खग जाने खगही के भाषा – प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

Amit Srivastav

Updated on:

खग जाने खगही के भाषा

खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
अमित श्रीवास्तव-
स्त्री और पुरुष के बीच मधुर संबंध को प्रेम, स्नेह, श्रद्धा, वात्सल्य आदि कई नामों से जाना जाता है। माता-पुत्र, पिता-पुत्री, ससुर-पुत्र वधु आदि के बीच वात्सल्य प्रेम रहता है। भाई-बहन के बीच स्नेह भाव छोटों के प्रति बडों की श्रद्धा शेष स्त्री-पुरुष, पति-पत्नी या समान आयु वर्ग के बीच मधुर संबंध को प्रेम कहा जाता है। कुछ लोग इस प्रकार के प्रेम को प्रेम न कहकर वासना कहते हैं।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
इसलिए बहस का एक मुद्दा प्रेम बनाम वासना हो जाता है जिसे अलग करके देखना असम्भव नही तो अत्यन्त कठिन अवश्य है। स्त्री और पुरुष के बीच आकर्षण का आधार शरीर होता है या मन? इसका निर्णय करना सरल नहीं होता। मूल प्रश्न आता है कि आकर्षण क्यों और कैसे होता है? सौन्दर्य स्त्री में ही नहीं पुरुष में भी होता है, इसलिए प्रेम में पहले कौन पहल करता है या कर सकता है, यह व्यक्ति के व्यक्तित्व पर निर्भर करता है। प्रेम का निवेदन या उसकी कामना पुरुष ही करता है। यह कहना गलत होगा, क्योंकि अनेक उदाहरणों में स्त्री भी पहल करती पायी गई हैं। इसलिए किसी भी ओर से प्रेम की कामना हो सकती है। प्रेम शून्य में नहीं होता, उसे एक आधार चाहिए और वह आधार कोई परलिंगी व्यक्ति का शरीर हो सकता है।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
जब प्रेम का आधार ही शरीर होता है तो फिर प्रेम अशरीर कैसे होगा? स्त्री-पुरुष प्रेम का आकर्षण मन से होता है। मन किसी परलिंगी के प्रति आकृष्ट होता है। परलिंगी में कौन सा अंग आकर्षण का केंद्र होता है, यह कहना कठिन होगा। इस विषय वस्तु पर लिखने से पहले बहुत ही सावधानी पूर्वक तमाम प्रेमी प्रेमिकाओं के साथ मंथन किया। सर्वप्रथम तो नेत्र ही टकराता है, नेत्र मन का द्वार होता है। नेत्रों में प्रिय की छवि जब समा जाती है तो सीधे ह्रदय में उतर जाती है। स्त्रियाँ इस अर्थ में बहुत चतुर सयानी होती हैं। वे प्रियतम की छवि को ह्रदय में कैद करके नेत्रों के पट बन्द कर लेती हैं। जैसे जनक की फुलवारी में सीता ने राम की छवि को ह्रदय में उतार लिया “दीन्हें पलक कपाल सयानी”
नैनो की भाषा केवल नैन ही पढ़ पाते हैं।
बेमुख रह कर भी बहुत कुछ कह जाते हैं।।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
प्रेमी-प्रेमिका जब पास-पास बैठते हैं तो पत्थर की मुर्ति नही रहते। उनके मन में कहने सुनने को बहुत कुछ रहता है। वे घन्टों बातें करते रहते हैं तब भी उनकी बातें समाप्त नही हो पाती कहने सुनने को बहुत कुछ रह जाता है। प्रेमी-प्रेमिका प्रायः सटकर या पास-पास बैठते और अधिक कुछ नहीं तो एक दूसरे का हाथ तो पकड़ ही लेते हैं।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

खग जाने खगही के भाषा – इस प्रकार का अनुभव स्पर्शानुभव कहलाता है। परलिंगियों का स्पर्श उनके शरीरों में विद्युत रासायनिक अभिक्रिया उत्पन्न करता है। इससे दिलों के तार झनझना उठते हैं प्रेम का यह द्वितीय चरण होता है। इस चरण में एक दूसरे का शरीर स्पर्श भिन्न-भिन्न स्थानों पर हो सकता है- बांहों, बालों, चेहरा, पीठ आदि को सहलाना या उस पर हाथ रख देना- इस चरण की अनिवार्य क्रियाएँ होती है।

खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
हाथ में हाथ पकड़ या स्त्री-पुरुष का हाथ एक दूसरे के कमर पर डाल टहलना भी इसी चरण के अन्तर्गत आता है। कभी-कभी प्रेमी युगल पास-पास लेट कर भी बातें करते हैं यह कार्य सूने स्थानों पर प्रायः होता है। कुछ भाग्यवान युगल नदियों या झीलों में नौकायन का आनंद लेते हैं, कल्पना के घोर सरपट दौड़ने या मुक्त पक्षी की भांति अनन्त आकाश में कुलांचे भरने लगते हैं। प्रेम का तीसरा चरण आलिंगन से प्रारम्भ होता है प्रेमिका प्रियतम की गोंद में लेटकर या उसकी छाती पर मस्तक टेक कर बैठ जाती है। फिर दोनों इसी स्थिति में रहकर बातें करते हैं या एक दूसरे के सौन्दर्य को निहारा करते हैं। आलिंगन या परिरंभण के दौरान प्रेमी युगल एक दूसरे को बाहों में बांध कर बैठे या लेटे रह सकते हैं।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
कामशास्त्रों में आलिंगन के अनेक प्रकार बताए गए हैं। सामान्यतः स्त्री-पुरुष की गोद में रहती है और पुरुष स्त्री की बाहों में पकड़े सहलाता रहता है। प्रेम का चौथा चरण चुम्बन होता है। यह आरम्भ में कपोल, ललाट, नेत्र, और अंत में अधरों पर आता है। अधर चुम्बन में अतिशय उत्तेजना वश युगल एक दूसरे के मुंह में जीभ डाल देते हैं। आलिंगन चुम्बन एक साथ होने वाली क्रियाएं हैं। प्रियतमा के अधर रस कि पान प्रेम प्रदर्शन की पराकाष्ठा होती है। यह प्रदर्शन अदभुद आनंद प्रदान करता है। चुम्बनों का इतिहास और विस्तार अनन्तकाल से चला आ रहा है। “वो योगी हो गया जिसने यह मोहन भोग चखा है।” या- लव पै लव रख कर लिपट जाऊं तुम्हारे सदके।
वोसा वह शै है जो दोनों को मजा देता है।।
या- क्या नजाकत है कि आरिज उनके नीले पड गये।
मैने तो वोसा लिया था, ख्वाब में उस तस्वीर का।।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
चुम्बन लेने वाले को तो सुख मिलता ही है देने वाले को अधिक सुख मिलता है। स्त्री-पुरुष के प्रेम का यह रूप या चरण बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक होता है। यह तन-मन को बिहवल कर देता है। यों तो चुम्बन के दूसरे स्थल भी होते हैं। स्तन, कुचाग्र, गर्दन का पिछला भाग, हथेली, छाती, नाभि, जांघें, कटि, कांख, गुप्तांग आदि। किन्तु गर्दन के नीचे भागों का चुम्बन तब लिया जाता है जब कामोत्तेजना बलवती हो जाती है और निकट की दूरी असहनीय होने लगती है।
प्रेम का पांचवां चरण मर्दन होता है। यह क्रिया थपथपाने, गुदगुदाने या सहलाने के द्वारा प्रदर्शित की जाती है। नव युगल प्रायः एक दूसरे का कपोल मसल देते हैं या बांह, पीठ या बाल सहलाते हैं। यों तो मर्दन का मुख्य लक्ष्य स्तन और जांघें होते हैं किन्तु उसका नम्बर बहुत बाद में आता है। स्तनों और जांघों को सहलाने या मसलने के बाद कामाग्नि इतनी प्रज्वलित हो जाती है कि फिर प्रेमी-प्रेमिका जब तक एक दूसरे में संलिप्त न हो जाए या नीर-छीर की भांती एक दूसरे में समा न जाएं तब तक कामाग्नि शांत ही नहीं होती।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
किन्तु यह एकीकरण प्रेम नाटिका की यवनिका होती है पर्दा गिरा खेल खत्म। प्रेम की अंतिम मंजिल संभोग होती है यह सत्य होने पर भी यह आवश्यक नहीं कि प्रेमी-प्रेमिका संभोग करें ही। भारतीय युवतियाँ प्रेम के चौथे चरण तक सरलता से चढ़ जाती हैं किन्तु पांचवें चरण पर पैर रखते ही उसका ह्रदय धड़कने लगता है। उसे आगे बढ़ने में खतरा दिखाई देता है। इसलिए आमतौर पर कुछ युवतियां पीछे भी हट जाती हैं।
किशोरावस्था में शरीर के साथ-साथ ही मन भी तेजी से विकसित होता है।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
स्त्री-पुरुष जननांगो पर पड़ने वाला नयसर्गिक प्रभावों से यौनांग तो विकसित पुष्ट और संभोग सक्षम बनते ही हैं, मन भी इन परिवर्तनों से अछूता नहीं रहता। घर मे ही किशोर किशोरियों को बडों के लाख गोपनीय व्यवहार करने के बावज़ूद ऐसे दृश्य देखने को मिल जाता है जो उनके मन को मथने लगते हैं। साथ ही स्कूल कालेज में फैशन और ग्लेमर की प्रदर्शनी और रोमांस के नए किस्से देखने सुनने को मिला करते हैं। फिल्मों, बीडीओ, दूरदर्शन और इन्टरनेट द्वारा भी पूर्ण सहयोग प्राप्त कर लेते हैं।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

