काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

Amit Srivastav

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जानिए 1964 से 2025 तक सोने-चांदी के भावों का व्यंग्यात्मक विश्लेषण, कांग्रेस के जमाने से बीजेपी के 11 साल ‘विकास युग’ में उछाल —1964 में 63.25 प्रति 10g, 2025 लगभग 1 लाख प्रति 10g। वैश्विक दबाव, निवेशकों का ETF रुझान, आयात बदलाव और महंगाई का सफर— डाटा के साथ। सोना लगभग ₹1,00,750, चांदी ₹1,07,700 तक पहुंची। क्या यह विकास जनता के लिए या सिर्फ धातुओं का? पढ़ें और समझें!

जब हम सोने और चांदी के भावों के सफर पर नजर डालते हैं, तो यह मानो भारत की राजनीतिक इतिहास की एक व्यंग्यात्मक कहानी बन जाती है—कांग्रेस सरकार के जमाने में जब ये धातुएँ आम आदमी की जेब में आसानी से समा जाती थीं, तब से लेकर 2025 तक की उछाल भरी यात्रा, जहां भाजपा की “विकास की लहर” के साथ ये भाव आसमान छूने लगे हैं। गरीबों की तो बात ही छोड़ो, मध्यम वर्गीय परिवार में भी अब बेटियों को पांच थान सोने के गहने देने के लिए हजार बार सोचना पड़ रहा है।

काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

एक समय था तब मोदी के अनुसार बुरे दिन थे,— बेटियों को शादी-ब्याह में जेवरों से सजाकर बिदाई की जाती थी। आज अगर आर्टिफिशियल न होता तो विवाह मंडप में भी बेटियों का चेहरा जेवरातों बगैर सूना सा दिखाई देता। जनता कह रही है मोदी जी वो बुरा दिन ही लौटा दो, आपके अच्छे दिनो से हम तंग आ चुके हैं। 2019 में पुलवामा हमला नहीं हुआ होता तो 2014 नारेबाजी के अनुसार 70 साल बनाम 5 साल का आकलन हो चुका था और बिदाई होने ही वाली थी लेकिन देश खतरे में है का नारा दे मतदाओ का रूझान बदला गया। बीजेपी की योजना सफल हुई।

सत्ता में वापसी नामुमकिन थी, उसी आड़ में जनता समझ नहीं पाई और अपना काम हो गया। अब तो बीजेपी को सत्ता से हटाना भी हर किसी के लिए मुश्किल है, क्योंकि तरकीब अच्छी है— सत्ता हासिल करने की। याद कीजिए 1964 का वह दौर, जब कांग्रेस की सरकार में सोना मात्र ₹63.25 प्रति 10 ग्राम था, और चांदी की कीमतें भी इतनी सुलभ थीं कि त्योहारों पर हर घर में चमकती थीं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, 2000 में सोना ₹4,400 प्रति 10 ग्राम पहुंचा।

2001 में ₹4,300, 2002 में ₹4,990, 2003 में ₹5,600, 2004 में ₹5,850, 2005 में ₹7,000 तक पहुंचा—ये वे साल थे जब कांग्रेस की आर्थिक नीतियां वैश्विक बाजारों से प्रभावित हो रही थीं, लेकिन कीमतें अभी भी नियंत्रण में थीं, जनता शादियों और निवेश के लिए बिना ज्यादा सोचे खरीद लेती थी। चांदी का सफर भी कम दिलचस्प नहीं—वर्ष 2000 में ₹7,900 प्रति किलोग्राम, 2001 में ₹7,215, 2002 में ₹7,875, 2003 में ₹7,695, 2004 में ₹11,770, 2005 में ₹10,675 तक उतार-चढ़ाव देखा, लेकिन कुल मिलाकर ये धातुएँ “जनता की पहुंच” में बनी रहीं।

फिर आया 2006 का साल, जब सोना ₹9,265 प्रति 10 ग्राम पहुंचा, चांदी ₹17,405 प्रति किलोग्राम—वैश्विक तेल संकट और मुद्रास्फीति का असर दिखा, लेकिन कांग्रेस सरकार की सब्सिडी और नियंत्रण नीतियां इसे ज्यादा उछलने नहीं दे रही थीं। 2007 में सोना ₹10,800, चांदी ₹19,520; 2008 में सोना ₹12,500, चांदी ₹23,625; 2009 में सोना ₹14,500, चांदी ₹22,165; 2010 में सोना ₹18,500, चांदी ₹27,255; 2011 में सोना ₹26,400, चांदी ₹56,900; 2012 में सोना ₹31,050, चांदी ₹56,290; 2013 में सोना ₹29,600, चांदी ₹54,030 तक पहुंचा।

