लोना चमारी और सिद्धेश्वर अघोरी: तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की 1 Wonderful अमर गाथा

Amit Srivastav

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Maa Kamakhya, माँ कामाख्या की तांत्रिक साधना, तांत्रिक सिद्धियां

भारत की रहस्यमयी धरती, जहाँ हर पत्थर, हर नदी और हर जंगल में कोई न कोई कहानी साँस लेती है, वहाँ एक ऐसी तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की गाथा गूँजती है जो समय की दीवारों को भेदकर आज भी हमारे हृदय को झकझोर देती है।

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यह है amitsrivastav.in पर भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज के देव वंश-अमित श्रीवास्तव की कर्म-धर्म लेखनी में लोना चमारी की कहानी—एक ऐसी स्त्री की, जिसने अपनी सुंदरता के अभिशाप को तंत्र की अलौकिक शक्ति में बदला और समाज की बेड़ियों को तोड़कर सत्य के शिखर तक पहुँची। यह कथा केवल मंत्रों और यंत्रों की नहीं, बल्कि प्रेम, वासना, नैतिकता और मानव मन की गहरी उथल-पुथल की है। लोना चमारी का जीवन एक तूफान था, जिसमें वह न केवल बचीं, बल्कि उस तूफान को अपनी शक्ति बना लिया।

इस लेख में हम उनके जीवन के गुप्त पन्नों को खोलेंगे, उनकी साधनाओं की गहराई में उतरेंगे, और कामरूप के राजा सुहीम व सिद्धेश्वर अघोरी के साथ उनके ऐतिहासिक तांत्रिक युद्ध की कहानी को जीवंत करेंगे। आइए, उस दौर में चलें, जब लोना की एक झलक के लिए लोग अपने प्राण तक देने को तैयार थे, और तंत्र की दुनिया में उनका नाम एक ऊंची शिखर बन चुका था। विस्तृत स्पष्ट जानकारी amazon पर प्रकाशित इस बुक मे पढ़ने के लिए यहां amazon पर जायें।

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1-लोना चमारी का प्रारंभिक जीवन: सुंदरता का जाल और विद्रोह की चिंगारी

पंजाब के अमृतसर के पास एक छोटा-सा गाँव, चमरी, इतना साधारण कि नक्शे पर इसे ढूँढना भी मुश्किल था। लेकिन यहीं, 11वीं शताब्दी के आसपास, एक ऐसी आत्मा ने जन्म लिया, जिसकी कहानी तंत्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी गई। लोना चमारी एक गरीब चमार परिवार में पैदा हुई थीं। उनके माता-पिता दिन-रात चमड़े का काम करते, मगर उनकी मेहनत दो वक्त की रोटी के लिए भी मुश्किल से काफी थी।

फिर भी, प्रकृति ने लोना को एक ऐसा तोहफा दिया, जो उनकी नियति को हमेशा के लिए बदलने वाला था—उनकी बेमिसाल सुंदरता। उनकी आँखें गहरे काले तालाबों-सी थीं, जिनमें सितारे झिलमिलाते थे। उनका चेहरा ऐसा कि गाँव के लोग उनकी एक झलक के लिए बेताब रहते। उनकी मुस्कान में एक जादुई मासूमियत थी, जो कठोर से कठोर दिल को भी पिघला देती। 

लेकिन यह सुंदरता लोना के लिए वरदान कम, अभिशाप ज्यादा बनी। उस दौर में समाज जातिगत भेदभाव और पुरुषवादी क्रूरता की जंजीरों में जकड़ा था। एक निम्न जाति की गरीब लड़की, जिसके पास न कोई सुरक्षा थी न सम्मान, वह समाज की भूखी नजरों का आसान शिकार थी।

गाँव के जमींदार, साहूकार, और यहाँ तक कि कुछ ढोंगी साधु लोना को अपनी हवस का निशाना बनाना चाहते थे। उनकी माँ उन्हें बार-बार चेताती, “लोना, अपनी सुंदरता को छिपा, वरना यह समाज तुझे चैन से जीने न देगा।” मगर सुंदरता ऐसी चीज है, जिसे चाहकर भी छिपाया नहीं जा सकता। 

