दिल्ली के रेडिएशन ब्लू होटल में आयोजित ग्लोबल पीस एंड डेवलपमेंट समिति 2025 सम्मेलन में UNSDG 2030, विकसित भारत 2047 और अफ्रीका विज़न 2063 पर गहन चर्चा हुई।
पश्चिम विहार, दिल्ली स्थित रेडिएशन ब्लू होटल ने 2025 के उस ऐतिहासिक दिन को साक्षी बना दिया, जब दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्योग जगत के दिग्गज और राजनीतिक नेतृत्व एक ही छत के नीचे बैठे और मानवता के भविष्य से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा की। यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं था, बल्कि एक ऐसी वैश्विक सोच का उदय था जिसमें शांति, प्रगति, नैतिकता और सतत विकास जैसे विषयों को केंद्र में रखकर नए युग की दिशा तय की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य था—एक ऐसे भविष्य का खाका तैयार करना जहाँ देशों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग हो; विकास की होड़ नहीं, बल्कि समान विकास का रास्ता हो; और मनुष्यता का पैमाना केवल अर्थव्यवस्था से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक न्याय और वैश्विक भाईचारे से तय किया जाए। इस सम्मेलन की विशिष्टता यह रही कि यहाँ केवल सिद्धांत नहीं बताए गए, बल्कि व्यावहारिक रणनीतियों और ठोस योजनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध दुनिया की नींव मज़बूत होती है।

इस भव्य कार्यक्रम में पाँच प्रमुख अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई—अमित शर्मा, सुरजीत सिंह, एडम गुंयाजा, प्रोफेसर रितु रंजन सिन्हा, और पंकज कुमार शर्मा। ये सभी व्यक्तित्व अपने-अपने क्षेत्रों में अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं और इनका एक मंच पर आना दर्शाता है कि शांति और विकास जैसे विषय अब केवल सरकारों या वैश्विक संगठनों की जिम्मेदारी नहीं रहे, बल्कि उद्योग, शिक्षा, नागरिक समाज और राजनीति सभी को मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
अमित शर्मा ने जहाँ औद्योगिक विकास और भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य की दिशा पर अपनी दृष्टि साझा की, वहीं सुरजीत सिंह ने सामाजिक न्याय, मानवीय मूल्यों और समाज के कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। युगांडा से आए एडम गुंयाजा ने अफ्रीकी महाद्वीप के विकास मॉडल, चुनौतियों और संभावनाओं पर रोशनी डाली और यह बताया कि भारत और अफ्रीका मिलकर एक नए वैश्विक नेतृत्व का निर्माण कर सकते हैं।
प्रोफेसर रितु रंजन सिन्हा ने शिक्षा, शोध, कौशल विकास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक प्रगति का वास्तविक आधार बताया। वहीं पंकज कुमार शर्मा ने विकसित भारत 2047 के विज़न को वैश्विक एजेंडों से जोड़ते हुए भारत की भूमिका को और अधिक दृढ़ता से प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र के 2030 के सतत विकास लक्ष्य (UNSDG 2030) पर व्यापक चर्चा हुई। यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने, समान अवसर प्रदान करने, जलवायु संकट का समाधान खोजने, गरीबी और भूख को समाप्त करने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
वक्ताओं का मानना था कि दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है—जैसे युद्ध, राजनीतिक तनाव, संसाधनों की कमी, बढ़ता प्रदूषण, शिक्षा के अवसरों में असमानता—उनका समाधान केवल वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। UNSDG 2030 एक ऐसी साझा भाषा है जिसे अपनाकर विश्व के देश एक ही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और आपसी सहयोग की नई मिसालें स्थापित कर सकते हैं।
अफ्रीका के संदर्भ में दो महत्वपूर्ण विकास योजनाएँ—Uganda Vision 2040 और Africa Agenda 2063—इस सम्मेलन में विशेष चर्चा का केंद्र बनीं। इन योजनाओं का लक्ष्य आर्थिक स्वतंत्रता, नवाचार, तकनीकी प्रगति, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और सामाजिक विकास पर केंद्रित है। एडम गुंयाजा ने बताया कि अफ्रीका आर्थिक रूप से तेजी से उभर रहा है, और भारत—जो स्वयं एक विकासशील देश से वैश्विक शक्ति बनने की राह पर है—अफ्रीका के लिए एक स्वाभाविक सहयोगी और मार्गदर्शक बन सकता है।
अफ्रीका की युवा आबादी, प्राकृतिक संसाधन और नई नीतियाँ उसे आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना सकती हैं, और भारत के साथ मिलकर वह शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और व्यापार के क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है।
सम्मेलन में विकसित भारत 2047 का विजन भी प्रमुखता से सामने आया। पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि 2047 तक भारत का लक्ष्य न केवल आर्थिक शक्ति बनना है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से भी दुनिया का नेतृत्व करना है। एक ऐसा भारत, जहाँ शिक्षा आधुनिक हो लेकिन भारतीय मूल्यों से जुड़ी रहे; जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ विश्व-स्तरीय हों लेकिन हर गरीब तक पहुँच सकें; जहाँ उद्योग प्रगतिशील हो लेकिन पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का पालन करते हुए काम करे; और जहाँ लोकतंत्र मजबूत हो पर नागरिकों की भागीदारी भी बढ़े।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का विकास केवल GDP की वृद्धि नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रयास है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। जिस समाज में असमानता, हिंसा, भेदभाव या सामाजिक टूटन होती है, वहाँ विकास की गति हमेशा रुक जाती है। इसके विपरीत, जहाँ संवाद, समानता, न्याय और भाईचारा होता है, वहाँ उद्योग भी आगे बढ़ते हैं, शिक्षा भी फलती-फूलती है और देश भी वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में आता है। विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, जल संकट, ग्रीन एनर्जी और कार्बन उत्सर्जन जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा हुई और विशेषज्ञों ने कहा कि यदि दुनिया को बचाना है, तो आज ही ठोस कदम उठाने होंगे।

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इस सम्मेलन का महत्व केवल इसका आयोजन नहीं, बल्कि इसका संदेश है। एक तरफ दुनिया राजनीतिक तनाव, आर्थिक असमानताओं और युद्ध की आशंकाओं से घिरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ भारत की धरती से उठी यह आवाज़ पूरी दुनिया को एकजुट होने का आह्वान करती है। यह कार्यक्रम भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका का भी प्रतीक है—एक ऐसा देश जो शांति, सहयोग और मानवता को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज भारत की नीतियाँ, विचार और दृष्टिकोण कई देशों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, और ऐसे सम्मेलन भारत की इस प्रतिष्ठा को और अधिक सशक्त करते हैं।
अंततः, ग्लोबल पीस एंड डेवलपमेंट समिति 2025 का यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसी ऐतिहासिक पहल बन गया है जिसने यह सिद्ध कर दिया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब देश, संगठन, संस्थान और समुदाय एक साझा मंच पर बैठकर संवाद करें, योजनाएँ बनाएं और संयुक्त रूप से कार्य करें। यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में नई साझेदारी, नए प्रोजेक्ट, नई नीतियों और नए विचारों का आधार बनेगा। दिल्ली की धरती इस ऐतिहासिक क्षण की भागीदार रही, और इसने दुनिया को यह संदेश फिर से सुनाया—शांति ही विकास का रास्ता है, और विकास ही मानवता का भविष्य। amitsrivastav.in पर दिल्ली से निधि सिंह कि रिपोर्ट।

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