ये वे साल थे जब वैश्विक मंदी, अमेरिकी डॉलर की उतार-चढ़ाव और भारत की आयात निर्भरता ने कीमतों को प्रभावित किया, लेकिन कांग्रेस की “समावेशी विकास” की नीतियां—जैसे मनरेगा और सब्सिडी—जनता को महंगाई से कुछ राहत दे रही थीं, हालांकि विपक्ष यानी भाजपा तब “महंगाई डायन” का नारा लगा रही थी। जब भी कोई बढोत्तरी होती भारत बंद, गांव का बच्चा-बच्चा जान जाता था, फला चीजों का दाम बढ़ गया है। इसलिए दाम घटाने का दबाव बनाने के लिए रेल बस बाजार सबकुछ बंद हो जाता था, जिससे सरकार को भारी नुकसान भी होता था।

काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

आलोचकों का कहना है कि वही महंगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार घोटाला आदि का हवाला देते हुए भाजपा जनता को ठगने का काम किया। फिर 2014 में भाजपा की सरकार आई, “अच्छे दिन” का वादा लेकर, लेकिन सोना-चांदी ने मानो कहा “अब हमारी बारी है उड़ान भरने की!” 2014 में सोना औसतन ₹28,006.50 प्रति 10 ग्राम रहा, चांदी ₹43,070 प्रति किलोग्राम—कांग्रेस के अंतिम साल से थोड़ा कम, लेकिन उसके बाद की उछाल ने सबको हैरान कर दिया—

2015 में सोना ₹26,343.50, चांदी ₹37,825; 2016 में सोना ₹28,623.50, चांदी ₹36,990; 2017 में सोना ₹29,667.50, चांदी ₹37,825; 2018 में सोना ₹31,438, चांदी ₹41,400; 2019 में सोना ₹35,220, चांदी ₹40,600; 2020 में कोरोना महामारी के बीच सोना ₹48,651, चांदी ₹63,435 तक उछला—वैश्विक अनिश्चितता में सुरक्षित निवेश के रूप में, 2021 में सोना ₹48,720, चांदी ₹62,572; 2022 में सोना ₹52,670, चांदी ₹55,100; 2023 में सोना ₹65,330, चांदी ₹78,600; 2024 में सोना ₹77,913, चांदी ₹95,700;

और 2025 तक (अगस्त तक) सोना ₹1,00,750, चांदी ₹1,07,700 प्रति किलोग्राम पहुंच गया। जनता का कहना है व्यंग्य नही बल्कि हकीकत यह है कि कांग्रेस के समय में सोना-चांदी कम दामों में थे, विकास की राह में सहायक, लेकिन भाजपा के विकसित भारत के साथ ये धातुएँ खुद “विकसित” होकर इतनी महंगी हो गईं कि जनता पूछ रही है— “अच्छे दिन कब आएंगे, सोने-चांदी के बुरे दिन क्यों?” मोदी जी हमारे वो बूरे दिन ही लौटा दो जेब खाली होती जा रही है और महंगाई डायन खाई जात है।

जनता और आलोचकों की बातों से इस विश्लेषण में हम लेखक चित्रगुप्त वंशज-अमित श्रीवास्तव इस सफर को गहनता से देखेंगे, वैश्विक दबावों से लेकर घरेलू नीतियों तक, निवेशकों के मूड से ETF की बाढ़ तक, आयात के बदलाव से सरकार की भूमिका तक, और अंत में एक व्यंग्यात्मक निष्कर्ष जहां हम देखेंगे कि कैसे कांग्रेस के “समावेशी” दौर से भाजपा के “विकास” युग तक सोना-चांदी ने जनता की जेबों को हल्का किया है, जबकि निवेशक चांदी को “नया सोना” मानकर मजे ले रहे हैं।