लोना की जवानी जैसे-जैसे निखरी, गाँव का माहौल उनके लिए और जहरीला होता गया। बचपन में ही उनकी शादी एक ऐसे पुरुष से कर दी गई, जो उनकी सुंदरता पर तो मर मिटा, मगर उनके साथ जीवन की जिम्मेदारी उठाने को तैयार न था। शादी के कुछ ही समय बाद पति ने उन्हें छोड़ दिया। अब लोना न पत्नी थीं, न समाज में उनकी कोई इज्जत थी। एक ऐसी स्त्री, जिसे न पति का सहारा था, न समाज का सम्मान, उसके लिए गाँव का जीवन काँटों की सेज था।

तभी एक ऐसी घटना घटी, जिसने लोना के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। गाँव का एक रसूखदार जमींदार, 11 ठाकुरों का खानदान जो लोना की सुंदरता का दीवाना था, ने एक दिन मौका देखकर उन्हें अकेले में पकड़ लिया। लोना उस समय मुश्किल से तेरह-चौदह साल की रही होंगी। जमींदार ने उनके साथ जबरदस्ती की कोशिश की। लोना ने अपनी पूरी ताकत से उसका विरोध किया और किसी तरह उसकी चंगुल से बच निकलीं।

अगले दिन 11 ठाकुर खानदान से लोना को बुलाया गया और सामुहिक बलात्कार किया गया। इस घटना ने लोना के मन में गहरा घाव छोड़ दिया। यह वह पल था, जब लोना के भीतर का आक्रोश ज्वालामुखी-सा फटा। उन्होंने महसूस किया कि यह समाज कमजोर को कुचलने के लिए बना है। अगर उन्हें इस व्यवस्था से लड़ना है, तो उन्हें ऐसी शक्ति चाहिए, जो हर बंधन को तोड़ दे। उनके मन में बदले की आग थी, मगर साथ ही एक ऐसी तलाश भी, जो उन्हें साधारण जीवन से परे ले जाए।

लोना ने ठान लिया कि वे अपने साथ हुए अत्याचारों का जवाब देंगी—न हथियारों से, बल्कि ऐसी शक्ति से, जो दुनिया की हर ताकत को झुका दे। यहीं से शुरू हुई उनकी यात्रा—एक ऐसी यात्रा, जो उन्हें तंत्र की दुनिया की सबसे शक्तिशाली साधिका बनाने वाली थी।

2-दिल्ली की खतरनाक राह: तंत्र की तलाश और अनगिनत कसौटियाँ

लोना के कानों में खबर पड़ी कि दिल्ली में कुछ ऐसी योगिनियाँ रहती हैं, जो तंत्र विद्या की महारथी हैं। ये योगिनियाँ ऐसी शक्तियाँ रखती थीं, जिनसे असंभव को संभव बनाया जा सकता था। यह सुनकर लोना के मन में एक नई किरण जगी। वे अपने साथ हुए अत्याचारों का बदला लेना चाहती थीं, और इसके लिए उन्हें तंत्र की शक्ति चाहिए थी।

मगर दिल्ली की यात्रा कोई बच्चों का खेल नहीं थी। उस दौर में रास्ते जंगलों, डाकुओं और खतरों से भरे थे। एक अकेली, सुंदर स्त्री के लिए यह यात्रा मौत को दावत देने जैसी थी। फिर भी, लोना ने हिम्मत जुटाई। उनके पास न पैसा था, न साथी, न कोई साधन। बस था एक जलता हुआ संकल्प—शक्ति हासिल करने का संकल्प। 


लोना ने अपने गाँव को अलविदा कहा और अमृतसर से दिल्ली की ओर कदम बढ़ाए। यह यात्रा उनके जीवन का सबसे कठिन अध्याय थी। रास्ते में उन्हें भूख-प्यास, ठंड और बारिश का सामना करना पड़ा। जंगलों में रातें बितानी पड़ीं, जहाँ भेड़ियों की चमकती आँखें और सन्नाटे की साय-साय उनके हौसले की परीक्षा लेती थी।

एक बार एक व्यापारी ने लोना को देखकर उन्हें अपने साथ ले जाने की कोशिश की। उसने धन, वैभव और सुख का लालच दिया, “इतनी सुंदर होकर क्यों भटक रही हो? मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें रानी बना दूँगा।” मगर लोना का मन इन लालचों से परे था। उन्होंने चतुराई से उसे चकमा दिया और रात के अंधेरे में निकल गईं। 