आजकल तो यूट्यूब गुगल नेट पर ऐसे ऐसे चित्र बीडीओ दिखाया जा रहा है जो सात्विक मन को भी झकझोर काम वासना को प्रज्वलित कर देता है। ऐसे वातावरण और परिवेश में सतीत्व और सात्विकता का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है। रोमांटिक पाकेट बुक में पढ़ने को मिलता है, ज्यादातर भोजपुरी अश्लीलता भरे फिल्म व गाने, इन्टरनेट पर तो अश्लीलता का भंडार ही है, डंके की चोट पर दिखाया व बताया जाता है कि प्रेम का अर्थ शरीर सम्बन्ध स्थापित करना होता है।

प्रेम की इस नौटंकी के तीन दृश्य होता है-ऐन, केन, प्रकारेण- किसी लड़की को पटाना, उसके साथ विवाह का वचन देना या कभी-कभी विवाह कर लेना, अंत में हनीमून पर निकल जाना।

खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोतCommunity Love खग जाने खगही के भाषा
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
आज का प्रेम न तो जायस के जायसी के पद्मावती का प्रेम है न काशी के कबीर का न राजस्थान की मीरा का प्रेम है न दक्षिण भारत की ओण्डाल का। अमीर खुसरो के प्रेम गीतों के प्रमुख नायक ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया हैं तो ओण्डाल और मीरा कृष्ण के साथ रमणेच्छु हैं, जायसी और कबीर दोनों आत्मा और परमात्मा के मिलन को पति-पत्नी के शारीरिक प्रेम के उदाहरणों से व्यक्त करते हैं। प्रेम का आधार शरीर ही होता है अब शरीर का मिलन संभोग हो ही यह परिस्थितियों, प्रेम की सीमा और प्रेमी-युगल की भावनाओं पर निर्भर करता है। यदि कोई प्रेमी युगल इस सीमा तक प्रेम करता है कि बिना शरीर सम्बन्ध के उसे शांति नहीं मिल सकती तो शरीर सम्बन्ध अनहोनी बात भी नही होती। शरीर रांगो का जब प्यार दुलार किया जाएगा तो कामाग्नि के धधक उठने पर उसको बुझाना अवश्यंभावी हो जाता है। कोई शरीर से छेड़छाड़ करे और उसकी प्रतिक्रिया न हो यह अस्वाभाविक है। प्रिय द्वारा अंगुली छू जाने पर ही जब शरीर में सनसनी फैल जाती है तब आलिंगन चुम्बन मर्दन से क्या दशा होती होगी? प्रेमी-प्रेमिका दूर-दूर बैठकर प्रेमालाप करें यह अपने आप में ही एक हास्यास्पद बात होगी।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
जब प्रेमी-प्रेमिका निकट बैठेंगे तो सट कर बैठना चाहेंगे, जब सट कर बैठेंगे तो कम से कम प्रिय का हाथ प्रियतमा के हाथ में या गोद में होगा, जब इतना चल कर कोई आएगा तो खाली हाथ कैसे जायेगा। निकट से निकटतर और निकटतर से निकटतम होने की कामना को अस्वभाविक भी कैसे कहेंगें? यह तो प्रेम का गणित है, दो दूनी चार और चार चौका सोलह होना ही है। फिर भी यह सर्वथा आवश्यक नहीं कि प्रेमी-प्रेमिका के यौनांगो का मिलन हो ही। अनेक बार केवल उपर-उपर से अंगों का प्यार दुलार करके मन को समझा लिया जाता है। कभी-कभी जननांगो को छेड़ कर भी प्यार का इजहार कर लिया जाता है। पश्चिमी देशों में उसे ‘हेवी पेटिंग’ कहते हैं। इसमे केवल शिश्न-योनी मिलन न होकर शेष सब कुछ कर यौन तृप्ति कर ली जाती है। वे लोग मानते हैं कि ऐसा करके पवित्र बने रहते हैं और लड़की का भी कुँवारीत्व भंग नहीं होता। ऐसा कुँवारीत्व कुछ ही लडकियां बचाएं रहतीं हैं, शेष तो आत्मसमर्पण करने का मन बना कर ही प्रेम की राह पर चलती हैं। शारीरिक प्रेम अनैतिक है या व्यवाहारिक मैं तो इतना ही कह सकता हूं कि प्रेम शून्य में नहीं किसी व्यक्ति से किया जाता है।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
