Google – गूगल का डिजिटल दरबार: छोटे प्रकाशकों के सपनों का कब्रिस्तान या अवसरों का खजाना?

Amit Srivastav

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क्या आपकी वेबसाइट भी Google के “सेक्सुअल कंटेंट” वाले फरमान की शिकार हुई है? जानिए गूगल की रहस्यमयी नीतियों का सच, छोटे प्रकाशकों के संघर्ष, और डिजिटल जंगल में टिके रहने की चतुर रणनीतियाँ—एक कटाक्ष भरे, सच्चाई से लबालब श्री चित्रगुप्त जी के देव वंश-अमित श्रीवास्तव की कर्म-धर्म लेख में!

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परिचय: गूगल का ताज और छोटे प्रकाशकों की त्रासदी

Google - गूगल का डिजिटल दरबार: छोटे प्रकाशकों के सपनों का कब्रिस्तान या अवसरों का खजाना?

स्वागत है, मेरे दोस्त, गूगल के डिजिटल दरबार में, जहां हर छोटा प्रकाशक अपने सपनों का ताज लेकर आता है, लेकिन अक्सर उसे निराशा का तमगा मिलता है। आपने एक वेबसाइट बनाई—शायद तांत्रिक साधनाओं, धार्मिक आस्थाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा या आयुर्वेदिक नुस्खों पर आधारित। रात-रात भर जागकर, अपनी आत्मा को शब्दों में उड़ेला, और सोचा कि गूगल ऐडसेंस के जादुई विज्ञापनों से आपकी मेहनत रंग लाएगी। लेकिन अचानक, गूगल का “दैवीय फरमान” आता है— “आपकी साइट पर सेक्सुअल कंटेंट है। विज्ञापन बंद!” आप हक्के-बक्के हैं।

आपके लेख में तो “तंत्र” का मतलब आध्यात्मिक साधना था, न कि कोई अश्लील सामग्री! तंत्र शास्त्र मे सेक्स योनि आदि सेक्सुअल शब्द स्वभाविक हैं, क्यूंकि तंत्रालोक तंत्र विद्या का मूल भाग योनि और लिंग है, फिर यह नोटिफिकेशन क्यों? कुंडलिनी जागरण में मूलाधार चक्र सेक्सुअल पार्ट उदर से नीचे से प्रारम्भ होकर शिखर यानी मस्तिष्क तक मे सातों भाग स्थापित है। इसकी सही व्याख्या कर जानकारी देने पर गूगल सेक्सुअल कंटेंट का ठप्पा वेबसाइट्स पर लगा नोटिफिकेशन दे देता है।

यह गूगल के मसीहा को समझने की जरूरत है, जहाँ धार्मिक शैक्षणिक लेख मे शब्दों के साथ जानकारी दी जाती है उसे सेक्सुअल का ठप्पा न लगाये। सोचिये गूगल पर तमाम वेबसाइट फूल सेक्सुअल पोस्ट प्रकाशित करने वाली हैं और अच्छी कमाई करती हैं, क्यूंकि सेक्स से सम्बंधित सही जानकारी हर व्यक्ति को चाहिए। स्कूली शिक्षा मे सामान्य रूप से ज्यादातर जानकारी शामिल नही है जो पाठकों का गूगल पर खोज में देखा गया है, अपनी आवश्यकता के अनुसार पाठक गूगल पर सर्च करते हैं और सबसे ज्यादा गूगल पर सर्च सेक्स से सम्बंधित किवर्ड होता है।

बड़ी वेबसाइट्स का भ्यू बढे ठीक, छोटी या नई वेबसाइट्स का भ्यू बढ़ने पर गूगल तुरंत सेक्सुअल वेबसाइट्स का ठप्पा लगा विज्ञापन रोक देता है, गूगल द्वारा वेबसाइटों में भेदभावपूर्ण व्यवहार क्यूँ? यह गूगल की नीतियों का वह काला जादू है, जो छोटे प्रकाशकों को भूलभुलैया में फंसाकर रखता है। इस लेख में, हम गूगल की नीतियों की गहराई में उतरेंगे, गूगल के दोहरे मापदंडों पर तीखा कटाक्ष करेंगे, हम लेखकों का दायित्व है किसी को भी सही मार्गदर्शन देना।

