Hindi Divas special article : हिंदी दिवस पर विशेष लेख हिंदी का बढ़ता वर्चस्व हिंदी सीखना है जरूरी

Amit Srivastav

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Political change in India

Hindi Divas special article; 14 सितंबर 1949 को राजभाषा के रूप में हिंदी को दर्जा मिला तो हिंदी भाषा को मजबूती मिली।‌‌ भारत में हिंदी  संपर्क भाषा के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है तो इंटरनेट और डिजिटल क्रांति ने हिंदी को पंख दे दिए हैं।‌ बोलचाल की भाषा के रूप में हिंदी भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए यूट्यूब और वेबसाइट के जरिए पूरी दुनिया में छा गयी है।

आने वाले समय में हिंदी भाषा का ज्ञान कितना महत्वपूर्ण होगा? हिंदी को रोजी-रोटी की भाषा के रूप में एक पहचान मिल रही है। जबकि आपको लग रहा है कि ‌ विज्ञान और तकनीकी की पढ़ाई अंग्रेजी भाषा माध्यम से चारों ओर छा रहा है।  इस कारण से हिंदी उच्च शिक्षा में पिछड़ती हुई चली जा रही है। इन प्रश्नों की जांच पड़ताल इस आर्टिकल के जरिए लेखक और सीबीएसई बोर्ड अध्यापक अभिषेक कांत पांडेय एवं अमित श्रीवास्तव द्वारा किया जा रहा है।

Political change in India । Hindi Divas special article

बाजार में हिंदी (Hindi in market):

जिस भाषा में व्यवसायिक शब्दावलियों का इस्तेमाल और उनका प्रयोग होने लगा है। यह भाषा अपने विश्व स्तर में भी पहचाने जाने लगी है। ‌ हिंदी बाजार की परिभाषा हो गई है इसलिए हिंदी को पहचान मिल रही है।‌

देश लोकतांत्रिक रूप से सशक्त होता है और उसका व्यापार फलता फूलता है तो उसकी भाषा भी बहुत तेजी से तरक्की करती है। इस नजरिए से देखा जाए तो पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का डंका बज रहा है।

विदेश के लोग भारतीय संस्कृति और यहां के दार्शनिक विचार के लिए लालायित हैं। रीति, रिवाज और संस्कृति, संस्कृत भाषा से होते हुए भारत की हिंदी समेत दूसरी भाषाओं में विद्यमान है।

भारत दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बनाने की ओर लगातार अग्रसर है। हिंदी भाषा पढ़ने लखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ‌

बीते शताब्दी से आने वाले वक्त में हिंदी का वर्चस्व लगातार बढ़ता जाएगा। भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है। तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत आगे बढ़ता चला जा रहा है इसके साथ क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हिंदी अपनी अलग पहचान बनाती हुई आगे बढ़ रहा है।

अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी जानने वाले लोग की डिमांड बढ़ रही है।

अगर आप से कोई कहें की हिंदी का कोई महत्व नहीं है तो समझ जाइए कि आप को वहां वह व्यक्ति बरगला रहा‌ है।‌

बाजारवाद की दृष्टि से भी देखा जाए तो हिंदी चमत्कारिक रुप से बढ़ती हुई भाषा है। एक सर्वे के मुताबिक हिंदी पूरी दुनिया में यूट्यूब की दूसरे नंबर की भाषा बन गई है। यूट्यूब की दुनिया में हिंदी बहुत तेजी से बढ़ रही है।

पूरी दुनिया में भारत में जन्म लेने वाली हिंदी-भाषा अपनी नयी पहचान सोशल मीडिया पर बना चुकी है। ‌आज आर्टिफिशियल‌ इंटेलिजेंस के इस जमाने में हिंदी अपना सिक्का जमाया हुआ है। ‌ 2024 से हिंदी सोशल मीडिया यूट्यूब की सशक्त भाषा के रूप में उभरकर पूरी दुनिया के सामने आ रही है।‌ यहां हिंदी के स्वरूप को लेकर हिंदी भाषियों में मतभेद हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर हिंदी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। (increasing Hindi language in our world second largest language in use YouTube video channel.)

