गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग-ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान को कैसे मिला मौका? ट्रंप का 1 ट्वीट, पाकिस्तान की चाल, भारत की अधूरी जीत पर विश्लेषण

Amit Srivastav

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ऑपरेशन सिंदूर पर गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग ने कैसे भारत को कूटनीतिक रूप से कमजोर किया? ट्रम्प का ट्वीट, पाकिस्तान की चाल और सच्चाई को इस लेख में जानिये।

हम भारत के वीर सैनिकों को सम्मान करते हैं। 1965, 1971 का युद्ध या फिर कारगिल (1999) का युद्ध वीर सैनिकों ने जिस शौर्य से लड़ा पाकिस्तानियों के छक्के छुड़ा दिए। ‌ 2025 युद्ध भारत ने पाकिस्तानियों के हौसले को पस्त कर दिया। भारतीय सैनिकों की बहादुरी किस्से पूरी दुनिया में गूंज रहे हैं। हम अपने भारत देश वीर शहीदों की शहादत को हमेशा अपने दिलों में याद रखेंगे।

भारतीय सेना द्वारा उठाया गया यह कदम, आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई पूरी दुनिया की भलाई के लिए थी। लेकिन पाकिस्तान की चाल और अमेरिका की वर्चस्ववादी नीति के कारण कई तरह के सवाल उठ रहे हैं? देश इन सवालों के बारे में जानना चाहता है? गोदी मीडिया की फेक न्यूज़ ने भी स्थिति को हास्यास्पद बना दिया? इन सब सवालों की गहराई से जवाब भविष्य में छिपा हुआ है लेकिन फिलहाल एक विश्लेषण की आवश्यकता है। इस लेख में इसी को प्रस्तुत किया गया है।


अब बात करते हैं, मीडिया के चौथे स्तंभ होने के नाते अपने कर्तव्य के बारे में, हम  राजनीति और गोदी मीडिया की चाल फेक न्यूज और चरित्र के बारे में इस आर्टिकल के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहेंगे। इस लेख को अंत तक पढ़िए चिंतन-मनन किजिए और जानिए मीडिया के चौके-छक्के वाली बड़ी बड़ी ब्रेकिंग न्यूज का हालिया दास्तान।

गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग: ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान को कैसे मिला फायदे भरा मौका?
1. वीर सैनिकों का सम्मान: भारत की असली ताकत—
भारत के हर युद्ध – 1965, 1971, 1999, और 2025 – में हमारे सैनिकों ने जो पराक्रम दिखाया है, वह हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा करता है।
2. मीडिया का धर्म और गोदी मीडिया की विफलता—
मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन जब वही स्तंभ झूठी खबरों से देश की रणनीति बिगाड़े तो प्रश्न उठाना अनिवार्य है।
3. 'आपरेशन सिंदूर' और गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग—
गोपनीय सैन्य ऑपरेशन को गोदी मीडिया ने एक 'TRP तमाशा' में बदल दिया। इससे पाकिस्तान को झूठा नैरेटिव गढ़ने का अवसर मिला।
4. हेडलाइन वॉर: जब एंकर बने युद्धनायक—
टीवी चैनलों की “लाहौर धुआं-धुआं” जैसी हेडलाइंस ने सच्चाई को दफना दिया और जनता को भरमाया।
5. पाकिस्तान का विक्टिम कार्ड और अंतरराष्ट्रीय प्रहार—
फेक मीडिया रिपोर्ट्स को पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया और 'विक्टिम' बनकर सहानुभूति बटोरी।
6. ट्रम्प का ट्वीट और भारत की अधूरी जीत—
डोनाल्ड ट्रम्प का दो लाइन का ट्वीट भारत की सर्जिकल रणनीति पर पानी फेर गया। क्या इसकी ज़िम्मेदारी गोदी मीडिया की नहीं?
7. फेक रिपोर्टिंग: मूर्खता या साजिश?—
क्या गोदी मीडिया TRP के लिए इतना नीचे गिर सकता है या कहीं ये किसी विदेशी ताकत की साजिश तो नहीं? क्या ISI की ‘स्लीपर सेल’ मीडिया में सक्रिय है?
8. धर्म युद्ध की नीति और मीडिया की विफलता—
भगवद गीता और श्रीराम के उदाहरण बताते हैं कि युद्ध की रणनीति गुप्त रखी जाती है। गोदी मीडिया ने इस नीति की धज्जियाँ उड़ा दीं।
9. जनता की हार, TRP की जीत—
जनता को मिला झूठा गौरव और फर्जी शोर। जबकि पाकिस्तान ने भारत की मीडिया रिपोर्ट्स को अपने लिए 'सबूत' में बदल दिया।
10. समाधान: क्या होना चाहिए?—
मीडिया नीति का पुनर्लेखन
गोपनीय सैन्य जानकारी के लीक पर सख्त दंड
TRP आधारित रिपोर्टिंग पर अंकुश
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली पत्रकारिता।


