गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

Amit Srivastav

Updated on:

गोरखनाथ —सदियों से भारत की लोक कथाओं और पौराणिक कहानियों में अनेक रहस्यमई पात्रों और घटनाओं का उल्लेख मिलता है। जो जनमानस के दिलों में गहराई तक समाए हुए हैं। इनमें से कुछ कहानियां तो इतनी गूढ़ और रोचक है कि समय के साथ उनका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी ही एक अद्भुत और रहस्यमयी कथा है, गुरु गोरखनाथ की, जो शिव के अवतार माने जाते हैं। गोरखनाथ से जुड़ी कहानियां योग, तंत्र और अध्यात्म के गहरे रहस्यों को उजागर करती हैं।


इस लेख में हम भगवान चित्रगुप्त वंशज अमित श्रीवास्तव आपको गोरखनाथ की एक विशेष कथा से परिचित कराने जा रहे हैं। इसमें सोरठी व बिरजाभार, जुड़वा बहने जादूगरनी हिरीया-जिरीया की कहानी का वर्णन है। यह कथा न केवल गोरखनाथ की महानता को दर्शाती है, बल्कि उनके जीवन के उस अंश को भी उजागर करती है, जिसमें उन्होंने असम के कामाख्या क्षेत्र में एक अद्वितीय अनुभव किया।


यह लेख आपको उन गुप्त और रोमांचक रहस्यों की ओर ले जाएगा, जिन्हें जानकर आप दंग रह जायेगें। इस धार्मिक और ऐतिहासिक इतिहास में आप पाएंगे कि कैसे गुरु गोरखनाथ को पराजय का सामना करना पड़ा और कैसे यह कथा असम की तांत्रिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। यहां पर आपको गोरखनाथ की ज्ञान की गहराइयों और शब्द साधना की अद्भुत दुनिया की झलक मिलेगी जो आज भी हमारे समाज में विद्यमान है।
प्रेम से बोलिए शिवधारी गुरु गोरखनाथ की जय!

कथा कहानी के पात्रों का परिचय:

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

गोरखनाथ का परिचय आप सबको पिछले लेखनी में दे चूका हूं और आप सभी भक्त जन परिचित हैं। सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया का परिचय देते हुए कथा कहानी को सरल भाषा में आगे बढ़ा रहे हैं। सोरठी विरजाभार भोजपुरी भाषा का प्रेमकाव्य है जो नाट्यकला व गीतों के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में गाया सुना जाता है। सोरठी सोरठपुर के राजा उदयभान सिंह की बेटी थी। उदयभान निसंतान राजा था, बड़ी मन्नत के बाद राजा को अपनी पत्नी रानी कमलावति की गर्भ से एक बेटी हुई।

जिसकि कुंडली देखने व नामकरण करने के लिए राजा ने पुरोहित को बुलाया। पुरोहित कुंडली और हस्तरेखा देख आश्चर्यचकित हो गया। कुंडली व भाग्य रेखा के अनुसार जन्मीं पुत्री बुद्धि विवेक और सद्गुण की खान थी। पुरोहित कुंठित हो अपने कुटिलता का परिचय दे, उदयभान से कहा कि यह पुत्री राज्य के लिए अशुभ है, इसे नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। राजा को अपने पुरोहित के बातों पर विश्वास हो गया और दुःखित मन से राजा, पुत्री को नदी में प्रवाहित करा दिया।

नदी में बहती नन्ही सी बेटी, एक निसंतान केका कुम्हार को दिखीं और केका उस बेटी को नदी से निकाल अपने घर ले गया। पत्नी बहुत खुश हुई दोनों ने मिलकर पाल-पोस युवा अवस्था प्रदान किया। इस बीच पुत्री को पाने के साथ ही गुणों कि खान भाग्यशाली पुत्री की वजह से केका के घर धन दौलत बढ़ने लगा। बेटी बहुत रुपवान, भाग्यशाली व गुणवान थी। उसके रुप व भाग्य पर पुरोहित पहले से ही मोहित था। एक दिन पुरोहित की नज़र उस बेटी सोरठी पर पड़ गई और पहचान लिया।

पुरोहित ने केका से सोरठी को मांगा, केका ने अपनी बेटी राज पुरोहित को देने से इंकार कर दिया। फिर पुरोहित कुचक्र रचना शुरू किया और राजा उदयभान के पास जाकर सोरठी के रूप लावण्य का बखान कर विवाह करने के लिए प्रेरित किया। राजा उदयभान सिंह बारात लेकर केका कुम्हार के घर पहुंच गया। सोरठी भविष्य द्रिष्ठा थी, सिंदूरदान के समय अपने पिता की हाथ पकड़ पुरोहित की सारी करतूतों को बता दी।

उदयभान अपनी बेटी कि सारी बातें सुनकर आश्चर्य चकित हो गया और पुरोहित को राजदरबार में बुलाकर सैनिकों को आदेश दे, नाक-कान, हाथ कटवा दिया। फिर राजा उदयभान अपनी पुत्री को बड़ी धूमधाम से केका कुम्हार के घर से महल ले गया। जो एक मात्र संतान थी और राज्य का उत्तराधिकारी थी।