2024 के विशालकाय की तुलना की जाए जब 14 सितंबर 1949 को आधिकारिक रूप से राजभाषा का दर्जा प्राप्त होने के बाद हिंदी ने बहुत तेजी से सरकारी कार्यालय की भाषा के रूप में तरक्की किया है। ‌लेकिन आजादी के इतनी साल बाद भी आज भी हिंदी पूर्ण रूप से भारत की भाषा के रूप में अपना पहचान नहीं बना पाई है। ‌जबकि इसके सापेक्ष में खड़ी अंग्रेजी तेजी से बढ़ती जा रही है। ‌आपको बता दे कि यूट्यूब की दुनिया हिंदी को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रही है। यहां बोलचाल की हिंदी भाषा आगे बढ़ रही है जिसमें इंग्लिश की शब्दावली का प्रभाव कम दिखाई देता है। ‌

मीडिया जगत में छा रही हिंदी

हिंदी और इंग्लिश मिक्स भाषा की कलचर बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। वहीं देखा जाए तो हिंदी अखबारों की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित है‌ तो वही हिंदी बोलने वाले लोग फेसबुक और दूसरे  सोशल मीडिया माध्यम पर हिंदी में लिख रहे हैं और बोल रहे हैं। दरअसल वॉइस टाइपिंग आ जाने से हिंदी बोलकर लिखना बहुत आसान हो गया है। ‌

आज हिंदी मुख्यधारा की समाचार चैनल में हिंदी का बोलबाला नजर आता है। डिजिटल क्रांति के साथ ही हिंदी भाषा जानने वाले लोग अपनी जानकारी हिंदी भाषा में सोशल मीडिया और विभिन्न यूट्यूब चैनल माध्यमों से लेने लगे जिससे हिंदी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।

हिंदी भाषा का स्वरूप कैसा होना चाहिए? इसको लेकर भी कई तरह के मतभेद होते हैं। ‌लेकिन भाषा विज्ञानिकों का मानना है कि भाषा का स्वरूप बोली और लिखित रूप में अपने समय में अलग-अलग तरीके से होता है।

जैसे किसी भी भाषा का लिखित रूप व्याकरण के नियम में बहुत बंधा होता है तो वही बोलचाल की भाषा सरल और सहज अभिव्यक्ति लिए होती है इसलिए अंग्रेजी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के शब्द इसमें सम्मिलित हो जाते हैं। ‌

बाजार के साथ बढ़ती हिंदी भाषा

हिंदी भाषा को बढ़ाने में  जितना योगदान बाजार का रहा है, उससे ज्यादा योगदान सोशल मीडिया और यूट्यूब का है। समाचार-पत्रों की भाषा हिंदी और उर्दू की शब्दावली युक्त होती है तो वही यूट्यूब में हिंदी की भाषा में क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी शब्दावली के प्रयोग बोलचाल की तरह सामने आ रही है। ‌

दरअसल इससे यह फायदा हो रहा की हिंदी को मुफ्त में प्रचार मिल रहा और आगे बढ़ रही है। हिंदी-दिवस के भरोसे कार्यालय और विद्यालयों में साल में एक बार हिंदी की महिमा का गुणगान करते हुए सरकारी महकमा नजर आता है।

कक्षा दसवीं तक हिंदी अनिवार्य होने के कारण इसका महत्व कुछ बड़ा है लेकिन कक्षा 12वीं तक हिंदी विषय अनिवार्य पूरे भारत में होना चाहिए ताकि हिंदी के माध्यम से लोग अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ सके। ‌

दरअसल संस्कृत ए भाषा के व्याकरण की नियमों से बंधी हुई हिंदी भारतीय संस्कृति की पहचान है। हिंदी कसाहित बहुत ही सशक्त है इसके साथ ही संस्कृत के साहित्य का हिंदी अनुवाद, हिंदी को और विशिष्ट बनाता है। ‌