एक दूसरी घटना में लोना एक घने जंगल से गुजर रही थीं, जब उन्हें भेड़ियों का झुंड दिखा। उनके पास कोई हथियार नहीं था। रात का सन्नाटा और भेड़ियों की गुर्राहट किसी का भी हौसला तोड़ सकती थी। मगर लोना ने हार नहीं मानी। उन्होंने पास के पेड़ों से सूखी लकड़ियाँ जमा कीं और आग जला दी। भेड़िए आग से डरकर भाग गए। यह छोटी-छोटी घटनाएँ बताती हैं कि लोना के भीतर कितना साहस और बुद्धि थी। 

कई महीनों की इस खतरनाक यात्रा के बाद लोना दिल्ली पहुँचीं। मगर यहाँ उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। दिल्ली की योगिनियों ने उन्हें सिखाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी विद्या सीमित है। सच्ची तंत्र शक्ति कामरूप में मिलती है। अगर तुम्हें वह चाहिए, तो वहाँ जाना होगा।” यह सुनकर लोना के सामने एक और कठिन रास्ता खड़ा हो गया। दिल्ली से कामरूप की यात्रा और भी लंबी और जोखिम भरी थी। मगर लोना का संकल्प अटल था। उन्होंने दिल्ली को पीछे छोड़ा और कामरूप की ओर चल पड़ीं। 

3- कामरूप की यात्रा: तंत्र साधना का आगाज और इस्माइल योगी का आशीर्वाद

अमृतसर से कामरूप (आधुनिक असम) तक की लोना की यात्रा एक ऐसी गाथा है, जो साहस और दृढ़ता का प्रतीक बन गई। उस समय के रास्ते इतने असुरक्षित थे कि बड़े-बड़े योद्धा भी अकेले यात्रा करने से डरते थे। एक अकेली, सुंदर स्त्री के लिए यह यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं थी। लोना को प्रकृति की मार झेलनी पड़ी—तेज बारिश, कड़ाके की ठंड, और भूख की तड़प। उनकी सुंदरता हर कदम पर खतरा बन रही थी। 

एक बार एक गाँव में कुछ गुंडे लोना के पीछे पड़ गए। उन्होंने लोना को घेर लिया और गलत इरादों से उनकी ओर बढ़े। मगर लोना ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी चतुराई से कहा, “मैं एक सिद्ध तांत्रिक हूँ। मुझे छुआ तो मैं तुम्हें श्राप दूँगी, और तुम्हारी सात पुश्तें तबाह हो जाएँगी।” उस दौर में अंधविश्वास की जड़ें गहरी थीं। लोना की बात सुनकर गुंडे डर गए और पीछे हट गए। 

एक दूसरी बार लोना को एक उफनती नदी पार करनी थी। नदी का प्रवाह इतना तेज था कि कोई नाविक उन्हें ले जाने को तैयार न था। लोना ने हार नहीं मानी। उन्होंने नदी किनारे घंटों बिताए और एक पुरानी, टूटी नाव ढूँढ निकाली। अपनी हिम्मत और बुद्धि से उन्होंने नाव को ठीक किया और नदी पार कर ली। 


कई महीनों की इस कठिन यात्रा के बाद लोना आखिरकार कामरूप पहुँचीं। कामरूप उस समय तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र था। यहाँ की मिट्टी में एक अनोखी शक्ति थी, और कामाख्या मंदिर तांत्रिकों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं था। लोना जब कामरूप पहुँचीं, तो उनके मन में एक अजीब सी शांति थी। उन्हें लगा कि वे आखिरकार उस जगह पर हैं, जहाँ उनकी तलाश पूरी होगी। 


यहाँ उनकी मुलाकात हुई इस्माइल योगी से, एक ऐसे तांत्रिक जिनकी ख्याति पूरे भारत में गूँजती थी। इस्माइल योगी का व्यक्तित्व ऐसा था कि लोग उन्हें देखकर उनके चरणों में झुक जाते। उनकी आँखों में गहरी शांति थी, और उनकी वाणी में जादू। जब लोना ने अपनी कहानी सुनाई, तो इस्माइल योगी का हृदय पिघल गया। उन्होंने लोना की आँखों में वह जुनून देखा, जो साधना के लिए जरूरी होता है। इस्माइल योगी ने लोना को अपना शिष्य बनाया और उन्हें तंत्र की गहरी शिक्षा देना शुरू किया। 

इस्माइल योगी ने लोना को मंत्र, यंत्र और आत्मशक्ति की गहरी समझ दी। उन्होंने बताया कि तंत्र कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और ब्रह्मांड की शक्तियों से एक होने की कला है। लोना की बुद्धिमत्ता और समर्पण ऐसा था कि वे हर विद्या को जल्दी आत्मसात कर लेती थीं। इस्माइल योगी ने उन्हें कुछ ऐसी गुप्त साधनाएँ सिखाईं, जिनका जिक्र तंत्र ग्रंथों में भी नहीं मिलता। इनमें से एक थी “अग्नि सिद्धि”—एक ऐसी साधना, जिसमें साधक को आग पर नियंत्रण करना होता था। 