जब व्यक्ति साकार है शरीर धारीवाल है तो उसका प्रेम अशरीर हो ही नहीं सकता। साधारण जन जब प्रेम करते हैं तो उनका शरीर ही माध्यम बनता है जिसके द्वारा ह्रदय का विनियम करते हैं इसलिए मनुष्य के प्रेम को अशरीरी कहना या मानना एक हास्यास्पद कल्पना के सिवा कुछ दूसरा नही हो सकता। भारतीय संस्कृति भी भानुमति के पिटारे से कम जादूई नही है। इसमे विधि और निषेध, स्वीकृति और वर्जित के इतने उदाहरण भरें पडे हैं कि कौन सा रास्ता चुना जाए यह निर्णय कर पाना कठिन है। राधाकृष्ण का प्रेम, गोपियों के रास और महारास के रस का सागर श्रीमदभागवत मध पुराण है। उसके विवरण एक ओर शुद्ध अध्यात्म की ओर ले जाते हैं तो दूसरी ओर मानसिकता के भोग का भी संकेत देते हैं। कुमार संभवत में शिव पार्वती का विवाह वात्स्यायन के कामसूत्रो की व्याख्या प्रतीत होती है। छांदोग्य और बृहदारण्यक में संभोग को यज्ञ के माध्यम से समझाया गया है। पूरे वैदिक और संस्कृत वांग्मय में प्रेम और संभोग के रूपक जहां तक बिखरे पड़े हैं पर उनकी समझ में यह नही आता कि कहां पहुंच कर वापस लौटा जाए। प्रेम पथ पर चल कर ऐसा दो राह मिलता है जहाँ वे भ्रमित हो जाती हैं।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
एक ओर प्रेम की पावन धारा, दूसरी ओर शरीर की ज्वालामुखी उन्हें दुविधा में डाल देती है। प्रेमी का सानिध्य जहाँ मन में सतरंगी इन्द्रधनुष बनाता है वहीं उसके अंगुली पकडने के साथ उरोजों तक बढ़ते हाथ से घबड़ाने लगती हैं। लरिका लेवे के मिशन लंगर मो ढिग आय गयो अचानक आंगुरी छाती छैल छुवाय, कहावत का मतलब – गोद में से बच्चा लेने के बहाने उस प्रेमी ने मेरी छाती- स्तन को छू लिया। एक ओर प्रेम का लोभ दूसरी ओर प्रेमी की काम भावना मन अजीब भवर जाल में फंस जाता है। ज्यादातर साहसी लडकियां प्रेम की पांचवें चरण पर चढ़ पीछे पैर हटा लेती हैं। निश्छल व भावुक लडकियां सर्वस्व लुटा देती हैं। क्या करूं क्या न करूं? यह दुविधा सभी प्रारम्भिक युगलों के मन मे होती है। पश्चिम की लडकियां जहाँ पूरी तरह प्रेम का समापन करती हैं, वहीं हमारे पुर्वीय प्रदेश की लडकियां भयभीत हिरणी बनी रहती हैं। ये यह चाहती हैं कि उनका एक अदद प्रेमी हो, पर यह देख सिहर उठती हैं कि उनका प्रेमी उनका प्रेम नहीं शरीर चाहता है।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
हमारा समाज दोहरी नैतिकता का कट्टर समर्थक है। पुरुष किसी स्त्री का प्रेम के नाम पर शरीर भोग करे तो उसका पौरुष, किशोर युवक हुआ तो उसकी नादानी या लड़कपन माना जाता है। किंतु लड़की भंवर जाल में फंस कर सर्वस्व लूटा बैठी तो उसके सात पुस्त की बखिया उडेल कर रख दी जाती है। उसे छमा करने का साहस या मानसिकता हमारे समाज में है ही नही। इस लेखनी में अहम भूमिका अदा करने वाली अपनी सहयोगियों के साथ-साथ इतना कहूंगा, दूसरों के प्रति आप को भी वैसा व्यवहार करना चाहिए जिसे हम अपने लिए पसंद करें। वैसे तो प्रेम की भाषा सब जानते हैं कुछ छुपकर इजहार करते कुछ यादगार बन जाते हैं। खग जाने खगही के भाषा के साथ-साथ कामदेव की ससम्मान में- नीचे लिखित दो पंक्तियाँ। 
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
प्रेम प्यार सुख चैन की वर्षा तेरी नजर से वर्षे।
कोई भी न पनघट तरसे कोई न प्यासा तडपे।।
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत
 
HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

देवरिया 5 जून: पर्यावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी— सभाकुंवर कुशवाहा

देवरिया 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम करही भुवन में भाजपा भाटपार रानी मंडल के द्वारा वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और हरित वातावरण को बढ़ावा देना था।इस अवसर पर दर्जनों पौधे लगाए … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

Astro Physics, AI और Robotics की रहस्यमयी दुनिया: क्यों तेजी से बढ़ रहा है युवाओं में विज्ञान सीखने का 1 जुनून?

Astro Physics, AI और Robotics की रहस्यमयी दुनिया क्यों युवाओं को आकर्षित कर रही है? जानिए Black Hole, Space Science, Artificial Intelligence, Robots, Alien Life और भविष्य की तकनीकों का एक विस्तृत शैक्षणिक विश्लेषण। आज की युवा पीढ़ी केवल पारंपरिक शिक्षा, नौकरी और मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गई है। इंटरनेट, Artificial Intelligence, Space Research … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

देवरिया में आंगनबाड़ी नियुक्ति विवाद महिला ने डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग

देवरिया जिले के भागलपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गहिला में आंगनबाड़ी कार्यकत्री की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव की निवासी कमलावती सिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2004 में उन्हें विधिवत चयनित किए जाने के बावजूद बाद में साजिश के तहत कुछ वर्ष बाद हटाकर दूसरी … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

Kisan Sammelan Gwalior In Nidhi Singh: पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने 1 राम दरबार भेंट कर किया अभिनंदन

ग्वालियर में आयोजित कृषि सम्मेलन Kisan Sammelan Gwalior में पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने निधि सिंह को राम दरबार भेंट कर सम्मानित किया। निधि सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती, सहकारिता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में आयोजित एक भव्य सहकारिता कृषि सम्मेलन में देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों और … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

20 May Deoria: वेतन संकट से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों का फूटा गुस्सा, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध — “जनता की सेवा करें या परिवार बचाएं?”

