मुंबई 15 मई 2025 ज्ञानेन्द्र मिश्र Operation Sindoor ने पाकिस्तान को धूल चटा दी, लेकिन क्या भारत के भीतर छिपे स्लीपर सेल्स और देशद्रोही साजिशकारों से भी निपटा गया? यह लेख ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य सफलता के साथ-साथ देश के भीतर छिपे खतरों पर भी प्रकाश डालता है।
जब बाहरी दुश्मन कुचले जा चुके हैं, तो घर के सांपों का क्या होगा? ऑपरेशन सिंदूर की अभूतपूर्व सैन्य सफलता ने पूरे देश को गौरव से भर दिया, लेकिन इसके साथ एक ज्वलंत प्रश्न भी जन्मा है—क्या दुश्मन सिर्फ सीमा पार है, या हमारे ही आँगन में पलने वाले सांप उससे भी ज्यादा खतरनाक हैं?
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Operation Sindoor Victory
ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को धूल चटा दी है, और यह एक बड़ी सफलता है। लेकिन असली खेल तो अब शुरू होता है। दुश्मन का सबसे खतरनाक हथियार कोई मिसाइल या बारूद नहीं, बल्कि वो जहरीले सांप हैं जो हमारे अपने देश में स्लीपर सेल्स के रूप में छिपे बैठे हैं।
पहलगाम के खौफनाक हिन्दू नरसंहार के बाद कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग और उनके आका—विपक्षी दल—बड़े जोर-शोर से सरकार के साथ खड़े होने का नाटक कर रहे हैं। अगर ये दिल से है, तो तालियां बजाइए! मगर इनका पुराना रिकॉर्ड देखें, तो भरोसा करना ऐसा है जैसे सांप को दूध पिलाकर पालना। मेरा दावा है कि इनका गुस्सा आतंकवाद के खिलाफ कम, बल्कि इसलिए ज्यादा है क्योंकि आतंकियों ने आतंक का “मजहब” उजागर कर दिया। इससे इनका नकाब उतर गया, और हिंदू बहुसंख्यक देश में इनकी साख पर बट्टा लग गया।
कश्मीर का कारोबार और हिंदू पर्यटकों का जादू हर साल ढाई करोड़ हिंदू पर्यटक कश्मीर जाते हैं। ये पर्यटक कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। वहां के होटल, दुकानें, शिकारे—सब इन्हीं पर्यटकों की बदौलत चलते हैं। अब सोचिए, अगर ये पर्यटक कश्मीर जाना बंद कर दें, तो? कश्मीर के लोग भूखे मरने की कगार पर आ जाएंगे। यही डर कश्मीरी नेताओं और वहां के कुछ लोगों की नींद उड़ा रहा है। इसलिए अब वो आतंक के खिलाफ ताल ठोककर बोल रहे हैं, सरकार और हिंदुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाने का नाटक कर रहे हैं।
दो ठोस वजहें और थोड़ा दिमागी खेल आखिर कश्मीर के लोग, कुछ भारतीय मुस्लिम, और उनके पॉलिटिकल आका इतना क्यों चिल्ला रहे हैं कि “हम आतंक के खिलाफ हैं”?
दो ठोस वजहें
1. पहली वजह—मजहब का पर्दाफाश: पहलगाम नरसंहार ने आतंक का चेहरा बेनकाब कर दिया। आतंकियों ने मजहब का ठप्पा लगा दिया, जिससे इनके चेहरों से नकाब हट गया- पहलगाम हत्याकांड को इतने गैर जिम्मेदाराना तरीके से अंजाम दिया गया कि अब सदा के लिए आतंक का मजहब उजागर हो गया- यह इसके खिलाफ गुस्सा है, ना कि हिंदू हत्याकांड के खिलाफ- नग्न हो गए हैं ये सभी और हिंदू बहुसंख्यक देश में इनकी साख दांव पर लग गई है।
2. दूसरी वजह—पेट का सवाल: कश्मीर का कारोबार हिंदू पर्यटकों के दम पर चलता है। अगर वो रुक गए, तो कश्मीर भुखमरी की चपेट में आ जाएगा। इसलिए ये लोग हिंदुओं को मनाने के लिए एकता का ढोंग रच रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर– आधी जीत, पूरा खेल बाकी- ऑपरेशन सिंदूर ने तो कमाल कर दिया। पाकिस्तान, जो आतंक का गढ़ था, उनके आतंकी अड्डों को धूल में मिला दिया। लेकिन सवाल ये है—
क्या इतने से काम चल जाएगा?
बिल्कुल नहीं!
मान लीजिए, आपके घर में सांप घुस आए। बगीचे में सांपों के बिल भी हैं। आप पहले क्या करेंगे? जाहिर है, पहले घर के सांपों को ठिकाने लगाएंगे, फिर बगीचे के बिलों को तबाह करेंगे।
आगे का प्लान: घर की सफाई
अब वक्त है घर की साफ-सफाई का। हर उस सांप को ढूंढकर खत्म करना होगा, जो देश के खिलाफ जहर उगल रहा है। स्लीपर सेल्स हों, देशद्रोही हों, या फिर आतंक के सौदागर—हर एक को बेनकाब करना होगा। सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे और देश को सांपमुक्त करना होगा। वरना, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक अधूरी कहानी बनकर रह जाएगा।
आपको अंतर्राष्ट्रीय दबाव और मानव अधिकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है आपको अपने पड़ोसी राष्ट्र श्रीलंका तथा अपने मित्र राष्ट्र इजराइल से सबक लेने की आवश्यकता है- श्रीलंका ने शत्रु विनाश की गति- इसके पहले कि वाह्य दबाव श्रीलंका तक पहुंचता, कार्यवाही पूरी हो चुकी थी। और इजराइल से चुन चुन कर शत्रु नाश की विधा को स्वीकार करना होगा।
अन्यथा ऑपरेशन सिंदूर, यकीन मानिए- मात्र 10% सफल हुआ, ही साबित होगा।
अंत में, हमें अपनी एकता और शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। देश के खिलाफ किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमें अपने घर को सुरक्षित बनाना होगा, और इसके लिए हमें हर संभव कदम उठाने होंगे। लेख से सम्बंधित अपने विचारों को नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर बताईयें। amitsrivastav.in पर बने रहने के लिए बेल आइकन को दबा एक्सेप्ट करें एप्स इंस्टाल करें अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़ने के बाद शेयर करें।
जय हिंद!
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