इस साधना के लिए लोना को कई रातें श्मशान में बितानी पड़ीं। श्मशान की वह डरावनी रातें, जहाँ चिताएँ जल रही थीं और सन्नाटा हड्डियाँ जमा देता था, लोना के लिए एक कठिन इम्तिहान थीं। एक रात, जब लोना अग्नि सिद्धि की साधना कर रही थीं, आकाश में बिजली चमकी और उनके सामने एक विशाल अग्नि गोला प्रकट हुआ। यह साधारण आग नहीं थी; यह ब्रह्मांड की प्रलयकारी शक्ति थी। लोना ने डरने के बजाय उस अग्नि के साथ संवाद किया।

अपनी साधना की शक्ति से उन्होंने उस अग्नि को अपने भीतर समाहित कर लिया। यह वह पल था, जब लोना ने अग्नि सिद्धि हासिल की। अब वे आग को अपनी इच्छा से प्रकट और शांत कर सकती थीं। 

इस्माइल योगी यह देखकर चकित रह गए। उन्होंने कहा, “लोना, तुम मेरी सबसे बड़ी शिष्या हो। तुमने मेरी विद्या को न केवल सीखा, बल्कि उसमें नई गहराई जोड़ दी।” लोना की साधना इतनी तीव्र थी कि वे जल्द ही अपने गुरु से भी आगे निकल गईं।

4- लोना की तांत्रिक सिद्धियां: सुंदरता से परे एक दैवीय तेज

लोना की साधना ने उन्हें ऐसी शक्तियाँ दीं, जिनका वर्णन करना भी मुश्किल है। उनकी सुंदरता अब केवल लौकिक नहीं थी; वह एक दैवीय तेज में बदल गई थी। उनके चेहरे पर ऐसी आभा थी कि लोग उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते। उनकी आँखों में शांति थी, और उनकी मुस्कान में रहस्यमयी जादू। जो भी उनसे मिलता, उनके व्यक्तित्व में खो जाता। 


लोना ने कभी दूसरा विवाह नहीं किया। अपने अनुभवों ने उन्हें सिखाया था कि समाज में कितने लोग दुख और उत्पीड़न से जूझ रहे हैं। वे अपनी शक्ति को दूसरों की सेवा में लगाना चाहती थीं। कामरूप में, कामाख्या मंदिर से कुछ दूरी पर, लोना ने एक आश्रम बनाया। यह आश्रम कोई साधारण जगह नहीं थी। चारों ओर घने जंगल, बीच में एक छोटा-सा मंदिर, और हवा में एक रहस्यमयी ऊर्जा। आश्रम के गुप्त कक्षों में लोना अपनी सबसे गहरी साधनाएँ करती थीं। एक कक्ष में उन्होंने “कामाख्या यंत्र” स्थापित किया था, जिसमें माँ कामाख्या की शक्ति बसी थी। 


लोना की ख्याति पूरे भारत में फैल चुकी थी। लोग उनकी एक झलक पाने और अपनी समस्याओं का समाधान पाने को बेताब रहते। एक बार एक व्यापारी उनके पास आया, जिसका व्यापार ठप हो गया था। लोना ने उसकी ओर देखा और तुरंत बता दिया कि उसने एक गरीब ब्राह्मण का धन हड़प लिया था, जिसके कारण उसे श्राप मिला है। व्यापारी ने अपनी गलती मानी, धन लौटाया, और उसका व्यापार फिर से चल पड़ा। 


लोना की सिद्धियाँ अनगिनत थीं। “दृष्टि सिद्धि” से वे किसी के मन की बात जान लेती थीं। “प्रति-छाया सिद्धि” से वे अपनी एक ऐसी छाया बना सकती थीं, जो असली लगती थी। “शब्द सिद्धि” से वे प्रकृति को नियंत्रित कर सकती थीं। एक बार जब कामरूप में भयंकर सूखा पड़ा, लोना ने एक पहाड़ी पर साधना की। कुछ ही घंटों में बादल छाए, और बारिश ने नदियों को लबालब भर दिया। 