सोचिए —गूगल पर हो रहे सर्च पर अगर लेखक जानकारी न दे तो गूगल जानकारी सर्च होने वाले किवर्ड पर पाठकों को कहां से लाकर देगा, यह गूगल के बादशाह को सोचना चाहिए और अपने ज्ञानी मशीन मे सुधार करना चाहिए। जो ज्ञानी मसीहा हम लेखकों की लेखनी से ही संचालित होता है कि सेटिंग को ठीक करना चाहिए ताकि धार्मिक तांत्रिक विद्या और स्वास्थ्य शिक्षा की लेख को सेक्सुअल का ठप्पा न लगाएं। गूगल हो समाज हो या सरकारी तंत्र या सरकार हो हम समाजिक लेखकों का दायित्व मार्गदर्शन देना है, पहल तो सम्बंधित को ही करना होता है।

हम इस लेख में गूगल के दोहरी नीतियों को हटाकर छोटी वेबसाइटों के लिए जीवित रहने की रणनीतियाँ सुझाएंगे। तैयार हैं? तो चलिए, गूगल के इस डिजिटल जंगल में कदम रखते हैं! आप अगर वेबसाइट्स चलाते हैं तो हमारे पोस्ट का समर्थन करें। हम लेखकों का दायित्व है, गूगल के इस दोगली राजनीति को भी सबक सिखाने की। बड़ी वेबसाइट्स सेक्सुअल पोस्ट प्रकाशित करे तो उसका सेक्सुअल नही और छोटी या नयी वेबसाइट्स मार्गदर्शी लेखनी में जो समाज के लिए उपयोगी है, में आवश्यकतानुसार सम्बंधित शब्दों व चित्र का प्रयोग करे तो वेबसाइट्स सेक्सुअल है का — ठप्पा लग जाता है।

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गूगल का “सर्वज्ञानी” एल्गोरिदम: ज्ञान का मसीहा या अज्ञान का बादशाह?

गूगल, वह डिजिटल मसीहा, जिसके पास हर सवाल का जवाब है। इसका ऐडसेंस मंच छोटे प्रकाशकों के लिए किसी स्वर्ग का द्वार लगता है। आप अपनी साइट पर विज्ञापन लगाते हैं, कुछ पैसे टपकने शुरू होते हैं, और आप सपने देखने लगते हैं—शायद एक दिन आप भी डिजिटल दुनिया के राजा बन जाएंगे। लेकिन रुकिए, जनाब! गूगल का “सर्वज्ञानी” एल्गोरिदम आपकी साइट को स्कैन करता है और एक झटके में फैसला सुना देता है— “यह साइट सेक्सुअल कंटेंट से भरी है!”

आप हैरान हैं। आपने तो बस तांत्रिक ध्यान की विधि लिखी थी, या शायद यौन, प्रजनन स्वास्थ्य, पर एक शैक्षिक लेख। लेकिन गूगल का यह मशीन-देवता, जो शायद संस्कृत और सनसनीखेज का फर्क नहीं समझता, आपके कुंडलिनी “चक्र संतुलन” को “चक्करबाज़ी” समझ बैठता है। और लीजिए, आपकी कमाई पर ताला लग जाता है! यह गूगल की नीतियों का वह काला हास्य है, जहां एक छोटा प्रकाशक अपनी मेहनत के फल की उम्मीद करता है, और बदले में उसे एक नोटिफिकेशन का “प्रसाद” मिलता है।

क्या यह जानबूझकर किया गया धोखा है? शायद नहीं, लेकिन गूगल का यह स्वचालित जज छोटे प्रकाशकों को सजा देने में कोई कसर नहीं छोड़ता। और मजेदार बात? बड़े-बड़े अश्लील साइट्स पर गूगल के ही विज्ञापन चमकते रहते हैं, जैसे तारे रात के आकाश में। आह, गूगल का यह दोहरा मापदंड! यह तो बस “न्याय” का डिजिटल नाटक है, जहां छोटे प्रकाशक सिर्फ दर्शक बनकर रह जाते हैं।