दक्षिण के राजा टोडरमल सिंह की रानी को गुरु गोरखनाथ के आशिर्वाद से एक पुत्र प्राप्त था, जिसका नाम विरजाभार रखा गया था। बड़ा भाग्यशाली और कुशल योद्धा गोरखनाथ का शिष्य विरजाभार तंत्र विद्या का जानकार था। किशोरावस्था प्राप्त होते विरजाभार का विवाह राजा हांचल की पुत्री हेमन्ती से हो गया। शादी में मामा खेखरमल अपनी अस्वस्थता के कारण नही आ सके थे। जिनसे विवाहोपरांत आशिर्वाद लेने विरजाभार वर्तमान के गुजरात राजा खेखरमल के यहां गया।

विरजाभार के मामा राजा खेखरमल को कुष्ठ रोग हो गया था। व्यास ऋषि ने राजा खेखरमल को बताया सोरठपुर के राजा उदयभान सिंह कि बेटी सोरठी से अगर आप का विवाह हो जाता है, तो आपका कुष्ठ रोग सदा-सदा के लिए ठीक हो जाएगा। सोरठपुर जाने के लिए राजा खेखरमल अपने भांजा विरजाभार का चयन किया। विरजाभार तमाम बाधाओं को पार करते अमरपुर पहुंचा जहां तीन सो राजकुमारियां अविवाहित थीं।

अमरपुर में कोई भी पुरुष नही था, क्योंकि वो राजकुमारियां अपनी तंत्र विद्या से सभी को तोंता बना रखीं थीं। बृजभार के गठीले यौवन को देख सब आसक्त हो गई और शादी की जिद्द करने लगीं। विरजाभार उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया तो वे राजकुमारियां तोता बना अपनी तंत्र विद्या में बांध रख लीं। येन-केन-प्रकारेण आजाद हो सोरठपुर पहुंचा जहां राजा उदयभान सिंह का हुक्म था, राज्य में किसी युवा पुरुष को प्रवेश न होने दिया जाए। सिपाहियों का सीमा पर पहरा था।

फिर अपने तंत्र विद्या से वृद्ध रुप धारण कर विरजाभार राज्य में प्रवेश कर गया और राजा के फूलवारी में चला गया। यह दृश्य सोरठी को दिख रहा था। सोरठी फुलवारी में जाकर विरजाभार से मिली। विरजाभार सोरठी से अपने मामा का सारा वृतांत बताया, सोरठी विरजाभार का प्रस्ताव मान मामा से शादी करने के लिए हामी भर दी। सोरठी अपनी तांत्रिक मालिन के साथ इंद्र के रथ पर सवार होकर विरजाभार को साथ ले गुजरात खेखरमल के सामने जा पहुंची।

सोरठी पर खेखरमल का नजर पड़ते ही कुष्ठ रोग खत्म हो गया। खेखरमल सोरठी से दोगुना अधिक उम्र का वृद्ध था। जो अपनी ढल चुकी उम्र का हवाला दे विरजाभार से विवाह करने को कहा। मामा के कहने पर विरजाभार सोरठी से विवाह कर लिया। निसंतान राजा खेखरमल अपना राजपाट भांजा विरजाभार को दे संन्यास को चला गया। विरजाभार व सोरठी गोरखनाथ के मार्गदर्शन में राज पाठ चलाते धर्म मार्ग पर चलते रहे।


हिरीया जिरीया दो जुड़वा बहनें थीं जो वर्तमान के असम राज्य के कामरुप जिले में निलांचल पर्वत पर स्थापित मां कामाख्या देवी कि भक्त त्रिया राज्य जादूई नगरी कि रहने वाली थीं। विरजाभार को पाकर अपना रात्रि विश्राम स्थान चार गोला रातावाड़ी वर्तमान के करीमगंज जिले का चयन कर 12 वर्षों तक यौन सुख भोग की थीं।

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी, विरजाभार, हिरीया, जिरीया:

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

क्या आपको पता है गोरखनाथ को पराजय किससे मिला, गोरखनाथ ने अपनी पराजय कहाँ स्वीकार किया? तो आज की कथा में इस प्रश्न का जवाब निहित है। गुरु गोरखनाथ की कथा कहानी से बहुत लोग परिचित हैं, हमारे लाखों मिलियन पाठकों को गुरु गोरखनाथ की सम्पूर्ण जीवन गाथा जानने की इच्छा भी रहती है। इसी क्रम में गुप्त गाथा को आज बताने जा रहे हैं।

नियमित कोई न कोई पाठक हमारे साइट व पोस्ट में पड़े सम्पर्क नम्बर पर सम्पर्क भी किया करता है और आगे जानकारी कि इच्छा प्रकट करता है और प्रकाशित लेखनी में मिला कुछ संदेहास्पद शब्दों पर चर्चा भी करता है। मुझे अपने पाठकों के तर्कसंगत बातों से खुशी होती है। इसलिए मधुरता से जानकारी देना, स्पष्ट करना, अपनी कर्म धर्म समझ – दुविधा दूर करने, कर्तव्य निभाने का सदैव प्रयास करता हूं। ताकि पाठकों को गुप्त रहस्यों कि सटिक जानकारी हो और लेखनी से संतुष्ट हों।

अपनी कर्म-धर्म लेखनी को आगे बढ़ाते हुए, आज शिव अवतारी गुरु गोरखनाथ की कथा में सोरठी के पति विरजाभार और दो सगी बहनें जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी बता रहे हैं। जिसपर पिछले कई वर्षों से तमाम जगहों पर सत्यता कि खोज में भटकते हुए असम राज्य के करीमगंज जिले के चार गोला रातावाड़ी सहित कामाख्या व त्रिया राज्य जादूई नगरी कि सीमा रेखा तक का सफ़र करना पड़ा। गुरु गोरखनाथ की कथा में एक ऐसी गुप्त रहस्य को उजागर करुंगा जिससे शायद आप पाठक पूरी तरह से अनभिज्ञ हों।

