ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

Amit Srivastav

Updated on:

कोरोना के साए में पनपा प्रेम: एक अनकही सपना और रोहित की दास्तान Love Life

ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — इस गहन आध्यात्मिक प्रश्न का मार्मिक, विवेचनात्मक और तांत्रिक दृष्टिकोण से उत्तर। लेख में आत्मा की दिव्यता, मानव दुख का वास्तविक कारण, माया-अज्ञान का प्रभाव, विचार–भावना की शक्ति, निर्मलता का रहस्य तथा कामाख्या देवी की साधना से मिलने वाले मार्गदर्शन का गहन विश्लेषण। लेखक चित्रगुप्त वंशज–अमित श्रीवास्तव द्वारा एक अद्वितीय आध्यात्मिक मार्गदर्शक लेख, जो जीवन, दुख और आत्म-जागरण को नए दृष्टिकोण से समझाता है।


लेखक–चित्रगुप्त वंशज — अमित श्रीवास्तव द्वारा देवी कामाख्या के मार्गदर्शन में दिया गया है।
हम ईश्वर के अंश हैं… फिर भी हम दुखी क्यों रहते हैं?
एक शाश्वत प्रश्न का आध्यात्मिक उत्तर।
लेखक: चित्रगुप्त वंशज — अमित श्रीवास्तव
देवी कामाख्या की दिव्य चेतना के मार्गदर्शन में

Table of Contents

मनुष्य का पहला प्रश्न: हम दुखी क्यों रहते हैं?

मनुष्य सदियों से एक ही प्रश्न से जूझता आया है— “यदि मैं ईश्वर का अंश हूँ, तो फिर जीवन में इतनी पीड़ा क्यों है? यदि आत्मा अनंत, अविनाशी, आनंदस्वरूप है, तो फिर यह अशांति, यह उलझन, यह भय, यह टूटन कहाँ से आती है?” यह प्रश्न साधारण नहीं है, यह मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन, सबसे गहन, और सबसे आवश्यक खोज है। ऋषि-मुनियों ने, तांत्रिकों ने, योगियों ने, उपनिषदों ने, पुराणों ने—सभी ने स्वीकार किया कि आत्मा ईश्वरीय है, परंतु जीवन में दुख का अनुभव वास्तविक है। यही द्वंद्व मनुष्य को भीतर तक हिला देता है।


यह लेख ठीक उसी द्वंद्व पर प्रकाश डालता है—मनुष्य ईश्वर का अंश होते हुए भी दुखी क्यों है, और इस दुख से पार जाने का मार्ग क्या है?

पवित्र आत्मा की दिव्यता क्या है?
उत्तर —वह ज्योति जो कभी बुझती नहीं

उपनिषद एक ही वाक्य बार-बार दोहराते हैं— तत्त्वमसि — तू वही है।
गीता कहती है— अविनाशी तु तद्विद्धि — आत्मा अविनाशी है।
पुराण कहते हैं— जीव ब्रह्म का अंश है।
तंत्र कहता है— जब तक मनुष्य अपनी दैवी चेतना को पहचान नहीं लेता, तब तक वह माया का दास बना रहता है।
लेकिन सबसे चमत्कारिक बात यह है कि इतने विशाल ग्रंथों के बाद भी मनुष्य को अपनी आत्मा की एक झलक तक नहीं मिलती।
क्यों?
क्योंकि दिव्यता उसके भीतर सुषुप्त है—अर्थात सोई हुई है।


एक दीपक को ढक दिया जाए तो उसका प्रकाश कहाँ दिखाई देगा?
एक सूर्य को घने बादलों से ढक दिया जाए तो क्या उसके अस्तित्त्व पर संदेह होगा?
नहीं। परंतु उसकी गर्मी, उसकी चमक, उसकी जीवनदायिनी ऊर्जा महसूस नहीं होगी।
इसी प्रकार आत्मा ईश्वर का अंश होते हुए भी मनुष्य को अंधकार में भटका हुआ महसूस होता है, क्योंकि उसके ऊपर अज्ञान, अहंकार, माया, वासनाएँ और संस्कारों की मोटी परतें जमी रहती हैं।

