प्रयागराज। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होती, क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट विद्यालय प्रयागराज – बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब उन्हें आत्म-अभिव्यक्ति, अनुशासन, सहयोग और रचनात्मकता के अवसर मिलें। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रयागराज के मंदर मोड़ स्थित क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में 21 मई 2025 से एक विशेष समर कैंप की शुरुआत हुई है। kraist jyoti konvent vidyaalay prayaagaraaj samar kaimp shuroo – bachchon mein dikha utsaah, seekh rahe hain nae jeevan kaushal
यह समर कैंप न केवल बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टियों का रचनात्मक उपयोग है, बल्कि यह उनके भीतर छिपे हुए कौशल और प्रतिभा को निखारने का एक शानदार मंच भी बनकर उभरा है। समर कैंप 6 जून 2025 तक चलेगा और इसमें सैकड़ों बच्चों ने भाग लिया है। स्कूल प्रांगण में बच्चों की चहलकदमी, हंसी-खुशी और उत्साह से माहौल जीवंत हो उठा है। बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावक भी इस कैंप के आयोजन से बेहद खुश और संतुष्ट हैं, क्योंकि यह उन्हें मोबाइल और टीवी की दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों और अनुभवों से रूबरू कराता है।
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क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट विद्यालय प्रयागराज
इस समर कैंप की सबसे खास बात यह है कि इसे बहुत ही सोच-समझकर, सुनियोजित ढंग से तैयार किया गया है। बच्चों की उम्र, रुचि और मानसिक स्तर को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी में विविध गतिविधियाँ करवाई जा रही हैं। इन गतिविधियों में संगीत, स्केटिंग, ताइक्वांडो, बास्केटबॉल, खो-खो, वॉलीबॉल, ड्रॉइंग, कला-कौशल और रचनात्मक लेखन जैसी कई विधाएं शामिल हैं।
प्रत्येक गतिविधि बच्चों के मानसिक विकास, आत्म-विश्वास, टीम भावना और नेतृत्व कौशल को संवारने में मदद कर रही है। खेलों के माध्यम से बच्चे न केवल शारीरिक रूप से फिट हो रहे हैं, बल्कि वे अनुशासन और संयम का अभ्यास भी सीख रहे हैं। वहीं संगीत और कला की गतिविधियाँ उनके भावनात्मक और रचनात्मक पक्ष को निखार रही हैं, जिससे उनका व्यक्तित्व और अधिक संतुलित और समृद्ध बन रहा है।
स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर जाइस मारिया का मानना है कि समर कैंप सिर्फ समय बिताने का साधन नहीं है, बल्कि यह बच्चों को जीवन के लिए तैयार करने की एक सशक्त प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना है जो उन्हें सोचने, सीखने और प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें। जब एक बच्चा स्केटिंग करता है या ताइक्वांडो सीखता है, तो वह न केवल अपने शरीर को नियंत्रित करना सीखता है, बल्कि आत्मसंयम और आत्मरक्षा के मूल मंत्र भी आत्मसात करता है।
इसी तरह जब वह किसी टीम गेम का हिस्सा बनता है, तो सहयोग और नेतृत्व उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों का आत्मबल बढ़ता है और वे अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग और उत्साही बनते हैं।
समर कैंप में भाग ले रहे छात्रों के अनुभव भी बेहद प्रेरणादायक हैं। एक छात्रा ने बताया कि उसे संगीत सत्र में भाग लेकर बहुत आनंद आ रहा है और वह हर दिन कुछ नया सीख रही है। वहीं एक छात्र ने कहा कि वह पहले ताइक्वांडो से डरता था, लेकिन अब उसे आत्मरक्षा का महत्व समझ में आ रहा है और वह खुद को पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर महसूस करता है। एक अन्य बच्चा, जो पहले शांत स्वभाव का था, अब खो-खो और वॉलीबॉल जैसे खेलों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है, जिससे उसमें आत्मविश्वास की स्पष्ट झलक देखी जा सकती है।
अभिभावकों का भी कहना है कि समर कैंप के आयोजन से बच्चों में एक नई ऊर्जा और जागरूकता देखने को मिल रही है। वे अब सुबह जल्दी उठने लगे हैं, समय पर तैयारी करते हैं और उत्साह के साथ कैंप में भाग लेने जाते हैं। यह परिवर्तन न केवल उनके दैनिक जीवन में अनुशासन ला रहा है, बल्कि डिजिटल डिवाइस की लत से भी छुटकारा दिलाने में सहायक हो रहा है। साथ ही, विभिन्न गतिविधियों से जुड़े अनुभव उनके लिए आने वाले जीवन में आत्मनिर्भरता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक कौशल जैसे मूल्यों की नींव रख रहे हैं।

कुल मिलाकर, क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट स्कूल द्वारा आयोजित यह समर कैंप बच्चों के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके भीतर की प्रतिभा को सामने लाने, उन्हें प्रेरित करने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का एक सुनहरा अवसर है। ऐसे कैंप न केवल बच्चों के वर्तमान को रचनात्मक बनाते हैं, बल्कि उनके भविष्य की नींव भी मजबूत करते हैं। जब शिक्षा के साथ-साथ अनुभव, कला, खेल और आत्म-अभिव्यक्ति को जोड़ा जाए, तब ही एक सशक्त और संवेदनशील पीढ़ी का निर्माण संभव है – और यह समर कैंप उसी दिशा में एक सशक्त कदम है।

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हमे आपका लेख नियमित पढ़ते हैं बहुत अच्छा लिखते हैं आप।
अच्छा लिखते हैं आप सर जी देवरिया कि खबरें भी लगाया किजिए।