यह सबको पता है, सृष्टि में जो भी जन्म या अवतार लिया किसी न किसी से पराजित जरुर हुआ है, तो आज इस कथा में बताऊंगा गुरु गोरखनाथ किससे कब और कहां पराजित हुए। यह कथा बहुत ही रोचक जानकारी देने वाली है। इस लिए प्रेम से बोलिए शिव अवतारी गुरु गोरखनाथ की जय और अपने किमती समय में से समय निकाल पढ़ते रहिए क्रमशः हमारी एक-एक खुलासे के साथ रहस्यमयी लेखनी। तमाम सिरियल धारावाहिक में दिखाया गया है, जिससे आप सबको पता है गुरु गोरखनाथ ने ज्वाला देवी व मां काली तक को पराजित किया।

जबकि ऐसा नहीं था कि मां ज्वाला देवी व मां काली गुरु गोरखनाथ से पराजित हुई वो महज एक गोरखनाथ की परिक्षा थी, जो माँ काली को गोरखनाथ अपने उदर में समाहित किए। मां काली ने शिव अवतारी गोरखनाथ की परिक्षा ली थी, लेकिन गुरु गोरखनाथ ने अपनी पराजय कहाँ स्वीकार किया यह आज बताने जा रहे हैं।

मछनदरनाथ को त्रिया राज्य से छुड़ाकर लाने के बाद हुआ गोरखनाथ को अभिमान:

बारह वर्षों से मछनदरनाथ त्रिया राज्य में रह रहे थे। नाथ संप्रदाय की बदनामी हो रही थी। तब गुरू गोरखनाथ अपने गुरू की तलाश पूरी कर त्रिया राज में रानी मैनांकनी के महल महेंन्द्रगढ़ की नर्तकियों  के साथ स्त्री भेष में जाकर, पवनपुत्र हनुमान जी जो त्रिया राज्य की पहरेदारी करते – को पराजित कर अपने गुरु मछनदरनाथ को छुड़ाकर लाएं।


गोरखनाथ महेंद्रगढ़ की नर्तकियों के साथ स्त्री भेष में त्रिया राज्य जादूई नगरी में प्रवेश कर रानी मैनांकनी से अपने गुरु मछनदरनाथ को छुड़ाकर लाने के बाद घमंडी हो चुके थे। क्योंकि जहां पुरुष अपनी इच्छा से प्रवेश तो करता है किन्तु निकलने का कोई मार्ग नहीं देख पाता। त्रिया राज्य जादूई नगरी में प्रवेश के बाद पुरुष अनायास ही खिंचकर जादूगरनीयों के शिकंजे में फंस जाता है और वहां रहने वाली जादूगरनीयां उस पुरुष को अपने भोग-विलास का साधन बना रख लेती हैं।

उनकी इच्छा के बिना निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता, न कोई उनकी इच्छा के बिना निकल पाता है।

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

यह स्थिति आज भी बरकरार है। इस लिए यहां सीमा रेखा से पहले ही जगह-जगह बोल्ड लगा हुआ है, त्रिया मारकोट का जंगल प्रवेश निषेध। इस त्रिया राज्य के पहरी शिव अवतारी पवनपुत्र हनुमानजी आदि काल से हैं। इस त्रिया प्रदेश का इतिहास तंत्र विद्या के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का आदि काल से ही धर्म ग्रंथों में प्रमाण भी मिलता है।

महाभारत काल में भीम पत्नी घटोत्कच की माता हिडिम्बा, घटोत्कच की पत्नी बर्बरीक की माता मोरंगी, कृष्ण के पौत्र प्रद्युम्न का अपहरण करने वाली जादूगरनी चित्रलेखा आदि का इतिहास त्रिया राज्य जादूई नगरी कामाख्या से जूड़ा हुआ है। कामाख्या शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में प्रथम स्थान हासिल है शिव प्रिया सती का यहां योनी भाग स्थापित है। इसलिए कामाख्या देवी को योनी शक्तिपीठ भी कहा जाता है।

विस्तार से पढ़ने जानने के लिए यहां ब्लू लाइन पर क्लिक किजिये पढ़िए प्रथम कामाख्या शक्तिपीठ योनी पीठ सृष्टि का केन्द्र बिन्दु मोंक्ष का द्वार यही है जादूई नगरी त्रिया राज।

विश्व भर के बड़े-बड़े सिद्ध तांत्रिकों की सिद्धि का केंद्र यहीं है। नाथ संप्रदाय से जुड़े मुस्लिम सूफ़ी सन्त इस्माइल जोगी की शिष्या लोना चमारी जिसके नाम से अनेकों शावर मंत्र चलता है, खटकर्म करने वाले तांत्रिक अपनी तंत्र विद्या में लोना चमारी की दुहाई देते हैं, पंजाब प्रांत के चमरी गांव की एक खुबसूरत लडकी से जुड़ी हुई ऐतिहासिक इतिहास है, जो अब त्रिया राज्य कि तांत्रिक जादूगरनी मानी जाती है।