मनुष्य दुखी क्यों रहता है? —
दुख का पहला कारण: ‘मूल स्वरूप का विस्मरण’

सबसे बड़ा कारण एक ही है—
मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गया है।
यह विस्मरण ही दुख का बीज है।
जिस प्रकार कोई व्यक्ति अपनी आँखों पर पट्टी बाँधकर कहे—“सूरज नहीं है,”
वैसे ही मनुष्य अविद्या की पट्टी बाँधकर कहता है—“मैं दुर्बल हूँ, मैं तुच्छ हूँ, मैं असहाय हूँ।”
यह विस्मरण जन्म-जन्मांतर के संस्कारों, मानसिक विकारों, इच्छाओं और भय से निर्मित होता है।


जब तक मनुष्य स्वयं को केवल ‘शरीर’ मानता है, तब तक दुख उसका पीछा नहीं छोड़ता।
शरीर को भूख लगेगी, दर्द होगा, वृद्धावस्था आएगी, हानि होगी—
लेकिन आत्मा इन सबके पार है।
जैसे हवा को हथियारों से नहीं काटा जा सकता, वैसे ही आत्मा को दुख छू भी नहीं सकता।
लेकिन मनुष्य शरीर और मन के दुख को अपना मान लेता है, और यहीं से दुख का चक्र शुरू होता है।

दूसरा दुख का कारण क्या है?
उत्तर —इच्छा का अतृप्त होना दुख का दूसरा बड़ा कारण है—

इच्छा और अपेक्षा।
इच्छाएँ अनंत हैं, और मन सीमित।
सीमित मन अनंत इच्छाओं को पूरा नहीं कर सकता, इसलिए दुख जन्म लेता है।
कभी मिला तो और चाहिए,
नहीं मिला तो पीड़ा है।
मिलकर छूट गया तो तड़प है।
मनुष्य जीवनभर बाहरी वस्तुओं से सुख खोजता है—
धन, प्रतिष्ठा, संबंध, उपलब्धियाँ—
परंतु जो आनंद भीतर है, उसकी तरफ झाँकने का समय नहीं है।
जब तक मनुष्य बाहरी संसार में सुख ढूँढेगा, दुख उसका छाया-पथिक बना रहेगा।

तीसरा दुख का कारण:
उत्तर – भावनाओं और विचारों का अनियंत्रित प्रवाह

आपने सही सूना —विचारों और भावनाओं में अपार शक्ति है।
एक विचार संसार बदल सकता है, एक भावना पूरे मानव समूह में ऊर्जा भर सकती है।
तंत्र व योग दोनों में विचार को वृत्ति कहा गया है और भावना को संवेग—
ये दोनों यदि शुद्ध हों तो मनुष्य ईश्वर के निकट पहुँचता है।
यदि अशुद्ध हों तो मनुष्य अपने ही बनाए नरक में जलता रहता है।

आज मानव का मन इतना बिखरा हुआ है कि उसमें एकाग्रता की शक्ति नहीं रही।
विचार आते हैं, पर दिशा नहीं होती।
भावनाएँ उठती हैं, पर निर्मलता नहीं होती।
यही बिखराव दुख का कारण बनता है।
जिस दिन विचार और भावना का मेल—
उच्च विचार + शुद्ध भावना
—एक साथ होगा, वही दिन मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा को उर्ध्वगामी बना देगा।

दुख का चौथा कारण
निर्मलता का अभाव—जीवन का सबसे बड़ा रोग

मूल समस्या यही है— मनुष्य निर्मल नहीं है।
निर्मलता केवल नैतिकता का विषय नहीं है,
निर्मलता एक ऊर्जा की अवस्था है।
जब मन, भावनाएँ, जीवनशैली और इच्छाएँ निर्मल होती हैं,
तभी भीतर आत्मा का प्रकाश प्रतिबिंबित होता है।
गंदे जल में सूर्य का प्रतिबिंब नहीं दिखता—
यही उदाहरण आत्मा पर भी लागू होता है।
माया, अविद्या, तमस, वासना, क्रोध, लोभ, तुलना, ईर्ष्या—ये सब मन को मलिन करते हैं।
जब मन मलिन हो जाता है, तब मनुष्य अपने दिव्य स्वरूप को नहीं देख पाता।
निर्मलता का अभाव ही दुख है।

