64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

Amit Srivastav

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भारत के प्राचीन मंदिरों और गुफाओं में 64 योगिनियों की पूजा एक विशेष स्थान रखती है। ये देवी शक्तियों का समूह हैं, जिन्हें तंत्र साधना और शक्तिपूजन में महत्वपूर्ण माना जाता है। इनका उल्लेख पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है, जहां इन्हें शिव की विभिन्न शक्तियों का रूप माना जाता है। 64 योगिनियो का ऐतिहासिक इतिहास, कथा, तंत्र-मंत्र के साथ सम्पूर्ण जानकारी के लिए अंत तक पढ़िए, भगवान चित्रगुप्त जी महाराज के वंशज संपादक अमित श्रीवास्तव कि कर्म-धर्म लेखनी मे।

64 योगिनियों का परिचय:

64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

64 योगिनियां विभिन्न रूपों और विशेषताओं से युक्त हैं। इन्हें तांत्रिक साधनाओं के लिए प्रमुख माना जाता है। इनकी पूजा से साधक को अद्वितीय सिद्धियां और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। ये देवी न केवल शक्ति का प्रतीक हैं, बल्कि सृष्टि के विभिन्न तत्वों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं।

मंदिरों की विशेषता:

64 योगिनियों के मंदिर पूरे भारत में पाए जाते हैं, जैसे कि मध्य प्रदेश के मितावली और हीरापुर (ओडिशा) में स्थित प्रमुख मंदिर। इन मंदिरों की वास्तुकला अद्वितीय होती है, जिसमें गोलाकार संरचना और खुला आकाश अनिवार्य विशेषता है। यह संरचना देवी की सार्वभौमिकता और उनकी असीम शक्ति का प्रतीक है।

तांत्रिक महत्व:

तंत्र साधना में 64 योगिनियों का अत्यंत महत्व है। इनकी साधना से साधक को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक शक्ति की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इनकी आराधना से जीवन में आने वाली अनेक बाधाओं का नाश होता है।

64 योगिनी साधना:

64 योगिनी साधना एक तांत्रिक साधना है, जिसमें साधक 64 योगिनियों की पूजा करता है। ये योगिनियाँ विभिन्न शक्तियों और विशेषताओं का प्रतीक होती हैं। इस साधना का मुख्य उद्देश्य साधक को आध्यात्मिक शक्तियाँ प्राप्त करना और विभिन्न सिद्धियाँ हासिल करना होता है। इस साधना के दौरान ध्यान, मंत्र जाप, और विशेष विधियों का पालन किया जाता है।

64 योगिनी नाम मंत्र:

64 योगिनी नाम मंत्र में प्रत्येक योगिनी का विशिष्ट नाम होता है, जिनका जप साधक उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करता है। प्रत्येक नाम एक विशेष शक्ति या गुण का प्रतिनिधित्व करता है, जो साधक के जीवन में संतुलन और समृद्धि लाता है। इन नाम मंत्रों का नियमित जाप साधक की आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। 64 योगिनियों का 64 मंत्र थोड़ा नीचे लिखा गया है। गुरु के मार्गदर्शन में मंत्र की सिद्धि प्राप्त करें।

64 योगिनी नाम Mantra :

64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

64 योगिनी शाबर मंत्र एक विशेष प्रकार का मंत्र है जो 64 योगिनियों की शक्तियों को जागृत करने के लिए उपयोग किया जाता है। शाबर मंत्रों की भाषा साधारण होती है, लेकिन इनमें गूढ़ रहस्यों और शक्तियों का समावेश होता है। इन मंत्रों का सही उच्चारण और नियमानुसार प्रयोग करने से साधक को मनोवांछित फल प्राप्त हो सकता है।

64 योगिनियों के मंत्र के लिये मंत्र सिद्ध माला यंत्र लेकर कोई भी मंत्र साधना अपने गुरु के मार्गदर्शन में करें मंत्र इस प्रकार हैं।