साहित्यिक दृष्टि से हिंदी भाषा पूरी दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाया हुआ है तो इसके साथ ही बाजार की दुनिया में हिंदी अपना मुकाम बहुत तेजी से बढ़ा रहा है। ‌सहज और सरल अभिव्यक्ति की माध्यम के रूप में हिंदी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन और लेखों के जरिए सामने आ रही है।

जन-जन की भाषा हिंदी

भारत के लोग हिंदी को बहुत ही प्यार करते हैं। ‌हिंदी भाषा का स्वरूप लगातार बढ़ता जा रहा है। ‌विदेश के विश्वविद्यालय में भी हिंदी भाषा को स्नातक और परास्नातक के स्तरों पर एक भाषा अध्ययन के रूप में पढ़ाया जाता है। ‌

हिंदी की विशेषता :

Hindi Divas special article : हिंदी दिवस पर विशेष लेख हिंदी का बढ़ता वर्चस्व हिंदी सीखना है जरूरी

भारत विविधताओं का देश है। यहां पर हजारों बोलियां और दर्जनों भाषण विद्यमान है। ‌ऐसे में हिंदी एक संपर्क भाषा के रूप में पूरे भारत को एकता के सूत्र में बांधती है। ‌संस्कृति और सभ्यता को खुद में संभाले हिंद अनुशासन और नैतिकता की सीख देती है जो अपने प्राचीन धरोहर को संस्कृत भाषा के माध्यम से और दूसरी प्राचीन तमिल भाषा के माध्यम से सामने लेकर आती है। ‌

जितना यह देश नदियों का है उतना ही यह देश भाषाओं का भी है। नदिया जिस तरह से इस देश की फसलों को सिचती है वैसे ही इस देश की सभी भाषाएं देश को मजबूत और एक बनाती है। आजादी के समय से ही हिंदी प्रमुख और मुख्य भाषा के रूप में अपनी पहचान बनाई है। एक राज्य से दूसरे राज्य को जोड़ने वाली हिंदी भाषा वास्तव में अंग्रेजी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

क्या हिंदी आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में सामने आएगा।

हमेशा या प्रश्न किया जाता रहा है क्या हिंदी भाषा आने वाले समय में व्यवसाय और तकनीक की भाषा के रूप में हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ‌भारत में अनेक भाषाएं हैं लेकिन इन भाषाओं में अगर राष्ट्रभाषा बनने की अधिकारी कोई भाषा है तो वह हिंदी है। हिंदी भाषा भारत की कई भाषाओं की बोलियों की मिठास और संस्कृत भाषा के संस्कारों को लेकर उत्पन्न हुई है। ‌व्यावहारिक रूप से हिंदी बहुत तेजी से अपनी पहचान बना रही है। यह कहना बिल्कुल सही है, ‌बाजार से लेकर कामकाज की भाषा के रूप में हिंदी अपनी पहचान बना रही है।

दरअसल इसके पीछे कारण यह है कि हिंदी राष्ट्र की भाषा और मातृभाषा में शिक्षा को बच्चे हिंदी में बहुत तेजी से ग्रहण करते हैं। यह बातें रिसर्च से प्रमाणित हैं। इसमें ज्ञान अर्जित करना बहुत आसान हो जाता है जबकि अंग्रेजी मातृभाषा न होने के कारण इसमें सहजता से ज्ञान हासिल कर लेना बहुत ही कठिनाई भरा होता है। ‌

गणित और विज्ञान जैसे विषयों को अगर कोई बालक मातृभाषा या हिंदी में सीखें तो अंग्रेजी की अपेक्षा बहुत तीव्र गति से इन विषयों को सीखता है। भारत के इतिहास और भूगोल के बारे में उसकी जानकारी अंग्रेजी माध्यम के छात्रों की अपेक्षा बहुत ही सशक्त होती है। जिस देश में जैसी भाषा होती है उसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करना और उसमें काम करना बहुत ही आसान होता है। ‌इसलिए बनावटी अंग्रेजी के पीछे यदि भारत भागता रहता या रूस भागता रहता तो निश्चित ही वह तरक्की नहीं कर पाता। ‌ अपनी मातृभाषा या अपने राष्ट्रभाषा में ही देश बहुत तेजी से तरक्की करता है इस पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं। ‌