पाँचवाँ दुख का कारण—
माया का नर्तन—पर वास्तव में अज्ञान का नर्तन

शास्त्र कहते हैं कि माया मनुष्य को नचाती है।
पर सच्चाई यह है कि माया अलग से कोई सत्ता नहीं है।
माया तो हमारे भीतर ही है—
भ्रम के रूप में,
भय के रूप में,
आसक्ति के रूप में,
और मोह के रूप में।
हम स्वयं ही अपने भ्रमों को पकड़कर जीते हैं और फिर दुखी होते हैं।


हमारी गलत मान्यताएँ, गलत धारणाएँ और भ्रम ही हमारे जीवन की सबसे बड़ी बेड़ियाँ हैं।
जब तक व्यक्ति पूछ नहीं लेता—
“मुझे क्या करना चाहिए?”
तब तक दिशा नहीं मिलती।

Vishwamitra: ऋषि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका सहित रम्भा की पौराणिक कथा

Click on the link ऋषि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका सहित रम्भा की पौराणिक कथा के लिए यहां क्लिक करें। विश्व की पसंदीदा इस वेबसाइट पर अपनी पसंदीदा लेख खोजें पढ़ें और समझें यहां मिलती है हर तरह की सुस्पष्ट जानकारी।

दुख से मुक्ति कैसे?
पहला मार्ग: आत्म-स्मरण

पहला उपाय सरल है, पर कठिन भी—
अपने दिव्य स्वरूप को याद करो।
हर दुख, हर भय, हर पीड़ा के नीचे एक ही सत्य छिपा है—
“मैं आत्मा हूँ, नश्वर शरीर नहीं।”
जब यह स्मरण बार-बार मन में बैठ जाता है,
तब दुख आपको उतनी गहराई से नहीं छू पाता।

दूसरा मार्ग: निर्मलता का साधन—
चिंतन, तप, संयम

निर्मलता कोई नैतिक आदेश नहीं है,
निर्मलता एक ऊर्जा-शुद्धिकरण है।
इसके लिए तीन साधन हैं—
चिंतन, तप, संयम।
चिंतन—उच्च विचारों का सेवन
तप—इच्छाओं का नियंत्रण
संयम—भावनाओं की शुद्धि
जिस दिन ये तीन एक साथ आते हैं,
मनुष्य के भीतर का मल उड़ने लगता है।

तीसरा मार्ग—
भावना और विचार की एकता

सिर्फ विचार ऊँचा होना काफी नहीं,
सिर्फ भावना पवित्र होना भी पर्याप्त नहीं।
जब विचार + भावना एक दिशा में प्रवाहित होते हैं,
तब भीतर प्रचंड शक्ति जागती है।
इसी शक्ति को योग में चित्त-एकाग्रता और तंत्र में शक्ति-संचय कहा गया है।

चौथा मार्ग—
माया को पहचानना—not fight it

माया से लड़ने की जगह उसे पहचानना आवश्यक है।
माया सिर्फ भ्रम है—
जैसे अँधेरे में रस्सी को साँप समझ लेना।
जब ज्ञान का प्रकाश आता है,
साँप अपने-आप गायब हो जाता है।
माया से लड़ने की ज़रूरत नहीं;
ज्ञान लाने की आवश्यकता है।