उनकी सबसे गुप्त साधना थी “काल ज्योति साधना”, जिससे वे समय की सीमाओं को लाँघ सकती थीं। वे भूत और भविष्य को देख सकती थीं और इसका उपयोग लोगों की भलाई के लिए करती थीं। लोना का हृदय इतना निर्मल था कि वे अपनी शक्ति का उपयोग कभी स्वार्थ के लिए नहीं करती थीं। उनका आश्रम हर उस इंसान के लिए खुला था, जो दुखों से जूझ रहा था। 

5- राजा सुहीम: प्रेम की आग और एक खतरनाक जुनून

उस समय कामरूप में राजा सुहीम का शासन था। सुहीम एक दयालु और बुद्धिमान राजा थे। उनके शासन में कामरूप स्वर्णिम युग जी रहा था। मगर उनके मन में एक खालीपन था, जो उन्हें बेचैन करता था। शायद यही खालीपन उनकी नियति को लोना से जोड़ने वाला था। 


एक दिन सुहीम के दरबार में एक विधवा ब्राह्मणी आई। उसने बताया कि एक साहूकार उसका उत्पीड़न करता है। सुहीम ने जाँच के आदेश दिए, मगर साहूकार इतना रसूखदार था कि कोई उसके खिलाफ गवाही देने को तैयार न हुआ। ब्राह्मणी निराश होकर बोली, “राजा, तुम्हारा न्याय लोना चमारी के सामने कुछ भी नहीं। वह बिना देखे सब जान लेती है। मैं अब उसके पास जाऊँगी।”

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यह सुनकर सुहीम के मन में कौतूहल जगा। कुछ ही दिनों बाद खबर आई कि साहूकार अचानक बीमार पड़ गया। उसका मल-मूत्र बंद हो गया, और कोई वैद्य उसे ठीक न कर सका। ब्राह्मणी ने साहूकार से क्षमा माँगने को कहा। साहूकार ने माफी माँगी, और वह ठीक हो गया। लोग कहने लगे कि यह लोना की तंत्र शक्ति थी। 
सुहीम ने लोना को दरबार में बुलवाया, मगर लोना ने जवाब दिया, “मैं किसी के बुलावे पर नहीं जाती। अगर राजा मुझसे मिलना चाहते हैं, तो मेरे आश्रम में आएँ—सामान्य वेश में।” सुहीम का राजसी अहं ठेसा, मगर उनकी उत्सुकता जीत गई। उन्होंने साधारण वेश में लोना के आश्रम का रुख किया।

Maa Kamakhya, माँ कामाख्या की तांत्रिक साधना

6- लोना और सुहीम की मुलाकात: प्रेम का जादू और एक खतरनाक मोड़

लोना का आश्रम कामाख्या मंदिर से कुछ दूरी पर एक सुनसान जंगल में था। चारों ओर घने जंगल, हवाएँ साय-साय करती थीं, और बीच में एक छोटा-सा मंदिर। आश्रम की हवा में एक जादुई शांति थी। जब सुहीम यहाँ पहुँचे, तो उनका मन शांत हो गया। 

लोना जब उनके सामने आईं, तो सुहीम एक पल के लिए ठहर गए। उनकी सुंदरता ऐसी थी कि समय रुक सा गया। उनकी आँखों में शांति थी, और चेहरे पर अलौकिक तेज। सुहीम ने कहा, “मैं आपकी शक्ति और न्याय के बारे में सुनकर आया हूँ।” लोना ने जवाब दिया, “शक्ति मन की शुद्धता और साधना का फल है। मैं लोगों के दुख कम करती हूँ।” 

सुहीम लोना की बातों और उनके व्यक्तित्व से मंत्रमुग्ध हो गए। वे उनके प्रेम में पड़ गए। मगर सुहीम एक राजा थे, और उनके मन में संकोच था। वे लौट आए, मगर लोना का चेहरा उनके सपनों में छा गया। सुहीम का मन बेचैन रहने लगा। वे अपने राज्य के काम में ध्यान न लगा पाए। आखिरकार, उन्होंने तय किया कि वे लोना से अपने प्रेम का इजहार करेंगे। 

सुहीम ने एक रात चुपके से महल छोड़ा और लोना के आश्रम पहुँचे। उन्होंने कहा, “लोना, मैं इस देश का राजा हूँ, मगर आपके सामने एक साधारण पुरुष। मैं आपसे प्रेम करता हूँ और आपसे विवाह करना चाहता हूँ।” लोना ने शांति से जवाब दिया, “राजन, मैंने प्रण लिया है कि मैं अपना जीवन सेवा में समर्पित करूँगी। मैं विवाह नहीं कर सकती।” 