-लोना चमारी का वशीकरण सिद्ध मंत्र-
कामरू देश कामाख्या देवी,
जहां बसे इस्माइल जोगी।
इस्माइल जोगी की लगी फूलवारी,
फूल चूनैं लोना चमारिन।
जो लेई यहु फूल की बास,
वहिकी जान हमारे पास।
घर छोडै़ घर-आंगन छोडै़,
छोडै़ कुटुम्ब की मोह लाज।
दुहाई लोना चमारिन की।

विस्तार से पढ़ने जानने के लिए यहां ब्लू लाइन पर क्लिक किजिये पढ़िए तांत्रिकों की देवी लोना चमारिन की आपबीती ऐतिहासिक इतिहास पूरी पृष्ठभूमि को उजागर किया हूं, इस आर्टिकल में यह भी बताया हूं आखिर 12-14 साल की छोटी सी उम्र में क्यों बनी लोना एक सिद्ध तांत्रिक, अपने इज्जत के लूटेरो, 12 ठाकुरों के खानदान से कैसे ली बदले की आग में जल रही गरीब चमार परिवार की खुबसूरत लडकी- बदला, फिर क्या हुआ? सब स्पष्ट रूप से पर्दाफ़ाश लेखनी में।

इस कहानी में हिरीया जिरीया दोनों बहनें भी यही कि सिद्ध तांत्रिक जादूगरनी हैं तो अब आप समझ चुके होगें असम के कामाख्या शक्तिपीठ और त्रिया राज्य जादूई नगरी के सम्बन्ध में तो आगे बढ़ते हैं सोरठी पती विरजाभार और गुरु गोरखनाथ की तरफ़।

गोरखनाथ द्वारा सोरठी पती विरजाभार की तलाश यात्रा:

सोरठी गुरु गोरखनाथ की शिष्या थी। सोरठी को गुरु गोरखनाथ के मार्गदर्शन में तंत्र विद्या प्राप्त थी। विवाह के कुछ वर्षों बाद विरजाभार गायब हो गए, वृजाभार की तलाश में गोरखनाथ बर्तमान के असम राज्य जा रहे थे। असम राज्य में पहुंच रास्ते में भुख महसूस हुई, जहां एक आम का बागीचा था। तपती धूप से राहत पाकर गोरखनाथ बगीचे में विश्राम करने बैठ गए, तब तक एक पेड़ से पक्का आम टपका और गोरखनाथ उसे उठाकर भोग लगा खाने लगे।

उसी समय उस बगीचे का पहरी आया और गोरखनाथ जी को खरी-खोटी सुनाने लगा। गोरखनाथ ने कहा भुख लगी थी, बच्चा आम गीरा और मै उठाकर भोलेनाथ का प्रसार मान ग्रहण कर लिया। शांत हो जाओ एक आम खा लेने से आपको कुछ कमी नहीं होगी। फिर भी वो पहरी मान ही नही रहा था और खरी-खोटी सुनाता ही रहा। तब गोरखनाथ नाराज होकर श्राप दिये – जा एक भुखे संत को एक आम खा लेने से इतना चिल्ला रहे हो- इस क्षेत्र में पेड़ से पका आम किसी को खाने को मोंहसर नहीं होगा।

गोरखनाथ के उस श्राप से आज भी असम के उस क्षेत्र में पेड़ पर आम पकता है तो कीड़े हो जाते हैं, किसी को पेड़ से पका हुआ आम खाने को नसीब नहीं होता।

गोरखनाथ को दिखे तोंता रुप में विरजाभार वहीं जादूगरनी हिरीया जिरीया से हुई मुलाकात:

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

वहां से धीरे-धीरे आगे विरजाभार का पता करते बढ़ते हुए कामरुप जहां अपनी काम की इच्छा से कोई भी अपना रुप धारण करने की विद्या जानता था गोरखनाथ पहुंच गए। निलांचल पर्वत पर कामाख्या देवी का दर्शन पूजन किया और विरजाभार की तलाश करने लगे। अपनी तंत्र विद्या के बल से गोरखनाथ उस स्थान पर पहुंच गए, जहां विरजाभार एक तोता के रूप में रहते थे। उनकी वह दशा देख दया आ गई, किन्तु उन्हें वास्तविक रूप देने में समर्थ नही हो पा रहे थे, न ही विरजाभार तक उस पिपल के वृक्ष पर जा पा रहे थे।

तालाब के किनारे पिपल बृक्ष के पास धीरे-धीरे दिन ढलता गया, संध्या के बाद रात होने लगी। रात्री होते-होते वहां दो सुंदर युवा युवतियां जल मार्ग से एक नाव में बैठकर आ पहुंची। वो दोनों जुड़वा बहनें ही हिरीया जिरीया थीं जो तंत्र विद्या में महारत हासिल कर ली थीं।


सुबह सूर्य की लालिमा आते वह अपने रात्रि विश्राम स्थान से एक नाव में बैठकर जल मार्ग से कामाख्या शक्तिपीठ पर जाती, 300 किलोमीटर की जल यात्रा छड़ भर में पूरी करती थीं। यहां बुजुर्गों द्वारा दंतकथा से ज्ञात हुआ, जब दोनों जुड़वा बहनें अपने रात्रि निवास स्थान चार गोला रातावाड़ी, इस तालाब से सुबह सूर्योदय के समय यात्रा प्रारंभ करती थीं, तब इस जल मार्ग से ब्रह्मपुत्र नदी में इधर से उल्टी धारा में जो जहां देखता एक छड़ के लिए दिखाई दे बहुत तेज़ी से जाती हुई दिखती थीं।