छोटी वेबसाइट्स के लिए सुझाव: गूगल के इस दोगली नीति के खिलाफ अपनी वेबसाइट पर लेख जरुर लिखें जबतक गूगल अपनी दोगले नीति मे बदलाव नही करता तब तक अपने लेखों में संवेदनशील शब्दों का उपयोग सावधानी से करें। उदाहरण के लिए, अगर आप “तंत्र” या “प्रजनन स्वास्थ्य” जैसे विषयों पर लिख रहे हैं, तो स्पष्ट करें कि यह शैक्षिक या आध्यात्मिक संदर्भ में है। गूगल के एल्गोरिदम को “संदर्भ” समझाने के लिए अपने लेख में अतिरिक्त व्याख्या जोड़ें, जैसे —यह लेख आध्यात्मिक साधना पर केंद्रित है, न कि यौन सामग्री पर।

YMYL का शाही फरमान:
छोटे प्रकाशकों के लिए गूगल का “गुप्त हथियार”

गूगल की YMYL (Your Money or Your Life) नीति को समझिए—यह गूगल का वह शाही फरमान है, जो छोटे प्रकाशकों के लिए किसी गुप्त हथियार से कम नहीं। इस नीति के तहत, अगर आप स्वास्थ्य, वित्त, या धार्मिक सलाह दे रहे हैं, तो आपकी साइट को “विशेषज्ञता, प्रामाणिकता, और विश्वसनीयता” (E-A-T) के ऊंचे मापदंडों पर खरा उतरना होगा। सुनने में तो यह बहुत पवित्र लगता है, जैसे गूगल दुनिया को भ्रामक जानकारी से बचाने का पुण्य कार्य कर रहा हो। लेकिन हकीकत में यह छोटे प्रकाशकों के लिए एक जाल है।

मान लीजिए, आपने अपनी छोटी-सी वेबसाइट पर आयुर्वेदिक नुस्खों या तांत्रिक साधनाओं पर लेख लिखा। गूगल कहता है, “हमें तुम्हारी डिग्री दिखाओ, तुम्हारा प्रमाणपत्र दिखाओ!” लेकिन भला एक छोटा ब्लॉगर, जो शायद अपने जुनून और स्व-अध्ययन के दम पर लिखता है, हर लेख के लिए डॉक्टर या गुरु का सर्टिफिकेट कहां से लाए? और अगर आपने “तंत्र” पर लिखा, तो गूगल का एल्गोरिदम उसे तुरंत “सेक्सुअल कंटेंट” समझकर आपकी साइट को दंडित कर देता है।

यह नीति बड़े प्रकाशकों के लिए तो ठीक है, जिनके पास विशेषज्ञों की फौज और संसाधनों का खजाना है, लेकिन छोटे प्रकाशकों के लिए यह किसी सजा से कम नहीं। गूगल का यह YMYL नियम एक ऐसा “शाही फरमान” है, जो छोटे प्रकाशकों को दरबार से बाहर फेंक देता है, जबकि बड़े खिलाड़ी ताज पहनकर नाचते रहते हैं।


छोटी वेबसाइट्स के लिए सुझाव: अपनी साइट पर अपनी विशेषज्ञता को हाइलाइट करें। अगर आप आयुर्वेद या तंत्र पर लिख रहे हैं, तो अपने “About Us” पेज पर अपने अनुभव, अध्ययन, या प्रशिक्षण का जिक्र करें। अगर आपके पास कोई औपचारिक डिग्री नहीं है, तो विश्वसनीय स्रोतों (जैसे पुस्तकों, शोध पत्रों, या विशेषज्ञों के उद्धरण) का उपयोग करें। गूगल का YMYL नियम आपसे “प्रमाण” मांगता है, तो उसे कुछ तो दिखाएं!

गूगल नीतियाँ
अपील की प्रक्रिया: गूगल का “मजाक” या डिजिटल भूलभुलैया?

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जब गूगल आपकी साइट को “सेक्सुअल कंटेंट” का दोषी ठहराता है, तो वह आपको अपील का मौका देता है। सुनने में तो यह बहुत उदार लगता है, जैसे गूगल कह रहा हो, “आओ, मेरे बच्चे, अपनी बात रखो, हम सुनेंगे!” लेकिन हकीकत में यह अपील की प्रक्रिया एक डिजिटल भूलभुलैया है, जहां हर मोड़ पर निराशा इंतजार कर रही है। आप घंटों लगाकर अपनी सामग्री का बचाव करते हैं, स्पष्ट करते हैं कि आपका लेख तांत्रिक साधना पर था, न कि किसी अश्लीलता अपराध के बढ़ावा पर।