  • स्रोत: RBI, WGC, MCX, Reuters, GoodReturns, Economic Times
  • Reserve Bank of India – Handbook of Statistics on Indian Economy (Historical Gold/Silver Data).
  • BankBazaar – Gold Price History in India (1964–2024).
  • GoodReturns – India Gold/Silver Historical Rates.
  • World Gold Council (WGC) – Gold Demand Trends Q2-2025.
  • Reuters – India Silver Imports, ETF Inflows, Gold Trade (May–June 2025).
  • Economic Times / Mint – Gold hits ₹1 lakh per 10g; Silver nears ₹1.15 lakh/kg (Aug 2025).
  • Trading Economics – USD/INR, Global Gold/Silver Spot Rates.
  • IBJA – Daily Bullion Prices (2024–25)
काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटा बेव्यंग्यात्मक विश्लेषण

काग्रेस के 70 बनाम बीजेपी के 11 साल की यात्रा
1. वैश्विक दबाव: डॉलर मंदा, सोना उड़ा

सोने और चांदी के भावों का सफर वैश्विक बाजारों से इतना जुड़ा है कि भारत की राजनीति इसमें सिर्फ एक ट्रिगर का काम करती है, लेकिन व्यंग्य यह है कि कांग्रेस सरकार के समय (2014 से पहले) जब कीमतें कम थीं—जैसे 2000 में सोना ₹4,400 प्रति 10 ग्राम, चांदी ₹7,900 प्रति किलोग्राम—तब वैश्विक दबाव जैसे अमेरिकी डॉलर की मजबूती और तेल की स्थिर कीमतें भारत को फायदा दे रही थीं, लेकिन 2014 के बाद भाजपा के दौर में डॉलर की कमजोरी, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी टैरिफ ने इन धातुओं को रॉकेट बना दिया।

कांग्रेस के अंतिम वर्षों में, 2013 में सोना ₹29,600 प्रति 10 ग्राम था, चांदी ₹54,030 प्रति किलोग्राम—वैश्विक मंदी के बाद रिकवरी का दौर था, लेकिन आयात शुल्क बढ़ाकर सरकार ने कीमतों को काबू करने की कोशिश की; फिर 2014 में भाजपा आई, और वैश्विक स्तर पर सोना 2015 में गिरकर ₹26,343.50 पहुंचा, लेकिन उसके बाद उछाल शुरू हुआ—2020 में कोरोना के कारण सोना 43.7% वैश्विक बढ़त के साथ ₹48,651 पहुंचा, चांदी 22.3% बढ़कर ₹63,435।

2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना लगभग 43.7% और चांदी 22.3% तक महँगा हुआ है—अमेरिका की नीतियों, डॉलर की कमजोरी (2025 में डॉलर इंडेक्स 0.3% गिरा), और भू-राजनीतिक तनाव जैसे इजराइल-हमास संघर्ष, यूक्रेन-रूस युद्ध का नतीजा है। अगस्त 2025 में ग्लोबल गोल्ड प्राइस $3,371 प्रति ट्रॉय औंस पहुंच गया, साल की शुरुआत से 34.33% ऊपर, जबकि सिल्वर $38.87 प्रति औंस पर 30.34% बढ़त के साथ भारत में इसका सीधा असर पड़ा, क्योंकि हम 90% सोना आयात करते हैं—

रुपये की कमजोरी (डॉलर के मुकाबले 85 तक गिरावट) ने आयात को महंगा बनाया, जुलाई 2025 में नागपुर में सोना ₹1,09,000 प्रति 10 ग्राम, चांदी ₹1,16,700 प्रति किलोग्राम पहुंचा। कांग्रेस के समय में वैश्विक दबाव थे, जैसे 2008 की वैश्विक मंदी जब सोना ₹12,500 था, लेकिन सरकार की विदेशी मुद्रा प्रबंधन ने इसे नियंत्रित रखा, भाजपा के दौर में ट्रंप की टैरिफ नीतियां और बाइडेन की इकोनॉमिक पॉलिसी ने वैश्विक व्यापार अनिश्चितता बढ़ाई, सोना सुरक्षित आश्रय बना—2025 की पहली छमाही में वैश्विक सोने की मांग 20% बढ़ी, आपूर्ति मात्र 5%।

चांदी की औद्योगिक मांग—ईवी बैटरीज, सोलर पैनल्स में 15-18% ग्रोथ—ने इसे 25% YTD बढ़त दी, जबकि सोना निवेश पर निर्भर। MCX पर 2025 में सोना ₹1,00,391 प्रति 10 ग्राम, चांदी ₹1,16,234 प्रति किलोग्राम ट्रेड कर रही है, 0.96% दैनिक बढ़त के साथ। व्यंग्यपूर्ण तरीके से, कांग्रेस के “कम दाम” वाले दौर से भाजपा के “उछाल” युग तक वैश्विक दबावों ने सोना-चांदी को “विकसित” बनाया, लेकिन जनता सोच रही है— “डॉलर मंदा हुआ, हमारी जेब क्यों उड़ी?”