संध्या काल में वो पूजा अर्चना कर वापस होतीं और सूर्यास्त होते-होते ही अपनी रात्रि विश्राम स्थान पर यहां पहुंच आती थीं। सुबह-शाम देवी कामाख्या की पूजा-अर्चना करती थीं और दिन में वो त्रिया राज जादूई नगरी में रहती थीं। और रात्रि अपने विश्राम स्थान पर यहां विरजाभार को मनुष्य रुप प्रदान कर यौनसुख भोगा करती थीं। सुबह जाने के साथ ही तोंता बना इस पिपल बृक्ष पर अपनी तंत्र विद्या से बांध दिया करती थीं।

हिरीया जिरीया और गोरखनाथ:

जब हिरीया जिरीया और गोरखनाथ का एक दूसरे से परिचय हुआ फिर गोरखनाथ ने कहा कि यह शादी-शुदा हमारी शिष्या सोरठी का पती विरजाभार है। इसे अपनी बंधन से अब मुक्त कर दो, इसे ले जाने के लिए मै आया हूं। हिरीया जिरीया दोनों बहनों को गोरखनाथ का यह कथन उचित नहीं लगा और वो विरजाभार को अपने बंधन से मुक्त कर गोरखनाथ के साथ जाने देने के लिए तैयार नही हुई।

गोरखनाथ अपनी जिद्द पर अड़े हुए थे, तब दोनों बहनों ने कहा अगर हमें अपनी तंत्र विद्या से पराजित कर दोगे, तो इसे अपनी बंधन से मुक्त कर दूंगी। हिरीया जिरीया और गोरखनाथ में घमासान तांत्रिक युद्ध हुआ और गोरखनाथ हिरीया जिरीया से तंत्र विद्या की युद्ध में पराजित हो अपने को बचाकर यहां से हार मान अपने तपोभूमि पर चले गए। यहीं गोरखनाथ तांत्रिक जादूगरनी दो सगी जुड़वा बहनें हिरीया जिरीया से पराजित हुए थे।

तांत्रिक जादूगरनी हिरीया जिरीया का रात्रि विश्राम स्थान:

कामरूप कामाख्या योनी पीठ से यह स्थान जल मार्ग ब्रह्मपुत्र नदी होते हुए लगभग 300 किलोमीटर दूर, रेल व बस मार्ग से लगभग 400 किलोमीटर दूर वर्तमान के करीमगंज जिले में चार गोला रातावाड़ी के समीप स्थित है। यहां तीन किलोमीटर दूर एक कछार सुगर मील है। हिरीया जिरीया का रात्रि निवास स्थान एक रहस्य से भरा हुआ है। यहां इर्द-गिर्द पहले लोगों की बस्ती नही थी। अब इस तालाब से कुछ दूरी पर गांवों की बस्ती हो चुकी है। फिर भी तालाब के आस पास कोई घर नही है। सुनसान स्थान पर एक बड़ा तालाब है।

तालाब के किनारे एक पिपल बृक्ष, जो बहुत बड़ा नही है, देखने से प्रतीक होता है यह पिपल बृक्ष लगभग 15-20 साल ही पुराना होगा लेकिन यहां बुजुर्गों का कहना है कि हम बचपन से इस पिपल बृक्ष को इतना बड़ा ही देखते-देखते बृद्ध हो चुके हैं और अपने पूर्वजों से भी यही सूना है कि यह बढ़ता-घटता नही है, न ही इस पिपल बृक्ष का पतझड़ हो पत्ता आता है। पहले इस बृक्ष में पत्ता आ जाता है, फिर पतझड़ होता है। जबकि ऐसा पिपल बृक्ष में नही होता है, जैसा इस तालाब किनारे स्थित बृक्ष मे होता है।


इस तालाब के मध्य पानी में एक ठूंठ पेड़ है जो वट वृक्ष जैसा दिखाई देता है। इसमें हमेशा किसी भी तरफ़ से गिनने पर पांच पत्ता दिखता है। इस तालाब से एक सोता निकला है जो ब्रह्मपुत्र नदी में मिलता है, ब्रह्मपुत्र नदी के जल से इस जल का लगाव बना रहता है और इस तालाब में कोई जाकर ठूंठ पेड़ छूने की कोशिश नही करता। बताया जाता है जो भी इस तालाब में पेड़ के समीप जाने की सोच रख गया, वो कितना भी तैराकी क्यो न हो, तालाब में डूब मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।


इस तालाब से एक सोता नाला निकला है जो ब्रह्मपुत्र नदी और तालाब के पानी को मिलाये रखता है। पहाड़ी एरिया है, जब वर्षाकाल में पानी ज्यादा होती है और तालाब भरा या ब्रह्मपुत्र नदी का पानी बढ़ता है, तो तालाब का भी पानी लेबल उठता है, फिर भी तालाब के बीच पानी में ठूठ वट-वृक्ष पानी के सतह से लगभग दो तीन हाथ ऊपर दिखता है। यह स्थिति रौगटें खड़ी कर देने वाली सत्य है, कि जादूई तालाब वास्तव में तंत्र-मंत्र साधना और जादू टोना पर भरोसा दिलाने वाला है।

