देवरिया में छठ महापर्व: आस्था का सैलाब, स्वच्छ घाटों पर उमड़ी भक्तों की भीड़

Amit Srivastav

देवरिया, 28 अक्टूबर 2025: लोक आस्था के छठ महापर्व पूजा का आज चौथे दिन उगते सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ समापन हुआ। देवरिया जिले के घाटों, तालाबों और नदियों के किनारे सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने के लिए सुबह से ही हजारों-हजारों व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन पहुंचे। चार दिवसीय इस पर्व का समापन उदया अर्घ्य के साथ हो गया है, जहां व्रती 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद प्रसाद ग्रहण कर पारण कीं। जिले में रिवर फ्रंट और प्रमुख घाटों पर आस्था का अपार सैलाब उमड़ा, जो देवरिया की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत कर दिया।

इस वर्ष छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू हुई, जब नहाय-खाय के साथ व्रत संकल्प लिया गया। 26 अक्टूबर को खरना प्रसाद ग्रहण किया गया, जबकि 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य के दौरान अस्ताचलगामी सूर्य को जल अर्पित कर भक्तों ने मंगल कामना की। 28 अक्टूबर सुबह 6:29 बजे उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन हो गया।

खराब मौसम बूंदाबांदी के साथ हल्की बारिश व काले बादलों ने सूर्य देव को समय से दिखने से रोके रखा, बाद में मौसम साफ़ हो गया। जिला प्रशासन ने 100 से अधिक घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। ड्रोन कैमरों से निगरानी, गोताखोरों की तैनाती और पुलिस फोर्स की विशेष टीमों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरती।

नगर विकास विभाग की मुहिम से घाटों की साफ-सफाई और सजावट ने पूजा स्थलों को निखारा। देवरिया के रिवर फ्रंट पर रंग-बिरंगे लाइट्स, स्वच्छ जल स्रोत और बांस-बनी डिजाइन ने आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। स्थानीय निवासियों ने बताया, “परिवार के साथ जन्मभूमि पर छठ मनाने का सौभाग्य मिला। भाटपार रानी थाने के पास छठ घाट पर सभासद मोनू सिंह अपने सहयोगियों सहित चाय पकोड़ा लोगों के बीच वितरित करते और स्वच्छता पर ध्यान देते देखे गए। स्वच्छ घाटों ने उत्साह दोगुना कर दिया।”

इसी तरह, विधायक विजय लक्ष्मी गौतम ने सलेमपुर के नदावर घाट पर पहुंचकर व्रतियों को शुभकामनाएं दीं और सूर्यदेव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना की तो सपा के भावी प्रत्याशी मालवीय प्रसाद दूसरे तरफ़ रंजना भारती जगह-जगह क्षेत्र में भ्रमण कर छठ घाटों पर छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। भाटपार रानी नगर के घाटों पर चेयरमैन प्रतिनिधि विजय कुमार गुप्ता भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लेते देखे गए। इससे पहले जिला और तहसील की टीम सभी छठ घाटों का स्थानिय निरिक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था प्रदान कर चुकी थी ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो।


हालांकि, एक चिंताजनक घटना भी सामने आई। एक छठ घाट के पोखरे में मछलियों के मरने की खबर ने स्थानीयवासियों को सतर्क किया। ग्रामीणों ने जहरीले पदार्थ छिड़काव का आरोप लगाया है, जिसकी जांच प्रशासन कर रहा है। जिला मजिस्ट्रेट दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं देते हुए कहा, “यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और उज्ज्वलता लाए। सभी घाट सुरक्षित हैं, भक्त निश्चिंत रहें।”


रेलवे ने भी छठ यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम किए। लखनऊ से बिहार और पूर्वांचल के ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े गए, जिससे देवरिया सहित गोरखपुर, बलिया और वाराणसी के यात्रियों को राहत मिली। छठ गीतों की धुनें चारो तरफ गूंजती रही जो पर्व की मस्ती को बढ़ाये रखी।


छठ पूजा सूर्यदेव और छठी मइया की उपासना का प्रतीक है, जो स्वास्थ्य, संतान सुख और पर्यावरण संरक्षण सिखाता है। विहार राज्य से सटा देवरिया जैसे पूर्वांचल के जिलों में यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का भी माध्यम बनता है। जय छठी मइया की! पर्व की सफलता के लिए सभी का सहयोग सराहनीय रहा।

देवरिया में छठ महापर्व: आस्था का सैलाब, स्वच्छ घाटों पर उमड़ी भक्तों की भीड़


देवरिया जिले में छठ पूजा के दौरान सजावट और साफ-सफाई के आधार पर प्रथम स्थान रिवर फ्रंट घाट को प्राप्त हुआ। देवरिया जिले में रिवर फ्रंट घाट देवरिया शहर के केंद्र में स्थित है, जो करुल नदी (कुकरहा जिसे कुर्ना नदी के नाम से भी जाना जाता है) के किनारे विकसित किया गया एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल है। यह घाट देवरिया रेलवे स्टेशन से लगभग 2-3 किलोमीटर की दूरी पर, शहर के पूर्वी हिस्से में राष्ट्रीय राजमार्ग-28 के निकट अवस्थित है, जहां से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