भारत में निवेशकों का मूड
2. चांदी की उछाल, सोने की देन—ऐतिहासिक बदलाव

निवेशकों का मूड सोने-चांदी के सफर में हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन कांग्रेस सरकार के समय (2014 से पहले) जब कीमतें कम थीं—जैसे 2010 में सोना ₹18,500 प्रति 10 ग्राम, चांदी ₹27,255 प्रति किलोग्राम—तब निवेशक फिजिकल खरीद पर जोर देते थे, त्योहारों और शादियों के लिए, लेकिन 2014 के बाद भाजपा के दौर में महंगाई ने चांदी को “नया सोना” बना दिया, जहां पिछले कुछ महीनों में चांदी ने 21% बढ़त ली, सोने की मात्र 5%।

मई 2025 में चांदी आयात 431% YoY छलांग लेकर 544 टन पहुंचा, सोने में 25% गिरावट, जनता अधिमूल्य पर चांदी खरीद रही है, सोने की महंगाई ने इसे भावनात्मक विकल्प बनाया। कांग्रेस के समय में, 2011 में चांदी ₹56,900 तक उछली थी वैश्विक मांग से, लेकिन कुल रिटर्न स्थिर थे, भाजपा के बाद 2025 में चांदी ने जनवरी से अगस्त तक 34.6% रिटर्न दिया, सोने के 30.4% से ज्यादा। वैश्विक ट्रेंड्स से जुड़ा यह बदलाव—सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी में—ने इसे आकर्षक बनाया, जबकि सोना सेफ हेवन।

मई 2025 में सिल्वर इम्पोर्ट 160% ऊपर अप्रैल से, YoY 431%, निवेशकों की चतुराई दिखाता है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई में सिल्वर ₹1,16,100 प्रति किलोग्राम स्थिर, गोल्ड ₹1,01,500 टेस्ट कर रहा है। भाजपा की बजट 2025 में प्रेशियस मेटल्स पर ड्यूटी कट ने आयात आसान किया, लेकिन कीमतें ऊपर चढ़ीं। कांग्रेस के दौर में निवेशक “सोने का सोना” मानते थे, लेकिन अब चांदी “चांदनी रिटर्न” दे रही है— व्यंग्य भरी हकीकत है कि सोना “अमीरों का खेल” हो गया, चांदी “मिडिल क्लास की चमक” और जनता कह रही है— कांग्रेस में कम दाम थे, अब विकास में महंगाई!

स्मार्ट निवेशक, स्मार्ट विकल्प
3. ETF में बहते रुपया—डिजिटल क्रांति का सफर

सोने-चांदी के निवेश का सफर कांग्रेस के समय फिजिकल खरीद तक सीमित था, जब 2005 में सोना ₹7,000 प्रति 10 ग्राम था, चांदी ₹10,675 प्रति किलोग्राम—जनता दुकानों से खरीदती थी, लेकिन भाजपा के डिजिटल इंडिया के साथ ETF का दौर आया, जहां जून 2025 में चांदी ETF में ₹20.04 अरब प्रवाह हुआ, मई के ₹8.53 अरब से दोगुना, कुल जून त्रैमासिक ₹39.25 अरब चांदी ETFs में, सोने में ₹23.67 अरब। गोल्ड ETF में जून में ₹2,081 करोड़ नेट इन्फ्लो, 5 महीनों का हाई, लेकिन सिल्वर ETFs ने ₹4,085 करोड़ रिकॉर्ड तोड़ा।