गोरखनाथ तंत्र युद्ध में हुए जादूगरनी जुड़वा बहनें हिरीया जिरीया से पराजित फिर – चली सोरठी विरजाभार को छुड़ाने:

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

गोरखनाथ हिरीया जिरीया जादूगरनी से हार कर आने के बाद, पूरी वृतांत सोरठी को बताया। अब सोरठी अपने पति विरजाभार को छुड़ाने उस स्थान पर पहुंच गई जहां दिन में तोंता के रूप पिपल बृक्ष पर तंत्र मंत्र कि बंधन में बंधे वृजाभार रहते थे। सोरठी का तंत्र विद्या विरजाभार को मूल रूप दे, नीचे उतार पाने में असमर्थ हो गया। धीरे-धीरे दिन व्यतित हो, संध्या काल के बाद रात्रि होने लगी।

तब तक दोनों सगी बहनें हिरीया जिरीया एक नाव से तालाब में आ पहुंची और पिपल बृक्ष के पास आकर, यहां बैठी सोरठी से आने का कारण पूछा, सोरठी अपनी व्यथा बता, पति से दूर होने की दुख प्रकट कर, हिरीया जिरीया से आग्रह करने लगी, कि मेरे पति को मुक्त कर मेरा सुहाग दान दे दो बहन। सोरठी के आग्रह पर जादूगरनी हिरीया जिरीया दोनों बहनों को दया आ गई और कहा जब तुम बहन मान अपनी सुहाग दान मांग रही हो तो बहन होने का अपनी फर्ज अदा कर तुम्हें अपने प्रेमी को दे रही हूं।

विरजाभार को मूल रूप प्रदान कर दोनों बहनों ने अपने बंधन से मुक्त कर सोरठी के हवाले कर दिया। इस बीच बिरजाभार को बहुत सारी सिद्धियां भी हिरीया जिरीया ने दे चुकीं थीं। अब बिरजाभार एक बड़ा तांत्रिक भी हो चुका था। अपनी तंत्र विद्या से सोरठी और विरजाभार अपने मूल स्थान पर चले गये। त्रिया राज जादूई नगरी कि तांत्रिक युवतियां त्रिया राज में आये पुरुषों से यौन तृप्ति के बदले तंत्र विद्या देती हैं। त्रिया राज से जो तंत्र विद्या प्राप्त कर लेता है। वो बहुत बड़ा सिद्ध तांत्रिक कहा जाता है। वैसे तो तंत्र साधना कामाख्या योनी पीठ पर भी मिलती है।

योनि पीठ पर जून महीने की अंबुबाची मेला, मतलब माता के रजस्वला पर जो यहां तंत्र विद्या की सिद्धि प्राप्त करता है, उसे सहज ही सिद्धि प्राप्त होती है। त्रिया राज कि तांत्रिक युवतियां भी अंबुबाची मेला के दौरान यहां योनि शक्तिपीठ पर अपनी सिद्धियों को मजबूत करने, मंत्रों को जगाने के लिए, अपनी भेष बदल आती-जाती हैं। जो सिद्ध तांत्रिक होता है, रुप बदल अपनी साधना में लीन तांत्रिक जादूगरनी युवतियों को पहचान कर गुरु बना, तंत्र विद्या की प्राप्ति कर लेता है।

गूगल पर पाठकों द्वारा पूछे गए सम्बन्धित तमाम सवालों का जवाब इस आर्टिकल में निहित है।

स्त्री को अहेरिन, नागिन और जादूगरनी कहने के पीछे क्या मंशा होती है, क्या ऐसा कहना उचित है ?

स्त्री को “अहेरिन,” “नागिन,” और “जादूगरनी” जैसे शब्दों से पुकारने के पीछे अक्सर नकारात्मक मानसिकता, पितृसत्तात्मक सोच, और रूढ़िवादी धारणाएँ होती हैं। ऐसे शब्दों का उपयोग स्त्री को डरावनी, चालाक, या धोखेबाज़ के रूप में चित्रित करने के लिए किया जाता है, जो उसके सम्मान को कम करता है और उसे दमनकारी स्थिति में रखता है।


ऐसे शब्दों का प्रयोग समाज में स्त्रियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुँचाता है। यह न केवल असंगत है, बल्कि इससे स्त्रियों के प्रति हिंसा और भेदभाव को भी प्रोत्साहन मिलता है।


किसी भी स्त्री को इस तरह के शब्दों से पुकारना अनुचित और गलत है। समाज में समानता और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए हमें इस प्रकार की भाषा और मानसिकता से बचना चाहिए।

जादूगरनी का पर्यायवाची

1- तंत्रिका
2- चमत्कारी
3- तांत्रिक
4- मायाविनी
5- मंत्रणी
6- टोनही (लोकप्रिय शब्द)
7- डायन
ये शब्द संदर्भ के अनुसार उपयोग किए जाते हैं, और इनमें से कुछ शब्द नकारात्मक धारणाओं से भी जुड़े हैं।

गोरखनाथ सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कथा कहानी का निष्कर्ष:

गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

गुप्त रहस्यों को उजागर करता इस कथा-कहानी में गुरु गोरखनाथ और सोरठी विरजाभार की कहानी के माध्यम से तंत्र विद्या और अद्वितीय घटनाओं का उल्लेख गहन सर्वेक्षण के आधार पर चित्रगुप्त वंशज-अमित श्रीवास्तव द्वारा किया गया है।
गुरु गोरखनाथ की कथा में सोरठी विरजाभार और जुड़वा बहनें हिरीया-जिरीया की कहानी लोक कथाओं और पौराणिक कथाओं का अद्भुत संगम है।