20 May Deoria। में एनएचएम कर्मियों, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सीएचओ और डॉक्टरों ने लंबित वेतन के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। जानिए वेतन संकट, कर्मचारियों की मांग और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले असर की पूरी रिपोर्ट। महीनों से लंबित वेतन ने स्वास्थ्य कर्मियों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेला।देवरिया में स्वास्थ्य … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

NCF 2023 के संदर्भ में भाषा शिक्षण: गहन अध्ययन, कौशल और रचनात्मकता की तरफ

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 (NCF 2023) ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि पुरानी रट्टू प्रणाली को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। हिंदी भाषा को अब ‘कोर्स A और B’ के स्थान पर … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

जनगणना-2027 : देश की आबादी गिनने से पहले सरकार मोबाइल की औकात क्यों गिन रही है?

जनगणना-2027 पर बड़ा सवाल सरकारी काम या महंगे स्मार्टफोन बेचने की योजना? जनगणना-2027 एप्स पुराने एंड्रॉयड मोबाइल में न चलने पर प्रगणकों में नाराजगी। क्या डिजिटल इंडिया के नाम पर कर्मचारियों पर महंगे मोबाइल और डेटा खर्च का दबाव डाला जा रहा है? प्रगणकों की जेब पर डिजिटल हमला! जनगणना-2027 एप्स पर व्यंग्यात्मक विश्लेषण। पुराने … Read more
कामाख्ये वरदे देवी नील पर्वत वासिनी। त्वं देवी जगत माता योनिमुद्रे नमोस्तुते।। sexual intercourse भोग संभोग

Yoni Sadhana Vidhi योनि साधना अदृष्ट शक्ति का महाप्रवाह वृहद तांत्रिक ग्रंथ 40 अध्याय

Yoni Sadhana Vidhi —तंत्र, शक्ति, कुण्डलिनी और ब्रह्माणी योनि का गूढ़ विज्ञान। वाममार्ग व दक्षिणमार्ग साधना का विस्तृत आध्यात्मिक वर्णन कामेश्वरी देवी कामाख्या की मार्गदर्शन में। जानें योनि साधना क्या है सम्पूर्ण मार्गदर्शिका। भूमिका/प्रस्तावनायोनि साधना: अदृष्ट शक्ति का महाप्रवाह केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय तांत्रिक परंपरा के उस गूढ़ विज्ञान का उद्घाटन है, जिसे … Read more
खग जाने खगही के भाषा - प्रेम, वासना, प्रेरणा स्रोत

16 मई: वेतन भुगतान में देरी से स्वास्थ्य कर्मियों में बढ़ी नाराजगी, परिवार चलाना हुआ मुश्किल

देवरिया 16 मई। जनपद देवरिया में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को मार्च माह से वेतन न मिलने के कारण भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। चाहे फील्ड में कार्यरत कर्मचारी हों या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी, सभी वेतन भुगतान में हो रही देरी … Read more
यक्षिणी साधना, सरल यक्षिणी साधना, काम यक्षिणी Yakshini sadhna

56 प्रकार के भोग में सबसे उत्तम भोग सम्भोग: धर्म, तंत्र, योग और विज्ञान के अनुसार प्रेम, ऊर्जा और चेतना का रहस्य

भारतीय दर्शन, तंत्र, योग, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के अनुसार सम्भोग को सबसे उत्तम भोग क्यों कहा गया? जानिए 56 प्रकार के भोग, शिव-शक्ति, कुंडलिनी, प्रेम, ऊर्जा, मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का गहन विश्लेषण। भारतीय संस्कृति में “भोग” शब्द का अर्थ केवल भोजन, धन, वैभव या इंद्रिय सुख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह … Read more