प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

Amit Srivastav

Updated on:

देवरिया। प्राकृतिक खेती को केवल विकल्प नहीं अनिवार्य रूप से देखा जाए। वर्तमान समय में जब रासायनिक खेती के दुष्परिणाम न केवल खेतों की उपजाऊ मिट्टी को खोखला बना रहे हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी गंभीर संकट की ओर धकेल रहे हैं, ऐसे में प्राकृतिक खेती को केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता के रूप में देखा जाना चाहिए। यही संदेश लेकर कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप – भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी) के मल्हना, देवरिया स्थित सभागार में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह प्रशिक्षण ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ के तहत पाँच दिवसीय सत्र के रूप में कृषि विभाग, देवरिया द्वारा कृषि सखियों के लिए संचालित किया गया, जिसमें प्राकृतिक खेती की बारीकियों को समझाने और उसे व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी गई। इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मांधाता सिंह ने अपने वक्तव्य में प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि जिस तरह से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग खेती की मूल आत्मा को नष्ट कर रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए खेती करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। प्राकृतिक खेती न केवल जैव विविधता को पुनर्जीवित करती है, बल्कि किसान की आत्मनिर्भरता और लागत घटाकर लाभ में भी वृद्धि करती है।

प्राकृतिक खेती केवल विकल्प नहीं है अनिवार्य है

प्राकृतिक खेती केवल विकल्प नहीं है अनिवार्य।

कार्यक्रम में शामिल केंद्र के उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने गौ आधारित खेती की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती का आधार गाय है, और ‘बीजामृत’ इस पद्धति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने बताया कि बीजामृत के माध्यम से बुवाई से पहले बीजों का शोधन किया जाता है, जिससे बीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। डॉ. श्रीवास्तव ने बीजामृत तैयार करने की विधि भी विस्तारपूर्वक बताई—जिसमें देसी गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी का प्रयोग किया जाता है।

इस प्रक्रिया से केवल बीज ही नहीं, बल्कि खेत की मिट्टी भी पुनर्जीवित होती है। यह विधि हजारों वर्षों पुरानी भारतीय परंपरा की देन है, जो आधुनिक समय में फिर से पुनर्जीवित हो रही है।

सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. कमलेश मीना ने ‘जीवामृत’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्राकृतिक खाद पौधों की वृद्धि, पोषण और मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ाने में एक क्रांतिकारी भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि जीवामृत के प्रयोग से खेत की सूक्ष्म जैविक संरचना सशक्त होती है, जिससे भूमि की उर्वरता में सतत वृद्धि होती है। डॉ. मीना ने जीवामृत तैयार करने की तकनीकी जानकारी देते हुए यह स्पष्ट किया कि यह तरल खाद तैयार करने के लिए गोमूत्र, गोबर, गुड़, बेसन और पानी का उपयोग किया जाता है, जो आसानी से हर किसान के घर में उपलब्ध होता है। इस प्रकार प्राकृतिक खेती की यह विधियां आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का मार्ग खोलती हैं।

गृह विज्ञान विशेषज्ञ श्री जयकुमार ने इस अवसर पर कृषि और मानव स्वास्थ्य के अंतर्संबंध पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण उत्पन्न जहरीले अवशेष न केवल हमारे भोजन में प्रवेश कर जाते हैं, बल्कि वह धीरे-धीरे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से न केवल हम शुद्ध और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि यह बच्चों से लेकर वृद्धों तक के स्वास्थ्य को दीर्घकालीन लाभ प्रदान करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से गृह विज्ञान के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के साथ जुड़कर एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

कार्यक्रम में पशु जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. अंकुर शर्मा ने प्राकृतिक खेती में गौधन की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पशुधन के खेती अधूरी है और विशेष रूप से गाय का गोबर व गोमूत्र प्राकृतिक खेती के दो ऐसे स्तंभ हैं, जो संपूर्ण खाद्य श्रृंखला को जैविक बना सकते हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि गोबर से न केवल खाद बनती है, बल्कि गोमूत्र का प्रयोग कीटनाशक के रूप में भी किया जा सकता है। इससे कीटों पर नियंत्रण होता है, लेकिन लाभकारी जीवों को नुकसान नहीं पहुंचता, जिससे खेत का पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। उन्होंने बताया कि एक स्वस्थ गौधन केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि कृषि की रीढ़ की हड्डी है।

