27 अगस्त 2025 से लागू हुए अमेरिका के 50% ट्रंप के टैरिफ क्या है ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह टैरिफ, विशेष रूप से रूस से तेल खरीद के जवाब में लगाया गया है, जिसका असर भारतीय निर्यात, उद्योगों, बेरोजगारी और महंगाई पर पड़ने की संभावना है। आइए, इसके प्रभावों का विश्लेषण करें।
Table of Contents
ट्रंप के टैरिफ क्या है?
किन-किन उद्योगों पर – पड़ सकता है टैरिफ का प्रभाव
1. कपड़ा उद्योग: भारत का कपड़ा क्षेत्र, विशेष रूप से भदोही जैसे कालीन निर्माण केंद्र, इस टैरिफ से सबसे अधिक प्रभावित होगा। अमेरिका भारत के कालीनों का 60% आयात करता है, और 50% टैरिफ के कारण इस क्षेत्र में 60.3-63.9% निर्यात में कमी आ सकती है। तिरुपुर, नोएडा और सूरत जैसे शहरों में कपड़ा इकाइयां उत्पादन बंद कर रही हैं, क्योंकि वे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ रहे हैं।
2. रत्न और आभूषण: इस क्षेत्र पर 52.1% शुल्क लगाया गया है, जिससे $60.2 बिलियन के निर्यात पर असर पड़ेगा। यह उद्योग, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है, मांग में कमी और डंपिंग की समस्या का सामना कर रहा है।
3. समुद्री उत्पाद और फर्नीचर: झींगा निर्यात ($2 बिलियन) और फर्नीचर (52.3% शुल्क) जैसे क्षेत्रों में भारी गिरावट की आशंका है। इन उद्योगों में ऑर्डर रद्द होने से उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ रहा है।
4. रासायनिक और ऑटो पार्ट्स: जैविक रसायनों पर 54% और ऑटो पार्ट्स पर 26% शुल्क से ये क्षेत्र भी प्रभावित होंगे। हालांकि, फार्मास्यूटिकल्स और स्मार्टफोन जैसे क्षेत्रों को छूट मिली है, जो राहत की बात है।
बढ़ जाएगी बेरोजगारी
टैरिफ के कारण निर्यात में अनुमानित 70% की कमी से लाखों नौकरियां खतरे में हैं। कपड़ा, रत्न, और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में ऑर्डर रद्द होने से मजदूरों की मजदूरी और रोजगार प्रभावित हो रहा है। भदोही के कालीन उद्योग से जुड़े कारोबारी असलम महबूब ने कहा, “माल डंप हो रहा है, और हमें बैंक ब्याज, मजदूरी, और सप्लायर का भुगतान करना मुश्किल हो रहा है।” विश्लेषकों का अनुमान है कि इन उद्योगों में नौकरियों की कमी से शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.2% तक पहुंच सकती है।

महंगाई पर प्रभाव
टैरिफ से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे मांग में कमी आएगी। इससे भारत के निर्यात-आधारित उद्योगों की कमाई घटेगी और इसका असर स्थानीय स्तर पर कीमतों पर पड़ सकता है।
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ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, $60.2 बिलियन के निर्यात प्रभावित हो सकता है। जिससे भारत की जीडीपी वृद्धि में 0.2-0.4% की कमी आ सकती है।
इस वजह से प्रोडक्शन की लागत बढ़ जाएगी और इसका बोझ कंपनियां निकालने के लिए उपभोक्ता पर डाल देगी मतलब साफ है वस्तु की कीमत बढ़ जाएगी अर्थात महंगाई बढ़ जाएगी।
लेकिन भारतीय स्टेट बैंक एक रिपोर्ट के अनुसार इसका उलटा असर अमेरिका में भी पड़ सकता है। इस फैसले के कारण वहां पर महंगाई और आर्थिक मंदी की स्थिति हो सकती है।

भारत की रणनीति!
भारत सरकार और उद्योगपति इस संकट को अवसर में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने चीन, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे वैकल्पिक बाजारों की तलाश शुरू कर दी है। पीएम मोदी ने जीएसटी सुधारों की घोषणा की है, हालांकि राहुल गांधी इस पर हमेशा सवाल उठाते रहे हैं कि जीएसटी बहुत अधिक है। यह बहुत अच्छी बात है कि जीएसटी जिसमें दो स्लैब खत्म करने और फूड आइटम को सस्ता करने की योजना है। इसके अलावा निर्यातकों के लिए वित्तीय सहायता और कम लागत वाले कर्ज की मांग की जा रही है।
ट्रंप के टैरिफ का कपड़ा, रत्न, समुद्री उत्पाद और फर्नीचर जैसे उद्योगों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे बेरोजगारी और महंगाई बढ़ने की आशंका है। हालांकि, भारत के डेयरी क्षेत्र जैसे प्रमुख उद्योग सुरक्षित रहेंगे, और वैकल्पिक बाजारों की तलाश और नीतिगत सुधारों से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है। सरकार को तत्काल राहत पैकेज और दीर्घकालिक रणनीतियों पर ध्यान देना होगा।

लेखक: अभिषेक कांत पांडेय, शिक्षा और लेखन के क्षेत्र से जुड़े हैं। पढ़ते रहिए amitsrivastav.in पर हर तरह की अपनी पसंदीदा लेख।

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