती भी शामिल हुईं। उन्होंने मोहन सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी श्रद्धांजलि दी और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए कहा कि समाजवादी आंदोलन का इतिहास हमेशा उनके योगदान के बिना अधूरा रहेगा।
सभा में वक्ताओं ने मोहन सिंह को “छोटे लोहिया” के रूप में संबोधित किया और उनके विचारों तथा संघर्षों की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। यह बताया गया कि उन्होंने हमेशा कनिष्ठ कार्यकर्ताओं को स्वयं से आगे खड़ा किया और राजनीति में नई पीढ़ी को अवसर देने का काम किया। वे राजनीति को सत्ता का साधन नहीं बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम मानते थे। समाजवादी सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ही उन्हें जन-जन के दिल में अमर बनाती है। मोहन सिंह ने सदैव गरीब, किसान, मजदूर और वंचित तबके की आवाज बुलंद की। उनके संघर्षों ने अनेक बार सत्ता को झकझोरा और जनता के हक की लड़ाई को मजबूती दी।

रंजना भारती ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. मोहन सिंह जैसे नेताओं की वजह से ही समाजवादी आंदोलन ने देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि छोटे लोहिया हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि राजनीति केवल परिवारवाद और सत्ता की कुर्सी तक सीमित न हो, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, शिक्षा, रोजगार और सम्मान पहुंचाने का जरिया बने। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में उनके बताए गए मार्गदर्शन से समाजवादी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित विभिन्न वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि मोहन सिंह 7ने संगठनात्मक मजबूती को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और भाईचारे को बढ़ावा दिया। उनकी राजनीति का आधार हमेशा समानता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र रहा। वे इस बात पर विश्वास करते थे कि जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक सच्चा लोकतंत्र स्थापित नहीं हो सकता। उनकी यही सोच उन्हें समाजवादी आंदोलन का सच्चा सिपाही और प्रेरणा स्रोत बनाती है।
कार्यक्रम में माहौल पूरी तरह भावुक था। जिले के कोने-कोने से आए समाजवादी कार्यकर्ता अपने नेता को याद करते हुए बार-बार यह दोहराते रहे कि स्वर्गीय मोहन सिंह का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए दीपस्तंभ है। उनके विचार और संघर्ष आज भी कार्यकर्ताओं को प्रेरणा और ऊर्जा प्रदान करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि मोहन सिंह की 12वीं पुण्यतिथि केवल एक स्मरण का अवसर नहीं बल्कि उनके आदर्शों और सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का क्षण है।
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कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि समाजवादी पार्टी के सभी कार्यकर्ता मिलकर स्व. मोहन सिंह के दिखाए गए मार्ग पर चलेंगे और समाज में व्याप्त अन्याय, शोषण, विषमता तथा भेदभाव के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। सभा में यह भी स्पष्ट किया गया कि समाजवादी विचारधारा ही आज की राजनीति को नई दिशा दे सकती है और गरीब, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और नौजवानों के अधिकारों की रक्षा कर सकती है।

देवरिया से amitsrivastav.in पर दिलीप कुमार की रिपोर्ट अपनी पसंदीदा लेख पढ़ने के लिए इस वेबसाइट पर खोजें पढे़ और शेयर करें गूगल टाप टेन बेबसाइट पर अपनी खबर, बायोग्राफी स्टोरी लेख प्रकाशित कराने के लिए संपर्क करें संपादक एवं लेखक अमित श्रीवास्तव हवाटएप्स कालिंग सम्पर्क नम्बर 07379622843 पर।

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