2025 की पहली छमाही में गोल्ड ETFs US$38 बिलियन इन्फ्लोज, भारत में सिल्वर AUM 88% बढ़कर ₹64,777 करोड़। कांग्रेस के समय ETF कम लोकप्रिय थे, निवेश स्टॉक और FD में था, लेकिन भाजपा की सेमीकंडक्टर चिप्स जैसी पहलें (2025 अंत तक पहली मेड-इन-इंडिया चिप) ने डिजिटल निवेश बढ़ाया। जून 2025 में इंडियन इक्विटी म्यूचुअल फंड्स 24% इन्फ्लो, गोल्ड ETFs 10-फोल्ड जंप। चांदी ETFs की लोकप्रियता इंडस्ट्रियल यूज से—2025 में ग्लोबल सिल्वर सप्लाई 3% बढ़कर 1.05 बिलियन औंस, लेकिन डेफिसिट।

सिल्वर ने गोल्ड से बेहतर रिटर्न दिए—25% YTD vs 15-18%। व्यंग्य है कि कांग्रेस में फिजिकल सोना “सुरक्षा” था, अब ETF “डिजिटल चमक”, जनता रो रही है फिजिकल महंगाई पर, निवेशक कह रहे —“विकास डिजिटल है, सोना ऐप में!”

बीजेपी के 11 साल
4. सोने की आयात लगाम ढीली—जनता को गुनाहगार दिखा?—ऐतिहासिक पैटर्न

आयात पैटर्न सोने-चांदी के सफर का अहम हिस्सा रहे हैं, कांग्रेस के समय जब 2013 में सोना आयात उच्च था लेकिन कीमत ₹29,600 प्रति 10 ग्राम, सरकार ने शुल्क बढ़ाकर कंट्रोल किया, भाजपा के बाद जुलाई 2025 में रेटेल सोना ₹1,01,000 प्रति 10 ग्राम पहुंचा—रुपये की कमजोरी, वैश्विक तनाव, अमेरिकी टैरिफ से। जून 2025 में सोना आयात 21 टन, YoY 40% कम (अप्रैल 2023 के बाद सबसे कम), चांदी 197 टन दोगुना।

उच्च कीमतों से गोल्ड सेल्स 60% गिरा। भाजपा की UAE से गोल्ड-सिल्वर इम्पोर्ट रूल्स मई 2025 से ने कंट्रोल किया, लेकिन कीमतें नहीं। पहली छमाही में गोल्ड इम्पोर्ट्स 30% गिरे, US$4bn जुलाई में। चांदी मई में 431% YoY। बजट 2025 में ड्यूटी 20% कट, लेकिन वैश्विक फैक्टर्स ने ऊंची रखीं। कांग्रेस में आयात लगाम सख्त थी, अब ढीली लेकिन जेब टाइट,
व्यंग्य: “जनता गुनाहगार, आयात कम लेकिन महंगाई ज्यादा!”

टीम सरकार या “महंगाई टीम”?
5. राजनीतिक सफर का व्यंग्य

सरकार की भूमिका सोने-चांदी के भावों में अप्रत्यक्ष रही है, कांग्रेस के समय 2021 में सोना ₹48,720 था (2021 भाजपा का लेकिन व्यंग्यात्मक उदाहरण काग्रेस), लेकिन औसतन 2014 से पहले कम; 2025 में ₹1,00,030 पहुंचा—दोगुना से अधिक 4 साल में। चांदी 34.6% रिटर्न vs सोना 30.4%। इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 ने गिरावट की भविष्यवाणी की, लेकिन उलटा हुआ।

भाजपा की ड्यूटी हाइक रिव्यू, UAE रूल्स ने आयात बिल कम किया। विकास की बात—सेमीकंडक्टर, EV—लेकिन महंगाई से “महंगाई टीम”। फिस्कल डेफिसिट कम, ट्रेड डेफिसिट $18.78 बिलियन। व्यंग्य नही हकीकत: कांग्रेस में “कम दाम”, भाजपा में “विकास के बदले महंगाई”!

काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

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बीजेपी के 11 साल
6. 70 साल बनाम 5 साल का नारा व्यंग्यात्मक निष्कर्ष

कांग्रेस से भाजपा तक सोना-चांदी का भाव सफर व्यंग्यपूर्ण है—कम दामों से उछाल तक, वैश्विक हलचल ने लॉन्च किया, निवेशक ETF से लाभांवित, जनता दर्द में। भाजपा ने विकास दिया, लेकिन सोना-चांदी “विकसित ऊंचाइयों” पर!