छठ पूजा जैसे अवसरों पर यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है, और यह जिले का एक महत्वपूर्ण जलाशय घाट के रूप में जाना जाता है। नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा आयोजित मूल्यांकन में रिवर फ्रंट को स्वच्छ जल, रंग-बिरंगी लाइटिंग, बांस की कलात्मक संरचनाएं, फूलों की सजावट और निर्बाध सुरक्षा व्यवस्था के लिए सर्वोच्च प्रथम स्थान दिए गए। घाट पर प्लास्टिक मुक्त वातावरण, डस्टबिन की नियमित खालीकरण प्रक्रिया और हरियाली संरक्षण के प्रयासों ने इसे अन्य 100 से अधिक घाटों से आगे रखा, जिससे यह आस्था के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल पूजा स्थल का आदर्श उदाहरण बना।


देवरिया जिले में छठ पूजा घाटों की सजावट और साफ-सफाई के मूल्यांकन में दूसरा स्थान सलेमपुर मे गंडक नदी के किनारे नदावर घाट को तथा तीसरा स्थान भटनी के काली मंदिर छठ घाट को प्राप्त हुआ। नदावर घाट ने पारंपरिक बांस की कलाकृति, स्वच्छ जल प्रबंधन, स्थानीय फूलों की मालाओं और सौर ऊर्जा लाइट्स के उपयोग से प्रभावित किया, जबकि काली मंदिर तालाब घाट ने प्लास्टिक-मुक्त क्षेत्र, नियमित सफाई दल की तैनाती, बच्चों के लिए अलग खेल क्षेत्र और व्रतियों के लिए विश्राम सुविधा के कारण तीसरा स्थान हासिल किया, दोनों घाटों ने आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।


देवरिया जिले में छठ पूजा घाटों की सजावट और साफ-सफाई के मूल्यांकन में चौथा स्थान रुद्रपुर के गोर्रा घाट को तथा पांचवां स्थान बरहज के सारनाथ घाट को मिला। गोर्रा घाट ने स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई गई मिट्टी की मूर्तियों, साफ-सुथरे प्रवेश मार्ग, जैविक कचरा प्रबंधन और व्रतियों के लिए छायादार पंडाल से प्रशंसा बटोरी, जबकि सारनाथ घाट ने स्वयंसेवी युवाओं की सफाई मुहिम, रंगीन झंडियों की सजावट, पीने के पानी की निरंतर उपलब्धता और गोताखोरों की अतिरिक्त टीम के कारण पांचवां स्थान प्राप्त किया, दोनों स्थानों ने सादगी और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

देवरिया जिले में भाटपार रानी नगर पंचायत के रानी पोखरा घाट ने इस वर्ष छठ पूजा में सजावट और साफ-सफाई के मानकों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, यह छठवाँ स्थान प्राप्त किया। नगर पंचायत की सफाई टीम ने घाट को प्लास्टिक-मुक्त रखा, तालाब की सतह से कचरा नियमित हटाया और प्रवेश द्वार पर रंग-बिरंगी तोरण व फूलों की सजावट की। स्थानीय महिलाओं के समूह ने बांस की टोकरी और दीयों से पारंपरिक डिजाइन वाली डालीं लेकर रानी पोखरा घाट पर पूजा-अर्चना की।

पोखरा मे स्थापित शिव प्रतिमा पर भव्य आरती दर्शन देखने को मिला। रात्री समय नाट्यकला गायन वादन होता रहा और स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा रहा। सौर लैंपों की रोशनी ने रात्रि में सुरक्षा और सौंदर्य दोनों बढ़ाया। व्रतियों के लिए पीने का पानी, विश्राम छतरी और प्राथमिक चिकित्सा किट की व्यवस्था ने सुविधा प्रदान की, नगर पंचायत अध्यक्षा प्रेमलता गुप्ता सहित उप जिलाधिकारी भाटपार रानी रत्नेश तिवारी की पत्नी व्रत पूजा-अर्चना करते देखी गई।

प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रहा जिससे यह घाट ग्रामीण आस्था का जीवंत केंद्र बना रहा। छोटे-छोटे घाटों पर राजनितिक दलों के नेताओं नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत के अध्यक्षों, प्रधानों, सदस्यों और कर्मचारियों को देखा गया जो तत्परता से सेवा भाव मे लगे हुए थे। देवरिया से amitsrivastav.in टीम की रिपोर्ट।

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