अंबुबाची मेला हर वर्ष आषाढ़ मास (अक्सर जून के मध्य या अंत में) में मनाया जाता है। यह मेला मुख्यतः कामाख्या देवी के रजस्वला (मासिक धर्म) के समय आयोजित होता है, और इसे “धरती माता के ऋतु धर्म” का प्रतीक माना जाता है।
अंबुबाची मेला की मास और तिथि:
हिंदू पंचांग अनुसार- यह मेला आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि से आरंभ होता है और अमावस्या या प्रतिपदा तक चलता है।
अंबुबाची मेला कब है 2026 समयावधि:
मेला 4 दिन तक चलता है—
1. पहला दिन: मंदिर के पट बंद होते हैं – देवी रजस्वला होती हैं
2. दूसरा और तीसरा दिन: कोई पूजा नहीं होती, मंदिर बंद रहता है
3. चौथा दिन: मंदिर के पट पुनः खुलता है – देवी की शुद्धि और स्नान के बाद भक्तों को दर्शन होता है
अंबुबाची मेला: 2026 में तिथियाँ
मंदिर के कपाट बंद (प्रवृत्ति): 22 जून 2026 (सोमवार)। इस दिन से देवी के एकांतवास के लिए मंदिर के द्वार बंद हो जाएंगे।
मंदिर के कपाट फिर से खुलेंगे (निवृत्ति): 26 जून 2026 (शुक्रवार)। इस दिन सुबह से भक्तों के लिए दर्शन और अनुष्ठान फिर से शुरू हो जाएंगे।
धार्मिक मान्यता—
इस समय देवी शक्ति विश्राम करती हैं, इसलिए इन 3 दिनों में किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि असम में नहीं किए जाते। जगत-जननी धरती माता स्वयं ही रजस्वला होती हैं और उन्हें विश्राम की आवश्यकता होती है। यह रहा 2026 अंबुबाची मेला कामाख्या का न्यू अपडेट, नीचे पढ़िए जानिए पूर्व की दी गई जानकारी को।
मां कामाख्या अंबुबाची पर्व विशेष सती के 51 शक्तिपीठों में सर्वशक्तिशाली शक्तिपीठ देवी कामाख्या योनी रुप में विराजमान हैं। यहां देवी सामान्य स्त्रियों के जैसे ही रजस्वला होती हैं। रजस्वला के दौरान मंदिर का कपाट बंद हो जाता है। सृष्टि विस्तार में स्त्री योनी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए यहां योनी रूपा महाशक्तिपीठ कामाख्या देवी की अनोखी पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। हमारा भारत वर्ष विभिन्न मान्यताओं का देश है। यहां कई तरह के रीति-रिवाज कल्चर प्रचलित है।
यहां तक कि देवी-देवताओं की पूजा अर्चना के नियम व तरीकों को भी अलग अलग जगहों पर अलग अलग तौर तरीकों से मनाते देखा जा सकता है। सृष्टि का केन्द्र विन्दु मुक्ति धाम माना जाने वाला सती के 51 शक्तिपीठों में प्रथम – कामाख्या शक्तिपीठ पर सती का योनी भाग स्थापित है। यहां प्रत्येक वर्ष की भांति वार्षिक उत्सव के तौर पर चार दिवसीय अंबुबाची मेला आयोजित किया जा रहा है। यह मेला प्राचीन काल से आयोजित होता रहा है। कोविड-19 के दौरान बिते दो वर्ष आयोजन फीका चला था।
कोविड काल के बाद पहले जैसा ही भब्य आयोजन किया जा रहा है। इस अंबुबाची मेला में रोज दिन लाखों श्रद्धालु आते रहते हैं। और भब्य उत्सव का आंनद लेते हुए माता की भक्ति में लीन हो अपनी मनोकामना पूर्ण कि याचना करते हैं। यहां जो भी मन्नतें मांगी जाती है निश्चित रूप से पूरी हो जाती है।
यहां देवी के पीरियड्स की होली है भव्य पूजा – वैज्ञानिक भी हैं हैरान

AMBUBACHI MELA 2024
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अनोखी परंपरा- अनोखा प्रसाद
योनि पुजा का रहस्य
योनी पीठ अंबुआची मेला का रास्ता भारत वर्ष के असम राज्य में प्रमुख स्थान गुवाहटी जहां सभी देशों जगहों से आवागमन का हवाई, रेल, रोड मार्ग उपलब्ध है। हवाई अड्डे से 20 किलोमीटर, गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर रोड मार्ग पर कामाख्या शक्तिपीठ निल गीरी, निलांचल पर्वत पर स्थित है। जो बहुत ही प्राचीन काल से प्रसिद्ध स्थान है। इस स्थान से जुड़ी दास्तान सभी युगों में देखने को मिलता है। यह स्थान श्रृष्टि का केन्द्र विन्दु मुक्ति धाम के रूप में धर्म ग्रंथों में वर्णित है।
इस शक्तिपीठ पर योनी रूपा देवी का आशिर्वाद लेने आना चाहिए। किंतु देवी के कृपा से ही यहां तक कोई भी पहुंच दर्शन प्राप्त करता है। इस कलयुग में शक्तिपीठों में स्थापित देवीयां ही सदैव सत्य हैं। अपनी आस्था के अनुसार परोक्ष या अपरोक्ष दर्शन मिलता है। दैवीय शक्तियों का थोड़ा भी सम्मान और एहसास है तो प्रेम से बोलो और कमेंट में लिखो जय माँ कामाख्या देवी।

भक्त जन को एक सलाह –
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योनी रूपा कामाख्या देवी सदैव हम सभी पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखना 🚩 जय भवानी 🚩
24 जून को देवी योनी रूपा कामाख्या होगी मासिक धर्म से निवृत्त 25 जून सूर्योदय बाद खुलेगा गर्भ गृह का कपाट। देवी स्नान के बाद होगी विधि-विधान से निवृती पूजा फिर श्रद्धालु करेंगे दर्शन मिलेगा अजीबोगरीब अंबुआची वस्त्र प्रसाद। सभी पर बनी रहे देवी कामाख्या की कृपा🙏प्रेम से बोलिए जय माता दी 🚩
आज सुबह सूर्योदय बाद देवी स्नान निवृती पूजा अर्चना के बाद पंडों ने किया दर्शन फिर वीआईपी लोगों ने किया दर्शन कल 26 को लाइन में खड़े श्रद्धालु करेंगे दर्शन पायेंगे प्रसाद में अंबुआची वस्त्र दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जय बोलिए कामाख्या देवी शक्तिपीठ की🙏🙏🚩🚩
मां