सुहीम ने धन, वैभव और शक्ति का लालच दिया, मगर लोना अडिग रहीं। उनका इनकार सुहीम के लिए एक चुनौती बन गया। उनका प्रेम अब एक खतरनाक जुनून में बदल रहा था। 

7- सिद्धेश्वर अघोरी का प्रवेश: तांत्रिक तूफान की शुरुआत

सुहीम का जुनून उन्हें सिद्धेश्वर अघोरी की याद दिला गया। कई साल पहले, शिकार के दौरान सुहीम की जान एक शेर से बची थी, जब सिद्धेश्वर ने अपनी शक्ति से शेर को मार गिराया था। सुहीम ने सिद्धेश्वर को बुलवाया और अपनी व्यथा सुनाई। सिद्धेश्वर ने कहा, “राजन, चिंता न करें। मैं लोना को आपके सामने ला दूँगा।” 

मगर सिद्धेश्वर को लोना की शक्ति का अंदाजा नहीं था। उन्होंने एक गुप्त वशीकरण मंत्र का जाप शुरू किया। मगर लोना की साधना इतनी प्रखर थी कि मंत्र उल्टा सिद्धेश्वर पर लौट आया। उनके आश्रम में चिताएँ भड़क उठीं, और एक भयावह शोर गूँजा। सिद्धेश्वर को लोना की ताकत का अहसास हुआ। 

8- तांत्रिक टकराव: लोना बनाम सिद्धेश्वर

सिद्धेश्वर का अहंकार भड़क उठा। उन्होंने धूमा यक्षिणी का आह्वान किया, एक ऐसी शक्ति जो अपनी कामुकता और तांत्रिक शक्तियों के लिए कुख्यात थी। यक्षिणी ने वृद्धा का वेश धारण कर लोना के आश्रम में प्रवेश की कोशिश की। मगर लोना ने अपने आश्रम को “अपर योनी रक्षा कवच” से सुरक्षित कर रखा था। यक्षिणी को लोना की प्रति-छाया सिद्धि ने चकमा दे दिया। लोना के शिष्य बटुका ने यक्षिणी को तांत्रिक युद्ध में हरा दिया। 

सिद्धेश्वर ने अब नागराज कालकेय को बुलाया, जो अपने विष से किसी को अशक्त कर सकता था। मगर लोना ने अपने आश्रम के द्वार पर एक मयूर तैनात कर रखा था, जो गरुड़ बनकर नागराज को भगा दिया।

Maa Kamakhya, माँ कामाख्या की तांत्रिक साधना

अंतिम तांत्रिक युद्ध और लोना की जीत

नागराज की हार ने सिद्धेश्वर को क्रोध में डुबो दिया। वह अब सुहीम को भूल चुका था। उसका एकमात्र लक्ष्य लोना को नष्ट करना था। एक अंधेरी रात, सिद्धेश्वर लोना के आश्रम पहुँचा और युद्ध की चुनौती दी। लोना के शिष्य बटुका और नरमे ने उसका मुकाबला किया, मगर सिद्धेश्वर ने उन्हें “अग्नि जाल” में फँसा दिया। 


लोना स्वयं बाहर आईं। उन्होंने सिद्धेश्वर को समझाने की कोशिश की, मगर वह अड़ा रहा। सिद्धेश्वर ने “महामारण मंत्र” का उपयोग किया, जो तंत्र में वर्जित था। इससे उसकी शक्तियाँ कमजोर हो गईं। लोना ने माँ कामाख्या की शक्ति का आह्वान किया और “कामाख्या संन्यासिनी मंत्र” का जाप शुरू किया। कामाख्या की शक्ति ने सिद्धेश्वर को परास्त कर दिया। वह अंधा, बहरा और अशक्त होकर गिर पड़ा। 

9- लोना की दया और सुहीम का पश्चाताप

लोना ने सिद्धेश्वर की हालत देखकर उसे अपने आश्रम में लाकर उसका इलाज किया। सिद्धेश्वर ने अपनी गलती मानी और क्षमा माँगी। लोना ने उसे क्षमा कर दिया। 

सुहीम को सबक सिखाने के लिए लोना ने उनकी नींद में प्रवेश किया और उनके महल का दक्षिणी हिस्सा नष्ट कर दिया। सुहीम ने अपनी गलती स्वीकारी और लोना से माफी माँगी। लोना ने उन्हें क्षमा किया और मित्रता का हाथ बढ़ाया। इस घटना ने सुहीम को और दयालु राजा बना दिया। 