लेकिन जवाब में गूगल का एक टेम्पलेट ईमेल आता है— “हमने आपकी साइट की समीक्षा की और नीति उल्लंघन पाया गया।” बस, इतना ही। न कोई स्पष्टीकरण, न कोई ठोस कारण। यहां तक कि आपके हजारों लाखों पोस्ट मे कौन सा पोस्ट गूगल नीतियों का पालन नहीं करता इसकी भी जानकारी नहीं दी जाती। यह ऐसा है जैसे गूगल का एल्गोरिदम एक डिजिटल जज बन बैठा हो, जो बिना सुनवाई के सजा सुना देता है। और मजेदार बात? यह प्रक्रिया इतनी धीमी और अपारदर्शी है कि छोटे प्रकाशक हताश होकर हार मान लेते हैं।

गूगल का यह “अपील का मौका” एक ऐसा मजाक है, जिसमें हंसी छोटे प्रकाशकों पर ही होती है। भले ही छोटी वेबसाइट्स या नयी वेबसाइट्स के लेखक बड़ी बड़ी वेबसाइटों से भी अधिक अच्छी सुस्पष्ट जानकारी देने वाले हों जो पाठकों को समझ आ सके और पाठकों के लिए फायदेमंद हो। जब छोटी या नयी वेबसाइट्स पर पाठकों का आगमन होता है उसको डाउन करने के लिए हजारों तरकीब लगनी शुरू हो जाती है।


छोटी वेबसाइट्स के लिए सुझाव: अपील दायर करते समय अपनी सामग्री की शुद्धता को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से बताएं। उदाहरण के लिए, अगर आपका लेख तंत्र पर है, तो लिखें— “यह लेख आध्यात्मिक साधना पर आधारित है और इसमें कोई यौन सामग्री नहीं है।” अगर गूगल जवाब नहीं देता, तो X जैसे मंचों पर अपनी बात उठाएं। गूगल को सार्वजनिक दबाव का डर होता है, और हो सकता है कि आपकी आवाज सुनी जाए।

गूगल के ऐसे गलत नीति निर्देश पर भी लेख लिखें जब आपकी वेबसाइट्स पर सेक्सुअल का एलर्ट नोटिफिकेशन तो बड़ी वेबसाइट्स या वो वेबसाइट्स जो नग्नता और फूल सेक्स पर आधारित है वैसे वेबसाइट्स पर गूगल एडसेंस एड कैसे चलाता है और वैसे वेबसाइट्स को गूगल सर्च से बाहर अभी तक क्यूँ नहीं किया?

Google policy
गूगल का दोहरा मापदंड: बड़े साइट्स का स्वर्ग, छोटों का नर्क

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गूगल की नीतियों में दोहरापन इतना साफ है कि इसे देखकर हंसी भी आती है और गुस्सा भी। बड़े-बड़े न्यूज पोर्टल्स, जो कभी-कभी सनसनीखेज, भ्रामक, या यहां तक कि संदिग्ध सामग्री प्रकाशित करते हैं, फूल सेक्सुअल कि भरपूर उपलब्धता रहती उनके विज्ञापन चमकते रहते हैं जैसे रात के आकाश में तारे। लेकिन एक छोटी-सी वेबसाइट, जो शायद आयुर्वेदिक नुस्खों या धार्मिक प्रथाओं पर लिखती है, को तुरंत “सेक्सुअल कंटेंट” का ठप्पा लग जाता है।

यह ऐसा है जैसे गूगल कह रहा हो, “बड़े मगरमच्छ, तुम तो पानी में तैरते रहो, लेकिन छोटी मछलियों, तुम्हें तो हम तालाब से ही निकाल देंगे!” यह दोहरा मापदंड छोटे प्रकाशकों के लिए सबसे बड़ा धक्का है। बड़े प्रकाशकों के पास संसाधन, वकील, और प्रभाव होता है, जो गूगल की नीतियों की भूलभुलैया में आसानी से रास्ता निकाल लेते हैं। लेकिन छोटे प्रकाशक? उनके पास सिर्फ मेहनत और सपने होते हैं, जिन्हें गूगल का एल्गोरिदम पलक झपकते कुचल देता है।