पाँचवाँ मार्ग—
देवी की कृपा और मार्गदर्शन—कामाख्या का रहस्य

कामाख्या तंत्र में एक सिद्धांत है—
देवी वही काम करती हैं जो मनुष्य के भीतर की सच्चाई को उजागर कर दे।
कामाख्या केवल शक्ति की देवी नहीं हैं—
वे अहंकार-विनाश और आत्म-प्रकाश की देवी हैं।
जो साधक अपने भीतर की असत्य पहचान छोड़ देता है,
उसके लिए देवी का मार्ग अपने-आप खुल जाता है।

दुख का अंत कहाँ है? —
उत्तर —आत्मा के जागरण में

दुख तब तक रहेगा जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचानता।
लेकिन जैसे ही आत्मा की पहचान शुरू होती है—
सुख बाहर से नहीं आता,
भीतर से फूटता है।
यह सुख स्थिर, अनंत, अविनाशी होता है—
क्योंकि यह वस्तुओं से नहीं,
स्वरूप से उपजता है।

अनुरागिनी यक्षिणी साधना कैसे करें। ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं?

लेखक का दैवीय एवं अंतिम संदेश
मनुष्य दुखी है, पर दुख उसका अंतिम सत्य नहीं

मनुष्य दुखी है—
क्योंकि वह स्वयं को पहचानता नहीं।
लेकिन मनुष्य दुखी रहना चाहता नहीं—
इसलिए उसकी यात्रा आध्यात्मिक है।
मनुष्य ईश्वर का अंश है—
इसलिए उसका अंत दुख में नहीं,
प्रकाश में होता है।
यह मार्ग कठिन नहीं,
केवल स्मरण की आवश्यकता है—
अपने भीतर के ईश्वर को पहचानने की।
जब वह पहचान हो जाती है,
तो जीवन में दुख रहते हुए भी
मनुष्य दुखी नहीं रहता। ✍️जय माँ कामाख्या।

Mahayakshini Sadhana: Tantrik Devi Mantra, Siddhi Method महायक्षिणी साधना: तांत्रिक देवी के मंत्र, रहस्य और सिद्धि प्राप्ति विधि

Click on the link भैरवी विद्या साधना निःशुल्क पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। amozan.in पर हमारी लिखी किताबें आनलाईन उपलब्ध हैं खोजें खरीदें पढ़ें। डायरेक्ट विस्तृत ग्रंथ पढ़ने के लिए भारतीय हवाटएप्स कालिंग सम्पर्क नम्बर 07379622843 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

सुखी दांपत्य जीवन: प्रेम, सम्मान और संवाद की संपूर्ण यात्रा

क्या केवल विवाह कर लेना ही सुखी दांपत्य जीवन की गारंटी है?यदि ऐसा होता, तो दुनिया में इतने अधिक वैवाहिक तनाव, बढ़ती दूरियाँ, लगातार होने वाले विवाद, भावनात्मक अकेलापन और टूटते रिश्ते दिखाई नहीं देते। वास्तविकता यह है कि विवाह जीवन की सबसे सुंदर यात्राओं में से एक है, लेकिन यह सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

क्या वास्तव में होती हैं अप्सराएँ? mrigakshi apsara का रहस्य, शास्त्रीय परंपरा, तांत्रिक विमर्श और 1 आध्यात्मिक दृष्टि

क्या अप्सराएँ केवल पौराणिक कथा हैं या भारतीय शास्त्रों का गहन प्रतीक? Mrigakshi Apsara मृगाक्षी अप्सरा, वैदिक संदर्भ, शक्ति परंपरा और शोधपरक तंत्र-मंत्र साधना विधि-विधान के साथ विश्लेषण पढ़ें। पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा शिर्षक मृगाक्षी अप्सरा साधना महाग्रंथ mrigakshi apsara mantra सम्पूर्ण विधि-विधान सहित amozan पर eBook एवं प्रिंट बुक अल्प मूल्य 99 रूपये में … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग | काल भैरव मंत्र, पूजा विधि और उपाय