  • 1- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काली नित्य सिद्धमाता स्वाहा।
  • 2- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कपलिनी नागलक्ष्मी स्वाहा।
  • 3- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुला देवी स्वर्णदेहा स्वाहा।
  • 4- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुरुकुल्ला रसनाथा स्वाहा।
  • 5- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विरोधिनी विलासिनी स्वाहा।
  • 6- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विप्रचित्ता रक्तप्रिया स्वाहा।
  • 7- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री उग्र रक्त भोग रूपा स्वाहा।
  • 8- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री उग्रप्रभा शुक्रनाथा स्वाहा।
  • 9- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री दीपा मुक्तिः रक्ता देहा स्वाहा।
  • 10- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नीला भुक्ति रक्त स्पर्शा स्वाहा।
  • 11- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री घना महा जगदम्बा स्वाहा।
  • 12- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री बलाका काम सेविता स्वाहा।
  • 13- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मातृ देवी आत्मविद्या स्वाहा।
  • 14- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मुद्रा पूर्णा रजतकृपा स्वाहा।
  • 15- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मिता तंत्र कौला दीक्षा स्वाहा।
  • 16- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री महाकाली सिद्धेश्वरी स्वाहा।
  • 17- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कामेश्वरी सर्वशक्ति स्वाहा।
  • 18- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भगमालिनी तारिणी स्वाहा।
  • 19- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नित्यकलींना तंत्रार्पिता स्वाहा।
  • 20- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भैरुण्ड तत्त्व उत्तमा स्वाहा।
  • 21- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वह्निवासिनी शासिनि स्वाहा।
  • 22- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री महवज्रेश्वरी रक्त देवी स्वाहा।
  • 23- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री शिवदूती आदि शक्ति स्वाहा।
  • 24- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री त्वरिता ऊर्ध्वरेतादा स्वाहा।
  • 25- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुलसुंदरी कामिनी स्वाहा।
  • 26- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नीलपताका सिद्धिदा स्वाहा।
  • 27- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नित्य जनन स्वरूपिणी स्वाहा।
  • 28- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विजया देवी वसुदा स्वाहा।
  • 29- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री सर्वमङ्गला तन्त्रदा स्वाहा।
  • 30- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ज्वालामालिनी नागिनी स्वाहा।
  • 31- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री चित्रा देवी रक्तपुजा स्वाहा।
  • 32- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ललिता कन्या शुक्रदा स्वाहा।
  • 33- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री डाकिनी मदसालिनी स्वाहा।
  • 34- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री राकिनी पापराशिनी स्वाहा।
  • 35- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री लाकिनी सर्वतन्त्रेसी स्वाहा।
  • 36- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काकिनी नागनार्तिकी स्वाहा।
  • 37- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री शाकिनी मित्ररूपिणी स्वाहा।
  • 38- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री हाकिनी मनोहारिणी स्वाहा।
  • 39- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री तारा योग रक्ता पूर्णा स्वाहा।
  • 40- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री षोडशी लतिका देवी स्वाहा।
  • 41- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भुवनेश्वरी मंत्रिणी स्वाहा।
  • 42- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री छिन्नमस्ता योनिवेगा स्वाहा।
  • 43- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भैरवी सत्य सुकरिणी स्वाहा।
  • 44- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री धूमावती कुण्डलिनी स्वाहा।
  • 45- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री बगलामुखी गुरु मूर्ति स्वाहा।
  • 46- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मातंगी कांटा युवती स्वाहा।
  • 47- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कमला शुक्ल संस्थिता स्वाहा।
  • 48- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री प्रकृति ब्रह्मेन्द्री देवी स्वाहा।
  • 49- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री गायत्री नित्यचित्रिणी स्वाहा।
  • 50- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मोहिनी माता योगिनी स्वाहा।
  • 51- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री सरस्वती स्वर्गदेवी स्वाहा।
  • 52- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री अन्नपूर्णी शिवसंगी स्वाहा।
  • 53- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नारसिंही वामदेवी स्वाहा।
  • 54- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री गंगा योनि स्वरूपिणी स्वाहा।
  • 55- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री अपराजिता समाप्तिदा स्वाहा।
  • 56- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री चामुंडा परि अंगनाथा स्वाहा।
  • 57- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वाराही सत्येकाकिनी स्वाहा।
  • 58- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कौमारी क्रिया शक्तिनि स्वाहा।
  • 59- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री इन्द्राणी मुक्ति नियन्त्रिणी स्वाहा।
  • 60- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ब्रह्माणी आनन्दा मूर्ती स्वाहा।
  • 61- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वैष्णवी सत्य रूपिणी स्वाहा।
  • 62- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री माहेश्वरी पराशक्ति स्वाहा।
  • 63- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री लक्ष्मी मनोरमायोनि स्वाहा।
  • 64- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री दुर्गा सच्चिदानंद स्वाहा।