godi media fake reporting operation sindoor

गोदी मीडिया फेक न्यूज

गोदी मीडिया की फेक पत्रकारिता

‘आपरेशन सिंदूर’ पर गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग ने कैसे भारत की रणनीति को नुकसान पहुँचाया? ट्रम्प के ट्वीट, पाकिस्तान की चालाकी और मीडिया की साजिश या मूर्खता पर पढ़ें आम लोगों की भावनाओं सोच कहावतों को समाहित करता तीखा व्यंग्य और गहन विश्लेषण।

पालिटिक्स | तीखा व्यंग्य और गहन विश्लेषण

10 मई 2025 का दिन भारत के इतिहास में न केवल एक शर्मिंदगी के रूप में दर्ज होगा, बल्कि यह सवाल भी उठाएगा कि हमारी मीडिया, जिसे चौथा स्तंभ माना जाता है, कहीं देश के खिलाफ ‘पांचवां स्तंभ’ तो नहीं बन गया? गोदी मीडिया के ‘महा-फेक-युद्ध’ और डोनाल्ड ट्रम्प के एक ट्वीट ने भारत के ‘आपरेशन सिंदूर’ को ‘आधा हकीकत, आधा फसाना’ बना डाला। यह वही गोदी मीडिया है, जो ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाकर TRP की माला जपता है, लेकिन अपनी फेक खबरों की मिसाइलों से पाकिस्तान को जैसे ‘विजय का तमगा’ थमा गया।


आइए, आम जन कि भावनाओं को समाहित करते इस तमाशे का तीखा व्यंग्य और गहन विश्लेषण करते हैं, ताकि समझ सकें कि आखिर ये हुआ कैसे, और इसके पीछे की सच्चाई क्या हो सकती है?

गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग

सुबह का तमाशा: गोदी मीडिया का ‘मिसाइल-मय’ प्रलाप

सुबह-सुबह, जब देश चाय की चुस्कियों और अखबारों के साथ दिन शुरू कर रहा था, गोदी मीडिया के टीवी चैनलों ने ऐसा शोर मचाया, मानो भारत ने रातों-रात पाकिस्तान को नक्शे से मिटा दिया हो।
हेडलाइंस थीं— “कराची में मिसाइलें! लाहौर धुआँ-धुआँ!
भारतीय सेना ने दिखाया 56 इंच का दम! विश्व के नक्से से मिट जायेगा पाकिस्तान! पाकिस्तान हुआ पस्त! आदि ऐसे-ऐसे जो पाकिस्तान को फायदा दे दिया।


एक चैनल पर एंकर जैसे तलवार लहराते हुए ‘जय श्री राम’ चिल्ला रहा था, तो दूसरा स्टूडियो में युद्ध का नक्शा खींचकर बता रहा था कि “भारतीय सेना ने कराची बंदरगाह को तबाह कर दिया!” स्क्रीन पर लाल-नीली लेजर लाइटें, धमाकों की साउंड इफेक्ट्स, जैसे आंखों देखी सीधा प्रसारण हो और बीच-बीच में ‘ब्रेकिंग न्यूज’ का शोर—मानो हॉलीवुड की ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ मूवी का प्रीमियर हो।