इस प्रेरणादायक प्रशिक्षण में राजमती देवी, किरण देवी, सीमा देवी, शीला देवी, रीता देवी, कंचन देवी, अनीता देवी सहित कुल ५४ कृषि सखियों ने भाग लिया। इन महिलाओं ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर यह सिद्ध किया कि यदि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिया जाए, तो ग्रामीण महिलाएं भी कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार की प्रतीक बन सकती हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों को न केवल सुना, बल्कि व्यवहारिक रूप से उन्हें बनाना भी सीखा, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर इसका प्रचार-प्रसार कर सकें। यह प्रशिक्षण न केवल ज्ञानवर्धक था, बल्कि भारत के कृषि भविष्य को टिकाऊ और समृद्ध बनाने की दिशा में एक ठोस पहल भी सिद्ध हुआ।

amitsrivastav.in पर बने रहने के लिए बेल आइकन को दबा एक्सेप्ट करें एप्स इंस्टाल करें अधिक से अधिक लोगों को शेयर करें। गूगल टाप वेबसाइट amitsrivastav.in

click on the link ब्लाग पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav
कर्म का फलकर्म का फलMarch 24, 2024Amit Srivastav
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

निधि सिंह कौन है? अंतरराष्ट्रीय शांति और सामाजिक जागरूकता को लेकर निधि सिंह की पहल चर्चा में

अंतरराष्ट्रीय शांति और सामाजिक जागरूकता को लेकर निधि सिंह की पहल चर्चा में जाने पूरी जानकारी यहां एक क्लिक में। नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट अंतराष्ट्रीय सहयोग, सामाजिक जिम्मेदारी, मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े प्रयासों के बीच निधि सिंह को स्वयंसेवी सेवा से संबंधित एक प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। United Nations … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

Journalism पत्रकारिता का संपूर्ण इतिहास: प्राचीन काल से आधुनिक युग तक – गुप्त रहस्यों के साथ विश्लेषणात्मक अध्ययन

पत्रकारिता का संपूर्ण इतिहास: “Journalism” प्राचीन काल से आधुनिक युग तक – गुप्त रहस्यों के साथ विश्लेषणात्मक अध्ययन का रहस्यमयी सफर: प्राचीन काल से गोदी मीडिया तक। फेक न्यूज़ का प्रभाव और भारत में सत्य की जंग। इतिहास और वर्तमान का रोचक विश्लेषण। The Complete History of Journalism: An Analytical Study/Analytical study of the entire … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

JINDAGI JHAND HAI PHIR BHI GHAMAND HAI: जिंदगी झंड है, फिर भी घमंड है: आज के युवक-युवतियों और दम्पतियों पर 1 हास्यास्पद व्यंग्यात्मक डिजिटल प्रेमकथा

jindagi jhand hai phir bhi ghamand hai — आज की जिंदगी बड़ी तेज हो गई है। इतनी तेज कि आदमी को खुद समझ नहीं आता कि वह जिंदगी जी रहा है या जिंदगी उसे जी रही है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल हाथ में आ जाता है, रात आंख बंद होने से पहले आखिरी बार … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

विकसित भारत की संकल्पना के शिल्पकार है नरेंद्र मोदी: September 17 सभा कुंवर कुशवाहा

उत्तर प्रदेश देवरिया। September 17 बृहस्पतिवार को भाटपार रानी मंडल के भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने मंडल अध्यक्ष विशंभर पांडेय की अध्यक्षता में भाटपार रानी उपनगर स्थित हरि ब्रह्मा बाबा के मंदिर में देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर स्वच्छता कार्यक्रम के अंतर्गत साफ-सफाई किया। एवं ग्राम पंचायत बेलपार पंडित … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

बॉलीवुड कैलाश खेर सिंगर ने मिस एशिया वर्ल्ड विनर निधि सिंह से की मुलाकात, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