और हां, यह विडंबना देखिए— गूगल की नीतियां कहती हैं कि वे उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए हैं, लेकिन असल में वे बड़े खिलाड़ियों की जेबें भरने के लिए हैं। जिन वेबसाइटों से खुलेआम नंगा बीडीओ फुटेज परोसा जाता है, प्लेबॉय, प्रेगनेंट जाँब जैसे उपभोक्ताओं को ठगने का बीडीओ पोस्ट प्रकाशित होता है वहां महंगे विज्ञापन भी चलते हैं। कहने का तात्पर्य है कि जो उपभोक्ताओं को वेबसाइटें ठग रही हैं उनपर एड्सन भी मेहरबानी से अच्छी कमाई कराता है। कभी-कभी तो लग रहा है दाल में कुछ काला ही नहीं बल्कि गूगल कि दाल ही पूरी काली है।


छोटी वेबसाइट्स के लिए सुझाव: अपनी साइट को बड़े प्रकाशकों की तरह पेशेवर बनाएं। एक साफ-सुथरा डिज़ाइन, स्पष्ट “About Us” पेज, और विश्वसनीय स्रोतों का उल्लेख गूगल के एल्गोरिदम को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, अपनी साइट को नियमित रूप से अपडेट करें और पुरानी सामग्री को हटाएं या सुधारें, जो गलत व्याख्या का कारण बन सकती है।

Google history
गूगल की नीतियों का अंधा तीर: सेक्सुअल कंटेंट का भूत

गूगल की सेक्सुअल कंटेंट नीति छोटे प्रकाशकों के लिए एक ऐसा भूत है, जो बिना बुलाए बार-बार आता है। आपने शायद अपने लेख में “प्रजनन स्वास्थ्य” या “तांत्रिक साधना” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, और गूगल का एल्गोरिदम तुरंत चिल्ला उठता है: “यह तो अश्लील है!” यह नीति इतनी सख्त है कि कई बार शैक्षिक या आध्यात्मिक सामग्री भी इसके शिकार हो जाती है। उदाहरण के लिए, अगर आपने योग के “कुंडलिनी जागरण” पर लिखा, तो गूगल का एल्गोरिदम शायद “कुंडलिनी” को “कामुक” समझ ले।

यह ऐसा है जैसे गूगल का एल्गोरिदम एक सख्त मौलवी बन गया हो, जो हर शब्द को शक की नजर से देखता है। और सबसे मजेदार बात? गूगल की यह नीति बड़े-बड़े साइट्स पर लागू नहीं होती, जो सनसनीखेज हेडलाइंस, फूल सेक्सुअल और संदिग्ध सामग्री के साथ लाखों कमाते हैं। यह गूगल का वह अंधा तीर है, जो छोटे प्रकाशकों के दिल को भेदता है, जबकि बड़े खिलाड़ी हंसते हुए निकल जाते हैं।


छोटी वेबसाइट्स के लिए सुझाव: अपनी सामग्री को स्कैन करें और संवेदनशील शब्दों को संदर्भ के साथ स्पष्ट करें। उदाहरण के लिए, अगर आप “तंत्र” पर लिख रहे हैं, तो पहले पैराग्राफ में ही स्पष्ट करें कि यह आध्यात्मिक प्रथा है। साथ ही, गूगल के “Content Policies” को नियमित रूप से पढ़ें और अपनी साइट को उनके अनुरूप रखें।

Google history politics and recovery theory
गूगल की नीतियों का इतिहास: छोटे प्रकाशकों पर हमला?

गूगल की नीतियां हमेशा से विवादों में रही हैं। 2023 में Adalytics की एक रिपोर्ट ने दावा किया कि गूगल ने TrueView विज्ञापनों के लिए भ्रामक दावे किए, जिसमें विज्ञापनदाताओं को यह विश्वास दिलाया गया कि उनके विज्ञापन देखे जा रहे हैं, जबकि कई बार वे छोटे, म्यूटेड, या गैर-इंटरैक्टिव खिलाड़ियों में चलाए गए। इसी तरह, ProPublica ने 2022 में खुलासा किया कि गूगल की विज्ञापन प्रणाली गलत सूचना को बढ़ावा देती है, खासकर गैर-अंग्रेजी भाषाओं में।