10- लोना की विरासत और उपसंहार

लोना चमारी की कहानी केवल तंत्र की नहीं, बल्कि एक ऐसी स्त्री की है, जिसने अपने दुखों को ताकत बनाया। उन्होंने अपने आश्रम को दुखियों का आश्रय बनाया और तंत्र विद्या को नई ऊँचाइयाँ दीं। उनकी साधनाएँ, जैसे काल ज्योति साधना और शाबर मंत्र, आज भी तांत्रिकों के बीच प्रचलित हैं। 

कहते हैं, एक दिन लोना ने अपने शिष्यों को बुलाया और कहा, “मेरा समय पूरा हुआ। मैं माँ कामाख्या के चरणों में समा रही हूँ।” इसके बाद वे ध्यान में लीन हुईं, और उनका शरीर एक ज्योति में बदलकर आकाश में विलीन हो गया। आश्रम के ऊपर एक चमकीला तारा टिमटिमाता रहा, जो आज भी लोना की आत्मा का प्रतीक है। 

लोना की गाथा हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति आत्मबल और नैतिकता में है। उनकी कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करें। लोना चमारी का तारा आज भी चमकता है, जो हमें याद दिलाता है कि सत्य और शक्ति का प्रकाश कभी मंद नहीं पड़ता।

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नोट— यह कहानी amitsrivastav.in पर प्रकाशित लेख “तांत्रिकों की देवी लोना चमारिन” से प्रेरित है। लोना की गुप्त साधनाओं और तंत्र-मंत्र की विस्तृत जानकारी के लिए गुप्त रहस्यों से भरा सम्पूर्ण मंत्र विधि-विधान समाहित ग्रथ रुपी किताब “लोना चमारिन का सम्पूर्ण तंत्र-मंत्र साधना विद्या” देखें, जो amitsrivastav.in के माध्यम से उपलब्ध है। तंत्र विद्या की पुस्तक के लिए UPI, फोन पे, गूगल पे, से 7379622843 अमित कुमार श्रीवास्तव के नाम 251 गुरु यक्षिणा भेट कर स्लिप WhatsApp 7379622843 पर भेज संपर्क करें। 24 घंटे मे किताब उपलब्ध हो जाएगा। जो हमारे द्वारा लिखा गया है।

Conclusion

प्राचीन धर्म शास्त्रों की शिक्षा आज भी समाज में स्वस्थ संबंध और परिपक्व दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है। सनातन तंत्र रहस्य के अन्तर्गत यह लेख साधना के इच्छुक सात्विक विचारधारा के साधक-साधिकाओं के लिए एक मार्गदर्शिका है।

Disclaimer

यह लेखन सामग्री केवल सनातन धर्म के तहत योग्य साधक-साधिकाओं के लिए धार्मिक तांत्रिक सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से है, न कि किसी भी प्रकार की यौन क्रिया को प्रोत्साहित करने हेतु।

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20 May Deoria: वेतन संकट से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों का फूटा गुस्सा, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध — “जनता की सेवा करें या परिवार बचाएं?”

20 May Deoria। में एनएचएम कर्मियों, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सीएचओ और डॉक्टरों ने लंबित वेतन के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। जानिए वेतन संकट, कर्मचारियों की मांग और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले असर की पूरी रिपोर्ट। महीनों से लंबित वेतन ने स्वास्थ्य कर्मियों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेला।देवरिया में स्वास्थ्य … Read more
लोना चमारी और सिद्धेश्वर अघोरी: तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की 1 Wonderful अमर गाथा

NCF 2023 के संदर्भ में भाषा शिक्षण: गहन अध्ययन, कौशल और रचनात्मकता की तरफ

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 (NCF 2023) ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है। भाषा शिक्षण के क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि पुरानी रट्टू प्रणाली को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। हिंदी भाषा को अब ‘कोर्स A और B’ के स्थान पर … Read more
लोना चमारी और सिद्धेश्वर अघोरी: तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की 1 Wonderful अमर गाथा

जनगणना-2027 : देश की आबादी गिनने से पहले सरकार मोबाइल की औकात क्यों गिन रही है?