विश्लेषण: यहाँ हकीकत क्या थी? भारतीय सेना आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी में थी—एक गोपनीय, सटीक, और रणनीतिक ऑपरेशन, जिसका मकसद था आतंकवाद को कुचलना, न कि पाकिस्तान के साथ पूर्ण युद्ध छेड़ना।


सर्जिकल स्ट्राइक की प्रकिया में गोपनीयता और समयबद्धता सबसे अहम होती है, क्योंकि दुश्मन को भनक लगते ही वह अपनी रणनीति बदल लेता है। लेकिन गोदी मीडिया ने इस गोपनीयता को तार-तार कर दिया।


टीआरपी की सस्ती चाहत के लिए गोदी मीडिया ने देश को शर्मशार किया, और देश को खतरे में डाल दिया।


उन्होंने न केवल अतिशयोक्ति से भरी खबरें चलाईं, बल्कि ऐसी फर्जी हेडलाइंस बनाईं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गईं।


सवाल यह है: क्या यह सिर्फ TRP की भूख थी, या जानबूझकर रणनीतिक ऑपरेशन को कमजोर करने की कोशिश?


पाकिस्तान की चाँदी: फेक खबरों का ‘जैकपॉट’
गोदी मीडिया की इन फर्जी हेडलाइंस को पाकिस्तान ने ऐसे लपका, जैसे कोई भूखा शेर हड्डी पकड़ता है। भारतीय चैनलों के स्क्रीनशॉट्स और वीडियो क्लिप्स को ट्विटर, फेसबुक, और व्हाट्सएप पर वायरल कर दिया गया। पाकिस्तान ने इन खबरों को ‘सबूत’ बनाकर संयुक्त राष्ट्र में हंगामा मचाया, चिल्ला-चिल्लाकर कहा, “देखो, भारत ने हम पर अघोषित युद्ध छेड़ दिया!”


उनके विदेश मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोदी मीडिया के वीडियो चलाए, आँसू बहाते हुए दुनिया को बताया कि “भारत ने हमारी संप्रभुता पर हमला किया है!” स्कूल कालेजों जन आबादी पर हमला किया है, अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इन स्क्रीनशॉट्स को लपक लिया, और भारत को ‘हमलावर’ के रूप में पेश किया जाने लगा।


विश्लेषण: यहाँ पाकिस्तान की चालाकी और गोदी मीडिया की मूर्खता (या साजिश?) का गठजोड़ साफ दिखता है। पाकिस्तान को मौका मिल गया भारत को कटघरे में खड़ा करने के लिए।


भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने गढ़ दिया नॉरेटिव, फेंक गोदी मीडिया की खबरों को पाकिस्तान ने बनाया आधार!


गोदी मीडिया की फेक खबरों ने उन्हें वह ‘सबूत’ दे दिया, जिसकी उन्हें जरूरत थी। एक मजबूत नैरेटिव बनाने के लिए। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को जवाब देना पड़ा कि “हमने कोई मिसाइल नहीं दागी, आतंकवादियों के 9 ठिकानों को निशाना बनाया, आम नागरिकों को क्षति पहुचाने का प्रयास हमारी सेना ने नही किया है!”

पाकिस्तान ने खेला अपने लिए वही पुराना राग विक्टिम कार्ड

लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। पाकिस्तान ने खुद को ‘विक्टिम’ दिखाकर सहानुभूति बटोरी, और भारत की छवि को धक्का लगा। यहाँ सवाल उठता है: गोदी मीडिया को क्या नहीं पता था कि उनकी खबरें दुश्मन देश के लिए हथियार बन सकती हैं? अगर नहीं पता था, तो यह उनकी अक्षमता है। और अगर पता था, तो यह देशद्रोह से कम नहीं। यह कोई आरोप नहीं हमारी अपनी भावनात्मक सोच है। इस बात पर सहानुभूति पूर्वक सोचा जाए।