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग काल भैरव की पूजा विधि, मंत्र और उपाय भगवान बटुक भैरव की पूजा विधि, शक्तिशाली कार्य सिद्धि मंत्र, अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्र, कवच पाठ और शत्रु नाशक प्रभावी उपाय जानिए। कालभैरवाष्टमी पर विशेष प्रयोग से असंभव कार्य सिद्ध होंगे और शत्रु परेशान करना छोड़ देंगे। भैरव कृपा प्राप्त … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

श्री श्री कामाख्या अंबुबाची महाग्रंथ: देवी शक्ति, तंत्र, साधना और सनातन चेतना का 12 दिव्य रहस्य

श्री श्री कामाख्या अंबुबाची महाग्रंथ में देवी कामाख्या, अंबुबाची महापर्व, शक्ति पीठ, तंत्र, साधना, शिव-शक्ति दर्शन, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का शोधपरक एवं विस्तृत अध्ययन। shri-shri-kamakhya-ambubachi-mahagranth इसे भी पढ़ें: तांत्रिकों की देवी लोना चमारिन की आपबीती इसे भी पढ़ें: गुरु गोरखनाथ का जन्म कब हुआ था — सम्पूर्ण जीवनी क्या आपने कभी सोचा है … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

देवरिया 5 जून: पर्यावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी— सभाकुंवर कुशवाहा

देवरिया 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम करही भुवन में भाजपा भाटपार रानी मंडल के द्वारा वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और हरित वातावरण को बढ़ावा देना था।इस अवसर पर दर्जनों पौधे लगाए … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

Astro Physics, AI और Robotics की रहस्यमयी दुनिया: क्यों तेजी से बढ़ रहा है युवाओं में विज्ञान सीखने का 1 जुनून?

Astro Physics, AI और Robotics की रहस्यमयी दुनिया क्यों युवाओं को आकर्षित कर रही है? जानिए Black Hole, Space Science, Artificial Intelligence, Robots, Alien Life और भविष्य की तकनीकों का एक विस्तृत शैक्षणिक विश्लेषण। इसे भी पढ़ें: योनि के 64 प्रकार — कामशास्त्र दृष्टिकोण इसे भी पढ़ें: राजा रानी कूपन लॉटरी रिजल्ट — पूरी जानकारी … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

देवरिया में आंगनबाड़ी नियुक्ति विवाद महिला ने डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग

देवरिया जिले के भागलपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गहिला में आंगनबाड़ी कार्यकत्री की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव की निवासी कमलावती सिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2004 में उन्हें विधिवत चयनित किए जाने के बावजूद बाद में साजिश के तहत कुछ वर्ष बाद हटाकर दूसरी … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

Kisan Sammelan Gwalior In Nidhi Singh: पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने 1 राम दरबार भेंट कर किया अभिनंदन

ग्वालियर में आयोजित कृषि सम्मेलन Kisan Sammelan Gwalior में पूर्व ब्लैक कैट कमांडर्स ने निधि सिंह को राम दरबार भेंट कर सम्मानित किया। निधि सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती, सहकारिता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में आयोजित एक भव्य सहकारिता कृषि सम्मेलन में देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों और … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

20 May Deoria: वेतन संकट से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों का फूटा गुस्सा, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध — “जनता की सेवा करें या परिवार बचाएं?”

20 May Deoria। में एनएचएम कर्मियों, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सीएचओ और डॉक्टरों ने लंबित वेतन के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। जानिए वेतन संकट, कर्मचारियों की मांग और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले असर की पूरी रिपोर्ट। महीनों से लंबित वेतन ने स्वास्थ्य कर्मियों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेला।देवरिया में स्वास्थ्य … Read more
ईश्वर के अंश होते हुए भी हम दुखी क्यों रहते हैं? — आत्मा, माया और आत्म-जागरण का गहन 5 Wonderful रहस्य

NCF 2023 के संदर्भ में भाषा शिक्षण: गहन अध्ययन, कौशल और रचनात्मकता की तरफ

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 (NCF 2023) ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि पुरानी रट्टू प्रणाली को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। हिंदी भाषा को अब ‘कोर्स A और B’ के स्थान पर … Read more

Leave a Comment