सोरठी विरजाभार की कहानी एक प्रेमकाव्य के रूप में भोजपुरी क्षेत्र में प्रसिद्ध है, जिसमें सोरठी का जन्म, उसके जीवन की कठिनाइयाँ, और अंततः उसके पति विरजाभार के साथ उसके मिलन की कथा है। सोरठी व विरजाभार, जो गोरखनाथ का शिष्य-शिष्या थे, तंत्र विद्या में महारत हासिल की थी।


इस कहानी का सबसे रहस्यमयी हिस्सा जुड़वा बहनें हिरीया और जिरीया से जुड़ा है। वे अपनी तांत्रिक शक्तियों से विरजाभार को एक तोता बना कर रखती थीं और उसके साथ यौनसुख भोगती थीं। गुरु गोरखनाथ ने जब इस स्थिति को देखा, तो उन्होंने हिरीया-जिरीया से विरजाभार को मुक्त करने की मांग की। दोनों बहनों ने गोरखनाथ को चुनौती दी कि अगर वे उन्हें तांत्रिक युद्ध में हरा दें, तो वे विरजाभार को मुक्त कर देंगी। इस कहानी में गुरु गोरखनाथ की महानता और उनके संघर्षों को दर्शाया गया है।


इस कथा में गुरु गोरखनाथ और सोरठी विरजाभार की कहानी के माध्यम से तंत्र विद्या और  घटनाओं पर लेखनी अपने सर्वेक्षण के आधार पर रोचक व सत्य विवरण के साथ प्रस्तुत किया हूं। गुरु गोरखनाथ के अद्वितीय साहस और तंत्र विद्या की महारत के बावजूद, दो जुड़वा बहनें तांत्रिक जादूगरनी हिरीया और जिरीया ने गुरु गोरखनाथ को पराजित किया।

गोरखनाथ के पराजय के बाद, सोरठी ने अपने पति विरजाभार को छुड़ाने के लिए प्रयास कि, जिसमें उसकी करुणा और समर्पण भाव ने अंततः जीत हासिल कराई। इस कहानी के माध्यम से बताया हूं, कैसे तांत्रिक विद्या और रहस्यमयी शक्तियों का प्रभाव गुरु गोरखनाथ जैसे महान संतों पर भी पड़ी।


कथा का निष्कर्ष यह है कि तंत्र साधना और रहस्यमयी शक्तियाँ चाहे जितनी भी प्रबल क्यों न हों, प्रेम, करुणा और समर्पण भाव के आगे झुक जाती हैं। इसके अलावा, यह कहानी एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है कि सच्चा ज्ञान और शक्ति विनम्रता और पराजय को स्वीकारने में निहित है, जो महान संतों की विशेषता होती है। इस प्रकार की लोक कथाएँ और पौराणिक कथाएँ भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जो हमें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती हैं।

गोरखनाथ की कथा में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया-जिरीया की कहानी एक अद्वितीय और रहस्यमयी घटना है, जो तंत्र, योग और अध्यात्म के गहरे रहस्यों को उजागर करती है। यह कथा उत्तर भारतीय लोककथाओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और तंत्रविद्या तथा अद्वितीय घटनाओं से भरी है।

click on the link गोरखनाथ का जन्म कैसे हुआ गुरु कौन थे मृत्यु कैसे हुई शाबर मंत्र सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक किजिये।

click on the link गोरखनाथ की कथा कहानी – राजा भर्तृहरि रानी पिंगला का त्रियाचरित्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक किजिये।

HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

निधि सिंह कौन है? अंतरराष्ट्रीय शांति और सामाजिक जागरूकता को लेकर निधि सिंह की पहल चर्चा में

अंतरराष्ट्रीय शांति और सामाजिक जागरूकता को लेकर निधि सिंह की पहल चर्चा में जाने पूरी जानकारी यहां एक क्लिक में। नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट अंतराष्ट्रीय सहयोग, सामाजिक जिम्मेदारी, मानवीय मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े प्रयासों के बीच निधि सिंह को स्वयंसेवी सेवा से संबंधित एक प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। United Nations … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

Journalism पत्रकारिता का संपूर्ण इतिहास: प्राचीन काल से आधुनिक युग तक – गुप्त रहस्यों के साथ विश्लेषणात्मक अध्ययन

पत्रकारिता का संपूर्ण इतिहास: “Journalism” प्राचीन काल से आधुनिक युग तक – गुप्त रहस्यों के साथ विश्लेषणात्मक अध्ययन का रहस्यमयी सफर: प्राचीन काल से गोदी मीडिया तक। फेक न्यूज़ का प्रभाव और भारत में सत्य की जंग। इतिहास और वर्तमान का रोचक विश्लेषण। The Complete History of Journalism: An Analytical Study/Analytical study of the entire … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

JINDAGI JHAND HAI PHIR BHI GHAMAND HAI: जिंदगी झंड है, फिर भी घमंड है: आज के युवक-युवतियों और दम्पतियों पर 1 हास्यास्पद व्यंग्यात्मक डिजिटल प्रेमकथा

jindagi jhand hai phir bhi ghamand hai — आज की जिंदगी बड़ी तेज हो गई है। इतनी तेज कि आदमी को खुद समझ नहीं आता कि वह जिंदगी जी रहा है या जिंदगी उसे जी रही है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल हाथ में आ जाता है, रात आंख बंद होने से पहले आखिरी बार … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

