वरिष्ठ पत्रकार विपुल कुमार तिवारी को नेशनल प्रेस यूनियन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया। पत्रकार हितों के संघर्ष और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। देवरिया से राष्ट्रीय स्तर तक पहुँची यह उपलब्धि पत्रकार जगत के लिए गर्व का विषय है।
देवरिया की धरती ने हमेशा ऐसे लोगों को जन्म दिया है, जिन्होंने समाज, पत्रकारिता और लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार विपुल कुमार तिवारी का नाम अब राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सम्मान के साथ जुड़ गया है। नेशनल प्रेस यूनियन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पत्रकार हितों के प्रति उनके लंबे संघर्ष और निरंतर सक्रियता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि तिवारी अब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी पत्रकारों की आवाज बुलंद करेंगे और पत्रकार हितों की लड़ाई को और अधिक धारदार बनाएंगे। यह जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल और खासतौर पर देवरिया जनपद के लिए गर्व का विषय है।

पत्रकारिता हमेशा से लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती रही है, लेकिन बीते कुछ दशकों में पत्रकारों को अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। चाहे वह स्वतंत्रता की लड़ाई हो, आपातकाल का दौर हो या फिर डिजिटल युग की नई चुनौतियाँ – पत्रकारों को हमेशा सत्ता, व्यवस्था और समाज के बीच पुल का कार्य करना पड़ा है। ऐसे समय में पत्रकारों की आवाज़ को संगठित करना और उनके हितों के लिए संघर्ष करना आसान नहीं होता।
विपुल कुमार तिवारी ने अपने लंबे पत्रकारिता करियर में यही काम किया है। उन्होंने हमेशा न केवल कलम की ताकत से, बल्कि संगठनात्मक नेतृत्व के माध्यम से भी पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी है। यही कारण है कि उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनके राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए जाने पर पत्रकार जगत में हर्ष और प्रसन्नता का वातावरण है। देवरिया समेत प्रदेश और अन्य जिलों के कई वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने उन्हें बधाई दी और उम्मीद जताई कि तिवारी अपने नए दायित्व को भी उसी निष्ठा और संघर्ष के साथ निभाएंगे, जिसके लिए वे जाने जाते हैं।
पत्रकार अमित श्रीवास्तव संपादक, मकसूद अहमद भोतपुरी, रामनाथ विद्रोही, अजय आर्य, सी. पी. शुक्ला, कामेश वर्मा, अनिल दुबे, विनय शाही, तारकेश्वर गुप्ता, अनिल पांडे, प्रमोद तिवारी, अनिरुद्ध गुप्ता, अरविंद पांडे, सत्यम पांडे, अजय पटेल, राजकुमार पांडे, गोल्डन बर्मा, अमानत अंसारी, प्रभात श्रीवास्तव, गणेशधर द्विवेदी, रूद्रेश शुक्ला, अंबरीश मणि आदि ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल नेशनल प्रेस यूनियन के लिए बल्कि देशभर के पत्रकारों के लिए शुभ संकेत है।
गौरतलब है कि विपुल तिवारी पहले से ही उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और उन्होंने राज्य स्तर पर कई बार पत्रकारों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का कार्य किया है। पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने से लेकर प्रेस की स्वतंत्रता पर होने वाले हमलों की मुखर आलोचना करने तक, उन्होंने कभी भी पीछे हटने का नाम नहीं लिया। उनके नेतृत्व में कई जिलों में पत्रकारों के साथ अन्याय और उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रशासन को झुकना पड़ा और पीड़ित पत्रकारों को न्याय मिला। यही संघर्षशील छवि और नेतृत्व क्षमता उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता पद तक ले आई है।
पत्रकार जगत मानता है कि आज जिस तरह से मीडिया पर कॉर्पोरेट और राजनीतिक दबाव बढ़ रहे हैं, ऐसे दौर में स्वतंत्र और साहसी पत्रकारों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रवक्ता का पद केवल संगठन का चेहरा नहीं, बल्कि एक ऐसी आवाज़ है जो देशभर के पत्रकारों की चिंताओं, समस्याओं और आकांक्षाओं को सरकार और समाज तक पहुँचाती है। तिवारी के अनुभव और उनकी साफगोई से उम्मीद की जा रही है कि वे इस पद को सार्थक दिशा देंगे और पत्रकारों को नई ऊर्जा और विश्वास के साथ जोड़ेंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों का संगठन हमेशा इस बात पर जोर देता रहा है कि लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी हालत में कमज़ोर नहीं होनी चाहिए। इस संदर्भ में तिवारी का चयन इस विचारधारा को और मज़बूत करता है। देवरिया जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचना अपने आप में संदेश देता है कि प्रतिभा, मेहनत और संघर्ष को कभी रोका नहीं जा सकता। स्थानीय पत्रकारों के लिए यह प्रेरणा है कि यदि वे ईमानदारी और दृढ़ता से काम करें तो राष्ट्रीय पहचान हासिल करना असंभव नहीं है।
विपुल तिवारी को मिली यह नई जिम्मेदारी निश्चित रूप से उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि उस सोच और विचारधारा की भी जीत है जो पत्रकारिता को लोकतंत्र की आत्मा मानती है। आज जब पत्रकारिता पर बाज़ार और सत्ता का दबाव है, ऐसे में तिवारी जैसे नेताओं का आगे आना पूरे पत्रकार समुदाय के लिए नई उम्मीद और नई दिशा है। उनका संघर्ष, उनकी सादगी और उनकी प्रतिबद्धता यह साबित करती है कि पत्रकारिता अभी भी समाज के लिए जीती-जागती ताकत है, जिसे दबाया नहीं जा सकता।
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कुल मिलाकर, विपुल कुमार तिवारी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनना पत्रकारिता जगत के लिए उत्साहजनक है। यह खबर केवल एक नियुक्ति की जानकारी भर नहीं, बल्कि पत्रकारों के हक और अधिकारों की लड़ाई को नई धार और नई पहचान देने वाली उपलब्धि है। देवरिया की गलियों से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर गूँजने वाली यह आवाज़ अब आने वाले समय में पत्रकारों के लिए कितनी क्रांतिकारी साबित होगी, यह देखना दिलचस्प होगा। मगर इतना तय है कि उनके प्रवक्ता बनने से नेशनल प्रेस यूनियन की आवाज़ पहले से कहीं ज्यादा मज़बूत और प्रभावी ढंग से देशभर में गूँजेगी। amitsrivastav.in पर अमित श्रीवास्तव कि रिपोर्ट।

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