ट्रम्प का ‘ट्विटर-अस्त्र’ और सीजफायर का तमाशा

इधर, दुनिया भर में हंगामा मचा, और फिर आया डोनाल्ड ट्रम्प का ‘ट्विटर-अस्त्र’। अमेरिका के इस ‘ट्वीट-योद्धा’ ने दो लाइन में सब कुछ ठप कर दिया, “भारत-पाकिस्तान, पीछे हटो, शांति रखो! युद्ध से किसी का भला नहीं होगा।” बस, इतना ही। अंतरराष्ट्रीय दबाव में भारत को अपना ऑपरेशन रोकना पड़ा।

‘आपरेशन सिंदूर’, जो आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की कगार पर था, अधूरा रह गया। पाकिस्तान में जश्न की रैलियाँ निकलीं, आतिशबाजियाँ फोड़ी गईं, मानो उन्होंने कोई विश्वयुद्ध जीत लिया हो। यह आरोप नहीं बल्कि व्यंग्य है, और इसे प्रतीकात्मक रूप में लिया जाए। मीडिया की रणनीति पर विचार किया जाए।


विश्लेषण: ट्रम्प का ट्वीट अपने आप में एक अलग अध्ययन का विषय है। यह दिखाता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया की ताकत कितनी है। एक ट्वीट ने न केवल भारत के रणनीतिक ऑपरेशन को रोक दिया, बल्कि वैश्विक कूटनीति में हस्तक्षेप भी किया। लेकिन यहाँ असली सवाल गोदी मीडिया पर है। अगर उनकी फेक खबरें न होतीं, तो क्या पाकिस्तान को नैरेटिव बनाने का मौका मिलता? क्या ट्रम्प को ट्वीट करने की जरूरत पड़ती? शायद नहीं। गोदी मीडिया की अतिशयोक्ति ने भारत को कूटनीतिक रूप से शायद कमजोर किया, और पाकिस्तान को मनोबल बढ़ाने का मौका दे दिया।

गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग

गोदी मीडिया: राष्ट्रवाद का ढोंग या ISI का ‘स्लीपर सेल’?

अब सवाल उठता है—यह सब हुआ कैसे? सर्जिकल स्ट्राइक रिपोर्टिंग गोदी मीडिया ने ऐसी बेतुकी और खतरनाक खबरें क्यों चलाईं? क्या यह सिर्फ TRP की भूख थी, या कुछ गहरी साजिश? ट्विटर पर लोग शक जता रहे हैं: “अटकलें लगाई जा रही हैं…”क्या गोदी मीडिया ISI का ‘स्लीपर सेल’ है?” यह सवाल इसलिए गंभीर है, क्योंकि जिस वक्त भारत ‘धर्म युद्ध’ के रास्ते पर आतंकी ठिकानों को राख करने को तैयार था, उसी वक्त गोदी मीडिया ने ‘धर्म युद्ध नीति’ को चौराहे पर नंगा कर दिया। उनकी फेक खबरों ने भारत के सैन्य कार्रवाई मिशन को नुकसान किया, और पाकिस्तान का मनोबल सातवें आसमान पर पहुँच गया।


विश्लेषण: गोदी मीडिया का व्यवहार कई सवाल खड़े करता है। पहला, क्या वे इतने अक्षम हैं कि उन्हें रणनीतिक ऑपरेशनों की संवेदनशीलता का अंदाजा नहीं?


दूसरा, क्या उनकी ‘राष्ट्रवादी’ छवि सिर्फ एक ढोंग है, जिसके पीछे TRP और सत्ता की चाटुकारिता छिपी है?


तीसरा, और सबसे गंभीर व्यंग्य भरे सवाल—क्या कोई बाहरी ताकत (जैसे ISI) इन चैनलों को प्रभावित कर रही है? यह सवाल इसलिए उठता है, क्योंकि गोदी मीडिया की खबरें सीधे तौर पर पाकिस्तान के हित में गईं।


भारतीय मीडिया की भूमिका में नेशनल मीडिया वैसे खबरों का ब्रेकिंग न्यूज दिखा रही थी जैसे गाँव में मैच होता है, ये रहा — छक्का जब खेल खेलाने वाला बताता है कि छक्का नही चौका या फाऊल है तो ब्रोंकाइटिंग बदल दी जाती है।