विधिवत मंत्र जाप पूर्ण करने के बाद भगवान शिव की आरती करें तथा साधना समाप्त होने के बाद शिवलिंग पर चढ़ाये गए चावल अलग से रख लें तथा अगले दिन बहते जल या नदी में प्रवाहित कर दें।

भारत में चार चौसठ योगिनी मंदिर हैं, जो दो ओडिशा और दो मध्य प्रदेश में हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर सबसे प्रमुख और प्राचिन है। यह भारत के उन चौसठ योगिनी मंदिरों में से एक है जो अभी भी अच्छी दशा में बचे हैं। यह मंदिर तंत्र-मंत्र के लिए काफी प्रसिद्ध था, इसलिए इस मंदिर को तांत्रिक यूनिवर्सिटी भी कहा जाता था। यहां देश-विदेश से लाखों तांत्रिक तंत्र-मंत्र जानने आते हैं।

जानिए चौसठ योगिनी मंदिर के बारे में खास बातें:

64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

मंदिर के मध्य में है खुला मण्डप
करीब 200 सीढ़ियां चढ़ने के बाद चौसठ योगिनी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर एक वृत्तीय आधार पर निर्मित है और इसमें 64 कमरे हैं। हर कमरे में एक-एक शिवलिंग बना हुआ है। मंदिर के मध्य में एक खुला हुआ मण्डप है, जिसमें एक विशाल शिवलिंग है।


यह मंदिर 1323 ई में बना था। इस मंदिर का निर्माण क्षत्रिय राजाओं ने करवाया था। ये सभी चौसठ योगिनी माता आदिशक्ति काली का अवतार हैं। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए मां काली ने यह अवतार लिया था। इन देवियों में दस महाविघाएं और सिद्ध विघाओं की भी गणना की जाती है। ये सभी योगिनी तंत्र तथा योग विद्या से संबंध रखती हैं।

चौंसठ योगिनी तंत्र साधना:

चौंसठ योगिनी तंत्र में सदा से योगिनीयो का अत्यंत महत्व रहा है, तंत्र अनुसार योगिनी आद्यशक्ति के सबसे निकट होती है, माँ योगिनियो को आदेश देती है और यही योगिनी शक्ति साधको के कार्य सिद्ध करती।

आधुनिक संदर्भ:

आधुनिक युग में भी 64 योगिनियों की पूजा का महत्व बना हुआ है। आज भी अनेक साधक और भक्तगण इनकी पूजा और साधना करते हैं। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य है आत्म-साक्षात्कार और जीवन में सकारात्मकता का संचार करना।

64 योगिनी की कथा:

64 योगिनियों की कथा भारतीय तांत्रिक परंपरा में गहरी जड़ें जमाए हुए है। ये देवी शक्तियों का एक समूह हैं, जिनका उल्लेख विभिन्न पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है। इन्हें शिव और शक्ति की सहायक शक्तियों के रूप में देखा जाता है।

कथनानुसार उत्पत्ति:

कथाओं के अनुसार, जब असुरों का आतंक बढ़ा, तब देवी शक्ति ने अपनी विभूतियों के रूप में 64 योगिनियों की रचना की। ये योगिनियां विभिन्न रूपों और शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं, जो ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करती हैं।

योगिनियों की विशेषताएं:

प्रत्येक योगिनी एक विशेष शक्ति या तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। ये योगिनियां तंत्र साधना में साधकों को अनेक प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं। इनकी पूजा से साधक को आत्मज्ञान और असीम शक्तियों की प्राप्ति होती है।

64 योगिनी मंदिर:

भारत में कई स्थानों पर 64 योगिनियों के मंदिर हैं, जैसे मितावली (मध्य प्रदेश) और हीरापुर (ओडिशा)। ये मंदिर अद्वितीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं, जो गोलाकार संरचना में बने हैं और खुले आकाश के नीचे स्थित हैं, जो उनकी सार्वभौमिक शक्ति का प्रतीक है।

योगिनियों का आध्यात्मिक महत्व:

64 योगिनियों की साधना साधक को भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करती है। यह साधना न केवल आत्म-शुद्धि का माध्यम है, बल्कि यह साधक को जीवन में आने वाली बाधाओं से भी मुक्त करती है।

64 योगिनियों का इतिहास:

64 योगिनियों का इतिहास भारतीय तांत्रिक परंपरा और शाक्त मत में गहराई से जुड़ा हुआ है। ये योगिनियां शिव और शक्ति के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं और तंत्र साधना में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

योगिनियो की उत्पत्ति:

योगिनियों का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, जैसे कि स्कंद पुराण और देवी महात्म्य में मिलता है। इन्हें शिव की शक्ति से उत्पन्न माना जाता है, जो सृष्टि की विभिन्न शक्तियों और तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

पूजा और साधना:

64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

योगिनियों की पूजा तांत्रिक साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। इनकी साधना से अद्वितीय शक्तियां और सिद्धियां प्राप्त होती हैं। साधक इन योगिनियों की आराधना से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकते हैं।

64 योगिनी मंदिर का इतिहास:

भारत में कई स्थानों पर 64 योगिनियों के मंदिर हैं। मध्य प्रदेश का मितावली मंदिर और ओडिशा का हीरापुर मंदिर सबसे प्रमुख हैं। इन मंदिरों की वास्तुकला अद्वितीय है, जिसमें गोलाकार संरचना और खुला आकाश विशेषता है, जो उनकी शक्तियों का प्रतीक है।

योगिनियों का तांत्रिक महत्व:

योगिनियां तंत्र साधना में साधक को विभिन्न शक्तियों और सिद्धियों की प्राप्ति का माध्यम मानी जाती हैं। ये साधक के भीतर छिपी दिव्यता को जागृत करती हैं और आत्मज्ञान की राह पर ले जाती हैं।

64 योगिनियों के नाम और उनके कार्य:

  • 1. कामाख्या – प्रेम की देवी
  • 2. कामेश्वरी – कामना को पूर्ण करने वाली
  • 3. वज्रेश्वरी – शक्ति की प्रतीक
  • 4. भगमालिनी – आकर्षण की देवी
  • 5. भैरवी – आतंक का नाश करने वाली
  • 6. छिन्नमस्तिका – आत्मबल की देवी
  • 7. धूमावती – रहस्यों की देवी
  • 8. बगलामुखी – शत्रुओं का नाश करने वाली
  • 9. मातंगी – विद्या की देवी
  • 10. कमला – समृद्धि की देवी
  • 11. महालक्ष्मी – धन की देवी
  • 12. कौमार्य – कौमार्य की रक्षक
  • 13. वैष्णवी – विष्णु की शक्ति
  • 14. वाराही – युद्ध की देवी
  • 15. नारसिंही – नृसिंह की शक्ति
  • 16. महेश्वरी – शिव की शक्ति
  • 17. आनंदेश्वरी – आनंद प्रदान करने वाली
  • 18. कालिका – समय की देवी
  • 19. तारा – रक्षा करने वाली
  • 20. त्रिपुर सुंदरी – सौंदर्य की देवी
  • 21. सर्वमंगला – मंगल की देवी
  • 22. ज्वालामुखी – अग्नि की देवी
  • 23. नृसिंहप्रिया – नृसिंह की प्रिय
  • 24. शाकिनी – शक्ति की देवी
  • 25. डाकिनी – रहस्यमयी शक्ति
  • 26. कौशिकी – रक्षा करने वाली
  • 27. इन्द्राणी – इंद्र की शक्ति
  • 28. वारुणी – जल की देवी
  • 29. नागिनी – सर्प की देवी
  • 30. अश्वारूढ़ा – अश्व की देवी
  • 31. यामिनी – रात्रि की देवी
  • 32. वज्रिनी – कठोर शक्ति
  • 33. सूर्यप्रिया – सूर्य की प्रिय
  • 34. शूलिनी – शूलधारिणी
  • 35. चंद्रिका – चंद्रमा की देवी
  • 36. पार्वती – पर्वतों की देवी
  • 37. अम्बिका – मातृत्व की देवी
  • 38. रत्नेश्वरी – रत्नों की देवी
  • 39. कालरात्रि – रात्रि की शक्ति
  • 40. गायत्री – मंत्रों की देवी
  • 41. काली – काल की शक्ति
  • 42. भद्रकाली – भद्र रूप की देवी
  • 43. भुवनेश्वरी – भू की देवी
  • 44. सोमेश्वरी – सोम की देवी
  • 45. सर्वेश्वरी – सभी की देवी
  • 46. सिद्धिदात्री – सिद्धि प्रदान करने वाली
  • 47. अन्नपूर्णा – अन्न की देवी
  • 48. विश्वेश्वरी – विश्व की देवी
  • 49. तारिणी – उद्धार करने वाली
  • 50. चामुंडा – चंड और मुंड का नाश करने वाली
  • 51. हरसिद्धि – सभी सिद्धियों की देवी
  • 52. अग्निशिखा – अग्नि का प्रतीक
  • 53. गौरी – उज्ज्वलता की देवी
  • 54. सती – पवित्रता की देवी
  • 55. प्रतिभा – प्रकाश की देवी
  • 56. स्वाहा – अग्नि की पत्नी
  • 57. कुब्जिका – रहस्य की देवी
  • 58. शिवदूती – शिव की दूत
  • 59. महाकाली – महान शक्ति की देवी
  • 60. योगिनी – योग की देवी
  • 61. ध्यानेश्वरी – ध्यान की देवी
  • 62. आर्या – श्रेष्ठता की देवी
  • 63. अन्याप्रिया – सभी की प्रिय
  • 64. परमेश्वरी – परम शक्ति की देवी

64 योगिनियो की लेखनी निष्कर्ष:

64 योगिनियां भारतीय संस्कृति और धर्म का अभिन्न अंग हैं। इनकी आराधना शक्ति, समृद्धि, और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक मानी जाती है। इनकी कथाओं और इतिहास से प्रेरित होकर आज भी लाखों भक्त इनकी पूजा में रत रहते हैं, जिससे उनकी जीवन यात्रा को एक नई दिशा और उन्नति मिलती है।

ये योगिनियां विभिन्न कार्यों और शक्तियों की प्रतीक हैं, जो जीवन के विविध पहलुओं में साधकों की सहायता करती हैं। इनकी पूजा तांत्रिक साधनाओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

64 योगिनियों की कथा भारतीय धार्मिक और तांत्रिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये देवियां साधकों को शक्ति, साहस, और आत्मज्ञान प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन सार्थक और समृद्ध बनता है।

64 योगिनियों का इतिहास भारतीय संस्कृति में अद्वितीय स्थान रखता है। ये दैवीय शक्तियां न केवल तांत्रिक साधना का केंद्र हैं, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं में संतुलन और शक्ति का प्रतीक भी हैं। Click on the link गूगल ब्लाग पर अपनी पसंदीदा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी कामाख्या शक्तिपीठ

“आत्मज्ञान और साधना ही सच्ची शक्ति के स्रोत हैं।”
64 योगिनियों की साधना मात्र एक तांत्रिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह आत्म-शुद्धि और दिव्य ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम भी है। जब हम इन शक्तियों का सम्मान और साधना करते हैं, तो वे हमें आध्यात्मिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाती हैं।