बॉलीवुड कैलाश खेर सिंगर ने मिस एशिया वर्ल्ड वियतनाम विनर निधि सिंह से मुलाकात कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। जानिए निधि सिंह की उपलब्धियों, सामाजिक सेवा, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से जुड़ी पूरी खबर। एंकर: बॉलीवुड के मशहूर और लोकप्रिय गायक कैलाश खेर ने मिस एशिया वर्ल्ड वियतनाम की विनर निधि सिंह … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

Sex Positions तंत्र, धर्म, विज्ञान और ज्योतिष के 5000 वर्षों के छुपे राज

Sex Positions सेक्स पोजीशन का गुप्त रहस्य वो गुप्त ज्ञान जो कभी आम लोगों को नहीं बताया गया — पूर्ण दांपत्य सुख और आत्मिक मिलन का प्रतिबंधित मार्गदर्शक amitsrivastav.in लेखक: अमित श्रीवास्तव विषय सूची भूमिका भाग 1 — छुपा हुआ इतिहास अध्याय 1: वो गुप्त शास्त्र जो सदियों तक छुपाए गए अध्याय 2: कामसूत्र का असली … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

माँ की ममता — wonderful महाग्रंथ श्रृंखला खंड 1,2,3

क्या हम सचमुच अपनी माँ को समझ पाए हैं? “माँ की ममता” महाग्रंथ-श्रृंखला — केवल एक पुस्तक नहीं, समाज के आत्ममंथन का दस्तावेज़ है जहाँ माँ पर बहुत लिखा गया है। कविताएँ लिखी गईं, गीत लिखे गए, कहानियाँ लिखी गईं, आँसू बहाए गए, श्रद्धा व्यक्त की गई और माँ को धरती पर ईश्वर का रूप … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

सुखी दांपत्य जीवन: प्रेम, सम्मान और संवाद की संपूर्ण यात्रा

क्या केवल विवाह कर लेना ही सुखी दांपत्य जीवन की गारंटी है?यदि ऐसा होता, तो दुनिया में इतने अधिक वैवाहिक तनाव, बढ़ती दूरियाँ, लगातार होने वाले विवाद, भावनात्मक अकेलापन और टूटते रिश्ते दिखाई नहीं देते। वास्तविकता यह है कि विवाह जीवन की सबसे सुंदर यात्राओं में से एक है, लेकिन यह सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

क्या वास्तव में होती हैं अप्सराएँ? mrigakshi apsara का रहस्य, शास्त्रीय परंपरा, तांत्रिक विमर्श और 1 आध्यात्मिक दृष्टि

क्या अप्सराएँ केवल पौराणिक कथा हैं या भारतीय शास्त्रों का गहन प्रतीक? Mrigakshi Apsara मृगाक्षी अप्सरा, वैदिक संदर्भ, शक्ति परंपरा और शोधपरक तंत्र-मंत्र साधना विधि-विधान के साथ विश्लेषण पढ़ें। पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा अप्सरा साधना महाग्रंथ श्रृंखला 64 में प्रथम शिर्षक मृगाक्षी अप्सरा साधना महाग्रंथ mrigakshi apsara mantra सम्पूर्ण विधि-विधान सहित amozan पर eBook एवं … Read more
प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग | काल भैरव मंत्र, पूजा विधि और उपाय

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग काल भैरव की पूजा विधि, मंत्र और उपाय भगवान बटुक भैरव की पूजा विधि, शक्तिशाली कार्य सिद्धि मंत्र, अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्र, कवच पाठ और शत्रु नाशक प्रभावी उपाय जानिए। कालभैरवाष्टमी पर विशेष प्रयोग से असंभव कार्य सिद्ध होंगे और शत्रु परेशान करना छोड़ देंगे। भैरव कृपा प्राप्त … Read more

4 thoughts on “प्राकृतिक खेती: वर्तमान समय की अनिवार्यता – कृषि विशेषज्ञों की चेतावनी और मार्गदर्शन”

  1. देवरिया कि खबर पढ़कर आपके वेबसाइट पर बहुत अच्छा लगा मै देवो कि नगरी देवरिया से आपके सभी लेखो को नियमित पढता रहता हूं।

    Reply
  2. अच्छी खबर ऐसी जानकारी हर किसी के पास पहुंचनी चाहिए।

    Reply

Leave a Comment