देवरिया जनपद के मझगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत स्थित उपकेन्द्र लाहिलपार में 15 अगस्त के पावन अवसर पर स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांव का माहौल देशभक्ति की भावना से सराबोर था। उपकेन्द्र परिसर को रंग-बिरंगी झालरों, तिरंगे झंडों और फूलों से सजाया गया था। ग्राम पंचायत लाहिलपार के प्रधान अब्दूल हसन उर्फ़ सोनू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। झंडारोहण के तुरंत बाद उपस्थित सभी लोगों ने सम्मानपूर्वक राष्ट्रगान गाया, और “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” तथा “जय हिंद” के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा।
इस आयोजन में लाहिलपार की एएनएम श्यामली देवी, वार्ड आया अराधना, सफाई कर्मी अवधेश, बनकटा से एएनएम रंजना देवी, आईओ संदीप कुमार, पत्रकार दिलीप कुमार, दाई छोहाडी देवी, आशा कार्यकर्ता रीता, अनीता देवी, संगीता देवी, सुनीता देवी, सरीता तिवारी सहित कई ग्रामीण महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे। विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और पूरे जोश व गर्व के साथ झंडारोहण, राष्ट्रगान और जयकारों में शामिल होकर एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की।
प्रधान अब्दूल हसन उर्फ़ सोनू ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे देश के वीरों की कुर्बानियों की याद दिलाने वाला दिन है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने जो बलिदान दिए, उन्हें भुलाया नहीं जा सकता। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने का संकल्प भी लिया।

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कार्यक्रम में वक्ताओं ने देवरिया और आसपास के क्षेत्रों के उन स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद किया, जिनके योगदान ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। इनमें पंडित भुवनेश्वर प्रसाद, रामलाल उपाध्याय, गुलाब चंद, और मौलवी मुस्तफा हुसैन जैसे वीर शामिल थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ निडर होकर संघर्ष किया। देवरिया के कई स्वतंत्रता सेनानी असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन और नमक सत्याग्रह जैसे आंदोलनों में सक्रिय रहे और जेल की यातनाएं सहीं, लेकिन देश के प्रति अपने समर्पण में कभी कमी नहीं आने दी।
एएनएम श्यामली देवी ने कहा कि जिस तरह स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने समय में देश को आज़ाद कराने के लिए संघर्ष किया, उसी तरह आज हमें स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में संघर्ष कर देश को आगे ले जाना है। उन्होंने ग्रामीणों से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने और बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूक रहने की अपील की।

पत्रकार दिलीप कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की रक्षा सिर्फ सीमा पर खड़े सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना चाहिए और तकनीक का उपयोग सकारात्मक दिशा में करना चाहिए।
ऐतिहासिक महत्व और आज की जिम्मेदारी
15 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस दिन भारत ने अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से मुक्ति पाई थी। महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं के साथ-साथ लाखों गुमनाम क्रांतिकारियों के संघर्ष का परिणाम था कि आज हम स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक हैं। यह आजादी हमें अनेक बलिदानों के बाद मिली है, और इसकी रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है।
आजादी का अर्थ सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छता और महिलाओं को सशक्त बनाना, ये सब आज की असली चुनौतियां हैं।
कार्यक्रम के अंत में मिठाइयों का वितरण किया गया और सभी ने एक-दूसरे को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन इस बात का सजीव प्रमाण था कि चाहे धर्म, जाति या भाषा में कितनी भी विविधता क्यों न हो, जब बात देश के सम्मान और एकता की आती है, तो सभी भारतीय एक साथ खड़े होते हैं।
लाहिलपार उपकेन्द्र पर आयोजित इस स्वतंत्रता दिवस समारोह ने यह संदेश दिया कि आजादी की भावना केवल इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि हर भारतीय के दिल में बसती है। यहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति ने अपने-अपने तरीके से देश के प्रति अपने प्रेम और निष्ठा का प्रदर्शन किया, और यही एक सशक्त, एकजुट भारत की पहचान है।

amitsrivastav.in google website पर देवरिया से दिलीप कुमार की रिपोर्ट।

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