समझदार भारतीय अपने बच्चों को हिंदी और संस्कृति को भी समान रूप से शिक्षा देने के लिए उत्साहित रहते हैं परंतु अंग्रेजी कलर बात के चलते हिंदी और संस्कृति को उपेक्षा मिलती है।

Hindi Divas- क्यों सीखना है जरूरी हिंदी?

विदेश के नजरिए से देखा जाए तो किसी देश की पहचान उसकी कोई एक भाषा होती है। इस नजरिए से देखा जाए तो विदेशों में भारत की पहचान हिंदी और संस्कृत भाषा के रूप में है‌। इसके साथ ही बांग्ला और तमिल भाषा का वर्चस्प पूरी दुनिया में विद्यमान है। ‌भारत में रहने वाला, पढ़ा लिखा व्यक्ति हिंदी के साथ एक दो क्षेत्र भाषा का ज्ञान भी रखता है इसके साथ ही उसे अंग्रेजी का भी पर्याप्त ज्ञान है।

अगर अंग्रेजी का पर्याप्त ज्ञान है लेकिन हिंदी का ज्ञान नहीं है तो आने वाले समय में ऐसे लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ेगा क्योंकि इनके मुकाबले हिंदी और अंग्रेजी के साथ कोई एक क्षेत्रीय भाषा जानने वालों की संख्या तेजी से बढ़ाने वाली है, इसके साथ यही लोग तकनीक और विज्ञान को भी अच्छे तरीके से जानने वाले होंगे। जानकारी का मतलब यह है कि कोई भी प्रोफेशनल हो उसे अपनी भाषाई दक्षता के रूप में अंग्रेजी के साथ हिंदी का ज्ञान होना भी आवश्यक है।

इसलिए मेडिकल और इंजीनियरिंग या फिर प्रशासनिक सेवा में भविष्य बनाने वाले आज के छात्रों को हिंदी का पर्याप्त ज्ञान नहीं दिया गया तो यह उन छात्रों के मुकाबले पीछे हो जाएंगे, जिनके पास मेडिकल या इंजीनियरिंग की डिग्री है और हिंदी का भी पर्याप्त ज्ञान है।

हिंदी दिवस हिंदी भाषा आर्टिकल निष्कर्ष

दरअसल इस आर्टिकल में यह बताया गया है कि हिंदी का वर्चस्व डिजिटल युग में बढ़ रहा है। ‌आने वाले समय में हिंदी भाषा को सिखने में अनदेखा करने वाले प्रोफेशनल के लिए बड़ी ही कठिनाई का समय हो सकता है। ‌


दरअसल भारत का बाजार बहुत तेजी से हिंदी की ओर झुक रहा है। ‌असल में 80 करोड़ से अधिक जनता अपनी क्षेत्रीय भाषा और हिंदी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में व्यावहारिक रूप से हिंदी का ज्ञान रखने वाले प्रोफेशनल्स के लिए बाजार का लाभ उठाना आसान हो जाएगा जबकि ऐसे प्रोफेशनल जो हिंदी या क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान नहीं रखते हैं उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ सकता है। ‌


यही कहना चाहता हूं कि जितनी जरूरी अंग्रेजी भाषा है उससे ज्यादा जरूरी आने वाले समय में हिंदी भाषा का ज्ञान है। ‌amitsrivastav.in पर मिलती है निस्पक्ष सुस्पष्ट जानकारी बेल आइकन को दबा एक्सेप्ट करें एप्स इंस्टाल करें।

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HomeOctober 27, 2022Amit Srivastav

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