देवरिया। भारतीय संस्कृति के सबसे पवित्र और भावनात्मक पर्वों में से एक, रक्षाबंधन, 09 अगस्त 2025 शनिवार को जवाहर नवोदय विद्यालय देवरिया में पूरे हर्षोल्लास, सांस्कृतिक गरिमा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के सभी सदस्य—अध्यापक, अध्यापिकाएं, छात्र और छात्राएं—एकजुट होकर भाई-बहन के इस अनमोल रिश्ते का उत्सव मनाने के लिए एकत्र हुए। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी.के. त्रिवेदी और उपप्राचार्य ने पूरे विद्यालय समुदाय को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
सुबह का माहौल – सजावट, मुस्कान और उल्लास
सुबह-सुबह विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण में उत्सव की ऊर्जा महसूस हो रही थी। मुख्य द्वार से लेकर प्रांगण तक रंग-बिरंगे फूलों की मालाएं, रंगोली और भाई-बहन के रिश्ते पर लिखे गए स्लोगन वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग रहे थे। बच्चों द्वारा बनाई गई हस्तनिर्मित राखियों और सजाई गई थालियों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी।
छात्र-छात्राएं पारंपरिक पोशाकों में सजे हुए थे—लड़कियां रंग-बिरंगे लहंगे और सलवार-कमीज में, तो लड़के साफ-सुथरी कुर्ता-पायजामा या विद्यालय की वर्दी में। हर चेहरे पर एक अलग ही चमक थी, जो इस पर्व की मिठास को बयां कर रही थी।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई, जिसमें संगीत शिक्षक निराला के मार्गदर्शन में विद्यालय के संगीत समूह ने भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित एक मधुर मंगल गीत प्रस्तुत किया। गीत की पंक्तियां जैसे ही गूंजीं, पूरा माहौल भावनाओं से भर उठा। इसके बाद छात्राओं ने सहपाठी भाइयों को राखी बांधी, माथे पर तिलक लगाया और मिठाई खिलाकर इस बंधन की पवित्रता को साकार किया। इस दौरान छोटे-छोटे छात्रों की मासूम मुस्कान और उत्साह ने सभी का दिल जीत लिया।
प्राचार्य डॉ. डी.के. त्रिवेदी ने अपने संबोधन में कहा— रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं है, यह हमारी संस्कृति की आत्मा है। यह पर्व हमें सिखाता है कि भाई का कर्तव्य अपनी बहन की रक्षा करना है, और बहन का धर्म अपने भाई को आशीर्वाद व प्रेरणा देना है। यह वचन, सम्मान और विश्वास का बंधन है, जो हर परिस्थिति में निभाया जाता है।
उपप्राचार्य ने कहा कि इस पर्व की खासियत यह है कि यह केवल खून के रिश्तों में सीमित नहीं है, बल्कि हर उस रिश्ते का उत्सव है जिसमें सुरक्षा, स्नेह और जिम्मेदारी का भाव हो।
समारोह में उपस्थित शिक्षकों ने रक्षाबंधन के महत्व को समझाने के लिए प्रेरणादायक प्रसंग सुनाए।
रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी – जब गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने मेवाड़ पर हमला किया, तब रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी। हुमायूं ने इसे अपनी बहन का आह्वान मानते हुए तुरंत सेना लेकर मेवाड़ की ओर कूच किया और राज्य की रक्षा की।
महाभारत की द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा – द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था, और बाद में चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने उसकी लाज बचाकर उस ऋण का कई गुना चुकाया।
इन प्रसंगों ने बच्चों को यह संदेश दिया कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि रक्षा और सम्मान का अटूट वचन है।
इस अवसर पर छात्रों ने कविताएं, गीत और नाट्य प्रस्तुतियां दीं। एक नाट्य प्रस्तुति में दिखाया गया कि कैसे कठिन समय में भाई-बहन का रिश्ता सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। कविताओं में भाई-बहन के बचपन की यादें, हंसी-ठिठोली और एक-दूसरे के लिए किए गए त्याग का सुंदर चित्रण किया गया।
कार्यक्रम में हस्तनिर्मित राखी बनाने की प्रतियोगिता और राखी थाली सजावट प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। बच्चों ने रंग-बिरंगे धागों, मोतियों, सितारों और ग्लिटर का इस्तेमाल कर अद्भुत राखियां तैयार कीं। सजाई गई थालियों में न केवल सौंदर्य था, बल्कि उनमें परंपरा की झलक भी स्पष्ट थी।
पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच संचालन, बच्चों की प्रस्तुति की तैयारी, सजावट और प्रतियोगिताओं के आयोजन में उनका योगदान सराहनीय रहा।

जवाहर नवोदय विद्यालय मेहरा पुरवा देवरिया में सहपाठी भाइयों को राखी बांधती छात्राएं
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समारोह के अंत में सभी को मिठाई वितरित की गई। इसके बाद पूरे विद्यालय परिवार ने एक साथ समूह फोटो खिंचवाया, जो इस आयोजन की यादों को हमेशा ताजा रखेगा।
शिक्षकों के उद्धरण—
हम चाहते हैं कि बच्चे केवल किताबों से नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपराओं से भी सीखें। – एक अध्यापिका
ऐसे कार्यक्रम बच्चों के मन में एकता, प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जगाते हैं। – एक शिक्षक

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