विकसित भारत की संकल्पना के शिल्पकार है नरेंद्र मोदी: September 17 सभा कुंवर कुशवाहा

उत्तर प्रदेश देवरिया। September 17 बृहस्पतिवार को भाटपार रानी मंडल के भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने मंडल अध्यक्ष विशंभर पांडेय की अध्यक्षता में भाटपार रानी उपनगर स्थित हरि ब्रह्मा बाबा के मंदिर में देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर स्वच्छता कार्यक्रम के अंतर्गत साफ-सफाई किया। एवं ग्राम पंचायत बेलपार पंडित … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

बॉलीवुड कैलाश खेर सिंगर ने मिस एशिया वर्ल्ड विनर निधि सिंह से की मुलाकात, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

बॉलीवुड कैलाश खेर सिंगर ने मिस एशिया वर्ल्ड वियतनाम विनर निधि सिंह से मुलाकात कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। जानिए निधि सिंह की उपलब्धियों, सामाजिक सेवा, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से जुड़ी पूरी खबर। एंकर: बॉलीवुड के मशहूर और लोकप्रिय गायक कैलाश खेर ने मिस एशिया वर्ल्ड वियतनाम की विनर निधि सिंह … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

Sex Positions तंत्र, धर्म, विज्ञान और ज्योतिष के 5000 वर्षों के छुपे राज

Sex Positions सेक्स पोजीशन का गुप्त रहस्य वो गुप्त ज्ञान जो कभी आम लोगों को नहीं बताया गया — पूर्ण दांपत्य सुख और आत्मिक मिलन का प्रतिबंधित मार्गदर्शक amitsrivastav.in लेखक: अमित श्रीवास्तव विषय सूची भूमिका भाग 1 — छुपा हुआ इतिहास अध्याय 1: वो गुप्त शास्त्र जो सदियों तक छुपाए गए अध्याय 2: कामसूत्र का असली … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

माँ की ममता — wonderful महाग्रंथ श्रृंखला खंड 1,2,3

क्या हम सचमुच अपनी माँ को समझ पाए हैं? “माँ की ममता” महाग्रंथ-श्रृंखला — केवल एक पुस्तक नहीं, समाज के आत्ममंथन का दस्तावेज़ है जहाँ माँ पर बहुत लिखा गया है। कविताएँ लिखी गईं, गीत लिखे गए, कहानियाँ लिखी गईं, आँसू बहाए गए, श्रद्धा व्यक्त की गई और माँ को धरती पर ईश्वर का रूप … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

सुखी दांपत्य जीवन: प्रेम, सम्मान और संवाद की संपूर्ण यात्रा

क्या केवल विवाह कर लेना ही सुखी दांपत्य जीवन की गारंटी है?यदि ऐसा होता, तो दुनिया में इतने अधिक वैवाहिक तनाव, बढ़ती दूरियाँ, लगातार होने वाले विवाद, भावनात्मक अकेलापन और टूटते रिश्ते दिखाई नहीं देते। वास्तविकता यह है कि विवाह जीवन की सबसे सुंदर यात्राओं में से एक है, लेकिन यह सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

क्या वास्तव में होती हैं अप्सराएँ? mrigakshi apsara का रहस्य, शास्त्रीय परंपरा, तांत्रिक विमर्श और 1 आध्यात्मिक दृष्टि

क्या अप्सराएँ केवल पौराणिक कथा हैं या भारतीय शास्त्रों का गहन प्रतीक? Mrigakshi Apsara मृगाक्षी अप्सरा, वैदिक संदर्भ, शक्ति परंपरा और शोधपरक तंत्र-मंत्र साधना विधि-विधान के साथ विश्लेषण पढ़ें। पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा अप्सरा साधना महाग्रंथ श्रृंखला 64 में प्रथम शिर्षक मृगाक्षी अप्सरा साधना महाग्रंथ mrigakshi apsara mantra सम्पूर्ण विधि-विधान सहित amozan पर eBook एवं … Read more
गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग | काल भैरव मंत्र, पूजा विधि और उपाय

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग काल भैरव की पूजा विधि, मंत्र और उपाय भगवान बटुक भैरव की पूजा विधि, शक्तिशाली कार्य सिद्धि मंत्र, अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्र, कवच पाठ और शत्रु नाशक प्रभावी उपाय जानिए। कालभैरवाष्टमी पर विशेष प्रयोग से असंभव कार्य सिद्ध होंगे और शत्रु परेशान करना छोड़ देंगे। भैरव कृपा प्राप्त … Read more

5 thoughts on “गोरखनाथ की कथा: में सोरठी विरजाभार और जादूगरनी हिरीया जिरीया कि कहानी”

  1. बहुत ही रोचक जानकारी गुरूदेव आपने दिया है आपके द्वारा सत्य जानकारी प्राप्त होती है हम आपकी वेबसाइट कि हर लेखनी गहनता से पढ़ते और मंथन करते हैं। आपकी कलम ईश्वरीय सत्ता से ही चलती है तभी मनपसंद सही जानकारी हर तरह की लेखनी से मिलती रहती है।

    Reply

Leave a Comment