और हां, महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित विज्ञापनों को गूगल ने कई बार अनुचित रूप से ब्लॉक किया, जबकि पुरुषों के यौन स्वास्थ्य से संबंधित विज्ञापनों को हरी झंडी दी। यह सब क्या दिखाता है? कि गूगल की नीतियां शायद उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा से ज्यादा बड़े विज्ञापनदाताओं और बड़े वेबसाइटों प्रकाशकों के हितों की रक्षा करती हैं। छोटे प्रकाशकों के लिए यह एक कड़वा सच है, जिसे निगलना पड़ता है।


छोटी वेबसाइट्स के लिए सुझाव: गूगल की नीतियों पर नजर रखें और उनके बदलावों को समझें। गूगल के “Adsense Help Center” और “Webmaster Guidelines” को नियमित रूप से पढ़ें। अगर आपको लगता है कि गूगल की नीतियां अनुचित हैं, तो X जैसे मंचों पर अपनी बात उठाएं और अन्य प्रकाशकों के साथ नेटवर्क बनाएं। नेटवर्क मे हम सदैव सहभागी रहेगें सम्पर्क करे भारतीय हवाटएप्स कालिंग सम्पर्क नम्बर 07379622843 पर।

Google websites
छोटे प्रकाशकों के लिए जीवित रहने की रणनीतियाँ

गूगल के इस डिजिटल जंगल में छोटे प्रकाशक कैसे बचें? यहाँ कुछ व्यावहारिक सुझाव हैं, जो आपके सपनों को गूगल के “दैवीय फरमान” से बचा सकते हैं–

  • 1. सामग्री की सावधानी: संवेदनशील शब्दों (जैसे “तंत्र”, “काम”, या “प्रजनन”) का उपयोग सावधानी से करें। अगर जरूरी हो, तो स्पष्ट करें कि यह शैक्षिक या आध्यात्मिक संदर्भ में है।
  • 2. विशेषज्ञता का प्रदर्शन: अपनी साइट पर अपनी विशेषज्ञता को हाइलाइट करें। अगर आपके पास औपचारिक डिग्री नहीं है, तो अपने अनुभव, शोध, या विश्वसनीय स्रोतों का उल्लेख करें।
  • 3. वैकल्पिक आय के स्रोत: गूगल ऐडसेंस पर पूरी तरह निर्भर न रहें। Media.net, PropellerAds, या सहबद्ध विपणन जैसे अन्य मंचों का उपयोग करें।
  • 4. तकनीकी अनुकूलन: अपनी साइट को तेज, मोबाइल-अनुकूल, और सुरक्षित (HTTPS) बनाएं। गूगल के एल्गोरिदम तकनीकी गुणवत्ता को भी ध्यान में रखते हैं।
  • 5. सामुदायिक समर्थन: X जैसे मंचों पर अपनी बात उठाएं और अन्य प्रकाशकों से जुड़ें। गूगल को सार्वजनिक दबाव का डर होता है, और आपकी आवाज ताकत बन सकती है।

निष्कर्ष: गूगल का साम्राज्य या छोटे प्रकाशकों का युद्धक्षेत्र?

गूगल का डिजिटल साम्राज्य छोटे प्रकाशकों के लिए एक युद्धक्षेत्र है, जहां हर कदम पर एक नया नोटिफिकेशन इंतजार कर रहा है। गूगल का “सर्वज्ञानी” एल्गोरिदम, YMYL का शाही फरमान, और अपील की भूलभुलैया छोटे प्रकाशकों के सपनों को कुचलने के लिए काफी हैं। लेकिन, मेरे दोस्त, हार मत मानो! यह डिजिटल युद्ध है, और तुम योद्धा हो। अपनी सामग्री को साफ-सुथरा रखो, अपनी विशेषज्ञता दिखाओ, और गूगल के इस जंगल में अपने रास्ते खुद बनाओ। गूगल शायद “देवता” हो, लेकिन तुम्हारी मेहनत और जुनून उसका मुकाबला कर सकते हैं। तो, लिखते रहो, सपने देखते रहो, और गूगल को दिखा दो कि छोटे प्रकाशक भी बड़े सपने देख सकते हैं।

Pornography and India, Google

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  1. गूगल लगता है हम वेबसाइट्स चलाने वालों के साथ निश्चित ही धोखाधड़ी कर रही है। हमारे वेबसाइट्स पर भी इन्कम कम हो गया है सर जी आप तो हम लोगों के गुरु जी हैं जब आपका यह पोस्ट पढा तो सत्य लगा गूगल अब धोखा कर रहा है हम सबके साथ।

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