लेखक का अंतिम विचार व्यंग्यात्मक हकीकत
भाजपा कहती थी महंगाई डायन खाईं (काग्रेस) जात है हमारी सरकार बनेगी महंगाई कम करेगें। जनता ने भरोसा किया सरकार बदली, सोना-चांदी उड़े! कांग्रेस के कम दाम से भाजपा की ऊंचाइयों तक—विकास आया, लेकिन जेबें खाली! आलोचकों के मुताबिक वास्तविक डायन कौन है यह तो यहां सोना चांदी के भाव में बढ़ोतरी को देखते हुए कोई भी समझ सकता है, बस किसी तरह जनता को गुमराह कर सत्ता पाना था लेकिन अब जाना नही है, यह तो पक्का हो गया है। जब तक आम जनता की आर्थिक स्थिति पूरी तरह खराब न हो जाए।

भले ही जनता वोट दे या ना दे, “कुछ विचारकों का कहना है कि भाजपा सत्ता में बने रहने की कोशिश करती रहेगी। हम लेखक का मानना है कहीं न कहीं बीजेपी के 11 साल के कार्यकाल से जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है, और राजनीतिक बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी भ्रष्टाचार को देखते हुए संभावना दिखाई दे रही है। आलोचक की आलोचना जनता 2019 लोकसभा चुनाव से ही सत्ता परिवर्तन के फिराक में है। एक दिन वास्तविक सबक सिखाएगी और सत्ता परिवर्तन होगा। जनता और आलोचकों के रूख को देखते हुए यह हम लेखक का अंतिम विचार है।

मेथडोलॉजी (Methodology)

  • इस विश्लेषण में प्रयुक्त आँकड़े निम्न स्रोतों से लिए गए हैं—
  • ऐतिहासिक गोल्ड-सिल्वर रेट्स (1964–2013): Reserve Bank of India और भारतीय मीडिया आर्काइव्स से संकलित डेटा।
  • 2000–2013 तक की सालाना कीमतें: [BankBazaar Gold History] और [GoodReturns Gold/Silver Rates] पर उपलब्ध ऐतिहासिक चार्ट्स से।
  • 2014–2023 दरें: MCX, Kitco, World Gold Council (WGC) रिपोर्ट्स और भारतीय फाइनेंशियल न्यूज़ पोर्टल्स।
  • 2024–2025 डेटा: MCX Spot/फ्यूचर्स रिपोर्ट्स, Economic Times, Reuters, Mint और WGC Q2-2025 Gold Demand Trends से।
  • आयात व ETF फ्लोज़: Reuters और WGC/IndiaBullion (IBJA) रिपोर्ट्स, जून 2025 तक।
  • ग्लोबल प्राइस: LBMA (London Bullion Market Association), Reuters और Trading Economics रिपोर्ट्स।


Conclusion:
अर्थशास्त्र कि शिक्षा अर्थव्यवस्था को सम्भालने के लिए नितांत आवश्यक है। बहुत बुरे स्थिति में अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह महंगाई को नियंत्रण करने में सक्षम रहे। किंतु दुर्भाग्य है कि वो एक कठपुतली के समान प्रधानमंत्री का कार्य किये। अगर स्वतंत्र प्रधानमंत्री रहे होते तो देश आज की तुलना में बहुत तरक्की किया होता। और सोना-चांदी का दर आसमान छूते आम जन से इतना दूर न होता। देश व समाज में शिक्षा का महत्व सर्वोपरि है, जैसा कि मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में महंगाई को नियंत्रित कर दिखा दिया। वर्तमान सरकार भावी भविष्य को चौपट करने के लिए तरह तरह का हथकंडा अपना शिक्षा से वंचित करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

Pornography and India

Disclaimer:
आँकड़े औसत/स्पॉट-रेट के रूप में लिए गए हैं, शहर/शुद्धता (22k/24k) के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह लेख जनता और आलोचकों का व्यंग्यात्मक-विश्लेषणात्मक राय है, न कि निवेश सलाह। सभी मूल्य अनुमानित हैं और समय-समय पर बदल सकते हैं। यह पूरी सामग्री केवल राजनीतिक शैक्षणिक निस्पक्ष दृष्टिकोण से सोने चांदी की महंगाई दर पर आधारित है, वर्ष के अनुसार दिया गया डाटा रिसर्च से लिया गया है पूरी सत्यता का दावा नही किया गया है। लेखक द्वारा निस्पक्षता का ध्यान रखते हुए लेख पब्लिश किया गया है।

