देवरिया हादसा, 31 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में आज एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहां गोवंश तस्करी में लिप्त एक पिकअप वाहन ने एक ई-रिक्शा को कुचल दिया। इस भीषण टक्कर में ई-रिक्शा चालक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन महिला शिक्षिकाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया, बल्कि योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून व्यवस्था और गोवंश तस्करी पर लगाम लगाने की कथित कोशिशों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आक्रोशित ग्रामीणों ने बैकुंठपुर-देवरिया मार्ग जाम कर अपना गुस्सा जाहिर किया, जबकि पुलिस ने दो तस्करों को हिरासत में लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश शुरू कर दी।
घटना बरियारपुर थाना क्षेत्र के बरूआडीह गांव के पास बैकुंठपुर-बरूआडीह मार्ग पर सुबह की है। पिकअप वाहन (पंजीकरण संख्या UK 17CA 5160), जिसमें अवैध रूप से गोवंश लदे थे, ने तेज रफ्तार में एक ई-रिक्शा को पीछे से जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ई-रिक्शा चालक रामज्ञानी प्रजापति (55 वर्ष, पुत्र धनपाल प्रजापति, निवासी बरूआडीह) की मौके पर ही मौत हो गई। ई-रिक्शा में सवार चार लोग घायल हुए, जिनमें तीन महिला शिक्षिकाएं—मीनाक्षी श्रीवास्तव (निवासी गायत्री नगर, देवरिया), माधुरी तिवारी (निवासी कोतवाली, देवरिया), और नाहीदा परवीन (निवासी अलीनगर, देवरिया)—शामिल हैं। चौथी घायल निरुपमा (निवासी भीखमपुर रोड, देवरिया) भी गंभीर हालत में हैं।

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पुलिस की कार्रवाई या महज खानापूर्ति?
सूचना मिलते ही अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) और क्षेत्राधिकारी (सलेमपुर) पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने पिकअप वाहन को कब्जे में लिया और दो अभियुक्तों—मुनाब अली (निवासी गोपालगंज, बिहार) और खुर्शीद (निवासी कुशीनगर)—को हिरासत में लिया। कई गोवंश भी बरामद किए गए। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावटी है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि गोवंश तस्करी का यह धंधा पुलिस की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं।
योगी सरकार पर कटाक्ष: “बुलडोजर कहां है अब?
योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण और तस्करी रोकने के लिए बड़े-बड़े दावे किए हैं। “गाय हमारी माता है” का नारा बुलंद करने वाली सरकार के राज में गोवंश तस्करी का धंधा फल-फूल रहा है, और इसकी कीमत बेकसूर लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर है कि सरकार का बुलडोजर सिर्फ चुनिंदा मामलों में चलता है, जबकि गोवंश तस्करी जैसे संगठित अपराध बेरोकटोक चल रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने तंज कसते हुए कहा, “योगी जी का बुलडोजर तो गरीबों के घरों पर चलता है, तस्करों के ठिकानों पर क्यों नहीं?”
ग्रामीणों का आक्रोश और सड़क जाम
हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने बैकुंठपुर-देवरिया मार्ग को जाम कर दिया। उनका कहना था कि गोवंश तस्करी के कारण आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। जाम के दौरान ग्रामीणों ने तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज के लिए निर्देश दिए। लेकिन यह दौरा कितना प्रभावी होगा, यह समय बताएगा। स्थानीय लोग मानते हैं कि ऐसे दौरे सिर्फ खानापूर्ति के लिए होते हैं, और असल में जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आता।
गोवंश तस्करी: सरकार की नाकामी का सबूत
देवरिया में यह पहला मामला नहीं है, जब गोवंश तस्करी के कारण कोई हादसा हुआ हो। पूर्वांचल में यह धंधा लंबे समय से चल रहा है, और इसमें कथित तौर पर पुलिस और स्थानीय नेताओं की मिलीभगत की बात भी सामने आती रही है। योगी सरकार ने गोवंश संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि तस्कर बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर सरकार की उस नीति पर सवाल उठाए हैं, जो कागजों पर तो सख्त दिखती है, लेकिन हकीकत में नाकाम साबित हो रही है।
सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही
यह हादसा सिर्फ गोवंश तस्करी का मसला नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा की बदहाली को भी उजागर करता है। तेज रफ्तार वाहन, ओवरलोडिंग, और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी आम बात है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठाता। क्या सरकार और पुलिस सिर्फ हादसों के बाद जागती है? क्या बेकसूर लोगों की जान की कोई कीमत नहीं?
जनता का सवाल: आखिर कब तक?
यह हादसा एक बार फिर योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर कटाक्ष करता है। “अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश” का दावा करने वाली सरकार के सामने यह सवाल है कि आखिर कब तक बेकसूर लोग संगठित अपराधों की भेंट चढ़ते रहेंगे? गोवंश तस्करी रोकने में नाकाम रही सरकार अब इस हादसे के बाद क्या कदम उठाएगी, यह देखना बाकी है।
देवरिया का यह हादसा एक परिवार की बर्बादी और तीन शिक्षिकाओं की जिंदगी पर मंडराते खतरे की कहानी तो है ही, साथ ही यह योगी सरकार की नाकामी का जीवंत सबूत भी है। गोवंश तस्करी, सड़क सुरक्षा की कमी, और प्रशासनिक लापरवाही—ये सारे मुद्दे इस घटना में एक साथ उभरकर सामने आए हैं। अब सवाल यह है कि क्या सरकार सिर्फ बयानबाजी और बुलडोजर की सियासत तक सीमित रहेगी, या वाकई में जमीनी स्तर पर कुछ बदलेगा? घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ ही जनता इंसाफ और सुरक्षा की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठी है।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और स्थानीय संदर्भों पर आधारित है। इसमें योगी सरकार की नीतियों पर कटाक्ष जनभावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। मामले में नए तथ्य सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
देवरिया से गूगल वेबसाइट्स amitsrivastav.in पर दिलीप कुमार की रिपोर्ट
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