अगर यह साजिश नहीं, तो मूर्खता की भी कोई सीमा होती है। और अगर साजिश है, तो ऐसी खबरें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।


गोदी मीडिया के इतिहास को देखें, तो यह साफ है कि वे ‘राष्ट्रवाद’ का चोला ओढ़कर सत्ता की जय-जयकार करते हैं। लेकिन इस बार उनकी हरकतें इतनी खतरनाक थीं कि उन्होंने देश के रणनीतिक हितों को ही दाँव पर लगा दिया।


यहाँ जरूरत है एक गहन जांच की—कौन इन चैनलों को फंड करता है? उनकी खबरों के स्रोत क्या हैं? और सबसे अहम, क्या कोई बाहरी ताकत इनके जरिए भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही है?

फेक खबरों का नतीजा: TRP की जीत, जनता की हार?

तो इस पूरे तमाशे का नतीजा क्या निकला? भारत का ‘आपरेशन सिंदूर’ अधूरा रह गया है, आतंकवाद का पूरा सफाया तो दूर पाकिस्तान में जश्न-ए-जालसाजी का माहौल बीते शाम यानी 10 मई से देखा जा रहा है, जैसे पाकिस्तानी सेना युद्ध जीत जश्न मना रही हो।


गोदी मीडिया की TRP चमचमाती। और जनता?
जनता को मिला एक और ‘ब्रेकिंग न्यूज’ का शोर: “सनसनीखेज खुलासा! भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाया!” हाँ, सबक तो सिखाया—पाकिस्तान को कि गोदी मीडिया के भरोसे तुम्हारा मनोबल हमेशा बुलंद रहेगा।


विश्लेषण: इस घटना ने कई सबक सिखाए। पहला, गोदी मीडिया की अनियंत्रित पत्रकारिता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। दूसरा, सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव आज के युद्धों को जितना प्रभावित करते हैं, उतना शायद हथियार भी नहीं।


तीसरा, भारत को अपनी मीडिया नीति पर पुनर्विचार करना होगा, ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। जहाँ धर्म की रक्षा के लिए भारतीय सेना की युद्ध नीति धर्म पर आधारित है कि जिन आतंकियों ने हमारे निर्दोष आम नागरिकों से धर्म पूछकर मारा हम उन्हें अपना धर्म बताकर जबाब देने निकले थे, एक ट्यूट मे रुकना पड़ा।


पाकिस्तान भारतीय मीडिया की गलतबयानी खबरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाकर अपनी रक्षा कि गुहार लगाई की हम निर्दोष पाकिस्तानियों को भारत मार रहा है!


काश भारतीय मीडिया दनादन खबरों को दिखाने से अपने आप को रोक लिया होता तो यह मौका पाकिस्तान को नही मिला होता यह हमारी अपनी भावनात्मक सोच है इस पर विश्लेषण किया जाए।


जहाँ भारत का हर जिम्मेदार जैसे राजनाथ सिंह ने हनुमान जी का लंका दहन पर उदाहरण देकर बताया। योगी आदित्यनाथ धर्म शास्त्रों का उदाहरण देकर बताया भारतीय सेना आतंकवादियों के ठिकानों को ध्वस्त करने निकली है, आम जन का कोई अहित नहीं होने दिया भारतीय सेना ने। वही कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले, भगवान कृष्ण ने पांडवों को सलाह दी थी कि उनकी रणनीति को शत्रु से गुप्त रखा जाए। “गुह्यं प्रकटति न युद्धे”—युद्ध में रहस्य को प्रकट नहीं करना चाहिए।


जहाँ भारत में हर कोई धर्म युद्ध के सिद्धांतों का पालन किया वही भारतीय नेशनल मीडिया धर्म के सिद्धांत के विपरीत रही है, क्योंकि समय से पहले खबरें प्रसारित करने से शत्रु को लाभ होता है।


यह भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था सो हो गया। हमारी अपनी भावनात्मक सोच है भारतीय मीडिया ने एडवांस और फेक खबरों से पाकिस्तान को लाभ पहुंचाने का काम कर दिया है। इसे भी धर्म नीति के दृष्टिकोण से देखा जाए तो।

आगे क्या-कहूं इन चंद शब्दों के साथ लेख को विराम दूंगा?