जनगणना-2027 पर बड़ा सवाल सरकारी काम या महंगे स्मार्टफोन बेचने की योजना? जनगणना-2027 एप्स पुराने एंड्रॉयड मोबाइल में न चलने पर प्रगणकों में नाराजगी। क्या डिजिटल इंडिया के नाम पर कर्मचारियों पर महंगे मोबाइल और डेटा खर्च का दबाव डाला जा रहा है? प्रगणकों की जेब पर डिजिटल हमला! जनगणना-2027 एप्स पर व्यंग्यात्मक विश्लेषण। पुराने … Read more
कामाख्ये वरदे देवी नील पर्वत वासिनी। त्वं देवी जगत माता योनिमुद्रे नमोस्तुते।। sexual intercourse भोग संभोग

Yoni Sadhana Vidhi योनि साधना अदृष्ट शक्ति का महाप्रवाह वृहद तांत्रिक ग्रंथ 40 अध्याय

Yoni Sadhana Vidhi —तंत्र, शक्ति, कुण्डलिनी और ब्रह्माणी योनि का गूढ़ विज्ञान। वाममार्ग व दक्षिणमार्ग साधना का विस्तृत आध्यात्मिक वर्णन कामेश्वरी देवी कामाख्या की मार्गदर्शन में। जानें योनि साधना क्या है सम्पूर्ण मार्गदर्शिका। भूमिका/प्रस्तावनायोनि साधना: अदृष्ट शक्ति का महाप्रवाह केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय तांत्रिक परंपरा के उस गूढ़ विज्ञान का उद्घाटन है, जिसे … Read more
लोना चमारी और सिद्धेश्वर अघोरी: तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की 1 Wonderful अमर गाथा

16 मई: वेतन भुगतान में देरी से स्वास्थ्य कर्मियों में बढ़ी नाराजगी, परिवार चलाना हुआ मुश्किल

देवरिया 16 मई। जनपद देवरिया में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को मार्च माह से वेतन न मिलने के कारण भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। चाहे फील्ड में कार्यरत कर्मचारी हों या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी, सभी वेतन भुगतान में हो रही देरी … Read more
यक्षिणी साधना, सरल यक्षिणी साधना, काम यक्षिणी Yakshini sadhna

56 प्रकार के भोग में सबसे उत्तम भोग सम्भोग: धर्म, तंत्र, योग और विज्ञान के अनुसार प्रेम, ऊर्जा और चेतना का रहस्य

भारतीय दर्शन, तंत्र, योग, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के अनुसार सम्भोग को सबसे उत्तम भोग क्यों कहा गया? जानिए 56 प्रकार के भोग, शिव-शक्ति, कुंडलिनी, प्रेम, ऊर्जा, मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का गहन विश्लेषण। भारतीय संस्कृति में “भोग” शब्द का अर्थ केवल भोजन, धन, वैभव या इंद्रिय सुख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह … Read more
लोना चमारी और सिद्धेश्वर अघोरी: तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की 1 Wonderful अमर गाथा

2027 Self Enumeration Guide: ऑनलाइन स्व-गणना कैसे करें, SE ID, Registration और पूरी प्रक्रिया हिंदी में

उत्तर प्रदेश जनगणना-2027 में Self Enumeration कैसे करें स्वगणना? जानिए ऑनलाइन स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया, रजिस्ट्रेशन, SE ID, मकान सूचीकरण, जरूरी दस्तावेज, लाभ, सावधानियाँ और Verification की सम्पूर्ण जानकारी आसान हिंदी में। भारत में जनगणना केवल लोगों की गिनती भर नहीं होती, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, तकनीकी और विकास संबंधी वास्तविक स्थिति … Read more

3 thoughts on “लोना चमारी और सिद्धेश्वर अघोरी: तांत्रिक सिद्धियां और तंत्र युद्ध की 1 Wonderful अमर गाथा”

  1. अद्भुत जानकारी बहुत ही सुंदर है आपकी लेखनी बिल्कुल सही 🙏🙏

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  2. बहुत अच्छा लगा आपका लेख कुछ और भी आपका लेख पढें है बहुत ही सुस्पष्ट भाषा में सत्य समझने योग्य आप लिख रहे हैं आप के जैसा सुस्पष्ट भाषा में लिखने वाला लेखक आज के समय में ना के बराबर हैं। आपकी लेखनी निरंतर ऐसे ही सुस्पष्ट जानकारी के साथ मिलती रहे यही कामना है कि आने वाले समय में भी आप अपने कलम से अच्छाई भरी लेख प्रकाशित करते रहिए सादर प्रणाम 🙏🙏 एम वी पाठक रायपुर छत्तीसगढ़।

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