शक्ति कि मूल केन्द्र विन्दु “मां कामाख्या देवी” की भक्त मिस एशिया वर्ल्ड निधि सिंह का मानना है कि यह साधना केवल कुछ गिने-चुने साधकों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो आत्मिक उन्नति की खोज में है। यह प्राचीन विद्या न केवल जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाती है, बल्कि हमारे अंदर छिपी अनंत शक्तियों को जागृत करने में भी सहायक होती है।

जो भी साधक सच्चे मन से इस मार्ग पर चलता है, वह अपने भीतर एक नई ऊर्जा और चेतना का अनुभव करता है। यह यात्रा आत्म-विकास की है, जो हमें बाहरी भ्रमों से मुक्त कर आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती है।
“यदि आपके भीतर खोज की ज्वाला जल रही है, तो साधना का दीपक आपका मार्गदर्शन अवश्य करेगा।”
— मिस एशिया वर्ल्ड निधि सिंह

Click on the link प्रथम शक्तिपीठ कामाख्या योनी पीठ सृष्टि का केन्द्र बिन्दु मोंक्ष का द्वार यही है त्रिया राज्य जादूई नगरी पढ़ने के लिए यहां क्लिक किजिये। हमारी शक्तिपीठ लेखनी सभी सनातन धर्मग्रंथों से एकत्रित स्थानों का भ्रमण कर समुचित सटीक जानकारी के साथ प्रकाशित किया गया है जो सभी के लिए निशुल्क है। शक्तिपीठ लेखनी पढ़िए और आस्था के प्रति ह्रदय को समर्पित किजिये।

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64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

छोटे बच्चों में यौन जिज्ञासा और असामान्य यौन व्यवहार एक शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक और अभिभावक-मार्गदर्शी अध्ययन

छोटे बच्चों में यौन जिज्ञासा और असामान्य व्यवहार पर शैक्षणिक, मनोवैज्ञानिक और अभिभावक-मार्गदर्शी विश्लेषण। कारण, संकेत, डिजिटल प्रभाव, शोषण के खतरे और उम्र-अनुकूल संवाद-सुरक्षा के व्यावहारिक उपाय। डर की जगह समझ और संरक्षण पर जोर—हर अभिभावक, शिक्षक के लिए लेखक संपादक अमित श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत पढ़ने समझने और उपयोग में लाने योग्य सीरीज़ लेख का … Read more
64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

UGC — शिक्षा सुधार नहीं, सत्ता की सामाजिक पुनर्संरचना का औज़ार|ज्ञान, संविधान और लोकतंत्र के भविष्य का सवाल

UGC के नए नियम शिक्षा सुधार हैं या सत्ता द्वारा सामाजिक पुनर्संरचना? जानिए विश्वविद्यालयों पर वैचारिक कब्ज़े, सवर्ण समाज, संविधान और लोकतंत्र के भविष्य का निर्णायक सीरीज़ लेख का अंतिम विश्लेषण भाग 6 में संपादक लेखक अमित श्रीवास्तव की कर्म-धर्म लेखनी से जनकल्याणार्थ प्रस्तुत। प्रस्तावना: यह केवल UGC का प्रश्न नहीं हैयह समझ लेना सबसे … Read more
64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी

इतिहास का युद्ध: कैसे अतीत को वर्तमान की राजनीति का हथियार बनाया गया|UGC विवाद 1 विश्लेषण

इतिहास का युद्ध, भारत में इतिहास लेखन कैसे वैचारिक युद्धभूमि बना? पाठ्यक्रम, प्रतीक, नायक–खलनायक और पहचान की राजनीति के ज़रिए समाज को बाँटने की रणनीतियों का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन UGC विवाद 2026 पर आधारित संपादक एवं लेखक अमित श्रीवास्तव कि सीरीज़ लेख में। 📚 भाग–5 : इतिहास का युद्ध, UGC विवादकैसे अतीत को वर्तमान की … Read more

14 thoughts on “64 योगिनियों का रहस्य: एक अनूठी दैवीय कथा सहित सम्पूर्ण विधि-विधान तंत्र-मंत्र की जानकारी”

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