याद रखें —अगली बार जब गोदी मीडिया ‘युद्ध’ छेड़े, तो रिमोट का बटन दबाइए, चैनल बदल दीजिए। क्योंकि इनके ‘महा-फेक-युद्ध’ में दुश्मन पहले ही सतर्क हो जाता है न पूरी तरह आतंकी मरते हैं, न देश और देश की जनता जीतता है—बस TRP की माला जपने वाले मालामाल होते हैं। और हाँ, अगर कोई पूछे कि गोदी मीडिया का असली मकसद क्या है, तो बस इतना कहिए— “TRP, साजिश, या मूर्खता— युद्ध धर्म नीति का उल्लंघन, जांच करवाइए, जवाब मिल जाएगा!” 

एक तलफ अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि… मोदी डोनाल्ड ट्रम्प के सामने सेरेंडर, उस समय अचानक कर गए जब भारतीय सेना आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के फतह पर थी, तो कहीं अडानी मामले को लेकर ट्रम्प ने मोदी को कुछ अंदरूनी तीखा रूख तो नहीं दिखा दिया।


जो तीनों सेनाओं से वार्तालाप भी करना उचित नहीं समझा और सेना की वापसी का ऐलान हो गया। यह कोई भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री पर आरोप नहीं लोगों का कहना है? व्यंग के रूप में भावनात्मक रूप से देखा जाए।

भारतीय सेवा आतंकवाद के खिलाफ पराक्रम से लड़ रही थी। विजय के करीब थी। भारत पर अवैध कब्जा किए हुए पाकिस्तान से जमीन वापस लेने का यह सुनहरा मौका था। ‌ 2025 का पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद के खिलाफ एयर स्ट्राइक भारतीय सैनिकों की मजबूत कार्रवाई साबित हो गई। ‌ लेकिन क्या नरेंद्र मोदी कूटनीति के रूप से अमेरिका के सामने झुक गए, यह एक बड़ा सवाल पैदा होता है? इस सवाल का जवाब आने वाले दो-तीन दिन में स्पष्ट रूप से मिलने वाला है!


पाकिस्तान से जब भी युद्ध हुआ है तो यह युद्ध अमेरिका के कूटनीति से भी हुआ है। ‌दरअसल अमेरिका पाकिस्तान का सच्चा मित्र भी हमेशा साबित होता रहा है 1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी के सामने यही विकट स्थिति पैदा हुई थी। तब इंदिरा गांधी ने अपने कूटनीति जवाब से तत्कालीन अमेरिका के राष्ट्रपति को सबक सिखा दिया था। ‌


इंदिरा गांधी ने दम दिखाया था कम से कम पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट तो दिया। आज पाकिस्तान चारों तरफ से घिरा हुआ था और आतंकवाद का सफाया भी होता और भारत की भूमि से पाकिस्तान का अवैध कब्जा भी खत्म हो गया होता लेकिन अचानक एक झटके में सब स्थगित मतलब कुछ अंदरूनी तो है जो ऐसा रिस्पॉन्स मिला जो 7 मई को भारतीय सेना के बढ़ते अच्छे कदम को रोक दिया।


आखिरकार पूरे घटनाक्रम में यह सवाल उठता है जिसका जवाब आने वाले वक्त में जरूर भारतीयों के सामने आएगा? भारतीय सेना के पराक्रम को पूरी दुनिया सराह रहा है। हम अपनी सेना के वीर सैनिकों को नमन करते हैं जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी।

अमेरिका की मध्यस्थता डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति चाल

