जानें पहली अप्रैल की विस्तृत जानकारी – इस देश पर एक लम्बे अरसे तक राज करने वाले अंग्रेजों एवं मुगल शासकों ने एक साजिश के तहत हमारी धर्म संस्कृति एवं मान्यताओं को इस कदर तहस नहस कर दिया कि हम खुद अपने संस्कारों रीति रिवाजों को भुला बैठे हैं। पहली अप्रैल जिसे हम मूर्ख दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। हमारी भारतीय संस्कृति एवं मान्यताओं के मुताबिक पहली अप्रैल का दिन नववर्ष नव संवतसर के प्रथम दिन के रूप में माना जाता है।

हिन्दी कैलेंडर के अनुसार अन्तिम मास फागुन की पूर्णिमा को है मतलब पुराने साल की विदाई में होलिकोत्सव और नये साल का आगमन होली की रात्रि या सुबह चैत मास की प्रतिपदा, हिन्दी कैलेंडर के अनुसार होलिकोत्सव के उदया तिथि भारतीय नव वर्ष की शुरुआत होती है। मार्च-अप्रैल में घर बाग बगीचे सभी धन धान्य व फलों से परिपूर्ण हो जाते हैं। सरकारी वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग 31 मार्च को होती है। वित्तीय वर्ष की शुरूआत पहली अप्रैल से होती है और व्यवसायी अपने नये बही खाते की शुरूआत करता है।
नववर्ष की मंगल पावन वेला को मूर्खो का दिवस बना दिया गया है और हम बड़े गर्व से अपने भारतीय नववर्ष के दिन को मूर्ख दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। अंग्रेजों व मुगलों ने एक गहरी साजिश के तहत हमें चारों तरफ से लूटा और आखिर में हमारी संस्कृति को भी लूट लिया है। इतना ही नहीं अंग्रेजों ने हमें दुनिया के सामने मूर्ख भी साबित कर दिया। हमारी नव संवतसर की जगह अपना अंग्रेजी कैलेंडर दे नववर्ष पहली जनवरी हम पर थोप कर हमें मानसिक गुलाम बना दिये।
जिसे हम सभी आज भी झेल रहे हैं। हमारी संस्कृति के दुश्मनों ने अंग्रेजी महीने का कलैंडर बनाकर पहली जनवरी को साल का नववर्ष का प्रथम दिन घोषित कर दिया। अप्रैल महीने में हमारी धरती हमें अन्न देकर खुश कर देती है और वृक्षों में नई कपोले और फल आ जाते हैं।

इसी के साथ जगत जननी माता कि नवरात्रि शुरू हो जाती हैं और आखिर के अंतिम नवमी तिथि को ही ईश्वरीय सत्ता मर्यादा पुरूषोत्म भगवान राम का अवतरण अयोध्याधाम में होता है। हमें अप्रैल में सारी खुशियाँ मिल जाती हैं फिर भी हम नया साल पहली जनवरी तब मनाते हैं जबकि कड़ाके की जानलेवा ठंडक से बूढ़े जवान व बच्चों की जान बचाना कठिन हो जाता है। जनवरी के महीने में लोगों को पेट भरना दुश्वार हो जाता है और इसलिए इस महीने को अशुभ मानकर इसमें कोई शुभ माँगलिक कार्य नहीं किया जाता है।
नववर्ष के प्रथम दिन हम खुशी की जगह मूर्ख बनते और बनाते हैं। नववर्ष के प्रथम दिन को मूर्ख बनाने की परम्परा अंग्रेजो की देन है जिसे हम अपनाते चले आ रहें हैं। अप्रैल फूल या मूर्ख दिवस के बारें में हमने भी ध्यान नहीं दिया कि आखिर ऐसा हमारे साथ क्यों किया गया ? हमने जरा भी नहीं सोचा कि कहीं हम साजिश के तहत तो नहीं अपने नववर्ष के प्रथम पावन महीने की शुरुआत को मूर्ख दिवस के रूप में कर रहे हैं। इसी महीने से शुभ कार्यों की शुरुआत भी कि जाती हैं और लोग नये साल पर हुई कमाई से शादी ब्याह जैसे उत्सव करना शुरू कर देते हैं।

पहली अप्रैल की जगह पहली जनवरी को नववर्ष के रूप में मनाने की शुरूआत 1582 में पोप ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान जारी करके किया था। जिसमें पहली जनवरी को नववर्ष का प्रथम दिन बनाया गया था। जिन लोगो ने इसे मानने से इंकार कर दिया उनका मजाक उड़ाने और मूर्ख बनाने के लिये साजिशन इस दिन को मूर्ख दिवस घोषित कर दिया गया। हम आज अंग्रेजों की डाली गयी नापाक इरादों वाली परम्परा का निर्वहन करते चले आ रहे हैं।
नववर्ष नव संवत की वेला पर तरह तरह से लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है। यहाँ तक कि सरकारी मशीनरी तक को बेवकूफ बनाकर उसे भी मूर्ख बनाने की कोशिशें की जाती है। इस पावन पवित्र महीने की शुरुआत अपनों को मूर्ख बनाकर नहीं बल्कि शुभ व नेक कार्यो की शुरूआत और नववर्ष की एक दूसरे को बधाई व शुभकामनाएँ देकर करने की जरूरत है। जय मातादी जय श्री राम। आप सभी को नववर्ष की बहुत बहुत बधाई।
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