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Sex Positions तंत्र, धर्म, विज्ञान और ज्योतिष के 5000 वर्षों के छुपे राज

Sex Positions सेक्स पोजीशन का गुप्त रहस्य वो गुप्त ज्ञान जो कभी आम लोगों को नहीं बताया गया — पूर्ण दांपत्य सुख और आत्मिक मिलन का प्रतिबंधित मार्गदर्शक amitsrivastav.in लेखक: अमित श्रीवास्तव विषय सूची भूमिका भाग 1 — छुपा हुआ इतिहास अध्याय 1: वो गुप्त शास्त्र जो सदियों तक छुपाए गए अध्याय 2: कामसूत्र का असली … Read more
काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

माँ की ममता — wonderful महाग्रंथ श्रृंखला खंड 1,2,3

क्या हम सचमुच अपनी माँ को समझ पाए हैं? “माँ की ममता” महाग्रंथ-श्रृंखला — केवल एक पुस्तक नहीं, समाज के आत्ममंथन का दस्तावेज़ है जहाँ माँ पर बहुत लिखा गया है। कविताएँ लिखी गईं, गीत लिखे गए, कहानियाँ लिखी गईं, आँसू बहाए गए, श्रद्धा व्यक्त की गई और माँ को धरती पर ईश्वर का रूप … Read more
काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

सुखी दांपत्य जीवन: प्रेम, सम्मान और संवाद की संपूर्ण यात्रा

क्या केवल विवाह कर लेना ही सुखी दांपत्य जीवन की गारंटी है?यदि ऐसा होता, तो दुनिया में इतने अधिक वैवाहिक तनाव, बढ़ती दूरियाँ, लगातार होने वाले विवाद, भावनात्मक अकेलापन और टूटते रिश्ते दिखाई नहीं देते। वास्तविकता यह है कि विवाह जीवन की सबसे सुंदर यात्राओं में से एक है, लेकिन यह सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में … Read more
काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

क्या वास्तव में होती हैं अप्सराएँ? mrigakshi apsara का रहस्य, शास्त्रीय परंपरा, तांत्रिक विमर्श और 1 आध्यात्मिक दृष्टि

क्या अप्सराएँ केवल पौराणिक कथा हैं या भारतीय शास्त्रों का गहन प्रतीक? Mrigakshi Apsara मृगाक्षी अप्सरा, वैदिक संदर्भ, शक्ति परंपरा और शोधपरक तंत्र-मंत्र साधना विधि-विधान के साथ विश्लेषण पढ़ें। पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा अप्सरा साधना महाग्रंथ श्रृंखला 64 में प्रथम शिर्षक मृगाक्षी अप्सरा साधना महाग्रंथ mrigakshi apsara mantra सम्पूर्ण विधि-विधान सहित amozan पर eBook एवं … Read more
काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग | काल भैरव मंत्र, पूजा विधि और उपाय

बटुक भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रुनाशक प्रयोग काल भैरव की पूजा विधि, मंत्र और उपाय भगवान बटुक भैरव की पूजा विधि, शक्तिशाली कार्य सिद्धि मंत्र, अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्र, कवच पाठ और शत्रु नाशक प्रभावी उपाय जानिए। कालभैरवाष्टमी पर विशेष प्रयोग से असंभव कार्य सिद्ध होंगे और शत्रु परेशान करना छोड़ देंगे। भैरव कृपा प्राप्त … Read more
काग्रेस का 70 बनाम बीजेपी के 11 साल: में सोना-चांदी की चमकदार यात्रा, डेटाबेस व्यंग्यात्मक विश्लेषण

श्री श्री कामाख्या अंबुबाची महाग्रंथ: देवी शक्ति, तंत्र, साधना और सनातन चेतना का 12 दिव्य रहस्य

श्री श्री कामाख्या अंबुबाची महाग्रंथ में देवी कामाख्या, अंबुबाची महापर्व, शक्ति पीठ, तंत्र, साधना, शिव-शक्ति दर्शन, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का शोधपरक एवं विस्तृत अध्ययन। shri-shri-kamakhya-ambubachi-mahagranth इसे भी पढ़ें: तांत्रिकों की देवी लोना चमारिन की आपबीती इसे भी पढ़ें: गुरु गोरखनाथ का जन्म कब हुआ था — सम्पूर्ण जीवनी क्या आपने कभी सोचा है … Read more
HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav

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