ऐसा हम अकेले नही सोचे नहीं हैं। यह कुछ लोगों की भावनाएं है जो इस व्यंग्य लेख में हम शामिल कर रहे हैं, इस आपरेशन सिंदूर का नतीजा देखकर, हमारे नजर मे अब नेता वास्तव में डोनाल्ड ट्रम्प दिख रहा है, भारत मे सभी विपक्षी पार्टियों सभी समुदायों का समर्थन मिला था मोदी को— आंतकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो उसके बाद भी कुछ भी न होने दिया गया, जिससे पाकिस्तान को आतंकवादियों का समर्थन करने से पीछे हटना पडे या आतंकवाद का सफाया हो सके साथ ही अपनी अवैध जमीन को वापस लिया जा सके।


ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान को कैसे मिला मौका?
दरअसल गोदी मीडिया के जरिए टीआरपी और फेंक न्यूज़ का खेल आज से नहीं वर्षों से चल रहा है। इस पर लगाम लगाना जरूरी है। ‌सूचना का आदान-प्रदान स्वस्थ तरीके से होना चाहिए। ‌

भारत की अस्मिता और उसकी प्रतिष्ठा का सवाल है।
यह लेख आम जनों कि भावनाओं को समाहित करते व्यंग्यात्मक और विश्लेषणात्मक है। फेक मीडिया रिपोर्ट्स और इस घटना से जुड़े तथ्यों की गहन जांच की जरूरत है, कि सच आम जन के सामने आवे। कल 10 मई को सुबह हमने युद्ध नीति के अनुसार एक आर्टिकल लिखा था पढ़िए समझिए और आने वाले समय में नेशनल मीडिया जो गोदीमीडिया के नाम से अपना परिचय पूरे विश्व को दे चुकी हैं कि काली करतूतों से आगे सावधान रहें सतर्क रहें साथ ही आईटी सेल के अफवाहों से भी सावधान रहें देश की सुरक्षा कौन करेगा अब सोचने का समय आ गया है।

इस बार कि फेक न्यूज जांच का विषय है सच सामने लाने के लिए। हर हर महादेव जय श्री राम।

Political change in India

प्रकाशन — amitsrivastav.in | लेख विश्लेषण प्रस्तुति—टीम कि गहन रिपोर्ट और सपोर्ट। मुख्य लेखक —अमित श्रीवास्तव/अभिषेक कांत पांडेय

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देवरिया में आंगनबाड़ी नियुक्ति विवाद महिला ने डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग

देवरिया जिले के भागलपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गहिला में आंगनबाड़ी कार्यकत्री की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव की निवासी कमलावती सिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2004 में उन्हें विधिवत चयनित किए जाने के बावजूद बाद में साजिश के तहत कुछ वर्ष बाद हटाकर दूसरी … Read more
गोदी मीडिया की फेक रिपोर्टिंग-ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान को कैसे मिला मौका? ट्रंप का 1 ट्वीट, पाकिस्तान की चाल, भारत की अधूरी जीत पर विश्लेषण

Kisan Sammelan Gwalior In Nidhi Singh: पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने 1 राम दरबार भेंट कर किया अभिनंदन

ग्वालियर में आयोजित कृषि सम्मेलन Kisan Sammelan Gwalior में पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने निधि सिंह को राम दरबार भेंट कर सम्मानित किया। निधि सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती, सहकारिता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में आयोजित एक भव्य सहकारिता कृषि सम्मेलन में देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों और … Read more
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20 May Deoria: वेतन संकट से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों का फूटा गुस्सा, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध — “जनता की सेवा करें या परिवार बचाएं?”

20 May Deoria। में एनएचएम कर्मियों, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सीएचओ और डॉक्टरों ने लंबित वेतन के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। जानिए वेतन संकट, कर्मचारियों की मांग और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले असर की पूरी रिपोर्ट। महीनों से लंबित वेतन ने स्वास्थ्य कर्मियों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेला।देवरिया में स्वास्थ्य … Read more
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NCF 2023 के संदर्भ में भाषा शिक्षण: गहन अध्ययन, कौशल और रचनात्मकता की तरफ

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 (NCF 2023) ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि पुरानी रट्टू प्रणाली को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। हिंदी भाषा को अब ‘कोर्स A और B’ के स्थान पर … Read more

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